Posted on 26 April 2016 by admin
केंद्र के एक प्रभावशाली युवा मंत्री और कुशल संगठनकर्त्ता जब अपने गृह राज्य के एयरपोर्ट पर उतरे तो वहां उनकी प्रदेश के मुख्यमंत्री से मुलाकात हो गई। औपचारिक दुआ सलाम के बाद वे एयरपोर्ट के लाऊंज में चाय के लिए बैठ गए, किसी बात पर केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से कुछ ऐसा अप्रिय कह दिया कि गर्म चाय सा माहौल भी उबल पड़ा, दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखे बगैर अपनी-अपनी राह पकड़ ली। दो दिनों बाद जब मंत्री जी दिल्ली लौटे, तो उनसे उनके गृह राज्य के एक सीनियर ब्यूरोक्रेट मिलने आए, एक छोटे से पैकेट के साथ। उस पैकेट में एक सीडी थी और उस सीडी में मंत्री जी के टॉलीवुड की एक मशहूर अदाकारा के साथ कुछ अंतरंग दृश्य कैद थे। मुख्यमंत्री की ओर से संदेश साफ था कि आज यह सीडी आपको भेजी गई है, कल सोशल मीडिया पर वायरल भी हो सकती है। समझदार के लिए इशारा काफी था, मंत्री जी ने तुरंत फोन उठाकर मुख्यमंत्री जी से अपने व्यवहार के लिए माफी मांग ली। फिलहाल मामला टल गया है, पर बकरे की मां आखिरकार कब तक खैर मनाएगी।
Posted on 26 April 2016 by admin
कुछ ऐसी सियासी बयार बह निकली है कि प्रधानमंत्री का ‘मैन मैनेजमेंट’ और उनके पवनसुत वेंकैया का ‘फ्लोर मैनेजमेंट’ किंचित गड़बड़ाने लगा है। कुछ दिनों पूर्व जब अम्मा के करीबी थंबीदुरै नरेंद्र मोदी से मिल कर गए थे तो काफी आशाएं बंधी थी कि कई महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर मोदी सरकार को अन्नाद्रमुक का समर्थन हासिल हो जाएगा। इसके एवज में थंबीदुरै बस इतना चाहते थे कि चूंकि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा की अपनी कोई खास जमीन नहीं, सो वह अम्मा पर सीधा हमला ना करें, क्योंकि इन दिनों जयललिता की तबियत नासाज़ चल रही है। कुछ दिनों तक तो सब ठीक-ठाक रहा, एक दिन अचानक केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर चैन्नई पहुंचे और उन्होंने जयललिता को सबसे भ्रष्ट नेता और अन्नाद्रमुक सरकार को अब तक की सबसे भ्रष्टतम सरकार करार दिया। फिर क्या था दुंदुभि बज उठी, रणबांकुरों ने दोनों ओर से तलवारें निकाल ली है, पिछले दिनों वेंकैया ने जीएसटी बिल पर समर्थन की आस लेकर जब अम्मा के दरबार में फोन लगाया तो उन्हें वहीं से दो टूक बता दिया गया-’आपकी बातों पर हमें भरोसा नहीं, आप एक दिन कुछ कहते हैं, अगले रोज कुछ, सो बेहतर होगा कि हम अपनी राजनीति भी अलग-अलग करें।’
Posted on 26 April 2016 by admin
