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ऐसे हुई मुलायम परिवार में संधि

Posted on 10 October 2016 by admin

सूत्रों की माने तो यादव परिवार में संधि करवाने के लिए गुजरात के उद्योगपति केतन देसाई की भी एक महती भूमिका रही, देसाई को अमित शाह का भी करीबी माना जाता है और वे कई वर्षों से मेडिकल काऊंसिल ऑफ इंडिया यानी एमसीआई के अध्यक्ष पद पर काबिज हैं। सूत्र बताते हैं कि देसाई से मुलायम सिंह की पक्की दोस्ती तब से है जब सैफई में एक मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी दी जानी थी। कहते हैं सैफई मुलायम की कमजोरी है और कोई सैफई के लिए जरा भी कुछ करता है तो नेताजी उन्हें सिर आंखों पर बिठा लेते हैं। इस पूरी घटनाक्रम में मुलायम ने सबसे पहले प्रोफेसर रामगोपाल यादव को लखनऊ तलब किया और उनसे तकरीबन 1 घंटे अकेले में बात की। फिर उन्होंने षिवपाल को बुलाया और उन्हें रामगोपाल के साथ बिठाया और आपसी बातचीत से तमाम विवाद खत्म करने के निर्देश दिए। फिर मुलायम अपने दोनों भाईयों को अकेला छोड़ घर के अंदर चले गए। इसके बाद मुलायम ने अपने पुत्र सीएम अखिलेश को तलब किया और उन्हें चाचाओं के साथ बिठाया ताकि सबसे गिले-शिकवे दूर हो सके। कहते हैं अखिलेश ने शिवपाल व रामगोपाल के पैर छू कर उनसे आशीर्वाद मांगा। फिर तय हुआ कि अखिलेश के जिन लोगों के शिवपाल ने टिकट काट दिए हैं, उन सभी युवा नेताओं के टिकट वापिस किए जाएंगे। नेताजी ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराई और खुद आगे की स्थितियों पर नज़र रखने का वायदा किया।

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रौर्द्र रूप में शिवपाल

Posted on 10 October 2016 by admin

पर यादव परिवार में सुलह सफाई इतनी आसानी से नहीं हुई। दिन भर मीडिया के समक्ष चुप्पी साधे रखने वाले शिवपाल के सब्र का बांध अपने बड़े भाई के समक्ष टूट गया। मुलायम भी शिवपाल के साथ मजबूती से खड़े दिखे। सूत्र बताते हैं कि शिवपाल ने दो टूक अखिलेश से कहा-’यह समझने की भूल मत करना कि हम तुम्हारे चेहरे पर 2012 में जीत कर सत्ता में आए थे। वह तो राज्य की जनता मायावती से त्रस्त थी और वह परिवर्त्तन चाहती थी।’ नेताजी के समक्ष शिवपाल ने साफ कर दिया कि अगर राज्य में अगली सरकार सपा की आई तो मुख्यमंत्री नेताजी होंगे, न कि अखिलेश। कहते हैं शिवपाल ने अपने भतीजे को लताड़ते हुए यहां तक कह डाला कि ’हमने पार्टी बनाई थी, तुमने सरकार में बस मज़े लूटे।’ सूत्रों की माने तो शिवपाल का गुस्सा वहीं तक नहीं थमा उन्होंने प्रोफेसर रामगोपाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा-’हम बेंगलुरू जाकर देवेगौड़ा जी से मिले। लालू, नीतीश व अजीत सिंह का महागठबंधन के लिए तैयार किया, अगर यह सब हुआ होता तो अगले पीएम के लिए नीतीश, केजरीवाल या ममता का नहीं, बस नेता जी का नाम आगे चल रहा होता।’ सब ओर सन्नाटा पसरा था, मुलायम भावुक थे और उन्हें शिवपाल पर प्रेम आ रहा था।

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100 सीटों पर पैसे खर्चेगी कांग्रेस

