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….और अंत में

Posted on 19 March 2017 by admin

भाजपाध्यक्ष अमित शाह मणिपुर के अपने सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में नहीं पहुंच पाए, वजह थी कि उन्हें और उनके साथियों को मणिपुर ले जा रहे उनके चार्टड विमान में आगरा पहुंचते –पहुंचते तकनीकी खराबी आ गई, इस वजह से विमान को पुनः दिल्ली वापस लाना पड़ा। उस विमान में अध्यक्ष जी के साथ वेंकैया नायडू और भाजपा के कुछ अन्य सीनियर नेता भी बैठे थे, जैसे ही विमान में खराबी आनी शुरू हुई विमान हिचकोले खाने लगा और वेंकैया के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी, वेंकैया ने शाह से कहा कि यह कोई नवीं बार है जब उनको लेकर उड़ रहे जहाज में खराबी आ गई हो। इस पर विमान में बैठे एक नेता ने चुटकी ली फिर तो आप के साथ हवाई यात्रा सेफ नहीं है। अध्यक्ष जी ने झट से मामला संभाला और कहा- उनकी कुंडली में हवाई यात्रा सेफ है, सो जो उनके साथ यात्रा करेगा, उसका बाल भी बांका नहीं होगा। सब की सांस में सांस आई।

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षत्रु से नाराज़ उनके अपने

Posted on 11 March 2017 by admin

एक समय हुआ करता था जब षाॅटगन यानी शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा के सबसे बड़े स्टार प्रचारकों की सूची में सिरमौर हुआ करते थे, मोदी राज में न सिर्फ भगवा फिजाएं बदल गई हैं, अपितु षाॅटगन के बड़बोलेपन की वजह से भाजपा का मौजूदा षीर्श नेतृत्व उनसे खार खाए बैठा है। यूपी में जब पिछली चुनावी सरगर्मियां उफान पर थीं तो भाजपा से सहानुभूति रखने वाले एक पुराने पत्रकार ने भाजपा के एक षीर्श नेता से पूछ ही लिया कि वे सिन्हा को प्रचार कार्य में क्यों नहीं लगाते? कहते हैं इस पर उस षीर्श नेता ने किंचित व्यंग्यभाव से जवाब दिया कि ’वे हमारे सबसे महंगे स्टार प्रचारक हैं, इसीलिए पार्टी उन्हें स्टार प्रचारकों की सूची में रखना पसंद नहीं करती। क्योंकि जनाब को कहीं भेजो तो सुबह के ग्यारह बजे से पहले तो सो कर नहीं उठते, एक या दो बजे तक तैयार होते हैं, रैली या मीटिंग में जाने के लिए हेलीकाप्टर या जहाज की फरमाइष होती है। एक दिन में दो से ज्यादा मीटिंग नहीं हो पातीं। उस पर भी जहां रूकते हैं, फाइव स्टार से कम में रूकते नहीं। इतनी डिमांड तो हमारी पार्टी के दोनों षीर्श नेताओं को भी नहीं होती है।

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राहुल के मोहन

Posted on 11 March 2017 by admin

राहुल गांधी के सबसे खास विष्वासपात्रों में षुमार होने वाले मोहन प्रकाष को राहुल हर दफे किसी न किसी राज्य में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी दे देते हैं। जबकि वे स्वयं एक दफे जनता लहर में बमुष्किल विधायकी जीत पाए हैं। उनके आलोचक लगातार राहुल से ये कहने में संकोच नहीं कर रहे कि पहले तो उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेसी उम्मीदों का कबाड़ा किया, फिर 14 के बाद उन्हें जिन राज्यों में भेजा गया, वहां कांग्रेसी उम्मीदों में पलीता लग गया। उन्हें महासचिव बनाकर महाराश्ट्र का प्रभार दिया गया, तो बीएमसी चुनाव में कांग्रेस की भद्द पिट गई। अभी महाराश्ट्र में 6 निगमों के चुनाव और होने हैं, उनसे नाराज कांग्रेस राहुल से उन्हें बाहर का दरवाजा दिखाने की मांग कर रहे हैं, वहीं इन बातों से बेखबर मोहन प्रकाष इन दिनों अपनी चमचमाती आॅडी का दरवाजा खोलते नजर आ रहे हैं।

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दम लगा के माकन

Posted on 11 March 2017 by admin

दिल्ली का एमसीडी चुनाव कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय माकन के लिए जीवन-मरण का प्रष्न बन गया है। उन्होंने पूरी ताकत झोंक रखी है कि किसी भी प्रकार इन निकाय चुनावों में कांग्रेस की वापसी हो सके। राहुल गांधी ने अबतलक उन पर आंख मूंद कर भरोसा किया हुआ है लिहाजा माकन अपने नेता के भरोसे को तोड़ना नहीं चाहते। सो, वे बेहद फंूक कर अपना हर दांव चल रहे हैं। दिल्ली निगम चुनावों के लिए कांग्रेसी उम्मीदवारों के चयन के लिए माकन ने बड़े से बड़े नेताओं की पैरवी अनसुनी कर दी। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने एक नहीं, दो नहीं पूरे तीन सर्वेक्षण एजेंसियों की सेवाएं ली है, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और उसके चयन को मापने के लिए इन एजेंसियों द्वारा समय-समय पर कराए गए विभिन्न सर्वेक्षणों के आधार पर संभावितों को अंक दिए गए और उनकी रेटिंग कर ये नाम रेटिंग के क्रम में पार्टी हाईकमान को अंतिम और निर्णायक मुहर लगाने के लिए भेजे गए। अजय माकन किसी भी कीमत पर इस दफे फेल नहीं होना चाहते, पर दिल्ली की जनता है, उसके मूड और मिजाज को अब तक कौन समझ पाया है।

