Posted on 17 November 2015 by admin
पर अगर हालात बदले, लोग और निष्ठाएं बदली तो स्वयं मोदी अमित शाह के लिए एक सम्मानजनक एक्जिट चाहेंगे। ऐसे में शाह को मोदी मंत्रिमंडल के पहले चार मंत्रियों की सूची में शुमार किया जा सकता है। सूत्रों की माने तो अगर ऐसी नौबत आई तो शाह की पहली पसंद गृह मंत्रालय हो सकती है, पर वहां पहले से पार्टी के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह काबिज हैं, उन्हें डिगाना शायद मोदी के लिए भी इतना आसान नहीं होगा। वैसे भी अगर शाह को देश का अगला गृह मंत्री बनाया जाता है तो मोदी सरकार पर विपक्षी हमले तेज हो सकते हैं, शाह की राह में स्वयं उनका अतीत बाधक साबित हो सकता है। ऐसे में मोदी के समक्ष सबसे आसान विकल्प यही बचता है कि वे मनोहर पर्रिक्कर को रक्षा से संगठन की ओर धकेले और उन्हें पार्टी का अगला अध्यक्ष बनाने की रणनीतियां बुने, तब कहीं जाकर शाह के लिए देश का अगला डिफेंस मिनिस्टर बनना मुमकिन होगा ताकि वे पार्टी के अंदर से लगातार हो रहे हमलों से मोदी जी और अपना डिफेंस कर सकें।
Posted on 17 November 2015 by admin
कभी नरेंद्र मोदी के बेहद करीबियों में शुमार होने वाले व चुनावी रणनीतियों बुनने में माहिर प्रशांत किशोर को मोदी दरबार से बाहर का रास्ता दिखवाने में अमित शाह की एक महती भूमिका मानी जाती है। 2014 के लोकसभा चुनाव मोदी को तूफानी जीत दिलवाने में प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीतियों का भी कमाल था, सूत्र बताते हैं कि साल 14 की एतिहासिक जीत के बाद किशोर अपने लिए कोई पारितोषिक चाहते थे और चाहते थे कि मोदी उन्हें नवगठित नीति आयोग में जगह दे दें, तब तक परिदृश्य में शाह की एंट्री हो जाती है और किशोर को मोदी दरबार से धकिया दिया जाता है, और वे चोटी-खोल चाणक्य की तरह नीतीश कैंप में इस संकल्प के साथ दाखिल होते हैं कि उन्हें शाह को जमीन दिखानी है, और इसमें वे कामयाब भी होते हैं। बिहार विजय को अमलीजामा पहनाने के बाद सियासी हलकों में प्रशांत किशोर की पूछ बढ़ गई है। इस गुरूवार न सिर्फ वे अरूण शौरी से मिले, अपितु माना जा रहा है कि उनकी गुप्त मुलाकात कांग्रेसी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से भी हुई। कहा जाता है कि ममता बनर्जी और नवीन पटनायक जैसे क्षेत्रीय क्षत्रपों ने भी प्रशांत किशोर को मिलने का न्यौता भेजा है। वहीं प्रशांत नीतीश कुमार से पहले ही यह वादा कर चुके हैं कि आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में वे नीतीश को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए तमाम रणनीतियों बुनेंगे, वहीं नीतीश की ओर से भी प्रशांत से यह वादा हुआ है कि वे जदयू के कोटे से उन्हें राज्यसभा में भेजेंगे। यानी प्रशांत किशोर के अच्छे दिन आ गए हैं।
Posted on 17 November 2015 by admin
पेरिस में हुए ताजा आतंकवादी हमलों के बाद फ्रांस के अंदर लगातार इस बड़े सवाल ने मुंह उठाना शुरू कर दिया है। यूरोप के सबसे बड़े धर्म निरपेक्ष राष्ट्रों में शुमार होने वाले फ्रांस में कोई 47 लाख मुस्लिमों की आबादी है, जो कि वहां की कुल जनसंख्या का कोई 7.5 प्रतिशत है। इसी वर्ष जनवरी में पेरिस में हुए चार्ली हैब्दों की घटना के बाद से फ्रांस सरकार लगातार इस्लामिक कट्टरपंथियों के खिलाफ मुहिम चलाने में जुटी है। चार्ली हैब्दों की घटना के बाद फ्रांस की खुफिया एजेंसियों ने वहां की सीनेट को एक रिपोर्ट सौंपी थी, इस रिपोर्ट में यह अंदेशा व्यक्त किया गया था कि हालिया दिनों में तीन हजार से ज्यादा यूरोपियन नौजवान एक जेहादी के तौर पर आईएसआईएस के साथ जुड़ गए हैं, इनमें से आधे से ज्यादा नौजवान फ्रेंच हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा हुआ है कि आईएसआईएस इन नौजवानों को सीरिया और इराक लेकर भी गया था। अकेले फ्रांस में 1570 ऐसे लोग हैं जो फ्रांस सरकार की कड़ी निगरानी में हैं, माना जा रहा है कि इनका कनेक्शन सीरिया के साथ हो सकता है। फ्रांस की खुफिया एजेंसियों को यह भी अंदेशा था कि 200 से ज्यादा फ्रेंच जेहादी आईएसआईएस की ट्रेनिंग लेकर फ्रांस लौट आए हैं। हालिया दिनों में वहां डेढ़ सौ से ज्यादा कट्टरपंथियों को सलाखों के पीछे डाला गया हैं। वहां बुर्के पर आंशिक बैन लगाया गया है और वहां की बदली परिस्थितियों में इस्लामिक यूथ के समक्ष नौकरियों का संकट पैदा हो गया है, फ्रांस के कई विश्वविद्यालय उन्हें एडमिशन देने में भी सतर्कता बरत रहे हैं, ताज़ा आतंकी हमलों के बाद फ्रांस में अपने सेकुलर ताने-बाने से बाहर आने की छटपटाहट साफ देखी जा सकती है।
Posted on 30 October 2015 by admin
बिहार के चुनावी परिदृश्य पर भले ही अनिश्चय की धुंध छायी हो, पर भाजपा के बिग कमांडर अमित शाह बिहार चुनाव में एनडीए की जीत को लेकर आश्वस्त जान पड़ते हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों शाह ने संघ के शीर्ष नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी को बिहार चुनाव के संदर्भ में अपनी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें खम्म ठोंककर यह दावा हुआ है कि बिहार में एनडीए भारी बहुमत से सरकार बना रहा है। इसके लिए शाह ने बिंदुवार क्रम से कारण भी गिनाए हैं, मसलन शाह ने अपनी रिपोर्ट में सबसे पहले पार्टी कैडर की जी खोलकर तारीफ की है और कहा है कि बिहार के 60 हजार से ज्यादा पोलिंग बूथ पर प्रति बूथ दस पार्टी कार्यकर्ता तैनात हैं, जो मतदाताओं को न सिर्फ बूथ तक लाने का कार्य कर रहे हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि इनके वोट सही तरीके से कास्ट हों। बिहार के 6.8 करोड़ वोटरों को लुभाने के लिए पार्टी के 96 लाख कार्यकर्ताओं ने दिन रात एक कर रखे हैं, और इस कार्य में उन्हें संघ के समर्पित 70 हजार स्वयंसेवकों का निःस्वार्थ भाव से साथ मिल रहा है जबकि नीतीश अपने कैडर को लेकर पूरी तरह से लालू पर आश्रित हैं। बिहार में पार्टी हरियाणा के सफल प्रचार माडल को अपना रही है और पूरी चुनावी लड़ाई को 65 बनाम 35 बनाने में जुटी है। मुस्लिम, यादव और कुर्मी को मिला कर महागठबंधन के पक्ष में 35 फीसदी का आंकड़ा जुटता है, चुनांचे शाह का मानना है कि पेश 65 फीसदी जातियां भाजपा और एनडीए के पक्ष में वोट कर सकती है। शाह को भरोसा है कि राज्य के 15 फीसदी अगड़े मजबूती से एनडीए के पक्ष में खड़े हैं, जिसे 4 फीसदी दुसाध (पासवान), 8 फीसदी कुशवाहा (उपेंद्र कुशवाहा) और 10-11 फीसदी महादलितों के वोट को जीतन राम मांझी ड्राईव करने का माद्दा रखते हैं। शेष बच गई 30 फीसदी अति पिछड़ी जातियां, जो लगभग 114 जातियों का मिला-जुला समूह है इनका झुकाव भी एनडीए के पक्ष में हैं। इसके अलावा शाह को लगता है कि बिहार में मोदी फैक्टर भी खूब काम कर रहा है, मोदी की जनसभाओं में नौज़वानों और महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ जुट रही है जो एनडीए के लिए एक सकारात्मक संकेत है। शाह का यह भी कहीं मजबूती से मानना है कि बीफ मुद्दे पर नीतीश की सोची-समझी चुप्पी और लालू-रघुवंश के अनर्गल बयानों से हिंदुओं का मन महागठबंधन के प्रति खट्टा हुआ है। शाह की इस रिपोर्ट कार्ड से मोदी भी सहमत बताए जाते हैं। यही वजह है कि मोदी बिहार के आखिरी तीन चरणों के चुनाव के लिए 17 रैलियां करने के लिए तैयार हो गए हैं।
Posted on 30 October 2015 by admin
