Posted on 06 March 2018 by admin
मीडिया प्रेमी श्री श्री रविशंकर का दावा है कि उन्होंने अध्योया विवाद का हल निकाल लिया है। और जब वे 5 से 8 मार्च के बीच दिल्ली में रहेंगे तो इसकी घोषणा कर देंगे। पर विश्व हिंदू परिषद बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी सरीखे जो संगठन इस मुकदमे में शामिल हैं, उनका कहना है कि हमें मालूम नहीं कि श्री श्री ने क्या हल ढंूढा है, चूंकि इस बाबत उनसे बात ही नहीं की गई है, मंदिर बनाने की बात तो ठीक है, पर मस्जिद कहां बनेगा गुरूजी यह तो बताएं?
Posted on 26 February 2018 by admin
अपने नए चेहरे-मोहरे से लैस कभी वाजपेयी व अडवानी की पार्टी रह चुकी भाजपा नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित अपने पांच मंजिला नई इमारत में शिफ्ट हो गई है। सनद रहे कि इस नई इमारत का शिलान्यास 18 अगस्त 2016 को ही हुआ था और इतने रिकार्ड टाइम में यह इमारत बनकर भी तैयार हो गई और पिछले ही इतवार को मोदी व शाह की जोड़ी ने भाजपा के नए मुख्यालय के शुभारंभ को हरी झंडी दिखा दी। सबसे खास बात तो यह कि भाजपा के इस नए मुख्यालय में प्रवेश करने वाले हर आगंतुक को बाहर रखे एक रजिस्टर में अपना नाम, पता व फोन नंबर के साथ अपना आधार नंबर भी लिखना होगा। आधार लिंक कराने की एक नई परंपरा की शुरूआत भगवा आगाज़ के साथ हुई है। मोदी व शाह भाजपा का चेहरा-मोहरा बदलने के साथ इसे नए जमाने की नई पार्टी बनाना चाहते हैं, वहीं इसी पार्टी में दकियानूसों की भी कोई कमी नहीं है, जो दावा करते हैं कि चुनावों के ऐन पहले जब जब भाजपा ने राष्ट्र या प्रदेश स्तर पर अपना मुख्यालय बदला है, चुनावों में उसको मुंह की खानी पड़ी है। हाथ कंगन को आरसी क्या, इसी 3 मार्च को नगालैंड, त्रिपुरा व मेघालय विधानसभा चुनावों के नतीजे आने वाले हैं, तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
Posted on 26 February 2018 by admin
नरेंद्र मोदी बड़े बड़ों को सियासत का ककहरा कंठस्थ कराने का माद्दा रखते हैं, अपनी इमेज मेक ओवर की होड़ में उन्होंने देश के दिग्गज प्रधानमंत्रियों, मसलन नेहरू, इंदिरा और वाजपेयी को भी पीछे छोड़ दिया है, यह बात एक लेखक और अध्येता के तौर पर है। अब मोदी देश के सबसे ज्यादा पुस्तकें लिखने व उन्हें संपादित करने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। जहां मोदी की कुल 14 पुस्तकें प्रकाश में आई हैं, वहीं वाजपेयी की 11, चौधरी चरण सिंह की 8, चंद्रशेखर की 5, इंदिरा गांधी की 4, पंडित नेहरू की 3, नरसिंहा राव की 3, मोरारजी देसाई की 2 और मनमोहन सिंह की 1 पुस्तक है। वाजपेयी की 11 पुस्तकों में दो कविता संग्रह भी है, ’क्या खोया, क्या पाया’ और ’मेरी 51 कविताएं’ तो वहीं