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चिदंबरम व कमिश्नर की जंग रोचक मोड़ पर

Posted on 19 January 2014 by admin

एक इंकम टैक्स कमिश्नर ने देश के वित्त मंत्री के खिला$फ खुला मोर्चा खोल दिया है, समझा जाता है कि इस कमिश्नर साहब ने अपने डिपार्टमेंट को एक रिपोर्ट भेजी कि चिदंबरम के पुत्र कार्तिक चिदंबरम ने गलत तरी$के से पैसा अर्जित किया है, उन्होंने अपने विभाग के आला अधिकारियों से इस बात की गुहार लगाई कि इस पूरे मामले की जांच की जाए, जब यह बात चिदंबरम तक पहुंची तो उन्होंने बात हल्के में लेते हुए इन कमिश्नर साहब को ‘साइकी’ यानी पागल करार दे दिया, कमिश्नर साहब को यह बात बेहद नागवार गुजरी और वे एम्स से अपने नॉर्मल होने का सर्टिफिकेट ले आए और यह उस रिपोर्ट के साथ नत्थी करवा दी। बात यहीं नहीं रूकी कमिश्नर साहब पर दो महिलाओं ने यौन-शोषण के आरोप जड़ दिए, जब कार्यवाई शुरू हुई तो कमिश्नर साहब ‘कैट’ चले गए, जहां इन महिलाओं ने अपने साथ हुए किसी भी प्रकार के दुव्र्यवहार से इंकार कर दिया, फिर कमिश्नर साहब को लगा कि सरकार से लडऩा इतना आसान नहीं तो वे मदद की गुहार लगाते हुए राम जेठमलानी के पास जा पहुंचे, जेठमलानी ने बतौर सीनियर वकील चिदंबरम को चि_ïी लिखी है और उनसे कात्र्तिक के खातों की गड़बडिय़ों की बाबत जवाब मांगा है। पर देश के एक बड़े उद्योगपति अब हरकत में आ गए हैं और वे चिदंबरम और राम जेठमलानी के बीच सुलह-सफाई करवाना चाहते हैं, क्योंकि वे चिदंबरम व जेठमलानी दोनों के ही बेहद करीबी मित्रों में शुमार होते हैं, कमिश्नर साहब परेशान हैं कि वे अब जाएं तो कहां?

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अपने पुत्र के लिए चिंतित थीं सुनंदा

Posted on 19 January 2014 by admin

केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर के लिए आगे की सियासी राह मुश्किल होने वाली है, उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर के असमय मौत के समय व तौर तरीक़ों से कई बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि थरूर दंपत्ति में पिछले काफी समय से खटपट चल रही थी, जानकार सूत्रों का दावा है कि सुनंदा को न केवल थरूर का नया रोमांस परेशान कर रहा था, बल्कि पहली शादी से हुए अपने पुत्र के भविष्य को लेकर भी वह काफी चिंतित थीं, सुनंदा को लगातार ऐसी $खबरें मिल रही थी कि यूएई में रह रहा उनका युवा पुत्र कई तरह के व्यसनों का शिकार हो गया है। उनके पुत्र पर ड्रग्स लेने के आरोप भी लग रहे थे। कहते हैं सुनंदा ने अपने कई करीबी मित्रों से इस बात का जिक्र किया था कि अपने पुत्र को सेट्ल करने के लिए उन्हें एक बड़ी रकम की जरूरत है, दरअसल सुनंदा अपने पुत्र के लिए कोई बिजनेस खड़ा करना चाहती थीं, पर इसके लिए वह वांछित रकम नहीं जुटा पा रही थीं।

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कैसे मानीं किरण?

Posted on 19 January 2014 by admin

आम आदमी पार्टी में नित्य दिन बड़े नामधारियों का शामिल होना व मीडिया की सुर्खियां बटोरना भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को बहुत व्यथित कर रहा था, सो उन्होंने देश के सबसे बड़े, अपने मित्र उद्योगपति से संपर्क साध उनसे मदद मांगी और यह आग्रह किया कि वे चाहते हैं कि अन्ना आंदोलन से जुड़े लोग भाजपा ज्वॉइन करें जिससे देश की जनता में एक मैसेज जाए। इस औद्योगिक घराने के सर्वेसर्वा और उनकी धर्मपत्नी से अन्ना की सहयोगी रहीं किरण बेदी के निजी ताल्लुकात हैं, सूत्र बताते हैं कि इन उद्योगपति की पेजथ्री धर्मपत्नी जो स्कूल चलाती हैं उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में किरण बेदी शामिल हैं और इसके एवज में उन्हें सालाना कोई 24 लाख रुपयों का मानदेय मिलता है, समझा जाता है कि इस उद्योगपति के कहने पर ही अब किरण बेदी ने नमो का गुणगान करना शुरू कर दिया है, आने वाले चुनाव में किरण बेदी दिल्ली की किसी संसदीय सीट से भाजपा की प्रत्याशी हो सकती हैं, ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है।