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…और अंत में

Posted on 11 March 2017 by admin

अमर सिंह इन दिनों भाजपा में आने के लिए बेताब दिख रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पहले वे उमा भारती से इस बाबत मिले पर उमा उनकी फरियाद मोदी-षाह तक पहुंचाने में नाकाम रहीं। फिर उन्होंने योगी आदित्यनाथ का रुख किया, योगी भी उनके लिए कोई साधक योग नहीं कर पाए तो फिर अमर सिंह ने संघ के प्रमुख नेता कृश्ण गोपाल से मिलने की गुहार लगाई फिर भी बात नहीं बनी तो सूत्रों के मुताबिक उन्होंने राजनाथ सिंह को फोन किया। पर कहते हैं राजनाथ ने फोन उठाना भी नागवार नहीं समझा। (एनटीआई-हवेेपचहनतनण्पद)

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शिवपाल का सियासी तांडव

Posted on 06 March 2017 by admin

मुलायम के दुलारे भाई और रिश्ते में अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव कहते हैं यादव बहुल इलाकों में अखिलेश और उनकी सपा की बैंड बजा दी है। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश को उनके राज्य खुफिया वालों ने खबर दी है कि कम से कम दो दर्जन यादव बहुल सीटों पर शिवपाल और उनके लोगों ने सीट दर सीट के हिसाब से भाजपा व बसपा उम्मीदवारों की मदद की है। यानी इनमें से जिस दल का उम्मीदवार सपा उम्मीदवार के खिलाफ लड़ाई में नजर आया शिवपाल गैंग ने हर तरह से कथित तौर पर उनकी मदद की। कहते हैं कि चाचा-भतीजा में यह जंग उस रोज छिड़ गई थी जब चाचा ने अपने भतीजे से हार मान ली और इस बात पर सहमत हो गए कि अखिलेश ही पार्टी के नेता और चुनाव में चेहरा रहेंगे। तो वे जाकर अखिलेश से मिले और उनसे मैनपुरी की करहल सीट से अपने पुत्र आदित्य के लिए और जसवंत नगर सीट से अपने लिए टिकट मांगा। अखिलेश ने उनसे दो टूक कहा कि ’चाचा, एक परिवार से किसी एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा या तो आप लड़ो या फिर आदित्य लड़े, मैं तो चाहूंगा कि आदित्य लड़े।’ इस पर शिवपाल भड़क गए, बोले-’क्या इसी परिवार से पिछली बार 9 लोगों ने चुनाव नहीं लड़ा? फिर नियम मेरे ही परिवार के लिए क्यों?’ तमतमाए शिवपाल फिर वहां से बाहर निकल आए और फिर अपने खास समर्थकों की बैठक बुला कर उनसे कथित तौर पर आह्वान किया-’वे संकल्प लें कि इस बार अखिलेश को सीएम नहीं बनने देना है‘ और आज भी शिवपाल अपने संकल्प पर अडिग हैं।

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…और अंत में

Posted on 06 March 2017 by admin

भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अनुप्रिया पटेल से नाराज़ है, सूत्र बताते हैं कि स्वयं अमित शाह को ऐसा लगता है कि कुर्मी वोटरों का समर्थन अनुप्रिया से कहीं ज्यादा उनकी मां कृष्णा पटेल को मिल रहा है। अनुप्रिया के पति पर भी कथित तौर पर कई उम्मीदवारों ने टिकट के एवज में पैसे मांगने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, सूत्र बताते हैं कि स्वयं षाह ने इस बाबत अनुप्रिया से जवाब तलब किया है।

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अपने सीएम भाई से नाराज़ प्रतीक

