Posted on 04 September 2016 by admin
सियासत उनके खून में है, क्रिकेट को लेकर जुनूं की हद तक उनकी दीवानगी है, वे युवा हैं, और इस कम उम्र में भी उन्होंने अपने लिये जो मुकाम हासिल किया है, वह काबिले तारीफ है। पर यह युवा नेता पिछले दिनों एक बड़ी मुसीबत में फंस गये, जब क्रिकेट की राजीनीति के दांव पेंच में उलझते दिल्ली के एक बड़े बकील ने एक बड़े पंचतारा होटल के सुइट में उनसे हुई बातचीत को गुपचुप अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और यह रिकॉर्डिंग केंद्र सरकार के एक सर्वशक्तिमान केन्द्रीय मंत्री को सुना दी। सूत्रों का दावा है कि इस बातचीत में कुछ लेन-देन के मामले का जिक्र था। वकील साहब एक प्रेस कांफ्रेंस कर यह रिकॉर्डिंग मीडिया के समक्ष रखना चाहते थे, मंत्री जी ने बीच-बचाव करके बड़ी मुश्किल से वकील साहब को समझाया, फिर युवा नेता से उनकी बात करवायी, तब जाकर सुलह-सफाई की नयी पटकथा लिखी जा सकी।
Posted on 28 August 2016 by admin
प्रधानमंत्री के सरकारी आवास में अवस्थित उनके दफ्तर ‘पंचवटी‘ का चेहरा-मोहरा बदला जा रहा है, कोई 40 से ज्यादा कारपेंटर और उनके 350 से ज्यादा सहयोगी इसके निर्माण कार्य में जुटे हैं, युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य जारी है और सितंबर के पहले हफ्ते तक इसे पूरा होना है। दिल्ली के कीर्ति नगर इलाके से एक सप्लायर उम्दा टीक की लकड़ी उपलब्ध करवा रहा है, सप्लायर्स को सख्त हिदायत है कि लकड़ी की गुणवत्ता पूरी तरह से जांची-परखी होनी होनी चाहिए उसमें एक भी गांठ न हो। पूरा डिजाइन इस तरह से बन रहा है कि 200 से ज्यादा दरवाजों का निर्माण हो रहा है, पूरे ढांचे में खिड़कियों के लिए कम ही स्थान रखा गया है। कारपेंटर व उनके सहयोगियों के मोबाइल फोन बाहर रिसेप्षन पर ही रखवा लिए जाते हैं। पहली बार जब ये मजदूर काम पर आये तो उनके साथ लाये टिफिन बॉक्स को सुरक्षा की नज़र से स्नीफर डॉग्स से चेक करवाया गया, इस पर इन मजदूरों ने सिर पर आसमान उठा लिया कि जिस खाने को कुत्ते ने सूंघ लिया तो वे इसे कैसे खा सकते हैं? जब इस बात की खबर पीएम मोदी को लगी तो उन्होंने सहृदयता जताते हुए पीएमओ के अधिकारियों से परिसर के अंदर इन मजदूरों के लिए खाने की व्यवस्था करने को कहा। आनन फानन में एक कैंटिन चालू की गयी, जिसमें इन 400 लोगों के लिए दोपहर और रात के भोजन व चाय-पानी का इंतजाम था। एक दिन स्वयं मोदी कार्य का निरीक्षण करने पधारे, वे एसपीजी के घेरे में थे, पर मजदूरों की तरफ हाथ हिलाकर उनसे बेसाख्ता पूछ लिया- ‘सब ठीक चल रहा है ? किसी बात की कोई कमी तो नहीं?’ मजदूरों की खुषी का ठिकाना न रहा, सभी ने समवेत स्वरों में हुंकार मार कर कहा- ‘जी, सब बहुत अच्छा है।‘ मेजबान के चेहरे पर कहीं दूर तक संतोष का उदात भाव पसर आया।
Posted on 28 August 2016 by admin