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सुनंदा व तरार की तकरार

Posted on 19 January 2014 by admin

सूत्र बताते हैं कि सुनंदा पुष्कर व शशि थरूर का वैवाहिक जीवन कगार की आग से दहक रहा था, रोज़ नए झगड़ों की $खबर मिल रही थी, एक पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार से अपने पति के संबंधों को लेकर वह $खासा परेशान थीं, मनमुटाव व झगड़े का आलम यह था कि सोशल मीडिया व ट्विटर इन दोनों के बीच ज़ुबानी जंग का अखाड़ा बन गया था, ट्विटर हेंडिल बम-गोला दागने के एक नए औज़ार के तौर पर अवतरित हो गया था, इस जंग की एक बानगी देखिए, जब मेहर सुनंदा पर एक तल्ख $िफकरा कसते हुए कहती हैं-‘इनकी अक्ल तो इनकी अंग्रेजी ग्रामर व अंग्रेजी स्पेलिंग से भी कमज़ोर है।’ शायद यही वजह थी कि सुनंदा ने अपने एक पत्रकार मित्र से खुलकर अपनी भावनाएं शेयर की थी और कहा था ‘चुनाव के पहले मैं ऐसा खुलासा करूंगी कि शशि का पॉलिटिकल कैरियर खत्म हो जाएगा।’ सूत्र बताते हैं कि वहीं थरूर की सोच थी कि बस एक बार चुनाव बीत जाए फिर वे सुनंदा से तलाक की अर्जी अदालत में दाखिल करेंगे। पर लगता है नियति को कुछ और ही मंजूर था, वैसे भी भारतीय खुफिया एजेंसियों मेहर तरार के आईएसआई लिंक को लेकर खासी सशंकित है और सुनंदा की असामयिक मौत में वह इस एंगिल से भी पड़ताल कर रही है।

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…और अंत में

Posted on 19 January 2014 by admin

अरविन्द केजरीवाल और इनके कुछ खास साथियों के निरंकुश व अडिय़ल रवैये की वजह से आप के 7 विधायक टूटने को तैयार बैठे हैं।

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देख तमाशा पैसे का

Posted on 19 January 2014 by admin

पिछले दिनों मुंबई के पॉश इलाके साऊथ मुंबई की एक व्यस्त सडक़ पर एक तेज रफ्तार एस्टॉन मार्टिन कार ने असंतुलित होते हुए कई गाडिय़ों को टक्कर मार दी, टक्कर इतनी जर्बदस्त थी कि एस्टॉन मार्टिन सामने से बुरी तरह टूट-फूट गई। तेज रफ्तार मार्टिन ने कोई तीन कारों को टक्कर मारी थी, इसमें ऑडी चला रही एक महिला रूपा रेल भी शामिल थीं, इस घटना के बाद देश के एक बड़े उद्योगपति के ड्राईवर ने पुलिस स्टेशन में सरेंडर कर कहा कि मौके पर गाड़ी वही चला रहा था, पर डर के मारे वह दुर्घटना के बाद गाड़ी छोडक़र भाग गया था, सूत्र बताते हैं कि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया था कि यह तेज रफ्तार गाड़ी उद्योगपति का पुत्र चला रहा था, दुर्घटना होते ही इसके पीछे चल रही एक्कॉटïर््स कार में उन्हें मौके से भगा ले जाया गया, दुर्घटना की शिकार हुई महिला भी अब मुंह खोलने को तैयार नहीं क्योंकि उसे आनन-फानन में एक नई चमचमाती ऑडी-6 गिफ्ट कर दी गई। सो मामला रफा-दफा हो गया है, सचमुच पैसे में बड़ी ताकत होती है।

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नमो के नए दोस्त

Posted on 13 January 2014 by admin

नमो की ऊंची महत्वाकांक्षी सियासी उड़ान के पंख जैसे अब लडख़ड़ाने लगे हों, वे अब जमीन की बातें, जमीन के लोगों से संपर्क साधने में जुटे हैं। कई बड़े क्षत्रपों से उनके सिपहसालारों ने पंगा ले रखा था। अब नमो एक-एक से खुद संपर्क साध रहे हैं उन्हें साथ आने का निमंत्रण दे रहे हैं, मसलन भाजपा के युवा गांधी वरुण अब तक नमो की एक भी पब्लिक रैली में उनके साथ एक मंच पर नहीं दिखे थे, अब वरुण 8 फरवरी को कोलकाता में मोदी के लिए एक बड़ी रैली कर  रहे हैं, जाहिर हैं उसमें वे नमो की तारीफ में कसीदे पढ़ेंगे और बुलंद दोस्ती की एक नई इबारत लिखेंगे। सियासत में कुछ भी स्थायी नहीं, न दुश्मन, न दोस्त।

