Posted on 27 September 2014 by admin
जब से भाजपा और मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में विजय पताका फहराई है, संघ के एक प्रमुख नेता दत्तात्रेय होसबोले यूरोपीय देशों में संघ की विचारधारा को परवान चढ़ाने में जुटे हैं, इस कार्य में उन्होंने लंदन में रह रहे राम वैद्य का पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है, सनद रहे कि राम वैद्य लंदन में रहकर संघ की शाखाएं लगाते हैं, वे संघ के एक प्रमुख नेता एमजी वैद्य के पुत्र हैं और मनमोहन वैद्य के भाई हैं। पेरिस के लौरवे म्यूजियम के आमंत्रण पर होसबोले और वैद्य पेरिस पहुंचे थे, वे भारत-फ्रांस के सांस्कृतिक आदन-प्रदान के एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। इसके बाद ये दोनों संघ नेता पेरिस स्थित रामकृष्ण मिशन के आश्रम में पहुंचे और स्वामी विवेकानंद की एकर् मूत्ति का अनावरण किया, फिर वे वहां से पेरिस स्थित ब्रह्म कुमारी आश्रम पहुंचे। इन संघ नेताओं के साथ लंदन में रहने वाले एक अप्रवासी भारतीय बिजनेस मैन अंशुमान मिश्र को भी देखा गया। यूरोप के कम से कम छह देशों में यानी फ्रांस, डेनमार्क, नार्वे, नीदरलैंड, इटली और फिनलैंड में संघ अपनी शाखाएं लगाता है।
Posted on 27 September 2014 by admin
हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपने पार्टी हाईकमान से खासे खफा हैं, उन्हें अब शिद्दत से लगने लगा है कि सिरसा से लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने में हुड्डा एंड कंपनी की कहीं न कहीं एक महती भूमिका रही थी। तंवर ने चार कांग्रेसी उम्मीदवारों को टिकट देने का विरोध किया था, क्योंकि उन्हें शक था कि ये चारों कांग्रेसी नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। टिकट बंटवारे को लेकर जब चाको के घर मीटिंग हुई तो उस बैठक में ही तंवर और हुड्डा के बीच कहा सुनी हो गई, बल्लभगढ़ की कांग्रेसी विधायक शारदा राठौर ने भी तंवर को आड़े हाथों लिया। तंवर जिन 7 दागी नेताओं को टिकट देने का विरोध कर रहे थे, हुड्डा ने इन सभी नेताओं को पार्टी टिकट से उपकृत करवा दिया, तंवर अपनी बात लेकर कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी तक पहुंचे पर उनकी आवाज वहां भी नक्कार खाने में तूती साबित हुई, क्योंकि सोनिया परिवार पर हुड्डा जी के ढेरों अहसान हैं, शायद यही वजह है कि अब तंवर कांग्रेस छोड़ने का मन बना रहे हैं।
Posted on 27 September 2014 by admin
हरियाणा में खाप पंचायतों का सिक्का हमेशा से चलता रहा है और राजनैतिक पार्टियां भी खाप के फरमानों के आगे नतमस्तक होती रही हैं। बीते कुछ वर्षों से खाप के अस्तित्व पर उठते सवालों को देखते हुए अब कई खाप पंचायतों के नेता सीधे-सीधे राजनीति में आ गए हैं। गठवाला खाप के बलजीत मलिक, धनखड़ खाप के ओमप्रकाश धनखड़, जाट महासभा के ओमप्रकाश मान जैसे खापों के नेतागण भगवा रंग में रंग गए हैं, और बीजेपी ज्वॉइन कर ली है। खाप पंचायतों की महिला विंग की भी कुछ नेत्री, मसलन संतोष दहिया जो सर्व खाप महापंचायत की नेता है, इनेलोद के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रही हैं। सत्रोल खाप की सुदेश चौधरी ने भाजपा की ठौर पकड़ी है। इसके साथ-साथ कई अन्य खाप पंचायतों ने सीधे तौर पर ऐलान किया है कि जो भी सियासी दल उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करेगी, इनका वोट वैसे राजनीति दलों के लिए होगा। खाप नेताओं को राजनीति का यह चस्का ऐसे वक्त लगा है जब खाप की पहचान और इसकी पकड़ बनाए रखने में खासी मुश्किल पेश आ रही है।
