Posted on 07 December 2014 by admin
जब से कृष्ण गोपाल ने संघ की ओर से भाजपा की कमान संभाली है, संघ, भाजपा और मोदी सरकार के लिए उत्तर पूर्व और म्यांमार इसकी प्राथमिकताओं की सूची में शुमार हो गया है। इसकी एक खास वजह है कि पिछले एक दशक से नार्थ ईस्ट में कृष्ण गोपाल का काफी काम रहा है। वे नार्थ ईस्ट में संघ के प्रभारी भी रहे हैं। सो, पिछले 15 दिनों से कृष्ण गोपाल नार्थ ईस्ट में जमे रहे, सुरेश सोनी भी एक सप्ताह के लिए नार्थ ईस्ट गए, नार्थ ईस्ट में जमीनी स्तर पर संघ का काफी काम है। इसी के बैक ड्रॉप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संजीदगी के साथ बांग्लादेसी घुसपैठियों का मसला उठाया था, वहीं म्यांमार में भी कूटनीतिक तौर पर भारत ने तेजी से अपना असर बढ़ाया है, क्योंकि प्रकारांतर में नार्थ ईस्ट के कई आतंकी समूहों के लिए म्यांमार पनाहगार बन गया था, इसी को मद्देनजर रखते हुए ही संघ ने जमीनी तौर पर म्यांमार में काफी काम किया है।
Posted on 07 December 2014 by admin
राजद, जद(यू), जद(एस), इंडियन नेशनल लोकदल, समाजवादी जनता पार्टी (चंद्रशेखर) और सपा ने सर्व सम्मति से अपनी नई पार्टी के नेता के तौर पर भले ही मुलायम सिंह को चुना हो, पर मुलायम के कुछ पुराने लोहियावादी साथियों को डर है कि कहीं नई पार्टी की चाह में जमी-जमाई सपा का आधार न खिसक जाए। क्योंकि नई पार्टी को चुनाव आयोग की ओर से एक नया चुनाव चिन्ह आवंटित हो सकता है, जबकि सपा के चुनाव चिन्ह साईकिल से यूपी के गांव-शहर परिचित हैं, चुनांचे नई पार्टी के नए चुनाव चिन्ह को आनन-फानन में लोगों तक पहुंचाना किंचित इतना आसान नहीं होगा। पर नेताजी इस पार्टी को लेकर खासे उत्साहित है, पहले से पंक्चर नीतीश नेताजी की ऊफान लेती उम्मीदों पर खूब हवा भर रहे हैं, पर आने वाले दिल्ली चुनाव में इन उम्मीदों और मंसूबों से पर्दा उठ सकता है।
Posted on 07 December 2014 by admin
संघ के सह सरकार्यवाह और भाजपा के पूर्व प्रभारी सुरेश सोनी ‘इन्फ्लूयेंस ऑफ हिंदू कल्चर’ (हिंदू संस्कृति के प्रभाव) को लेकर एक किताब लिख रहे हैं, इसके अलावा वे प्राचीन वांड.मय को ई-बुक की शक्ल देने में भी जुटे हैं, वहीं एक प्रचारक के तौर पर उनके प्रवास का क्रम भी जारी है। पिछले सप्ताह सोनी हिंदू स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए 29 नवंबर से एक 1 दिसंबर तक बैंकाक में बने हुए थे, जहां उन्होंने रोमीनेंट पार्क में हर सुबह हिंदू स्वयंसेवक संघ की लगने वाली शाखा में हिस्सा लिया, फिर देव मंदिर बैंकाक में अपनी एक स्पीच दी। सोनी के सम्मान में बैंकाक के गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रमुख सुंदर सिंह मनचंदा ने एक डिनर भी दिया जिसमें थाईलैंड के कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति देखी गई।
Posted on 01 December 2014 by admin