अपने उम्र की निर्णायक सियासी पारी खेल रहे देश के एक प्रमुख जाट नेता अजीत सिंह और नीतीश कुमार के बीच जब बातचीत की डोर यकबयक टूट गई, तो थोड़े परेशान और चिंतित अजीत को उनके एक जाट उद्योगपति मित्र देर रात भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलवाने ले गए। बातचीत अच्छे माहौल में हुई और तकरीबन डेढ़ घंटे तक चली। सूत्र बताते हैं कि सियासत के खेल में माहिर शाह ने अजीत का मन टटोला तो अजीत के दिल की बात जुबां पर आ गई। वे यूपी से भगवा टिकट पर राज्यसभा व केंद्र में मंत्रिपद चाहते थे। और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के लिए 45 सीट चाहते थे। अमित शाह ने दो टूक कहा कि उन्हें हर शर्ते मंजूर है, बेशर्ते अजीत अपनी पार्टी का विलय भाजपा में कर दे। अजीत इसके लिए तैयार नहीं हुए, उनका शाह से आग्रह था कि भाजपा पहले उन्हें यूपी से राज्यसभा दे दें तो 25 सीटों पर भी बात बन सकती है। अजीत एनडीए का हिस्सा बनने को तैयार थे, उनकी राय में अगर वे अपनी पार्टी का विलय भाजपा में कर देंगे, तो इससे न तो अजीत को ही लाभ मिलेगा और न ही भाजपा को। फिर तय हुआ कि निर्णायक बातचीत के लिए अगले तीन दिनों में अजीत अपने पुत्र जयंत चौधरी के साथ शाह से मिलेंगे।
Posted on 26 April 2016 by admin
अमित शाह से हुई मुलाकात ने अजीत में एक नया जोश भर दिया, अगले रोज उनसे मिलने मुजफ्फरनगर से कार्यकर्त्ताओं का एक हुजूम आया, इसमें से कुछ कार्यकर्त्ता भाजपा से भी सहानुभूति रखने वाले थे, सूत्र बताते हैं कि बातों-बातों में अजीत ने कार्यकर्त्ताओं के समक्ष कुछ ज्यादा ही बयां कर दिया, उन्होंने यह कह दिया कि वे भाजपा वालों के पास नहीं गए थे, अपितु भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही चिरौरी करता हुआ उनके पास आया था। एक कार्यकर्त्ता ने पूछ लिया-’चौधरी साहब, उन्नीस के लोकसभा चुनाव में भाजपा यूपी में हमें कितनी सीटें देगी?’ चौधरी साहब ने उन्हें घुड़का और ‘कहा इतनी आगे की मत सोच, तब हवा का रूख देख कर ही हम किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।’ सूत्र बताते हैं कि केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान ने यह खबर अमित शाह तक पहुंचा दी, शाह इस बात पर बेतरह भड़क उठे। और अगले ही दिन उनकी अजीत व जयंत से जो मीटिंग होनी थी, उसे आनन-फानन में उन्होंने कैंसिल कर दी, अजीत को संदेशा भेज दिया गया कि अब यह मीटिंग मई में होगी, जब ताजा विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ जाएंगे।
Posted on 26 April 2016 by admin
पिछले दिनों नीतीश लालू के घर खाने पर गए, तो नीतीश ने उन्हें समझाया कि राबड़ी और मीसा दोनों को एक साथ राज्यसभा देने से कार्यकर्त्ताओं में अच्छा संदेश नहीं जाएगा, सो बेहतर यह होगा कि राबड़ी देवी को राज्यसभा दे दी जाए, और मीसा 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में अभी से जुट जाए और राजद राज्यसभा की यह दूसरी सीट किसी मुसलमान को दे दें। तब लालू ने अपने मन की बात कही कि वे यह दूसरी सीट ऐसे किसी बड़े वकील को देना चाहते हैं जो उन्हें तमाम कानूनी पचड़ों से उबार सके। सूत्र बताते हैं कि इसके अगले ही दिन राम जेठमलानी शाम की फ्लाइट से पटना पहुंचे, उन्होंने रात का भोजन लालू के साथ किया और लालू को यह भरोसा भी दिया कि सिर्फ छह महीनों में वे लालू के ऊपर चल रहे तमाम मुकदमों को उनके पक्ष में मोड़ने का यत्न करेंगे, और ईश्वर ने चाहा तो उन्हें इस काम में वांछित सफलता मिलेगी। अगले रोज जेठमलानी ने पटना से मुंबई की उड़ान पकड़ ली, पर तब तक वे अपनी सियासी उड़ान की थाह पा चुके थे।