Posted on 21 September 2014 by admin
एक ओर जहां प्रधानमंत्री अपनी अमरीका यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यूरोप के देशों में अपना जनाधार बढ़ाने में जुटा है। संघ के एक प्रमुख नेता दत्तात्रेय होसबोले इन दिनों लंदन में हैं, जहां संघ की सम्मिलित शाखाओं का आयोजन हो रहा है। अपने लंदन प्रवास के दौरान होसबोले लेखक और कंजरवेटिव पार्टी के पूर्व मुखिया जेफरी आर्चर से भी मिले, इसके अलावा कंजरवेटिव पार्टी के एक अन्य सांसद बॉब ब्लैकविल से भी उनकी लंबी मुलाकात हुई। सनद रहे कि ब्लैकविल पहले भी संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते रहे हैं। इसके बाद होसबोले यहां से स्काईट्रेन के मार्फत पेरिस के लिए रवाना होंगे, फिर उनका नीदरलैंड व इटली जाने का प्रोग्राम है, नीदरलैंड में वे सूरनामी मूल के लोगों की एक सभा को भी संबोधित करने वाले हैं। समझा जाता है कि फिर वे पोप से मिलने वेटिकन सिटी का रूख कर सकते हैं, इसके पूर्व संघ की ओर से मनमोहन वैध भी इटली और फ्रांस में संघ की शाखाएं लगा चुके थे। संघ वेटिकन मॉडल के तर्ज पर पश्चिमी देशों में अपना प्रचार-प्रसार चाहता है, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में संघ काफी सक्रिय रहा है। सनद रहे कि सन् 1896 में जब स्वामी विवेकानंद स्विट्जरलैंड गए तो उनका भाषण सुनने के लिए तब वहां काफी भीड़ जुटी थी। दत्तात्रेय ने विश्व कप फुटबॉल के दौरान एक आलेख लिखा था-‘वसुधैव कुटुम्बकम : और फुटबॉल’ यह आलेख किसी तरह पोप के पास पहुंच गया, वे भी फुटबॉल के उतने ही बड़े दिवाने हैं, सो उन्होंने वेटिकन स्थित भारतीय राजदूत को बुलाकर होसबोले से मिलने की इच्छा जाहिर की। चूंकि भारतीय राजदूत लोकेश और होसबोले दोनों ही कर्नाटक से हैं, सो वे एक-दूसरे को पहले से जानते रहे हैं। समझा जाता है कि पोप से मिल कर होसबोले उनके समक्ष भारत में बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण का मुद्दा उठा सकते हैं। वैसे भी संघ की ओर से अपने प्रचारकों को विदेश भेजने की परंपरा काफी पुरानी है, इससे पूर्व सौमित्र गोखले, राम वैध और राम माधव ने भी इन परंपराओं का लंबे समय तक निर्वहन किया है।
Posted on 21 September 2014 by admin
नरेंद्र मोदी अपने पांच दिवसीय अमरीका यात्रा पर एक राष्ट्राध्यक्ष से कहीं ज्यादा एक कंपनी के सीईओ के अवतार में नज़र आ सकते हैं। 26-30 सितंबर के मध्य हो रही अपनी यात्रा में मोदी अमरीका की पांच बड़ी कंपनियों के प्रमुख से मिल रहे हैं, जिनकी कंपनी का कारोबार 500 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। 29 सितंबर को व्हाईट हाउस में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा उनके सम्मान में एक डिनर देंगे, जहां कई द्विपक्षीय मुद्दों पर वार्ता होगी। 26 को मोदी यूएन जरनल असेंबली में बोलेंगे, 28 सितंबर को मेडिसन स्क्वेर गार्डेन्स में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे, इस काम को अंजाम देने में मोदी के खासमखास भरतलाल व पार्टी महासचिव राम माधव एक सप्ताह से जुटे हैं। 29 सितंबर को ही मोदी बिल और हिलेरी क्लिंटन और साउथ कैरोलिना की गवर्नर निकी रंधावा हेले से मिल रहे हैं, इसके अलावा वे बोईंग के चैयरमैन जेम्समेकनरे, जीई के चैयरमैन जेफरी इमेल्ट, आईबीएम के वर्जिनिया रोमेटी, ब्लैक रॉक के चैयरमैन लॉरेंस फिंक और गोल्डमैन सेच के चैयरमैन लॉयड फिंक से मिल रहे हैं। इसके अलावा मास्टर कार्ड, पेप्सी, एबॉट फार्मा आदि के उच्च अधिकारियों से भी मुलाकात कर रहे हैं, सितंबर 30 को अमरीकी उप राष्ट्रपति जो बिडेन और सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जॉन केरी भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान में एक लंच दे रहे हैं।