सियासत का दस्तूर भी क्या निराला है, कल तक जो कांग्रेस देश के बड़े थैलीशाहों को अपने अंगुलियों के इशारों पर नचाती थी, आज उसका खााना खाली है। पार्टी को पैसे की भारी किल्लत है, और इस किल्लत की शुरूआत 2014 के आम चुनावों के वक्त से हो गई थी, जब वक्त की नब्ज को पढ़ते हुए देश के बड़े औद्योगिक घरानों ने कांग्रेस से मुंह फेरना शुरू कर दिया था, इसका नतीजा यह हुआ कि पार्टी बैंक के क़र्ज़ में डूबती चली गई। सूत्र बताते हैं कि आज कांग्रेस पार्टी के ऊपर अलग-अलग बैंकों के कुल 300 करोड़ रुपयों के ओवरड्राफ्ट हो गए हैं। पार्टी ने जिन लोगों पर फंड जुटाने की जिम्मेदारियां डाली थी वे ‘सिफर’ साबित हो रहे हैं। राहुल की नई टीम में कोई भी ऐसा खेवनहार नहीं जो पार्टी की डूबती उम्मीदों को सहारा दे सके। सो, सोनिया गांधी ने तय किया है कि पार्टी के नए फंड मैनेजरों को चलता कर उनकी जगह अपने पुराने भरोसेमंदों पर ही फिर से भरोसा दिखाया जाए, सो सोनिया के पुराने सिपहसलार अब फिर से नए रंग में नज़र आने लगे हैं।
Posted on 01 December 2014 by admin
सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश सुधांशु ज्योति मुखोपाध्याय की पुत्री की विवाह का मौका था, लुटियंस जोन स्थित जस्टिस साहब के बंगले पर इस समारोह का आयोजन था, इस मौके पर गणमान्य अतिथियों की एक लंबी कतार देखी जा सकती थी। लेकिन सबसे हैरान कर देने वाली उपस्थिति थी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो ठीक शाम के आठ बजे वहां पहुंच गए, जबकि इससे पहले जब जस्टिस मुखोपाध्याय गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे और नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री तब दोनों अंर्तसंबंधों में पेंचोखम के कई अध्याय अटके थे, पर मोदी उन तमाम गिले-शिकवों को भुलाकर वहां पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एच.एल.दत्तू समेत पूरा सुप्रीम कोर्ट ही जैसे इस मौके पर मौजूद था। विभिन्न हाई कोर्ट के कई चीफ जस्टिस की मौजूदगी भी इस समारोह में देखी गई। अटॉर्नी जरनल मुकुल रोहतगी, पूर्व कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, कांग्रेसी खेमे से तीनों वकील यानी पी.चिदंबरम, सलमान खुर्शीद और अभिषेक मनु सिंघवी की तिकड़ी वहां मौजूद थी, तो केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह संघ के करीबी अप्रवासी भारतीय अंशुमान मिश्र के साथ एक कोने में तल्लीनता से बतियाते नजर आए।
Posted on 01 December 2014 by admin
भाजपा के पूर्व थिंकटैंक और पार्टी के चाणक्य रहे गोविंदाचार्य के भाजपा में फिर से सक्रिय होने के अटकलों को फिलवक्त विराम लग गया लगता है, अपनी दिल की सुनने वाले और मन की करने वाले गोविंदाचार्य नेहरू और इंदिरा के बाद भले ही नरेंद्र मोदी को देश का सबसे ‘प्रो-एक्टिव’ और मेहनती प्रधानमंत्री मानते हों, लेकिन शिक्षा, श्रम, न्याय, स्वास्थ्य, उद्योग और चुनाव सुधार से संबंधित कई नीतियों को लेकर वे मोदी सरकार की तीखी आलोचना भी करते हैं। चुनांचे इन दिनों गोविंदाचार्य का सारा फोकस ‘गऊ और गंगा’ को लेकर है। वहीं इन दिनों वे भारत विकास संगम के भारतीय संस्कृति उत्सव की तैयारियों में भी जुटे हैं, जो नए वर्ष में 19-25 जनवरी 2015 को कोल्हापुर के कनेरी में आयोजित होना है। सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में कृषि, मातृ शक्ति, युवा शक्ति, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी है। अनुमान है कि इस उत्सव में छोटे-बड़े कोई 1500 से ज्यादा ग्रुप शामिल हो सकते हैं। चुनांचे गोविंदाचार्य इन दिनों जोर-शोर से मोदी के महत्त्वाकांक्षी नदियों को जोड़ने के मुद्दे को उछाल रहे हैं और सरकार से पूछ रहे हैं कि अब तक सहायक नदियों की दिशा में क्या काम हुआ है?