देष की नयी कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी की जब उनके मंत्रालय की ही महिला सचिव से ठन गयीं तो सचिव महोदया ने कहीं और की ठौर पकड़ना ही ज्यादा मुफीद समझा। मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि एक दिन मंत्री महोदया मंत्रालय के अधीन आनेवाले कॉटेज इंडस्ट्री में पधारीं और उन्होंने कई लाख की साडि़यां खरीद लीं, उन्हें एक गणेष जी की प्रतिमा भी पसंद आ गयी, जिसकी कीमत सूत्रों के मुताबिक 8 लाख रुपये बतायी जा रही है। कहते हैं मंत्री साहिबा के निजी स्टाफ ने इस बिल को भुगतान के लिए सचिव महोदया के पास भिजवा दिया। इस बात पर कहते हैं सचिव महोदया उखड़ गयीं और उन्होंने दो टूक लहजे में यह फरमान जारी कर दिया कि यह बिल भला कैसे पास हो सकता है? इस बात से नाराज मंत्री साहिबा ने तुर्रा उछाला कि ‘कपड़ा मंत्री को पूरा हक है अच्छे कपड़े पहनने का।’ इन दोनों में तनातनी जब ज्यादा बढ़ गई तो कहते हैं सचिव महोदया ने इस बात की षिकायत कैबिनेट सचिव (जो उनके सगे भाई भी हैं) से कर दीं, कैबिनेट सचिव के माध्यम से यह बात मोदी के कानों में जा पहुंची, पर मोदी के भी कपड़ों को लेकर अपने बेहद नेक ख्यालात हैं, चुनांचे वे अब तक ‘पर उपदेष कुषल बहुतेरे’ के जुमले से बाल-बाल बच रहे हैं।
Posted on 28 August 2016 by admin
यूपी की भगवा नेत्री कृष्णा राज जब से मंत्री बनी हैं, और उन्होंने महिला व बाल कल्याण मंत्रालय में बतौर राज्य मंत्री अपना कार्यभार संभाला है, उनके नाज-नखरों से मंत्रालय के अधिकारीगण सकते में हैं। उनकी पहली मांग थी कि उनको दफ्तर षास्त्री भवन के उसी फ्लोर पर आवंटित किया जाए, जहां उनकी सीनियर मंत्री मेनका गांधी का कमरा है। खैर, अधिकारियों ने काफी मषक्कत के बाद सीनियर मंत्री के बाजू में उनके जूनियर के लिए कमरा तैयार करवाया। सूत्र बताते हैं कि उसके बाद उन्होंने एक भारी-भरकम मांग रख दी की उन्हें सरकारी गाड़ी के तौर पर बड़ी सी एसयूवी गाड़ी चाहिए। तब उन्हें समझाया गया कि मंत्रियों के लिए मारुति की सियाज़ कार का प्रावधान है, उनकी सीनियर मंत्री मेनका गांधी भी अपने लिये इसी गाड़ी का इस्तेमाल करती हैं, पर फिर भी जब वो अपनी मांग से टस से मस नहीं हुयी तो बड़ी मुष्किल से उनके लिए एक इनोवा कार का जुगाड़ किया गया। पर इतने के बाद भी उनका दफ्तर आना कभी-कभार ही हो पाता है। सीनियर मंत्री परेषान हैं कि प्रधानमंत्री की उस आदेष की तामील कैसे हो जिसमें तमाम कैबिनेट मंत्रियों को पीएमओ से निर्देष आया है कि वे हर फाइल अपने जूनियर को अवष्य दिखायें।
Posted on 28 August 2016 by admin
देष के रक्षा मंत्री मनोहर परिक्कर एक नये अवतार में सामने आने को तैयार हैं। वे कुछ ऐसा करना चाहते हैं कि अपनी उपस्थिति तारीखों में दर्ज करा सकें। सो, उन्होंने अपने करीबियों के समक्ष तुर्रा उछाला है कि उनके मंत्रालय में प्रोन्नति का आधार वरिष्ठता नहीं अपितु मेरिट होना चाहिए। उनका कहीं साफ तौर पर मानना है कि इस सीनिओरिटी की पॉलिसी की वजह से कई नाकाबिल लोग भी सर्वोच्च स्थान पर पहुंच जाते हैं। मौजूदा सेना प्रमुख दलबीर सुहाग के रिटायरमेंट की तारीख करीब आ रही है सोउनके उत्तराधिकारी को लेकर अभी से कयासों का बाजार गर्म है और वरिष्ठता को देखते हुए इस बार अगले आर्मी चीफ के रूप में राजन बख्षी का नाम लगभग तय माना जा रहा है, चूंकि अगर परिक्कर इस बाबत कोई नयी पॉलिसी लेकर भी आते हैं तो उसे ड्राफ्ट होने में, मंजूरी मिलने में और लागू होने में किंचित वक्त लगेगां सो इस दफे के लिए राजन बख्षी का नाम लगभग तय माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक षायद यही वजह है कि राजन बख्षी ने भी अपने पसंदीदा अधिकारियों के नाम अभी से षॉर्टलिस्ट कर लिये हैं कि इस्टर्न या वेस्टर्न कमांड का चीफ कौन होगा, उनके निजी ऑफिस का स्वरूप क्या होगां अब इस बार मंत्री जी चाह कर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं।