मोदी की पुस्तकों में उनकी कविता संग्रह, डायरी अंश और अन्य पुस्तकें सम्मिलित हैं। अगर बात भाषा की करें तो नेहरू, इंदिरा, गुजराल व राव ने जहां अपनी पुस्तकें अंग्रेजी में लिखी हैं, वहीं मोदी ने हिंदी व गुजराती में, वाजपेयी, चरण सिंह और चंद्रशेखर की पुस्तकें हिंदी भाषा में है। छात्रों को परीक्षा के टेंशन से उबारने के लिए ब्लू क्राफ्ट द्वारा संयोजित मोदी की ’एग्जॉम वारियर’ पुस्तक जो सूत्र वाक्य की दास्तां बयानी है, यह हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में पेंग्विन द्वारा प्रकाशित हुई है।
Posted on 26 February 2018 by admin
भाजपा व संघ परिवार में इस बात को लेकर एक तरह से आम सहमति बनी हुई है कि पार्टी या संघ के अंदर से प्रधानमंत्री पर सीधा हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही बात पहले विहिप के प्रवीण तोगडि़या को समझाने की कोशिश हुई, पर तोगडि़या जब फिर भी नहीं माने तो संघ ने ही उनका हिसाब किताब दुरूस्त कर दिया। भारतीय मजदूर संघ के ब्रजेश उपाध्याय ने भी गलती से ऐसा ही दुस्साहस कर दिया था, जिसकी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। अश्विनी महाजन भी इसी रास्ते पर चल निकले थे, पर अचानक से बजट के बाद उन्होंने यू-टर्न ले लिया, चुनांचे उन्हें अभयदान मिल गया। अब अनूप मिश्रा भी जब जाने-अनजाने इसी राह पर चल निकले और भरी सदन में जब उन्होंने हुंकार भरी कि सरकार केवल जुमलों से नहीं चलती, सरकार कैसे चलती है यह किसी को वाजपेयी जी से सीखनी चाहिए, तो राव इंद्रजीत सिंह ने उन्हें रोकना चाहा और उन्हें अपनी सीट पर बैठ जाने को कहा तो मिश्रा उन पर ही भड़क गए-’ अरे आप मुझे क्या सिखाइएगा, आप तो खुद कांग्रेस से आए हैं’, कहते हैं इस बात का भी संघ ने संज्ञान लिया है, सूत्र बताते हैं कि अनूप मिश्रा जो वाजपेयी के रिश्तेदार भी हैं, उन्हें बुलाकर आइना दिखा दिया गया है, और नए जमाने के नए दस्तूर में आइना भी हर बार सच ही बोले, यह जरूरी तो नहीं।
Posted on 26 February 2018 by admin
245 सदस्यों वाले राज्यसभा से इस अप्रैल कोई 59 सदस्यों की मियाद खत्म होने वाली है, वे रिटायर हो जाएंगे और अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को फिर से परवान चढ़ाएंगे। सबसे ज्यादा दमखम के साथ भाजपा ऊपरी सदन में वापसी करेगी तो सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ेगा। पर इन तमाम सियासी दांव-पेंचों के बावजूद सपा के तीन नेता ऐसे हैं जो भरोसे से कह रहे हैं कि सदन में उनकी वापसी होगा। दावा यही नरेश अग्रवाल भी कर रहे हैं और सपा के ही किरणमयी नंदा भी। नरेश अग्रवाल पाला बदल कर मुलायम खेमे से अखिलेश के खेमे में आ गए हैं। रिटायर तो सपा की जया