Posted on 01 December 2014 by admin
मोदी मंत्रिमंडल के हालिया फेरबदल में मुख्तार अब्बास नकवी भले ही कोई मलाईदार मंत्रालय पाने से चूक गए हों और उनकी वरिष्ठता को दरकिनार रखते हुए भले ही उन्हें महा राज्य मंत्री का झुनझुना थमाया गया हो, पर बतौर संसदीय राज्य मंत्री वे कांग्रेस के राजीव शुक्ला की याद दिला रहे हैं, ऊपरी सदन में शुक्ला जी का फ्लोर मैनेजमेंट उतना ही शानदार था। नकवी के राजद, सपा और वामदलों के नेताओं से निजी ताल्लुकात हैं, शायद यही वजह थी कि राज्यसभा में भाजपा का बहुमत नहीं होने के बावजूद पिछले तीन दिनों में यहां तीन महत्त्वपूर्ण बिल पारित हो गए हैं यानी लेबर लॉ अमेंडमेंट बिल, अपरेंटिस बिल और पुलिस एस्टेबलिशमेंट बिल। ऐसा शायद पहली बार हुआ कि वामपंथी दलों ने लेबर लॉ पर अपना ‘अमेंडमेंट’ वापिस ले लिया, जबकि लेबर लॉ और अपरेंटिस बिल पर कांग्रेस का भारी विरोध था। नकवी ने इन विधेयकों को लेकर पहले शरद यादव और राम गोपाल यादव से बात की और फिर कम्यूनिस्ट पार्टी के अपने दोस्तों से, फिर बात बन गई। वैसे भी जो विपक्षी नेता वेंकैया नायडू के समक्ष अपनी बात नहीं रख पा रहे थे, नकवी इन नेताओं से सीधा संपर्क साध रहे हैं और सरकार की ओर से संवाद का रास्ता खोल रहे हैं।
Posted on 01 December 2014 by admin
दिल्ली विधानसभा चुनाव में ‘आप’ के इरादों और इसकी उद्दात सियासी महत्त्वाकांक्षाओं में पलीता लगाने के लिए भाजपा करीबी अन्ना टोली की एक नेता ने इस वयोवृद्ध गांधीवादी नेता को फिर से अनशन करने के लिए मना लिया है। वैसे भी भाजपा मानती है कि जाने-अनजाने उन्हें अन्ना से लाभ पहुंचा है। जनवरी में अन्ना हजारे दोबारा दिल्ली में अनशन कर सकते हैं और केंद्रनीत मोदी सरकार के समक्ष अपनी आधी दर्जन मांगों की सूची पेश कर सकते हैं, सूत्र बताते हैं कि इनमें से आधी मांगे मोदी सरकार सहर्ष स्वीकार कर सकती है और यह सारा सियासी मंचन दिल्ली विधानसभा चुनाव से पूर्व होना है, ताकि अन्ना और उनकी मंडली ‘आप’ के एजेंडों को हाई जैक कर सके, क्योंकि अन्ना मंडली का कहीं शिद्दत से मानना है कि आम आदमी पार्टी आज दिल्ली में जिस जमीन पर खड़ी है और जिन मुद्दों की बात कर रही है वे अन्ना के ही मूल विचार हैं।
Posted on 01 December 2014 by admin
