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…और अंत में

Posted on 14 May 2017 by admin

सूत्रों की मानें तो दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल को संघ के एक शीर्ष पदाधिकारी का फोन गया, उनसे कहा गया कि बतौर स्पीकर उनके पास तो असीमित अधिकार है, वे चाहे जिस विधायक को डिस्क्वालीफाई कर सकते हैं, सो संघ के ये नेता चाहते थे कि गोयल साहब उनसे मिल जुल कर कोई बड़ा निर्णय लें। सूत्र बताते हैं कि इसके जवाब में गोयल साहब ने जो कहा उससे संघ नेता की नींद ही उड़ गई, दरअसल गोयल और हर्षवर्द्धन में छत्तीस का आंकड़ा है, सो सूत्रों की मानें तो गोयल साहब ने छूटते ही कहा-’आप हर्षवर्द्धन को पार्टी से निकाल दो, फिर मैं आपके साथ बैठ कर साझा निर्णय लेने को तैयार हूं। (एनटीआई-gossipguru.in)

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शीला पर भगवा डोरे

Posted on 07 May 2017 by admin

शीला दीक्षित और उनके पुत्र संदीप दीक्षित भी कांग्रेस से नाराज़ बताए जाते हैं। दिल्ली के एक प्रमुख भाजपा नेता की संदीप दीक्षित से पुरानी दोस्ती है, चुनांचे माहौल की नजाकत को भांपते हुए इन्होंने एक दिन संदीप को फोन किया कि ’हमें मिले काफी अरसा हो गया है, सो क्यों नहीं साथ एक कॉफी पी जाए, या तो मैं आपके घर आ जाता हूं या आप मेरे घर आ जाओ।’ संदीप दीक्षित मजमून भांप गए थे, सो उन्होंने बेतकत्लुफी से फोन पर ही कह दिया-’साथ कॉफी पीने में कोई हर्ज नहीं है और बात यह भी सही है कि मुझे अपनी पार्टी से कुछ नाराज़गी है, बावजूद इसके मैं कांग्रेस छोड़ने वाला नहीं हूं।’ भाजपा के मंत्री ने बात टालते हुए कहा-’नहीं यह मुलाकात बस मित्रता के नाते है, इसका कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं हैं।’ खैर, मिलने का वक्त मुकर्रर हुआ और दिल्ली भाजपा के ये दिग्गज नेता जब संदीप के घर कॉफी पीने पहुंचे तो देखा कि उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्री वेंकैया नायडू वहां पहले से मौजूद हैं जो दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के साथ बैठ कर कॉफी की चुस्कियां भर रहे हैं।

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पीएम व शौरी में नहीं बनी

Posted on 07 May 2017 by admin

मोदी सरकार के एक शक्तिशाली मंत्री ने प्रधानमंत्री से नाराज़ चल रहे अरुण शौरी को एक दिन यूं ही फोन कर लिया, बोले-’हमें मिल कर बात करनी चाहिए, हमें आपकी नाराजगी दूर करनी है।’ सूत्र बताते हैं कि शौरी के देश के एक शीर्ष औद्योगिक घराने से बेहद आत्मीय ताल्लुकात हैं और ये केंद्रीय मंत्री भी इस औद्योगिक घराने के करीबियों में शुमार होते हैं, इस नाते अगर दोनों में कुछ कॉमन था तो इस घराने से नजदीकियां, यह घराना भी चाहता था कि शौरी पीएम मोदी के खिलाफ आग उगलना बंद करे। फिर मंत्री जी ने शौरी से पूछा, ’आखिरकार पीएम से आपकी नाराज़गी क्या है?’ तो मंत्री जी को बताया गया कि 2014 के चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद मोदी शौरी के घर आए थे और कथित तौर पर उन्होंने शौरी से यह भी कहा था कि उन्हें इस नई सरकार में एक बड़ी जिम्मेदारी संभालनी है।’ मीडिया में यह खबर लीक हो गई और कांग्रेस से सहानुभूति रखने वाले एक न्यूज चैनल ने पहले से ही खबर चलानी शुरू कर दी कि ’अरुण शौरी देश के अगले वित्त मंत्री होंगे।’ इसके बाद जाने क्या हुआ कि कहते हैं कि मोदी ने शौरी से मिलने से भी इंकार कर दिया। सूत्र बताते हैं कि यह पूरी दास्तां सुनने के बाद संघ के करीबी माने जाने वाले इस मंत्री ने पीएम से इस बारे में बात की। तो पीएम की ओर से उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, उल्टे पीएम ने उन्हें एक तरह से डपट दिया कि उन्हें फालतू में बीच में कूदने की क्या जरूरत थी? बात आई गई हो गई, शौरी भी समझ गए, सो, उन्होंने मंत्री जी से बेलाग कहा-’वे (पीएम) अपना धर्म निभाएं, मैं अपना कर्म करूंगा।’ सो, धर्म-कर्म जारी है।