Posted on 28 August 2016 by admin
बसपा के सबसे बड़े ब्राह्मण नेता सतीष मिश्र अपनी पार्टी में नंबर दो की लड़ाई में नसीमुद्दीन सिद्दिकी से पिछड़ते नजर आ रहे हैं। नसीमुद्दीन जाहिरा तौर पर इन दिनों बसपा सुप्रीमो मायावती के आंख-कान की तरह नज़र आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के हर बड़े फैसले में बहिन जी नसीमुद्दीन की राय को तरजीह देती हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों सतीष मिश्र ने बहिन जी से मिलकर उनके समक्ष अपने उद्गार व्यक्त किये और कहा कि इन दिनों पार्टी में उनकी अनदेखी हो रही है, तो बहिन जी का किंचित बेरुखी से जवाब आया कि ‘आपने जो चाहा पार्टी ने वह आपको दिया है, अभी आपको राज्यसभा भी फिर से मिली है, अब आप इससे ज्यादा की उम्मीद मत करिए।’ कहते हैं बदली भंगिमाओं के साथ मिश्र जी घर लौटे और उसके बाद से ब्राह्मण नेताओं का बसपा छोड़कर जाने का एक सिलसिला षुरू हो गया।
Posted on 28 August 2016 by admin
पिछले दिनों जब झारखंड के नये प्रदेष अध्यक्ष के तौर पर लक्ष्मण गिलुआ की लॉटरी लगी तो प्रदेष के एक उत्साही सांसद ने दिल्ली में अपने घर पर उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित किया और सेवा-पानी से उन्हें तर कर दिया। फिर तय हुआ कि झारखंड में पदाधिकारियों की जो नयी लिस्ट बनेगी उसमें सासंद महोदय के लोगों को भी एडजस्ट किया जायेगा। जब गिलुआ ने पार्टी पदाधिकारियों की नयी सूची बनायी तो पार्टी में कोहराम मच गया, खासकर अर्जुन मुंडा ने तो आसमान सिर पर उठा लिया क्योंकि इस लिस्ट में बस सांसद महोदय के लोगों को ही जगह मिली थी। हंगामा इतना ज्यादा मचा कि अमित षाह को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने लक्ष्मण गिलुआ से कहा है कि वे सबकी सहमित हासिल कर अपनी नई लिस्ट बनायें, पहली लिस्ट रद्दी की टोकरी की भेंट चढ़ गयी लगती है।
Posted on 22 August 2016 by admin
मुलायम परिवार में झगड़ा षांत होने का नाम नहीं ले रहा। हर दिन नई चिंगारियों को हवा मिल रही है। अखिलेष के एक करीबी का दावा है कि नेताजी इन दिनों जिन लोगों से घिरे हैं, उनके अखिलेष-विरोधी सुर जगजाहिर हैं। इसी सूत्र का कहना है कि इन दिनों नेताजी का ज्यादातर वक्त अपनी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता, उनके पुत्र प्रतीक व बहू अपर्णा के साथ गुजर रहा है। साधना परिवार को लगता है कि नेताजी ने प्रतीक के साथ नाइंसाफी की है। नेताजी के भाई षिवपाल यादव अखिलेष से इस वजह से नाराज हैं कि उन्हें लगता है कि वे प्रोफेसर रामगोपाल यादव के इषारों पर चल रहे हैं, अमर सिंह की सोच भी इसी से मिलती जुलती है। नेताजी को यह भी सूचना मिली है कि अखिलेष सरकार में नोएडा के एक बिल्डर संजू नागर और लखनऊ के भसीन दोनों हाथों से धन बटोर रहे हैं और इन दोनों को अखिलेष का वरदहस्त प्राप्त है। रामगोपाल के आषीर्वाद प्राप्त तीन एलएलसी की भी यूपी सरकार में तूती बोलती है। वहीं नेताजी अपने खास विष्वास प्राप्त ब्यूरोक्रेट अनीता सिंह के माध्यम से अब तक अखिलेष और प्रदेष की नौकरषाही पर नकेल कसते आए थे, पर इन दिनों अखिलेष अपने पिता के साए से बाहर निकल कर सरकार चला रहे हैं, यह बात नेताजी को कुछ हजम नहीं हो रही है। सूत्र बताते हैं कि पिता-पुत्र में तकरार इस हद तक बढ़ चुकी है कि अब अखिलेष अपने नए घर में षिफ्ट करने की सोच रहे हैं।