Posted on 21 September 2014 by admin
अमरीका में मोदी के स्वागत को लेकर वहां के भारतीय समुदाय में खासा उत्साह देखा जा सकता है, अकेले अमरीका में 60 हजार से ज्यादा भारतीय डॉक्टर कार्यरत हैं। भारतीय डॉक्टरों को मोदी के साथ जोड़ने के लिए जो कमेटी बनी है, उसमें आपी के प्रेसिडेंट डा. जहांगी दार, डा. भरत बिराई और न्यूयॉर्क के अल्बर्ट आईंसटीन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत यंग डॉक्टर ऋषभ मिश्र शामिल हैं। इस कमेटी ने पहले भारतीय डॉक्टरों से 1.5 मिलियन डॉलर चंदा जुटाने का लक्ष्य रखा था, पर कुछ दिनों में ही यह आंकड़ा 1.6 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, तो चंदा उगाही का अभियान बंद करना पड़ा। पहले न्यूयॉर्क के ताज पियरे होटल में मोदी के संग 783 भारतवंशियों का डिनर रखा गया था, पर बाद में यह संख्या जब काफी बढ़ गई तो न्यूयॉर्क पैलेस होटल में एक और डिनर रखा गया है। सनद रहे कि मोदी अपने कारवां के साथ इसी न्यूयॉर्क पैलेस होटल में रूकने वाले हैं, न्यूयॉर्क के मेडिसन स्वॉयर टाइम्स में होने वाली मोदी की सभा में भारतीय समुदाय के लोगों के शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क मेट्रो ने न्यूजर्सी व कनेक्टीकट से विशेष ट्रेनें भी चलवाई है। यानी मोदी की अमरीका यात्रा को भव्यता देने के लिए पूरा भारतीय समुदाय एकजुट है।
Posted on 21 September 2014 by admin
सपा के इस बड़े नेता का नाम बताने की आवश्यकता नहीं, आप खुद जान जाएंगे, गोया कि यह मुलायम के बेहद करीबी रिश्तेदार हैं, अखिलेश सरकार में एक प्रमुख काबीना मंत्री हैं और अपने बेवाक बोलों के लिए हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। सूत्र बताते हैं कि मंत्री जी ने अपने बेहद भरोसेमंद और मुंहलगे ड्राईवर बिहारी यादव के नाम से यूपी में ‘बिहारी कंस्ट्रक्शन’ कंपनी बना ली है, आधिकारिक रूप से इस कंपनी के मालिक के तौर पर बिहारी यादव का नाम दर्ज बताया जाता है, सबसे खास बात तो यह है कि यूपी सरकार के ज्यादातर रोड निर्माण का कार्य इसी कंपनी को मिल रहा है। कंपनी बाद में छोटे-बड़े ठेकेदारों में यह काम बांट देती है, और यूपी में किसी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की हिम्मत नहीं जो वह बिहारी कंस्ट्रक्शन का कोई बिल रोक दे या फिर उस पर सवाल खड़े कर सकें यानी जब सैंया भए कोतवाल तो फिर डर काहे का।
Posted on 21 September 2014 by admin
2002 के गुजरात दंगों पर नरेंद्र मोदी को लगातार सवालों के कटघरे में खड़ा करने वाले इस पति-पत्नी द्वय ने अंग्रेजी के टीवी पत्रकारिता में एक नई धारा शुरू करने का प्रयास किया, एक खास सियासी दल को लेकर इनका अनुराग कभी छुपा नहीं, और न ही अपने टॉक-शो या टीवी एंकरिंग में इन दोनों ने कांग्रेस से अपनी निकटता से कभी पल्ला झाड़ा। सो, मोदी समर्थक माने जाने वाले देश के सबसे बड़े उद्योगपति ने जब इस चैनल समूह को अधिग्रहित किया, तो कांग्रेस राग अलापने वाले इस दंपत्ति की उस चैनल से छुट्टी हो गई। काफी दिनों तक बेराोजगारी का दंश झेलने के बाद पति को अभी हाल में ही एक तेज चैनल में जगह मिल गई है, रही बात पत्नी की, तो उन्होंने दिल्ली के एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार में बतौर एडिटर-एट-लार्ज का जिम्मा संभाल लिया है। सूत्र बताते हैं कि एक दिन पीएमओ से इस अंग्रेजी अखबार के मालिक को फोन गया और उन्हें इत्तला कर दी गई कि इस महिला पत्रकार को नौकरी देने में आपने जो जल्दबाजी दिखाई है उससे ‘बॉस’ खुश नहीं है। वहीं जब दिल्ली के एक अन्य बहु प्रसारित अखबार समूह की मालकिन पीएमओ के एक उच्च अधिकारी से मिलने पहुंची, तो उनसे कहा गया कि ‘कांग्रेसनीत यूपीए के शासनकाल में तो आप अपने अंग्रेजी व हिंदी अखबारों के संपादक दस जनपथ के कहने पर रखा करती थीं, अब वक्त आ गया है कि आप इस आदत से मुक्त हो जाइए।’ वहीं जब एक प्रमुख राजनैतिक चिंतक व स्तंभकार ने पीएम से मिलने का समय मांगा तो उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के पास भेज दिया गया और उनसे कहा गया कि ‘आपने मोदी के विरोध में कोई छह दर्जन से ज्यादा कॉलम लिखे हैं, जब इस व्यक्ति से आपका इतना ही विरोध है तो आप उनसे मिल कर क्या करेंगे?’ जाहिर है, दोस्त और दुश्मन की परख करने में और उन रिश्तों को निबाहने में मोदी कभी चूकते नहीं।
Posted on 21 September 2014 by admin
आखिर यूपी उप चुनाव में भाजपा का टेंट-तंबू क्यों उखड़ा? मोदी और अमित शाह की आत्म मुग्धता क्या तमाम सियासी परिधियां लांघ गईं? या पार्टी के अन्य छोटे-बड़े नेताओं और कार्र्यकत्ताआें ने इस जोड़ी की आत्म प्रवंचनाओं से तौबा कर ली? यूपी में खासा असर रखने वाले राजनाथ सिंह और वरुण गांधी जैसे भगवा नेता इस चुनाव में स्थितप्रज्ञ बने रहे, हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। सो, भाजपा के साथ आस्था रखने वाले मतदाताओं को घर से बाहर निकालने की हुंकार और हरकारे का सर्वदा अभाव था, आत्म उन्माद में डूबे चंद बड़े नेताओं को अहसास नहीं हो पाया कि जनता का मिजाज पल में तोला, पल में माशा हो सकता है, यही वजह है कि आने वाले दिनों में यूपी की भगवा सियासत में बड़ा ऊफान आ सकता है, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की विदाई हो सकती है, योगी आदित्यनाथ को ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है, और किसी फायर ब्रांड नेता की बतौर अध्यक्ष ताजपोशी हो सकती है, वरुण गांधी सरीखे पार्टी के कई रूठे नेताओं को मनाया जा सकता है, और यूपी में पार्टी संगठन को नए सिरे से खंगाला और मांजा जा सकता है।
Posted on 13 September 2014 by admin
महाराष्ट्र में एक तरह से भाजपा के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। भाजपा-शिवसेना के बड़े नेताओं ने मिल बैठकर तय किया है कि प्रदेश में दोनों ही घटक दल बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और जिस दल के ज्यादा विधायक चुनकर आएंगे, मुख्यमंत्री भी उसी दल से होगा। पर 1999 के बाद से लगातार हर चुनाव में चाहे वह विधानसभा का चुनाव हो या फिर लोकसभा का, यह बात तय सी हो गई है कि शिवसेना के मुकाबले भाजपा के टिकट पर जीतने वाले उम्मीदवारों का औसत कहीं बेहतर रहा है। यानी हर चुनाव में भाजपा का ‘स्ट्राइक रेट’ सेना के मुकाबले ज्यादा शानदार रहा है। चुनांचे अगर इस बार भी इस रिकार्ड की पुनरावृत्ति होती है तो भाजपा की झोली में सेना की तुलना में कहीं ज्यादा सीटें आ सकती है, वैसी सूरत में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में सबसे बड़ा दांव नितिन गडकरी का हो सकता है, महाराष्ट्र में वे फिलवक्त भाजपा के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार होते हैं, गडकरी की संभावनाओं में पलीता लगाने का काम प्रकाश जावड़ेकर कर सकते हैं, उनकी निगाहें कहीं पहले से महाराष्ट्र के सीएम की गद्दी पर टिकी है, और उन्हें अंदरखाने से मोदी और जेतली का पूरा समर्थन हासिल है। सो, फिलवक्त गडकरी के लिए महाराष्ट्र की राह इतनी आसान नहीं दिखती।