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ओडिशा में परेशां नवीन

Posted on 07 May 2017 by admin

भाजपा ओडिशा में मजबूती से अपने पांव जमा रही है, कमल के प्रस्फुटन की इन आहटों ने बीजद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को बैचेन कर दिया है, यह पटनायक की बैचेनी ही है कि एक ओर वे दिल्ली जाकर भाजपा से अपने नए रिष्तों के सूत्र ढूंढते हैं तो वहीं ओडिशा में भाजपा की जड़ों में मट्ठा डालने का उपक्रम साध रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने एक तरह से तय कर दिया है कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ही ओडिशा में उनके चेहरा होंगे, प्रधान विरोधी खेमे में इस बात को लेकर हलचल है, विरोध है, नाराज़गी है और नवीन इसी बात का फायदा उठाना चाहते हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने नाराज़ भाजपा विधायकों को एक तरह से खुला ऑफर दे दिया है कि अगर वे जरूरी संख्या बल में भाजपा से अलग होकर उनके पाले में आते हैं तो वे उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बनाएंगे। वहीं ओडिषा से भाजपा के पाले में जो दो राज्यसभा सीटें आ रही है, भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इसके लिए दो नामों को लगभग हरी झंडी दिखा दी है, इनमें से एक भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरिधर गोमांग है तो दूसरा नाम कनक वर्द्धन सिंहदेव का है, जो संगीता सिंहदेव के पति हैं।

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…और अंत में

Posted on 07 May 2017 by admin

Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.

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विश्वास का भगवा रंग

Posted on 07 May 2017 by admin

आप के एक अहम स्तंभ कुमार विश्वास के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। अभी एक रोज पूर्व इंडिया टुडे ग्रुप को दिए गए इंटरव्यू में कुमार विश्वास ने खुल कर अपने मन की बातें कहीं। सूत्र बताते हैं कि कुमार ने उसी दिन आप छोड़ने का मन बना लिया था, जब पंजाब चुनाव के नतीजे आने के बाद उन्होंने एक शेर ट्वीट किया था। केजरीवाल के निजी सहायक वैभव महेश्वरी ने इसका संज्ञान लेते हुए कुमार के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक मुहिम छेड़ दी। वैभव का कहना था कि यहां लोग जीत का श्रेय लेने तो आ जाते हैं, पर हार के समय मुंह छुपा लेते हैं। वैभव के इस ट्वीट के बाद केजरीवाल की पूरी ई-आर्मी सोशल मीडिया के सहारे कुमार पर टूट पड़ी, पर कुमार को बचाने के लिए तब भी केजरीवाल आगे नहीं आए। शाजिया इल्मी की तरह कुमार विश्वास ने भी पार्टी में रह कर भाजपा में जाने की जमीन तैयार कर ली।

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राज्यसभा और आप

Posted on 07 May 2017 by admin

अगर केजरीवाल के हाथों से दिल्ली की गद्दी जाती है तो उन्हें एक और करारा आघात सहने के लिए तैयार रहना होगा, अगले साल दिल्ली से राज्यसभा की 3 सीटें आप के खाते में आनी हैं, पहले इन तीनों सीटों के लिए प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास का दावा सबसे मजबूत था। समय बदला तो दिल्ली में आप की राजनीति बदली, केजरीवाल के विश्वासी बदले, निष्ठाएं बदली और इस बदले परिदृश्य में राज्यसभा की इन तीनों सीटों के लिए लगभग चेहरे भी तय हो गए थे। ये त्रिमूर्ति थी संजय सिंह, आशीष खेतान और आशुतोष, पर जिस तरह से दिल्ली की राजनीति करवटें बदल रही हैं, यहां कुछ भी हो सकता है और दिल्ली से राज्यसभा की ये तीनों सीटें भाजपा के पाले में भी जा सकती हैं।