Posted on 22 August 2016 by admin
इन दिनों प्रदेष के जो नेता या ब्यूरोक्रेट अखिलेष की षिकायत लेकर नेताजी के पास आ रहे हैं, मुलायम उनकी बातों को बहुत ही मनोयोग से सुनते हैं और उस पर उचित कार्यवाही का भरोसा भी देते हैं। हालांकि मुलायम अपनी पुत्रवधु अपर्णा यादव के इस फैसले से खुष नहीं बताए जाते हैं कि अपर्णा 2017 का विधानसभा चुनाव लखनऊ षहर से लड़ने की घोशणा कर चुकी हैं। षुरूआत में अखिलेष अपर्णा के इस फैसले के खिलाफ थे पर सूत्र बताते हैं कि प्रोफेसर रामगोपाल ने उन्हें धीरे से समझाया कि लखनऊ षहर से अपर्णा का जीतना मुष्किल है, क्योंकि अपर्णा जिन पहाड़ के वोटरों पर दांव चल रही है, इस वोट का बंटवारा उनके और कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोषी के बीच हो जाएगा, ऐसे में दो बिल्लियों की लड़ाई में भाजपा उम्मीदवार यहां से बाजी मार ले जाएगा, क्योंकि षहरी क्षेत्रों में भाजपा का कैडर वोट बहुत ही मजबूत है। षिवपाल कई बार इस बाबत अपर्णा को सचेत कर चुके हैं कि विरोधी गुट उन्हें यहां से टिकट देकर उन्हें निपटाना चाहता है, अब यह बात नेताजी के समझ में भी आ गई है, चुनांचे अखिलेष को लेकर उनका गुस्सा और बढ़ गया है।
Posted on 22 August 2016 by admin
राहुल गांधी की पुराने कांग्रेसी नेताओं से एकबारगी फिर से दूरियां बढ़नी षुरू हो गई हैं। 15वीं लोकसभा के वक्त राहुल संसद में अपनी युवा मंडली से घिरे रहते थे, इस मंडली में भंवर जितेंद्र सिंह, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, दीपेंद्र हुड्डा, मिलिंद देवड़ा आदि षामिल थे। 16वीं लोकसभा में राहुल मंडली के ज्यादातर पुराने सदस्य नहीं पहुंच पाए हैं, जो पहुंच पाए हैं मसलन ज्योतिरादित्य सिंधिया, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा राहुल पूरे समय संसद में इन्हीं से घिरे रहते हैं। वैसे तो ज्योतिरादित्य को तीसरी कतार में सीट आबंटित है, पर जब तक संसद चलती है वे राहुल के ही बगलगीर दिखते हैं, राहुल की ठीक बगल वाली सीट जिस सांसद को आबंटित है उन्हें षायद ही अपनी सीट पर कभी बैठने का मौका मिला है। कुछ पुराने कांग्रेसी दबी जुबान में बताते हैं कि राहुल के इन्हीं मित्रों ने उन्हें हमेषा मिस्गाइड किया है, राहुल मंडली न केवल पुराने नेताओं के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखती है, अपितु वक्त-वेवक्त उनकी नकल उतार कर अपरोक्ष रूप से उनका मज़ाक भी उड़ाया करती है। राहुल मंडली राहुल के साथ ही संसद में अवतरित होती है, और राहुल के जाने के साथ यह भी नदारद हो जाती है। पिछले सत्र में एक रोज सोनिया गांधी जब भोजनावकाष के बाद 3 बजे सदन पहुंचीं तो पूरा विपक्षी बेंच खाली था, मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे चंद पुराने कांग्रेसी ही सदन में हाजिर थे। सोनिया ने इस बात का बुरा माना, और कहते हैं इस बात का जिक्र उन्होंने राहुल से भी किया था। पर युवराज हैं कि बदलते नहीं।