बच्चन भी हो रही हैं, पर सुना जा रहा है कि इस दफे वो यूपी से नहीं बल्कि बंगाल से राज्यसभा में आएंगी। और इस बाबत उन्हें ममता दीदी से पूर्ण आश्वासन भी प्राप्त हो चुका है। तृणमूल वाले भी जया बच्चन को एक ’बंगाली आयकन’ बताने से पीछे नहीं हट रहे, और सूत्र बताते हैं कि जया व ममता की पिछले दरवाजे से सारी बात भी हो चुकी है। भाजपा के 8 केंद्रीय मंत्रियों की राज्यसभा की अवधि भी इस अप्रैल में समाप्त हो रही है, सो इनमें से ज्यादातर की पुनर्वापसी होगी, सूत्र बताते हैं कि शाह की ओर से और जिन लोगों को राज्यसभा का आश्वासन प्राप्त हुआ है उनमें से एक राजनाथ सिंह के राजनैतिक सलाहकार और उनके ज्योतिश सुधांशु त्रिवेदी हैं तो दूसरा नाम शाजिया इल्मी का सुना जा रहा है, जो ऊपरी सदन में आप के संजय सिंह की बोलती बंद कराने का माद्दा रखती हैं।
Posted on 26 February 2018 by admin
जब से अमित शाह की राज्यसभा में एंट्री हुई है, पत्रकारों का एक बड़ा जत्था उन्हें सेंट्रल हॉल में घेरे रहता है। इनमें से ज्यादातर वे मंझे और बड़े पत्रकार हैं जिनकी खबरों की भूख उन्हें अरूण जेटली के इर्द-गिर्द कदमताल करने को मजबूर करती थी। इन दिनों उनका अंदाज और नजरे इनायत कुछ बदला-बदला सा है, जेटली ने भी गिरती उठती सियासत के कई मौसम देखे हैं, उन्होंने इन रंग बदलते चेहरों की हकीकत भी देखी है जो मौके पर चौका लगाने का हुनर रखते हैं, सो जेटली आश्वस्त हैं कि क्या पता अगले सेशन तक लौट के बुद्दू घर आ जाएं।
Posted on 20 February 2018 by admin
सरकारी बाबुओं पर नकेल कसने की प्रधानमंत्री की कवायद कई मायनों में बेमानी साबित होती जा रही है। 2014 में जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, इसके बाद से वे लगातार इन कोशिशों में जुटे रहे कि बाबुओं और अफसरों को कैसे समय से ऑफिस आने के लिए प्रेरित किया जाए। जिन बड़े आईएएस अफसरों के ज्यादातर वक्त गोल्फ क्लब और सोशल गैदरिंग में गुजरता था, उन पर भी लगातार नज़र रखी गई। उनकी आदतों में किंचित बदलाव भी आया पर पूरी तरह से नहीं। सरकारी दफ्तरों को सुचारू व नियमित बनाने के लिहाज से बॉयोमैट्रिक्स लगवाए गए। पर इससे भी इनकी लेट-लतीफी का पूरी तरह से इलाज नहीं हो सका। सूत्र बताते हैं कि अब पीएमओ बाबुओं की गतिविधियों का रीयल अपडेट रखने के लिए और उनकी लोकेशंस पर नज़र रखने के लिए बॉयोमैट्रिक्स को जीपीएस से कनेक्ट करने की कवायदों में जुटा है। क्योंकि यह पाया गया है कि ज्यादातर अफसर व बाबू फील्ड वर्क और दूसरे बहाने कर दफ्तर से गायब हो जाते हैं, सो अब जीपीएस लगा कार्ड उन्हें अपने मोबाइल या टेबलेट में पंच करना पड़ेगा, जिससे उनके रीयल टाइम लोकेशंस का पता चलता रहे। अब बच के कहां जाओगे बाबू?