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‘आप’ का संताप

Posted on 13 January 2014 by admin

एक अलग ख्याल, अलग अस्मिता, अलग राजनैतिक चिंतन, अलग रास्ता लेकिन सत्ता की गंगोत्री सामने दिख रही हो तो एक स्वच्छ धारा को भी मैली होने में वक्त नहीं लगता। कहां वक्त लगा आम आदमी पार्टी को शोएब इकबाल जैसे अमर्यादित चरित्र वालों का समर्थन हासिल करने में? कहा तो यह भी जा रहा है कि हालिया दिनों में आम आदमी पार्टी में कई दबंग नेताओं के रिश्तेदार, माफियाओं के भाई-बंधु, और कई अवसरवादी राजनीतिज्ञ थोकभाव में शामिल हुए हैं। आम चुनावों में वक्त नहीं रह गया है, चुनांचे आम आदमी वालों के पास भी वक्त कहां इतनी छान-बीन का कि पार्टी में शामिल हो रहे या उन्हें समर्थन दे रहे लोगों का ‘टै्रक रिकार्ड’ क्या है? यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में कई आम आदमी प्रतिनिधियों के खिलाफ परचे बंटने शुरू हो गए हैं, कुछ पर तो संगीन आरोप लग रहे हैं, सियासत का तो यही दस्तूर है मिस्टर क्लीन, केजरीवाल जी जरा संभल कर!

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‘आप’ तो ऐसे न थे

Posted on 13 January 2014 by admin

देश में ‘आप’ की हवा इस कदर बह रही है कि सत्ता के बड़े दावेदारों की हवा भी खराब हो रही है। जानकार सूत्र बताते हैं कि अगले कुछ दिनों में अरविन्द केजरीवाल नरेंद्र मोदी को सीधे-सीधे ललकारने जा रहे हैं कि ‘मैं भी मुख्यमंत्री, तुम भी मुख्यमंत्री, हिम्मत है तो मेरे खिलाफ किसी न्यूट्रल लोकसभा सीट से चुनाव लडक़र दिखाओ, आपका भी मैं वहीं हश्र करूंगा जैसा शीला दीक्षित का किया था।’ इस ललकार की पूर्व पीठिका तैयार हो चुकी है, मोदी को उनके गढ़ गुजरात में घेरने के लिए ‘आप’ ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह गुजरात की सभी 26 लोस सीटों पर चुनाव लड़ेगी, गुजरात में ‘आप’ की टिकट पर चुनाव लडऩे वाले कई चौंकाऊ चेहरे हो सकते हैं, इनमें से कई वो हैं जिन्होंने कालांतर में मोदी विरोध की अलख जगाई है। मसलन मल्लिका सारा भाई।

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75 प्लस भी लड़ेंगे चुनाव

Posted on 13 January 2014 by admin

‘आप’ के इस हालिया अभ्युदय और भाजपा व नमो के गिरते ग्राफ से संघ चिंता में है और संघ की दिल्ली बैठक में इसी बात को लेकर गहन विचार विमर्श के दौर चले, मोटे तौर पर इस बैठक में ये विचार उभरकर सामने आए कि भाजपा ‘आप’ को हल्के में न ले। दूसरा इस लोस चुनाव में जीत सकने वाले उम्मीदवारों को ही पार्टी टिकट मिले। चुनांचे संघ ने अपने उस पुराने स्टैंड पर भी यू-टर्न ले लिया है कि 75 साल से ज्यादा उम्र वाले नेताओं को चुनावी महासमर में नहीं उतारा जाए, बल्कि ये पुराने नेता पार्टी में अभिभावक की भूमिका निभाएं। संघ के इस बदले-बदले रवैये से खर्च हो चुके भगवा नेताओं की चांदी हो गई है, यानी अडवानी फिर से गांधीनगर से पार्टी प्रत्याशी हो सकते हैं, मुरली मनोहर जोशी वाराणसी से, यशवंत सिन्हा हजारीबाग से, कल्याण सिंह बुलंदशहर या इटावा से, अगर वसुंधरा मान गई तो जसवंत सिंह राजस्थान की किसी सीट से यानी युवा मतदाताओं के इस नए दौर में भाजपा व संघ रिटायर नेताओं पर दांव लगाने जा रही है, कैसी विडंवना है यह?

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