Posted on 22 August 2016 by admin
राजस्थान की महारानी वसुंधरा राजे को क्या मालूम था कि जिस वी पी सिंह बडनोर को वह दोबारा राज्यसभा दिए जाने की इतनी खुली मुखालफत कर रही हैं, भीलवाड़ा जिले के बडनोर रियासत के इस षख्स की किस्मत इस कदर चमकने वाली है। बडनोर चार बार विधायक, एक बार लोकसभा सांसद, एक बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं, 2009 का लोकसभा चुनाव जब वे हार गए तो पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेज दिया। पिछले महीने ही उनकी राज्यसभा की मियाद खत्म हुई है, राजनाथ सिंह, अरूण जेतली व राजीव प्रताप रूढ़ी सरीखे पार्टी दिग्गज उन्हें राज्यसभा का टर्म दोबारा दिलवाना चाहते थे पर इसके लिए वसुंधरा नहीं मानीं। सांसद रहते हुए बडनोर हाउसिंग कमेटी के चेयरमैन भी थे और अपने मिलनसार प्रवृत्ति व मधुर स्वभाव के चलते उन्होंने विपक्ष में भी अपने लिए काफी दोस्त बना लिए थे। नरेंद्र मोदी से भी उनके निजी ताल्लुकात काफी अच्छे बताए जाते हैं। इस सोमवार को वे जब पंजाब के गवर्नर पद की षपथ लेंगे तो वे चंडीगढ़ के नए प्रषासक भी बनेंगे। केंद्र सरकार ने बडनोर के लिए अपनी 32 साल की पुरानी परिपाटी को एक झटके में खत्म किया है जिससे कि पंजाब का गवर्नर केंद्र षासित चंडीगढ़ का भी बाॅस बन सके।
Posted on 22 August 2016 by admin
हर किसी को यह जानने की बेहद उत्सुकता होगी कि यूं अचानक कष्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने अपने स्वर कैसे बदल लिए और कैसे पाक अधिकृत कष्मीर व ब्लूचिस्तान का नया खटराग अलापा गया है? इसके पीछे एक षख्स हैं, जिनका नाम है ए बी माथुर, जिन्हें हालिया दिनों में राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने अपनी टीम में बतौर सलाहकार षामिल किया है। माथुर 1974 बैच के आईपीएस अफसर हैं जिन्हें आईबी और ’राॅ’ दोनों ही संस्थानों में काम करने का अच्छा अनुभव है। वे डोवल के पुराने दिनों के गहरे मित्र भी हैं। माथुर को पाकिस्तान व बांग्लादेष मामलों का एक्सपर्ट माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने सलाहकार नियुक्त होने के बाद पाकिस्तान को लेकर अपना एक डाॅसियर डोवल के हवाले किया, जिसे डोवल ने पीएम के पास पहुंचा दिया, इसी डाॅसियर में इस बात का विस्तार से जिक्र है कि कैसे ब्लूचिस्तान पाकिस्तान के लिए एक दुखती रग है और माथुर के कहने पर ही मोदी ने पाकिस्तान की दुखती रग पर हाथ रख दिया है।
Posted on 22 August 2016 by admin
वित्त मंत्री अरूण जेतली अपने जूनियर मंत्रियों को लेकर परेषान हैं, वे समझ नहीं पा रहे हैं कि संतोश गंगवार और अर्जुन मेघवाल को वित्त मंत्रालय में क्यों भेजा गया है, जबकि ये दोनों ही कानून मंत्रालय के लिए ज्यादा उपयुक्त पात्र हैं। बात संतोश गंगवार की करें तो वे रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से लाॅ ग्रेजुएट हैं, और बात मेघवाल की करें तो वे एक पदोन्नत आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने राजनीति विज्ञान में एमए करने के बाद लाॅ की डिग्री हासिल की है और फिलिपींस यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया है। षायद यही वजह है कि आर्थिक मामलों की अंतरराश्ट्रीय बैठकों में हिस्सा लेने जहां जेतली स्वयं नहीं जा पाते, वहां अपने राज्य मंत्रियों को भेजने की बजाए मंत्रालय के अधिकारियों को भेजना पसंद करते हैं। अभी पिछले दिनों चीन में इकाॅनोमिक फोरम की एक बैठक आहूत थी उसमें जेतली ने अपने जूनियर मंत्रियों की जगह वित्त मंत्रालय के सेक्रेटरी षक्तिकांता दास को भेजना ज्यादा मुफीद समझा। सनद रहे कि ये षक्तिकांता दास वही अधिकारी हैं जो काफी समय से स्वामी के निषाने पर हैं।