केंद्रीय इस्पात मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जो संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के आंखों के तारे हैं, उन्हें बिहार में भाजपा के चुनाव प्रचार को धार देने और उसे कार्डिनेट करने का जिम्मा सौंपा गया है। पर बिहार कोटे के मोदी सरकार के अन्य मंत्रियों से उनकी पट नहीं रही है, चुनांचे राज्य में भाजपा के पूरे प्रचार अभियान में एक किस्म की अव्यवस्था और अराजकता देखी जा सकती है, इस कटु सत्य के बावजूद कि नीतीश-लालू-कांग्रेस महागठबंधन के मुकाबले भाजपा ने इस पूरे चुनावी अभियान में धन और संसाधन कहीं शिद्दत से झोंक रखे हैं। तोमर हैरत में हैं कि केंद्रीय मंत्रियों की बात छोड़ भी दी जाए, तो बिहार भाजपा के नेतागण भी उनके सुझावों और आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं। पिछले दिनों तोमर ने इस बात की शिकायत अमित शाह से की, सूत्र बताते हैं कि भगवा बिहारी नेताओं को हड़काने के बजाए शाह ने तोमर को समझाया कि बिहारी नेताओं के मूड को मद्देनजर रखते उन्हें ही अपने रवैया बदलना पड़ेगा।
Posted on 30 October 2015 by admin
संघ का शीर्ष नेतृत्त्व भाजपा के सिरमौर अमित शाह से खार खाए बैठा है। बिहार चुनावों के बाद उनकी क्लास ली जा सकती है। संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पिछले पांच-छह महीनों में भाजपा के दर्जन भर से ज्यादा शीर्ष नेताओं ने संघ के तीनों प्रमुख नेताओं मोहन भागवत, दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल से मिल कर यह शिकायत लगाई है कि पार्टी नेताओं के प्रति शाह का रवैया अहंकारपूर्ण है। भाजपा के एक प्रमुख नेता ने तो यहां तक कहा कि वे पिछले आठ महीनों से शाह मिलने का वक्त मांग रहे हैं, पर शाह को उनसे मिलना नागवार गुजर रहा है। उन्हें शाह की ओर से मिलने का वक्त नहीं दिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि संघ नेतृत्त्व शाह के मसले पर गंभीरता से विचार कर रहा है, भले ही शाह पार्टी को बिहार जितवा लाएं पर बतौर अध्यक्ष उनकी पुनः ताजपोशी खतरे पड़ गई है। पार्टी के अगले अध्यक्ष के लिए तीन नाम फिर से चर्चा में आ गए हैं-राजनाथ सिंह, ओम माथुर और जेपी नड्डा।
Posted on 30 October 2015 by admin
अगले महीने से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के हंगामीखेज होने के आसार हैं। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों की रणनीति बेहद साफ है कि मानसून सत्र के मानिंद ही शीतकालीन सत्र को चलने नहीं देना है। अगर एनडीए बिहार में जीत जाता है तो कम से कम लोकसभा में भाजपा व एनडीए एक आक्रामक रणनीति के साथ सामने आएगा और विपक्षी दलों पर पूरी मजबूती के साथ पलटवार करेगा। वहीं विपक्षी दलों के एजेंडे में ललित गेट यानी एक बार फिर से निशाने पर सुषमा, वसुंधरा, दादरी और बीफ, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, एनजेएसी एक्ट, आरक्षण पर संघ का नज़रिया, इन मुद्दों को विपक्ष संसद में उछाल सकता है। कांग्रेस ललित मोदी के इस एंगिल को भी जोर-शोर से उछाल सकती है कि मोदी सरकार ने कुछ ऐसी व्यूह रचना गढ़ी है कि ललित मोदी 8-10 साल आराम से विदेश में गुजार सके, सुषमा स्वराज को घेरने के लिए कांग्रेस पी चिदंबरम के ब्रिटिश काउंटरपार्ट को लिखे पत्र और उसके जवाब को पहले ही सार्वजनिक कर चुकी है, यानी सुषमा पर विपक्षी हमले का वार पहले से कहीं तल्ख़ रहने वाला है। सरकार के रणनीतिकारों ने भी जवाबी पलटवार की व्यूह रचना बुन ली है, यानी सत्ताधारी दल का जवाब भी उतना ही आक्रामक और पैना रहने वाला है।
Posted on 30 October 2015 by admin
