Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 08 March 2016 by admin
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Comments Off on (English) The fourth front under Congress’ leadership
Posted on 08 March 2016 by admin
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Comments Off on (English) Congress low on funds
Posted on 08 March 2016 by admin
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Comments Off on (English) Rahul’s new avatar
Posted on 08 March 2016 by admin
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Comments Off on (English) Kanhaiya to contest in 2019?
Posted on 08 March 2016 by admin
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Comments Off on (English) Sangma’s heritage
Posted on 01 March 2016 by admin
स्वच्छता, पारदर्शिता, नैतिकता, शुचिता जैसे खटराग सबसे ईमानदार पीएम के राज में अपने मायने खोते जा रहे हैं, सरकार में हो वही रहा है जो पूर्ववर्त्ती सरकारों में अब तक होता आया है, क्या यह महज़ इत्तफाक है कि मोदी सरकार भी अपने पसंदीदा थैलीशाहों के हित साधने का उपक्रम साध रही है? दवा कारोबारी एक बड़े थैलीशाह का ताज़ा मामला ले लीजिए, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पार्टी फंड में दूसरा सबसे बड़ा चंदा देने वाली इसकी कंपनी की सरकार की नई दवा नीति से बल्ले-बल्ले हो गई है। हालिया दिनों में मोदी सरकार ने जिन 61 दवाओं के दाम ’डी-कंट्रोल’ किए हैं, सूत्र बताते हैं कि इनमें से कोई 29 दवाएं बस इसी कंपनी की है। यानी इन दवाओं पर से सरकारी नियंत्रण हटने के बाद कंपनी इन दवाओं के मूल्य अपने हिसाब से तय कर सकती है और जाहिरा तौर कर भी रही है, जैसे अकेले टीबी के दवाओं के दाम पांच गुना तक बढ़ा दिए गए हैं, इस गरीब देश में किस अमीर आदमी को टीबी होता है भला? अमरीका में भी जब एक दवा कंपनी ने एड्स की दवाओं पर सरकारी नियंत्रण खत्म होने के बाद जब इनकी दवाओं के दाम 50 गुणा तक बढ़ा दिए थे, तो अमरीकी सीनेट में हंगामा बरप गया था, संसद तो अपने यहां भी चल रही है, पर किस सांसद की इन मामलों में बोलने में दिलचस्पी है, कंपनियों को उनके मुंह बंद कराने का हुनर जो मालूम है।
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Posted on 01 March 2016 by admin
तमाम हंगामों के बावजूद बजट सत्र चलने के पूरे आसार नज़र आते हैं, कांग्रेस भी मान गई है कि सत्र बार-बार बाधित होने से जनता में इसका नकारात्मक संदेश जाता है। जब संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू से विपक्षी मोर्चा संभाले नहीं संभला तो आमतौर पर संसदीय कार्यों में कम दिलचस्पी दिखाने वाले हमारे यशस्वी पीएम हरकत में आए। उन्होंने जब कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी को मिलने का न्यौता भेजा, तो निमंत्रण कुबूल हुआ। मुलाकात में गिले-शिकवे भी दूर हुए, सोनिया की मूलरूप से यह आपत्ति थी कि भाजपा व संघ के नेता उन पर निजी तौर पर हमला बोल रहे हैं, इस कड़ी में नेशनल हेरल्ड मुद्दे को भी अपनी सहुलियतों के हिसाब से उछाला जा रहा है। पीएम ने आपसी रिश्ते व सौहार्द्र की बात की, तो बात से बात बन गई। सोनिया ने पीएम से आग्रह किया कि वे संसदीय कार्यों को लेकर अपनी सक्रियता और बढ़ाएं, क्योंकि उनके मंत्री विपक्षी दलों से संवाद-सेतु स्थापित करने में अब तक नाकाम साबित हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि जीएसटी को लेकर भी कांग्रेस की ओर से हरी झंडी मिल गई है, कांग्रेस इसमें तीन अनुमोदन चाहती है, भाजपा दो के लिए तैयार है, चुनांचे जब बजट सत्र का दूसरा चरण प्रारंभ होगा तो उसमें जीएसटी के पास होने के पूरे आसार हैं।