Posted on 26 April 2016 by admin
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित एक नए सियासी अवतार के लिए तैयार हैं, अगर कांग्रेस में सब कुछ इसी योजनाबद्द तरीके से चला और रणनीतिकार प्रशांत किशोर की यूं ही सुनी जाती रही तो फिर शीला दीक्षित को 2017 के यूपी चुनाव के लिए कैंपेन कमेटी का प्रमुख बनाया जा सकता है। किशोर का फार्मूला है कि यूपी में कांग्रेस ब्राह्मण, ठाकुर व मुस्लिम समीकरण पर अमल करे, जिसके तहत अगर शीला का ब्राह्मण चेहरा प्रोजेक्ट होता है तो फिर किसी क्षत्रिय को प्रदेश कांग्रेस का प्रमुख बनाया जा सकता है और किसी मुस्लिम को विधानमंडल दल का नेता। सूत्र बताते हैं कि शीला दीक्षित को उनकी नई राजनैतिक पारी के लिए तैयार करने में उनके पुत्र संदीप दीक्षित की एक महती भूमिका रही। जिनको लगता है कि दिल्ली में आप पार्टी के अभ्युदय के बाद इन वर्षों ने शायद ही कांग्रेस के लिए कोई स्कोप बचा है, चुनांचे संदीप अपनी आगे की राजनीति के लिए यूपी में अपने लिए जमीन तलाश कर रहे हैं और 2019 का चुनाव वे यूपी की किसी ब्राह्मण बहुल सीट से लड़ सकते हैं, उनकी मां भी पूर्व में एक दफे कन्नौज से सांसद रह चुकी हैं।
Posted on 21 April 2016 by admin
दरअसल संघ ने ही आखिरकार मौर्य के नाम पर जोर लगाया कि वे विवादास्पद नहीं है, संघ के पुराने प्रचारक रहे हैं, इन पर किसी के आदमी होने का ठप्पा नहीं है। यह जिस पिछड़ी मौर्या जाति से ताल्लुक रखते हैं यूपी में इस जाति के 6-7 फीसदी वोट हैं। पर जब लखनऊ में केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत के लिए कार्यक्रम हुआ तो उसमें दिल्ली से किसी भी राष्ट्रीय नेता ने शिरकत नहीं की। न राजनाथ सिंह पहुंचे, न कलराज मिश्र। न वरूण गांधी पहुंचे, न योगी आदित्यनाथ। सूत्र बताते हैं कि यूपी के कद्दावर ठाकुर नेता राजनाथ सिंह ने तो अमित शाह के समक्ष यहां तक नाराजगी जता दी कि उन्हें मौर्या के नाम का पता टीवी से चला, पार्टी हाईकमान ने उनकी राय पूछने तक की जहमत नहीं उठाई। यानी आने वाले दिन मौर्या के लिए कठिन परीक्षाओं वाले दिन हो सकते हैं।
Posted on 21 April 2016 by admin
क्या भाजपा के लिए दिल्ली दूर होती जा रही है? सूत्र बताते हैं कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी एक पसंदीदा सर्वेक्षण एजेंसी से दिल्ली में एक बड़ा जनमत सर्वेक्षण करवाया है, इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। भाजपा के परंपरागत वैष्य वोटरों ने भी भगवा पार्टी से मुंह मोड़ना षुरू कर दिया है, दिल्ली के व्यापारी वर्ग को लगता है कि केंद्रनीत भाजपा सरकार की नीतियां व्यापारी विरोधी है, 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली के 79 फीसदी व्यापारी वर्ग ने भाजपा को वोट दिया था, यदि आज चुनाव होते हैं तो इनमें से 70 फीसदी आप के लिए वोट कर सकते हैं, क्योंकि इनकी नज़र में केजरीवाल व्यापारियों के दुख दर्द को ज्यादा बेहतर तरीके से समझते हैं। 