आम आदमी पार्टी अपने इस राजनैतिक अभ्युदय काल में कई गंभीर संकटों से दो-चार हो रही है। पार्टी के जमे-जमाए पुराने चेहरे मसलन योगेंद्र यादव, मनीष सिसौदिया और कुमार विश्वास जैसे लोग नेपथ्य में चले गए हैं। आशीष खेतान और आशुतोष सरीखे जो नए-नवेले चेहरे इन दिनों केजरीवाल को खास तौर पर पसंद है, वे इतने जाने-पहचाने चेहरे नहीं, जिनको लेकर चुनावी पांसे फेंके जाएं। पार्टी के कई प्रमुख नेताओं ने बीजेपी की ठौर पकड़ ली है, कई भाजपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं। ‘आप’ का एक धड़ा इस दिशा में काम कर रहा है कि कैसे कांग्रेस समेत कुछ अन्य दलों के नेताओं को ‘आप’ ज्वॉइन कराई जाए। वहीं ‘आप’ फंड के भारी कमी से जूझ रही है, देश-विदेश से पार्टी को मिल रहे चंदे में भारी गिरावट आई है, फिलवक्त पार्टी में फंड लाने का सारा जिम्मा एक पूर्व अन्वेषी पत्रकार आशीष खेतान ने उठा रखा है। ‘आप’ से जुड़े सूत्र बताते हैं कि आशीष ने पूर्व में भी ‘आप’ को एक बड़ा फंड मुहैया कराया था, गौरतलब रहे कि केजरीवाल ने जब एक कांग्रेसी परिवार द्वारा चलाए जा रहे ‘इंडिया बुल्स’ के गड़बड़झालों की पोल खोली थी और सार्वजनिक तौर पर इसके काम-काज पर अंगुली उठाई थी, फिर अचानक से ऐसा क्या हुआ कि केजरीवाल ने इस कंपनी का नाम लेना ही छोड़ दिया? सूत्रों की मानें तो इस कंपनी ने खेतान के सौजन्य से इस लोकसभा चुनाव के वक्त ‘आप’ को कथित तौर पर एक बड़ा चुनावी चंदा दिया था। सो, मुमकिन है कि अब केजरीवाल कॉरपोरेट घरानों पर अपने हमले की धार कुंद कर लें, चूंकि खेतान पार्टी की इन्हीं मंशाओं को चमकाने में जुटे हैं।
Posted on 25 November 2014 by admin
पंडित जवाहर लाल नेहरू के 125वां जन्मोत्सव को कांग्रेस इतने धूमधाम से मनाना चाहती थी कि इसकी धमक भगवा हलकों में भी सुनी जा सके। इस कार्य को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा मिला 10 जनपथ के दुलारे आनंद शर्मा को, जिनका सोनिया दरबार में यह दावा था कि कई बड़े विदेशी राजनीतिज्ञों से उनके निजी ताल्लुकात हैं, चूंकि सोनिया चाहती थीं कि इस कार्यक्रम की अनुगूंज अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी सुनाई दे, चुनांचे तमाम महत्त्वपूर्ण देशों के राष्ट्राध्यक्ष को न्यौता भेजा गया, पर इक्के-दुक्के छोटे मुल्कों की बात छोड़ दें तो किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय हस्ती की शिरकत कांग्रेसनीत इस कार्यक्रम में देखी नहीं गई। आनंद शर्मा ने आयोजन का जिम्मा अकेले ही संभाला, उन्होंने अपनी टीम में किसी बड़े कांग्रेसी नेता को शामिल करने की जहमत नहीं उठाई, शर्मा सोनिया दरबार में सारी वाह-वाही खुद लूटना चाहते थे, पर जब मामा ही नहीं जुटा तो तमाशा कैसे हो? शर्मा अब सोनिया को यह समझा रहे हैं कि मोदी सरकार नहीं चाहती थी कि बड़े देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो, जबकि सच्चाई यह है कि शर्मा की पहुंच महा कुछ अफ्रीकी देशों और कराई तक थी, सो वे आ गए। पर जो आए उससे सुर्खियां तो नहीं बन पाई।