Posted on 10 October 2016 by admin

कांग्रेस यूपी में अपने 403 उम्मीदवार उतारने को तैयार है, पर पार्टी का फंडा साफ है कि खर्च वह सिर्फ 100 चुनी हुई सीटों पर ही करेगी, क्योंकि पार्टी के पास फंड की कमी है। कांग्रेस ने यूपी में 100 ऐसी सीटों को चिन्हित करने का काम पूरा कर लिया है जहां कांग्रेस लड़ाई में है। इन सीटों के लिए अधिकृत उम्मीदवारों के लिए फंड की भी व्यवस्था है। शेष 303 सीटों के लिए पार्टी ने साफ कर दिया है कि इन सीटों से भाग्य आजमाने वाले पार्टी उम्मीदवारों को अपना पूरा चुनावी खर्च स्वयं वहन करना होगा, पार्टी सिर्फ प्रचार सामग्री मुहैया करा सकती है, पार्टी के दिग्गज नेता यहां चुनाव प्रचार की अलख जगा सकते हैं। बस!

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’सर्जिकल स्ट्राइक’ का आइडिया आया कहां से

Posted on 03 October 2016 by admin

पाक प्रायोजित कायराना उरी हमले से देश आहत था। पीएम को प्राप्त हो रही अलग-अलग खुफिया जानकारियों में हिंदुस्तानियों के गुस्से, हताशा व प्रतिशोध की भावना उबाल मार रही थीं। डिप्लोमेसी का सहारा लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाक को बेनकाब करने की भारतीय कोशिशें जारी थीं पर यह सारा उपक्रम मोदी सरकार के प्रति देश का भरोसा बहाल करने के लिए नाकाफी था। देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिक्कर उरी हमले का जायजा लेकर वायुसेना के एक विशेष विमान से दिल्ली लौट रहे थे, उन्होंने अपने साथ बैठे भारत के सेनाध्यक्ष से पूछा-’हम क्या कर सकते हैं? कुछ ऐसा कि हम पाकिस्तान को सबक भी सिखा सकें और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत की किरकिरी भी न हो।’ सूत्र बताते हैं कि पर्रिक्कर ने सेनाध्यक्ष से साफ कर दिया कि कल सुबह ही कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्यूरिटी (सीसीएस) की बैठक है, जिसमें उन्हें पीएम के समक्ष कोई ठोस प्लॉन लेकर जाना होगा। कहते हैं सेनाध्यक्ष ने अपने रक्षा मंत्री से कहा-’सर, सुबह तक, आपके मीटिंग में जाने से पहले यह पूरा प्लॉन आपको मिल जाएगा।’ ऐसा ही हुआ, सूत्र बताते हैं कि इस प्लॉन में तीन अलग-अलग रणनीतियों का जिक्र था, जिसमें से एक ’सर्जिकल स्ट्राइक’ का विकल्प भी था। पर्रिक्कर ने सेनाध्यक्ष से हुई अपनी बातचीत में इस बात का थाह पा लिया था कि यह एक ऐसा मौका है जब पूरी भारतीय सेना का हौंसला बम बम है, और इस सत्य के बावजूद कि मौजूदा दौर में यकीनन वह हथियारों की कमी से जूझ रही है, पर पूर्ववर्त्ती हुक्मरानों की तुलना में मोदी का नेतृत्व उनके मन को नए हौंसले दे रहा है। तब जाकर सीसीएस की बैठक में सर्जिकल स्ट्राइक की योजना को हरी झंडी दे दी गई और इस बात को लेकर यह भी एक कारगर नीति बनी कि मीडिया को इस बात की जानकारी ऑपरेशन पूर्ण हो जाने के बाद सेना की ओर से ही दी जाएगी। यह पूरी योजना तय शुदा रणनीति को मद्देनजर रखते अमल में लाई गई, जो बेहद कारगर रही।

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मन है ठंडा, पर दिल में जल रही है आग