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Posted on 01 March 2016 by admin
संसद के दोनों सदनों में अपने अकाट्य तर्कों, भावुक भाव-भंगिमाओं, आक्रामक तेवरों और हथियारों के धार से मारक शब्दों से विपक्षी बेंचों को चित्त करने वाली स्मृति ईरानी मोदी-दरबार की नई स्टार हैं। सूत्र बताते हैं कि जब से एक पंडित ने स्मृति से कहा है कि घर से बाहर निकलने पर वे कुछ लाल जरूर धारण करें, नहीं तो कम से कम एक लाल बिंदी ही लगा लें, तो उनके आभा मंडल में एक अपेक्षित बदलाव परिलक्षित होगा। लाल के ओज से लैस स्मृति इन दिनों संघ की भी बेहद दुलारी बनकर उभरी हैं। सूत्र बताते हैं कि जेएनयू मुद्दे पर स्मृति का भाषण तैयार करवाने में और उन्हें जरूरी दस्तावेज मुहैया करवाने में संघ के भाजपा प्रभारी कृष्ण गोपाल की सबसे महती भूमिका मानी जा रही है। संघ के लिए हमेशा से मानव संसाधन विकास मंत्रालय अहम रहा है। वजह साफ है और विपक्षियों को इस बात का इल्म भी है कि शिक्षा ही भावी राजनीति की पटकथा लिख सकती है। अब इस पर शिक्षा के भगवाकरण का शोर उठे तो उठता रहे, यूपीए सरकार ने भी कब इन बातों की परवाह की थी।
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Posted on 01 March 2016 by admin
चूंकि हरियाणा में जाट आरक्षण के आंदोलन की बानगी पर जाट बनाम गैर जाटों में एक तरह से अघोषित जंग छिड़ी हुई थी, सो केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इस मसले पर चर्चा के लिए हरियाणा के अपने तीन साथी सांसदों को अपने दफ्तर चाय पर आमंत्रित किया और इत्तफाक से इन तीन सांसदों में एक पंजाबी, एक ब्राह्मण और एक सैनी थे। सांसदगण जब राव साहब के कमरे में पहुंचे तो देखकर हैरान रह गए कि मंत्री महोदय के दफ्तर की मैज एकदम से चकाचक साफ थी, फाईलों की बात तो जाने दीजिए, एक कागज का अदना सा टुकड़ा भी कहीं उस पर नज़र नहीं आ रहा था। सांसदगणों ने राव साहब से जानना चाहा कि बतौर मंत्री क्या वाकई उनके पास काम नहीं है? उनके पास फाईलें आती नहीं है? तो सांसदगणों को बताया गया इसमें हैरान होने की क्या बात है, उनके सीनियर मनोहर पर्रिक्कर का कमरा भी उन्हें इतना ही साफ सुथरा मिलगा। यह मोदी के ’स्वच्छ भारत अभियान’ की धमक है या इन दिनों रक्षा मंत्रालय के सारे काम-काज स्वयं पीएमओ ही निपटा रहा है?
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Posted on 01 March 2016 by admin
लोकसभा टीवी में रिसर्च का बड़ा काम है, और इस काम के लिए जो कंपनी ढूंढी गई है वह भाजपा के एक केंद्रीय प्रवक्ता की बताई जाती है, ये प्रवक्ता महोदय अरूण जेटली के बेहद करीबियों में शुमार होते हैं। हर महीने कोई 12 लाख रुपए के रिसर्च का काम है, भाजपा प्रवक्ता की कंपनी ने साढ़े नौ लाख रुपयों का टेंडर भरा है और पेश ढाई लाख रुपयों का टेंडर एक ओपिनियन पोल कंपनी चलाने वाले भाजपा करीबी चुनाव विश्लेषक का है, जब इस चुनाव विश्लेषक को पता चला कि काम इतना बड़ा है तो वे जिद पर अड़ गए कि चूंकि उनकी कंपनी के पास ऐसे कामों के पूर्व का अनुभव है सो काम का एक बड़ा हिस्सा उनके पास आना चाहिए, नहीं तो यह टेंडर रद्द हो। सूत्र बताते हैं कि लोकसभा टीवी ने भी इस टेंडर को रद्द करने का पूरा मन बना लिया है और कहते हैं उन्हें ऊपर से यह आदेश भी प्राप्त हो गया है कि अब यह सारा काम भाजपा प्रवक्ता वाली कंपनी को ही दे दिया जाए। आने वाले दिनों में इस पर अमल भी हो सकता है और बवाल भी।
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