14 के चुनाव में दिल्ली के 94 फीसदी जाटों का समर्थन भाजपा को मिला था, आज भाजपा को जाटों का समर्थन भी गिनती का रह गया है, शायद यही वजह है कि अपनी तमाम दावेदारियों के बावजूद प्रवेश वर्मा दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष नहीं बन पाए। क्योंकि उनके सजातीय जाट वोटरों ने भाजपा का दामन छोड़ दिया है।
Posted on 21 April 2016 by admin
दिल्ली प्रदेश भाजपा के नए सिरमौर के रूप में पवन शर्मा का नाम लगभग पक्का हो चुका है। पवन शर्मा संघ के सक्रिय कार्यकर्त्ता हैं, उत्तर भारतीय हैं, संगठन मंत्री रह चुके हैं, चुनांचे प्रदेश कार्यकर्त्ताओं के साथ उनका अच्छा समन्वय है, अच्छा नेटवर्क है। वैसे भी दिल्ली के लिहाज से अगले 2-3 साल इतने महत्त्वपूर्ण नहीं है, यहां चुनाव में अभी साढ़े तीन साल बाकी है। सो, दिल्ली के एक धुरंधर भगवा नेता विजय गोयल ने बेहद आसानी से अपनी दावेदारी समेट ली है। सूत्र बताते हैं कि इससे पूर्व गोयल प्रधानमंत्री से भी मिले थे और उनके समक्ष अपनी भावनाओं को भी स्वर दिए थे। दरअसल गोयल चाहते थे कि अगर उन्हें दिल्ली में भगवा बागडोर सौंपी जानी है तो इससे पहले उन्हें केंद्र में मंत्रिपद भी दिया जाना चाहिए, कहते हैं यह बात मोदी को बेहद नागवार गुजरी। सो, गोयल का पत्ता कट गया और शर्मा का नंबर लग गया।
Posted on 21 April 2016 by admin
देश के दर्जन भर राज्य जिस तरह सूखे की चपेट में हैं, महाराष्ट्र, तेलांगना, गुजरात जैसे कई राज्यों में जल के लिए त्राहिमाम मचा है, उसे देखते हुए संघ के अंदर यह विचार पल्लवित हुआ है कि क्यों नहीं इन राज्यों में वैदिक पंडितों की मदद से ’जल वृष्टि यज्ञ’करवाया जाए? सूत्र बताते हैं कि कालांतर में भी एक वक्त जब देश में सूखे की नौबत आई थी तो तत्कालीन सर संघचालक के. सुदर्शन ने अपनी पहल पर देश भर में ऐसे 11 यज्ञ करवाए थे, जिसके परिणाम सकारात्मक बताए जाते हैं, इस यज्ञ में 37 वैदिक पंडित हिस्सा लेते हैं, और पानी से भरे एक बड़े पात्र के अंदर बैठ कर इस यज्ञ को संपन्न किया जाता है। संघ के एक उच्च पदस्थ सूत्र का दावा है कि उस समय ऐसे एक यज्ञ पर 11 लाख रूपए का खर्च आया था, आज के समय में यह खर्च सीमा बढ़ कर 15 लाख रूपयों तक पहुंच सकती है। सुदर्शन जी ने यह यज्ञ उस समय महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व राजस्थान जैसे राज्यों में करवाए थे, संघ की योजना भी भाजपा शासित राज्यों में इस अनोखे यज्ञ को करवाने की है, इस यज्ञ को परवान चढ़ाने के लिए संघ निरंतर अपने आनुशांगिक संगठनों से बात कर रहा है, इस यज्ञ की अवधि कम से कम एक सप्ताह की होती है। अगर वास्तव में ’जल वृष्टि यज्ञ’ से कोई चमत्कार हो सकता है तो देश इस चमत्कार को नमस्कार करने के लिए तैयार बैठा है।