Posted on 03 October 2016 by admin

केरल के कोझीकोड में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नरेंद्र मोदी ने बेहद सुविचारित तरीके से दो मौकों पर पार्टी जनों को संबोधित किया। कहना न होगा कि ’उरी अटैक’ को लेकर तब भी उनके मन में घोर उथल-पुथल के दौर जारी थे। उनके भाशणों में भी इसकी प्रतिध्वनि देखी-सुनी जा सकती थी। शब्द उनके मन की तल्खियों से लैस थे, मोदी ने अपने बारे में अपने पार्टी जनों से दो टूक कहा कि वे एक पंथ निरपेक्ष व्यक्ति हैं, पर उनकी ही पार्टी के कुछ नेता अनाप-शनाप बयान देकर उनकी धर्मनिरपेक्षता को कटघरे में ला खड़ा करते आए हैं। इसकी मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि जब पिछली वर्ष नवरात्रि के मौके पर वे अमरीका गए तो उनके खान-पान की बात को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं ने मीडिया में अलग तरह से बात रखी, जबकि इसमें किंचित मात्र सच्चाई नहीं है। वे तन-मन की शुद्धि के लिए ही नवरात्रि का व्रत रखते हैं, जब एक जगह उनके लिए शीशे के ग्लास में पानी आ गया, तो उन्होंने वह जल ग्रहण न कर एक नए ग्लास के आने का इंतज़ार भर किया। मोदी ने साफ किया कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। एक अन्य उदाहरण में मोदी ने अपनी कोझीकोड यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब भी वे किसी नई जगह पर जाते हैं तो सबसे पहले वहां वे किसी स्थानीय मंदिर का दर्शन करना पसंद करते हैं, कोझीकोड में भी उन्होंने ऐसा ही किया, इससे किसी पंथ की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। पाकिस्तान के बारे में भी उन्होंने पहेलियां बुझाने के अंदाज में कहा-जब तक स्थितियां हमारे अनुकूल नहीं हो जाती है, तब तक हमारे सिर पर बर्फ (ठंडे मन), पर ह्यदय में आग जलती रहनी चाहिए। इस आग की चिंगारियों का स्वाद अब पाकिस्तान ने तो कम से कम चख ही लिया है।

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बंसल परिवार की आत्महत्या के पीछे कौन?

Posted on 03 October 2016 by admin

कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के पूर्व डायरेक्टर वी के बंसल, उनके पुत्र और उनकी पत्नी व बेटी की आत्महत्या का मामला गहराता ही जा रहा है। मामला सिर्फ 9 लाख रूपयों की रिश्वत से जुड़ा है, पर सीबीआई के रवैए पर शक की सुई गहराती जा रही है। पूरे परिवार के एक साथ आत्महत्या के मामले ने देश को झकझोर दिया है। बंसल परिवार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि वी के बंसल की पत्नी और बेटी के साथ सीबीआई ने अत्याचार किया है। सोशल मीडिया पर लगातार सीबीआई के एक डीआईजी रैंक के एक अफसर को जो इस मामले की तहकीकात से जुड़े हैं, उन्हें यह कहते उद्दत किया जा रहा है कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, चूंकि उन्हें अमित शाह का वरदहस्त प्राप्त है। कहते हैं अपनी जान लेने से पहले बंसल को इस बात का इल्म हो चुका था कि पुलिस और सीबीआई उनके सुसाइड नोट से छेड़छाड़ कर सकती है सो उन्होंने स्वयं पोस्ट ऑफिस जाकर अपने सुसाइड नोट को कई अखबारों के दफ्तरों में पहले ही पोस्ट कर दिया था।

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यूपी का मनोहर खट्टर

Posted on 03 October 2016 by admin

भाजपा ने यूपी में अपना नया मनोहर खट्टर ढूंढ लिया है। जिन्हें अब भाजपा की ओर सीएम पद के नए दावेदार के तौर पर मैदान में उतारा जा सकता है, दरअसल, यह नाम संघ की ओर से सुझाया गया है। पार्टी में इस नाम को लेकर आम राय बनाने की कवायद हो रही है, ये हैं शाहजहांपुर के भाजपा विधायक सुरेष खन्ना, जो खट्टर साहब की तरह ही अविवाहित हैं, संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। लगातार सात टर्म विधायक रह चुके हैं, उनकी एक ईमानदार छवि हैं और भाजपा आलाकमान उनके मुंह में अपने शब्द भी डाल सकने में सक्षम है।