Posted on 20 February 2018 by admin
संसद सत्र के दौरान लोकसभा व राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग होती है, जिसे दोनों सदनों के सभापति चेयर करते हैं। और सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें संसदीय कार्य मंत्री भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, तो वहीं विपक्षी दलों के नेताओं की भी इसमें मौजूदगी होती है। पिछले सप्ताह इसी कमेटी की मीटिंग आहूत थी कि सदन में किन मुद्दों पर चर्चा होनी है, राज्यसभा कमेटी की मीटिंग को इसके सभापति वेंकैया नायडू चेयर कर रहे थे, पर सरकार की ओर से कोई भी मंत्री इस बैठक में मौजूद नहीं था, पर विपक्षी नेतागण हाजिर थे। सो, विपक्ष को इस बात का एडवांटेज मिल गया और उन्होंने राज्यसभा का एजेंडा आपसी बातचीत से तय कर लिया। तृणमूल कांग्रेस के डेरेक-ओ-ब्रायन ने इस बैठक से बाहर निकलकर ट्वीट किया-’भाजपा के रवैया को देख कर आप समझ सकते हैं कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर उनके मन में कितना सम्मान भाव बचा रह गया है?’ एक ओर जब राज्यसभा की इस कमेटी की बैठक चल रही थी तो दूसरी ओर लोकसभा कमेटी की बैठक भी वहां आहूत थी। वहां से भी मंत्रिगण नदारद थे, सुमित्रा ताई ने समझा कि मंत्री राज्यसभा की बैठक में होंगे, उनकी ढुंढाई हुई, पर न तो अनंत कुमार मिले और न ही अर्जुनराम मेघवाल। 25 मिनट बाद मेघवाल बैठक में तशरीफ लाए और इसके दस पांच मिनट बाद अनंत कुमार। अनंत कुमार ने सफाई देनी चाही कि वे पीएम के साथ मीटिंग में थे, पर विपक्षी नेताओं ने उनकी इस बात को ज़रा भी तवज्जो नहीं दी।
Posted on 20 February 2018 by admin
राहुल गांधी अपनी नई नवेली अध्यक्षीय पारी को किंचित ज्यादा ही गंभीरता से ले रहे हैं। आसन्न आम चुनावों की आहटों को भांपते उन्होंने भी नेपथ्य के सन्नाटों को पढ़ने की आदत डाल ली है। पिछले दिनों वे द्रमुक नेत्री कनिमोझी से मिले, 2जी केस से बरी होने के बाद कनिमोझी भी इन दिनों एक बदले अवतार में नज़र आ रही हैं। पूरी बातचीत के दरम्यान कनिमोझी राहुल को यह सियासी पाठ कंठस्थ कराने की कवायद कर रही थीं कि कांग्रेस और राहुल को तमिलनाडु में गठबंधन के लिए स्टालिन के बजाए कनि से बात करनी चाहिए। इस बारे में कनिमोझी के अपने तर्क थे और अपने स्वांग। कनि का राहुल से कहना था कि इस वक्त वह, उनके एक अन्य भाई अलागिरि और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.राजा साथ हैं। और इस तिकड़ी का द्रमुक राजनीति में ज्यादा प्रभाव है। कनि का कहना था कि उनका सेंट्रल तमिलनाडु, अलागिरी का दक्षिण तमिलनाडु में और ए.राजा का उत्तरी तमिलनाडु में खासा असर है। राहुल ने कनि की बातों को ध्यान से सुना, पर उनकी ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं आया।
Posted on 20 February 2018 by admin
कनिमोझी से मुलाकात में जहां राहुल गांधी की राजनैतिक परिपक्वता का पता चलता है, लेकिन जब बात यूपी की राजनीति की आती है तो वे गलती कर बैठते हैं। कभी मायावती के सबसे खास विश्वासपात्रों में शुमार होने वाले नसीमुद्दीन सिद्दिकी अपने पुत्र के साथ राहुल से मिलने पहुंचे। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यह मुलाकात जब सारगर्भित क्षणों के उफान पर थी तो नसीमुद्दीन से राहुल ने पूछा-’वैसे तो कांग्रेस में आपका स्वागत है, पर आप टिकट कहां से चाहते हैं?’ नसीमुद्दीन ने कहा वे अपने बेटे के लिए टिकट चाहते हैं और उसे बांदा से लड़वाना चाहते हैं। बांदा से सुनकर एक बार राहुल गलती कर बैठे, बोले-’बांदा, ऐतिहासिक भूमि है, जिसने राजनीति को प्रधानमंत्री के रूप में चंद्रशेखर जी दिया।’ नसीमुद्दीन ने टोका-’सर, वह बांदा नहीं बलिया है।’ राहुल चौंके, बोले-’ मैं तो समझता था कि बलिया बिहार में है।’