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दिल्ली का मेयर एक

Posted on 07 May 2017 by admin

दिल्ली नगर निगम में अपनी बंपर जीत के बाद भाजपा एमसीडी में कई नए प्रस्तावों को हरी झंडी दिखा सकती है। भाजपा के कर्णधारों का मत है कि भले ही एमसीडी को तीन अलग-अलग जोन में बांट दिया गया हो, पर इसका मेयर एक ही होना चाहिए। फिलवक्त तीनों जोन के लिए अलग-अलग मेयर चुने जाते हैं। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि भाजपा में इस बात को लेकर गंभीर विमर्श चल रहे हैं कि मेयर एक हो, पर तीनों जोन के लिए कमिश्नर अलग-अलग रखे जा सकते हैं।

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65 लाख की घास

Posted on 07 May 2017 by admin

यूं तो न्याय और संवैधानिक प्रक्रियाओं में लोगों का भरोसा कायम करने में भारत की न्याय प्रणाली की एक महती भूमिका है, फिर भी कुछ न्याय रक्षकों की ओछी मानसिकता से इसकी गरिमा को ठेस पहुंचती है। उत्तर भारत के एक प्रमुख राज्य को जब दक्षिण भारत के एक चीफ जस्टिस मिले तो उनके स्वागत में राज्यवासियों ने पलक पांवड़े बिछा दिए। उनके आवास व परिसर को सुसज्जित किया गया और केवल घास लगाने के लिए हैदराबाद की एक कंपनी को कथित तौर पर 65 लाख रुपयों का भुगतान किया गया। पर समय का चक्र देखिए, मात्र 3 महीनों में इन जज महोदय का ट्रांसफर दिल्ली हो गया, उनकी जगह जिस जज ने ली उन्हें 65 लाख की यह घास पसंद नहीं आई, 65 लाख की इस घास को उखाड़ा गया और जज महोदय की पसंद की घास के लिए उनकी पसंद की किसी अन्य कंपनी को आर्डर दिए गए।

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अब तिवारी की बारी

Posted on 07 May 2017 by admin

जब से यूपी में योगी सरकार बनी है, राज्य के एक पूर्व बाहुबली हरिशंकर तिवारी के अच्छे दिन पैदल हो गए हैं। नहीं तो यूपी में अखिलेश सरकार गठित होने से पूर्व तिवारी जी का यह रिकार्ड था कि यूपी में बनने वाली हर सरकार में वे मंत्री रहे, चाहे सरकार भाजपा की हो, सपा या बसपा की। अब एक जंगल में दो शेर तो रह नहीं सकते सो, तिवारी जी के गोरखपुर स्थित उनके घर के अहाते में जांच एजेंसियों की रेड पड़ गई। तिवारी समर्थकों ने इसे आनन-फानन में ठाकुर बनाम ब्राह्मण की जंग का रंग दे दिया। तिवारी समर्थकों ने क्या खूब बवाल काटा, यहां तक कि कमिश्नरी के गेट तक तोड़ दिए। हरिशंकर तिवारी के दाएं हाथ कहे जाने वाले ब्रजेश पाठक पहले बसपा में गए, फिर वे लखनऊ से इस दफे भाजपा की टिकट पर चुनाव जीत गए। वे तिवारी जी के पुत्र विनय शंकर तिवारी के गहरे मित्र रह चुके हैं। पर इस संकट की घड़ी में तिवारी को ब्रजेश पाठक से भी कोई मदद नहीं मिल पाई। हालांकि तिवारी के खिलाफ झंडा बुलंद करने में गोरखपुर के ही विधायक राधामोहन दास अग्रवाल सबसे आगे हैं। सनद रहे कि राधामोहन को जब भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो योगी ने उन्हें अपनी हिंदू वाहिनी से चुनाव लड़वा दिया और राधामोहन जीत गए। आज राधामोहन दास अग्रवाल अपराध मुक्त गोरखपुर बनाने के लिए सबसे ज्यादा प्रदर्शन कर रहे हैं।

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