Posted on 06 March 2017 by admin

लखनऊ में जिस रोज मतदान होना था उससे ठीक दो रोज पूर्व, मुलायम के दूसरे बेटे प्रतीक यादव ने अपने मुख्यमंत्री भाई अखिलेश को सुबह-सुबह फोन किया और उनसे मिलने का समय मांगा। सूत्र बताते हैं कि अखिलेश ने यह कहते हुए प्रतीक को टरका दिया कि वे अभी एक जरूरी मीटिंग में हैं, शाम को फोन कर लेना। कहते हैं इसके बाद प्रतीक ने दोपहर को एक-दो दफे अपने भाई को फोन लगाया पर भाई ने फोन नहीं उठाया। तो शाम को वे सीधे अखिलेश के घर जा धमके, उस वक्त सचमुच एक जरूरी मीटिंग चल रही थी, प्रतीक ने बिना लाग लपेट सीधे शब्दों में कहा-’मुख्यमंत्री जी आपके पास क्या अपने भाई के लिए पांच मिनट का समय हैं?’ अखिलेश ने प्रतीक को मीटिंग में अपने साथ बिठा लिया। बैठक खत्म हुई तो प्रतीक ने अखिलेश को 40 लोगों की एक लिस्ट सौंपी जो सपा के छोटे-बड़े नेता थे, प्रतीक ने कहा-’ये लोग लखनऊ कैंट में अपर्णा (प्रतीक की पत्नी) को हराने में लगे हैं, सो अच्छा होगा आप इन्हें एक बार बुला कर बोल दें।’ अखिलेश ने कहा कि ये सभासद स्तर के नेता हैं, भला मैं इनसे क्या बात करूं? तो प्रतीक ने कहा कि फिर आपका ऑफिस ही इनसे बात कर ले।‘ अखिलेश ने हामी भरी, जब प्रतीक जाने लगे तो अखिलेश ने उनसे किंचित तल्खी से कहा- ’भाई, तुम्हें यही समय मिला था लंबोरजिनी (एक महंगी कार) खरीदने का, देखो, मेरी कितनी किरकिरी हो रही है।’ प्रतीक अपमान का घूंट पीकर रह गए, कुछ नहीं बोले, चुपचाप चले गए। इसके बाद ना तो अखिलेश और ना ही उनके दफ्तर से इन 40 में से किसी नेता को फोन गया, इन सबने संदेश पढ़ लिया कि अर्पणा को हराना है। रात में प्रतीक मुलायम के पास पहुंचे और उन्हें यह सारा माजरा सुनाया, मुलायम ने उसी वक्त अखिलेश को फोन लगाया पर अखिलेश ने फोन नहीं उठाया, अखिलेश के मन में क्या है यह अब प्रतीक समझ चुके थे।

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क्रूड ऑयल की खरीददारी में समझदारी

Posted on 06 March 2017 by admin

सबको मालूम है कि पहले कि मान्य परंपराओं में क्रूड ऑयल की खरीददारी को अंजाम देने के लिए फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय लेता था और वह भी वित्त मंत्रालय को संज्ञान में रख कर कि कितना क्रूड ऑयल खरीदना है और कब खरीदना है? पेट्रोलियम मंत्रालय के डिमांड पर वित्त मंत्रालय का काम इसके लिए डॉलर जुटाने का होता था। अब नए और बदले घटनाक्रमों में इस पुरानी आदतों को भी रिटायर कर दिया गया है, विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अब इस खरीददारी की कमान भी पीएमओ के पास आ गई है। सूत्र बताते हैं कि अब पीएमओ ही तय कर रहा है कि क्रूड ऑयल की कितनी खरीद होनी है और कब होनी है। क्या यह महज इत्तफाक है कि क्रूड ऑयल की सरकारी खरीद के बाद यूं अचानक रुपये कुलांचे भरता है और डॉलर के रेट कम हो जाते हैं, उसके बाद तेल क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी को इशारा मिल जाता है कि सस्ते दामों पर क्रूड ऑयल खरीदने का यह सबसे नायाब मौका है। और वह कंपनी यह मौका हाथ से नहीं जाने देती।

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खेत खाए गदहा, मार खाए जुलाहा

Posted on 26 February 2017 by admin

यूपी के एक प्रमुख समाचार पत्र के डिजिटल एडिशन के हिंदी संस्करण के संपादक को यूपी में एक्जिट पोल प्रकाशित करने और उसमें भाजपा को आगे दिखाने के लिए गिरफ्तारी का दंश झेलना पड़ा। जबकि इस एक्जिट पोल को इस प्रकाशन समूह के केवल अंग्रेजी वेबसाइट ने प्रमुखता से दिखाया था, पर अंग्रेजी वालों का बाल बांका नहीं हुआ। अब तक यह स्पश्ट नहीं हो पाया है कि इस एक्जिट पोल का संचालन किस कंपनी ने किया। अंग्रेजी वेबसाइट को इस बारे में जो मेल प्राप्त हुआ वह drsrdi@gmail.com की ओर से भेजा गया बताया जाता है। आरडीआई से दो कंपनियों की ओर इशारा जाता है, इसमें से एक कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंटरनेशनल है, जिसके एमडी राजीव गुप्ता नामक एक शख्स हैं, जिनका दावा है कि उनकी कंपनी कोई सर्वे का काम करती ही नहीं है, यह तो मानव संसाधन को प्रशिक्षित करने का काम करती है। आरडीआई से दूसरी कंपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनीशिएटिव है, जिसे अमित शाह के करीबी माने जाने वाले देवेंद्र कुमार चलाते हैं, पर वे भी ऐसे किसी एक्जिट पोल के बारे में अनभिज्ञता जाहिर करते हैं। कहते हैं इस एक्जिट पोल के प्रकाश में आने के बाद चुनाव आयोग ने कोई 15 स्थानों पर एफआईआर दर्ज करवाई और गाजियाबाद के एक थाना की पहल पर रातों रात उस हिंदी संपादक की गिरफ्तारी हो गई।

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