Posted on 14 August 2016 by admin
क्या वाकई अमित शाह ने गुजरात की गद्दी संभालने के लिए कमर कस ली थी? पीएमओ से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि आनंदीबेन के फेसबुक पर इस्तीफे के बाद अमित शाह मुंबई गए थे जहां उनकी मोदी करीबी कुछ उद्योगपतियों से मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में शाह ने इन थैलीशाहों से पीएम के समक्ष अपना नाम आगे बढ़ाने की गुजारिश की थी। फिर दिल्ली लौट कर शाह ने वेंकैया नायडू, अरूण जेतली और नितिन गडकरी से बात की और उनसे आग्रह किया कि वे पीएम को शाह के नाम पर राजी करें। सूत्रों के मुताकिब जिस रोज भाजपा की संसदीय दल की बैठक होनी थी, शाह ने उस सुबह रामलाल और अनंत कुमार से विस्तार में बातें की। इस पूरे वाकयात की ख़बर नरेंद्र मोदी को पहले लग चुकी थी। चुनांचे गुजरात के मसले पर संसदीय दल की बैठक में हिस्सा लेने मोदी ने जैसे ही कमरे में प्रवेश किया, छूटते ही उन्होंने कमरे में मौजूद भाजपा नेताओं से दो टूक कह दिया कि गुजरात के अगले सीएम के लिए अमित जी के नाम को छोड़ कर अन्य नामों पर चर्चा होगी। इस बैठक में मोदी की मंशाओं को भांपते नितिन पटेल के नाम पर सहमति की मुहर लग गई और पटेल के नाम पर विधायकों की राय बनाने का जिम्मा नितिन गडकरी और सरोज पांडे को सौंपा गया। इस बात की भनक जैसे ही नितिन पटेल गुट को लगी, समर्थकों ने मिठाइयां बांटनी शुरू कर दी और स्वयं नितिन पटेल ने बधाईयां स्वीकार करनी शुरू कर दीं। अपना दांव उल्टा पड़ता देख अमित शाह उसी रात मोदी से मिले, उनके चरणस्पर्श किए और उनसे आशीर्वाद मांगा कि 17 के विधानसभा चुनाव में वे अपने दम पर गुजरात विजय करके दिखाएंगे, फिर उन्होंने गुजराती में मोदी से कहा-इसके लिए बस आपको विजय रूपानी के नाम को हरी झंडी दिखानी होगी। इस बात के लिए मोदी मान गए पर शाह का दिल अब भी नहीं मान रहा कि वे चाह कर भी गुजरात का सीएम नहीं बन पाए, भले ही उनके भरत रूपी रूपानी उनका खड़ाऊं रख कर गुजरात का राजपाट चला रहे हों पर राम को तो वनवास ही मिला।
Posted on 14 August 2016 by admin
कांग्रेस के लिए उनके कर्नाटक के सिरमौर सिद्दारमैया उनके गले की हड्डी बन गए हैं, सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने पिछले दिनों कर्नाटक का एक गुपचुप जनमत सर्वेक्षण करवाया है और इस सर्वेक्षण के नतीजों ने कांग्रेस हाईकमान की पेशानियों पर बल ला दिए हैं। इस सर्वेक्षण नतीजों में कहा गया है कि आज अगर कर्नाटक में चुनाव हो जाते हैं तो कांग्रेस के हिस्से 55 सीटों से ज्यादा नहीं आएंगी। फिर दिल्ली में कर्नाटक के बड़े नेताओं की एक बैठक आहूत हुई, इस बैठक में स्वयं सिद्दारमैया, मल्लिकार्जुन खड़गे, वीरप्पा मोइली जैसे नेता शामिल हुए, बैठक की अध्यक्षता सोनिया गांधी स्वयं कर रही थीं। इस बैठक में तय हुआ कि सिद्दारमैया अपनी कुर्सी किसी वोक्कालिंगा नेता के लिए छोड़ देंगे, जिनके अधीन दो लिंगायत नेताओं को डिप्टी सीएम का पद दिया जाएगा। इसके एवज में सिद्दारमैया को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया जाएगा और आम परंपराओं से अलहदा उन्हें कर्नाटक का प्रभारी भी नियुक्त किया जाएगा। उस बैठक में तो सिद्दारमैया कुछ नहीं बोले। पर सूत्र बताते हैं कि जब वे बैठक से बाहर निकल खड़गे की गाड़ी में बैठे तो उन्होंने कथित रूप से खड़गे से कहा-’आपके खून में कांग्रेस हो सकती है, पर मेरे खून में यह नहीं है, क्योंकि मैंने ज्यादातर वक्त कांग्रेस विरोध की राजनीति की है, अगर मेरे साथ कोई अन्याय होता है तो मेरे लिए भाजपा अछूत नहीं रह जाएगी। वे तो मुझे कैबिनेट मिनिस्टर बनाने को भी तैयार हैं।’ हतप्रभ रह गए खड़गे ने घर पहुंच कर, एक कमरे से चुपचाप सोनिया को फोन कर उन्हें सिद्दारमैया के इरादे बताए और कहा कि ’ले देकर हमारे पास एक ही बड़ा स्टेट कर्नाटक रह गया है, इस वक्त मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना ठीक नहीं रहेगा।’ सोनिया मान गई और सिद्दारमैया की कुर्सी सलामत रह गई।
Posted on 14 August 2016 by admin
एक और घटनाक्रम में जब कलिखो पुल अपने लिए और भाजपा के लिए विधायकों का जुगाड़ कर रहे थे, तो कहते हैं भाजपा सुप्रीमो अमित शाह ने असम के कद्दावर भगवा नेता हेमंत बिस्वा सरमा को फोन कर कह दिया कि उन्हें पुल और उनके साथ के अन्य विधायकों का हर तरह से पूरा ध्यान रखना है। कहते हैं कि बिस्वा सरमा किसी बात पर भाजपा हाईकमान से रूठे थे। सो उन्होंने पुल और उनकी टीम की आवभगत का तो पूरा ध्यान रखा, उन्हें अपने होटल में अच्छी तरह रूकवाया पर किसी और तरह की मदद नहीं की। जब बहुमत सिद्ध करने की तारीख करीब आ रही थी तो सूत्रों का दावा है कि उस समय भी पुल को 47 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, पर पुल विधायकों से किए वायदे पूरे नहीं कर पा रहे थे। कहते हैं शाह ने यह जिम्मा हेमंत बिस्वा के ऊपर छोड़ रखा था और हेमंत बिस्वा सरमा उस वक्त इतनी जहमत उठाने को तैयार नहीं थे। चुनांचे पुल की सियासी व्यूह रचना तितर-बितर हो गई। आहत पुल ने तब मजबूर होकर कांग्रेसी सांसद नीनांग एरिंग से बात की और उनसे कथित तौर पर कहा कि ‘वे घर आने को तैयार हैं,पर उनकी बस इतनी सी शर्त्त है कि वे नहीं तो, नबांग तुकी भी सीएम नहीं बनने चाहिए, किसी और को बना दो और मुझे लोकसभा का टिकट दे देना।’ पुल की कांग्रेस के साथ बात तो बन गई पर उनके दिल में एक टीस सुलगती ही रह गई।
Posted on 14 August 2016 by admin
आम आदमी पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में मनीश सिसौदिया और संजय सिंह इस राय के थे कि नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब में कैंपेन कमेटी का चीफ बनाया जाए। आप से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की माने तो बस एक केजरीवाल ही थे जो इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि ‘सिद्धू जब भाजपा में थे तो भाजपा को अपनी मां और पार्टी को अपना घर बताया था। अब हमारे साथ आने को राजी हैं तो हमारे लिए भी यही जुमला दोहरा सकते हैं। हो सकता है वे एक चुनाव तक ही हमारे साथ हों।‘ दूसरी ओर केजरीवाल का भगवंत मान के बारे में मानना था कि चाहे उनमें कुछ कमियां हो, उनकी राजनैतिक परिपक्वता पर भी सवाल खड़े किए जा सकते हैं, फिर भी वे हमारे परिवार की तरह हैं। उन पर हम पूरा भरोसा कर सकते हैं, इसके बाद ही मान को पंजाब में आप की ओर से कैंपेन कमेटी का चीफ घोषित किया गया और सिद्धू के लिए यह तय किया गया कि वे पंजाब में घूम-घूम कर आप के पक्ष में अलख जगाएं, इसके एवज में उनकी पत्नी को सीनियर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।
Posted on 14 August 2016 by admin
विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि आप के दोनों बागी सांसदों की मुलाकात पिछले दिनों प्रधानमंत्री से हुई। कहते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव में इन दोनों सांसदों ने कमल के प्रस्फुटन में मदद देने का भरोसा जताया था। यह भी तय हुआ था कि ये दोनों सांसद भी अंदरखाने से आप कैडर में सेंध लगाने की भी कोशिश करेंगे। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद शाम को इनमें से एक आप सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी से मिलने जब कुछ पत्रकार उनके घर पहुंचे तो डॉ. गांधी ने पीएम से हुई मुलाकात और पूरी बातों का ब्यौरा जस के तस अपने मुंहलगे उन पत्रकारों के समक्ष उद्घाटित कर दिया। जब यह ख़बर भाजपा हाईकमान को लगी तो उसने फौरन अपने कैडर को सचेत करते हुए कहा कि वे डॉ. गांधी से एक दूरी बना कर रखें।
Posted on 07 August 2016 by admin
विजय रूपानी के रूप में जहां गुजरात को नया सीएम मिला, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रूतबे को एक नया मुकाम। सनद रहे कि शाह से मन मुटाव के बाद जब आनंदीबेन ने अपना इस्तीफा सौंपा था तो उन्होंने प्रखरता से अपने मन की बात को मोदी के समक्ष स्वर दिए थे कि चाहे किसी को उनकी जगह सीएम बनाया जाए पर विजय रूपानी नहीं बनने चाहिए। विधायकों की बैठक में भी साफ तौर पर यह कश्मकश देखी गई, जब आनंदीबेन समेत कई विधायकों की पार्टी चीफ अमित शाह से तीखी नोंक झोंक हो गई, वह तो मोदी के वीटो ने शाह की पगड़ी की लाज रख ली। वहीं इस फैसले से यह भी साबित हो गया कि शाह की कही बातें पार्टी में पत्थर की लकीर है, क्योंकि गुजरात भाजपा प्रमुख रहते रूपानी ने सदैव शाह की भावनाओं को सर्वोपरि माना और आनंदीबेन के रास्ते को कांटो भरा बनाया। नितिन पटेल के नाम को एक वक्त प्रधानमंत्री की हरी झंडी मिल चुकी थी, ज्यादातर भाजपा विधायक भी उनके पक्ष में बताए जाते थे, पर शाह ने अपने सबसे भरोसेमंद रूपानी के लिए सियासी खेल का पांसा पलट दिया। विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि रूपानी ऐसे नेता हैं जो शाह के लिए आने वाले दिनों में अपनी कुर्सी छोड़ सकते हैं, गुजरात में 2017 अक्तूबर के आसपास विधानसभा चुनाव होने हैं, चुनांचे यूपी चुनाव जब मार्च में पूरे हो जाएंगे तब बतौर सीएम शाह की गुजरात में ताजपोशी हो सकती है, शाह की महत्त्वाकांक्षाओं के इसी रोड मैप को साकार बनाने के लिए रूपानी काम करते नज़र आ सकते हैं।
Posted on 07 August 2016 by admin
यूपी की भगवा सियासत में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। शाह की छाया से पार्टी को उबारने की मशक्कत में जुटे यूपी के पार्टी प्रभारी ओम माथुर अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले सुनील बंसल की अक्खड़ कार्यशैली से खासे नाराज़ बताए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बात की शिकायत ओम माथुर ने मोदी से कई बार की है, पर अब तलक मामला टलता जा रहा है, इस सच्चाई के बावजूद कि माथुर के रिश्ते मोदी से बहुत पुराने और किंचित गहरे हैं, एक वक्त माथुर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में भी रह चुके हैं, बावजूद उन्हें अभी तक इंसाफ का इंतजार है, क्योंकि माथुर जब भी बंसल की शिकायत मोदी से लगाते हैं, उन्हें वही घिसा-पिटा जवाब सुनने को मिलता है-‘इस बारे में अमित जी से बात करेंगे।’ लिहाज़ा अब भाजपा में सिर्फ और सिर्फ वही होगा जो अमित शाह चाहेंगे।