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राजनाथ का सोशल मीडिया

Posted on 03 October 2016 by admin

देश के गृह मंत्री भी अब सोशल मीडिया पर एक्टिव होना और दिखना चाहते हैं। उनके डिजिटल मीडिया को हेंडल करने के लिए पिछले दिनों कई कंपनियों ने उनके लोगों से संपर्क साधा है। यह डिजिटल मीडिया कवायद गृह मंत्री की निजी इमेज को सुधारने को लेकर है। पर राजनाथ जी के करीबियों ने उस डिजिटल मीडिया कंपनी के समक्ष कुछ अजीबोगरीब शर्त्तें रख दी हैं कि कंपनी के जितने भी लोग राजनाथ जी का अकाऊंट हेंडिल करेंगे सबके पास एपल का मैक कंप्यूटर होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की हैकिंग से बचा जा सके। वहीं कंपनी यह बताने की कोशिश कर रही है कि यह कंपनी नहीं, बल्कि प्रोग्रामिंग पर निर्भर करता है, कि इनके डिजिटल काम में किस स्तर की प्रोग्रामिंग की जा रही है जिससे किसी भी प्रकार के हैकिंग के खतरे से बचा जा सके।

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बेटे के इंतजार में बड़े बादल

Posted on 03 October 2016 by admin

पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सुबह तड़के 4 बजे ही उठ जाया करते हैं, और नित्य क्रिया से फारिग होने के बाद बस वह एक ही काम करते हैं, अपने पुत्र सुखबीर सिंह बादल के उठने का इंतजार। सुबह 7 बजे सबसे पहले वह पूछते हैं-कुकी (सुखबीर) उठ गया क्या? फिर सुबह के 8-9 बजे तक काका जी का इंतजार जारी रहता है। जब तक सुखबीर उठ कर आ नहीं जाते और उनसे दो घड़ी बतिया नहीं लेते कि आज का प्रोग्राम क्या है? चुनाव का क्या चल रहा है? आम आदमी पार्टी नया क्या कर रही है? आदि-आदि तब तक बड़े बादल को चैन नहीं आता।

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नए अवतार में मुख्तार

Posted on 26 September 2016 by admin

संघ और उनके आनुशांगिक संगठनों की बदली भंगिमाएं भले ही देश के अल्पसंख्यक समुदायों की पेशानियों पर बल ला रहे हों, पर देश के मुसलमानों को लेकर स्वयं प्रधानमंत्री की सोच किंचित अलग दिखती है। उनके निर्देश पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय पूरी तरह से हरकत में है। नजमा हेपतुल्ला की विदाई और मुख्तार अब्बास नकवी के हाथों में विभाग की पूरी कमान सौंपने के बाद मोदी अपने कुछ ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर खासे उत्साहित नज़र आ रहे हैं। मसलन, मोदी का एक नायाब आइडिया देश भर में 1 हजार से ज्यादा ’सदभाव मंडप’ बनाने का है, ये मंडप अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में बनने हैं, जिसमें एक कम्युनिटी सेंटर, लाइब्रेरी, स्किल डेवलपमेंट सेंटर के साथ इस बात की भी व्यवस्था रहेगी कि किसी प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति (सूखा, बाढ़, भूकंप या युद्ध) आने पर वहां स्थानीय लोग इकट्ठे भी हो सके और उनके ठहरने व खाने-पीने की वहां व्यवस्था भी हो सके। विभाग के मंत्री नकवी ने 100 से ज्यादा प्रोग्रेस पंचायत का ऐलान भी किया है, जिसके अंतर्गत अल्पसंख्यक बहुल रूरल क्षेत्रों में गर्ल्स हॉस्टल, नर्सिंग स्कूल आदि बनाए जाएंगे। इस योजना की शुरूआत 29 सितंबर से हरियाणा के मेवात इलाके में हो रही है, फिर यह कार्यक्रम 6 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में जा पहुंचेगा। दक्षिण भारतीय राज्यों को भी इस योजना से तेजी से जोड़ा जा रहा है, बकौल नकवी ’हम राज्यों के आने का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि मंत्रालय अपनी पहल से उनके पास जा पहुंचेगा।’

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