गांधी-नेहरू परिवार के पुराने वफादार माखनलाल फोतेदार अपने संस्मरणों का कच्चा-पक्का चिट्ठा एक पुस्तक ’द् चिनार लीव्स’ में लेकर आ रहे हैं, इस संस्मरणात्मक पुस्तक में कई बड़े खुलासे भी हैं। फोतेदार का दावा है कि अपनी मृत्यु से चंद रोज पूर्व इंदिरा गांधी ने इस बात का जिक्र किया था कि उनकी पोती प्रियंका ही उनकी असली राजनैतिक वारिस साबित होगी। क्या यह महज़ इत्तफाक है कि कुछ ऐसा ही दावा अप्रैल 2014 में पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन द्विवेदी भी कर चुके हैं, भले ही इसके बाद पार्टी ने उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया। सनद रहे कि अप्रैल’ 14 में द्विवेदी ने खुलासा किया था कि सन् 1990 में राजीव गांधी ने अपनी पुत्री प्रियंका को लेकर उनसे ऐसी ही कुछ मंशा व्यक्त की थी। कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं का दावा है कि पार्टी के कुछ पुराने ब्राह्मण नेताओं के ऐसे ख्यालात हैं कि कांग्रेस की डूबती नैया को सिर्फ प्रियंका ही पार लगा सकती हैं।
Posted on 30 October 2015 by admin
नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते बिहार की स्कूली छात्राओं को थोकभाव में साइकिलें बांटी थी, इस साइकिल वितरण के सकारात्मक नतीजे भी आए, लड़कियों ने भी स्कूल जाने में दिलचस्पी दिखाई। सो, इस साइकिल को आधार बनाकर नीतीश ने कई महत्त्वाकांक्षी प्रचार योजनाओं के डिजाइन करवाए, टीवी विज्ञापन से लेकर प्रिंट कैंपेन तैयार हुए, पर जैसे ही ये कैंपेन बाहर आए समाजवादी पार्टी के लोगों ने उसका बेजा फायदा उठाना शुरू कर दिया और पब्लिक में जाकर कहने लगे, ‘यही साइकिल है हमारा चुनावी निशान।’ साइकिल से जुड़ा यह मीडिया कैंपेन जब डिजाइन हो रहा था तब मुलायम नीतीश-लालू के साथ थे, पर यादव सिंह मामले ने उन्हें पाला बदलने को मजबूर कर दिया, अब वे बिहार में एनसीपी के साथ मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। सो मुलायम के साथ छोड़ते ही नीतीश को अपना ‘साइकिल कैंपेन’ वापिस लेना पड़ा।
Posted on 22 October 2015 by admin
सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा संविधान के 99 संशोधन और एनजेएसी ;नेशनल जुडिशियल अपाॅइंटमेंट कमीशनद्ध एक्ट को असंवैधानिक क़रार देने से शुक्रवार को सियासी हलक़े में कोहराम मचा रहा। सनद रहे कि इस एक्ट के द्वारा सरकार ने 22 साल पुराने काॅलेजियम सिस्टम को ही खत्म कर दिया था। फैसला आते ही मीडिया में भी हड़कंप मचा और मीडिया वाले पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल को फोन करने लगे,जब उनके फोन को रिसीव नही किया गया तो मीडिया वालों ने सिब्बल के घर के आगे डेरा-डंडा डाल दिया। न्यूज चैनलों के ओबी वैन ने भी सिब्बल के घर के आगे पोजिशन ले ली। हैरान परेशान सिब्बल नें तब अख़बार और चैनल के संपादकों को फोन कर उनसे कहा कि यह बिल उनके क़ानून मंत्री रहते पास नही हुआ था, चुनांचे इस बाबत रविशंकर प्रसाद की बाईट ली जाए। इस के बाद मीडिया वालों ने मौजूदा कानून मंत्री सदानंद गौड़ा से संपर्क साधा, क्योंकि तब तक रविशंकर प्रसाद भी उन्हें उपलब्ध नही हो रहे थे। पर गौड़ा नें पत्रकारों से साफ कर दिया था कि जब तक उनकी बातचीत प्रधानमंत्री और सरकार के एक वरिष्ट मंत्री से नही हो जाती है वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नही दंेगे। तब तक पत्रकारों को इस बात की भनक लग गई थी कि एनजेएसी एक्ट का पूरा मसौदा सरकार के उसी सर्वशक्तिमान मंत्री जी ने बनाया था, पर उनसे बयान देने को कौन कहे। खैर इसी सर्वशक्तिमान नें पत्रकारों को इस पीड़ा से उबार लिया, सूत्र बताते हैं कि उन्होंने रविषंकर प्रसाद से कहा कि वे मीडिया के सामने आकर सरकार का पक्ष रखें, तब कहीं जाकर पत्रकारों को एक अदद बाईट नसीब हो सकी।