Posted on 21 December 2014 by admin
जब से नजमा आपा को इस बात की भनक लगी है कि बतौर मंत्री अब उनके दिन गिनती के हैं, और अब वह भी 75 पार के मंझधार में फंसने वाली है, तब से काम-काज में उनका जी किंचित कम ही लग रहा है। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि सरकार के सर्वशक्तिमान ने उनसे बातों ही बातों में पूछ लिया है कि ‘वह किस राज्य का गवर्नर बनना पसंद करेंगी?’ अब तो हालत यह हो गई है कि जब कोई पत्रकार नजमा आपा से फोन कर उनसे मिलने का समय मांगता है, तो मिलना तो दूर, पत्रकारों को उनके फोन का जवाब भी नहीं मिलता है। पिछले दिनों ऐसी ही एक विचित्र स्थिति पैदा हो गई जब नजमा हेपतुल्ला सदन में पहुंची तो उन्हें मालूम ही नहीं पड़ा कि विपक्षी हंगामे की वजह से सदन तो कब का स्थगित हो चुका है। सो उन्हें उल्टे पांव अपने कमरे में वापिस जाना पड़ा।
Posted on 13 December 2014 by admin
मोदी सरकार अपने हर बड़े फैसले में जन आकांक्षाओं को उसमें शामिल करने के प्रयास में जुटी दिखती है, ताजा मसला भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने से जुड़ा है। समझा जाता है कि अटल जी के 90वें जन्मदिवस के मौके पर इस आशय की घोषणा हो सकती है। पर सत्ता के गलियारों में एक और नाम की बहुत चर्चा है, वह है सुलभ स्वच्छता आंदोलन के जनक डा. विन्देश्वर पाठक का, जिन्हें भारत सरकार बहुत पहले ही 1991 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित कर चुकी है। इस बात के भी काफी कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ भी कहीं न कहीं डा. पाठक के सुलभ आंदोलन से अभिप्रेरित है। ‘भारत रत्न’ के लिए डा. पाठक का नाम सर्वप्रथम सन् 2012 के उत्रार्द्ध में प्रकाश में आया, जब केंद्र में यूपीए-दो की सरकार थी, सूत्र बताते हैं कि तब तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन हुआ था, उस कमेटी में शिंदे के अलावा विलासराव देशमुख, एस.एम.कृष्णा जैसे नेता भी शामिल थे। उक्त कमेटी ने डा. पाठक के नाम का प्रस्ताव किया था, और जब यह मसला तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पहुंचा तो उन्होंने कथित रूप से यह कहा कि चूंकि वे सुलभ से ‘ऑनेस्ट मैन ऑफ द् ईयर’ का अवार्ड ग्रहण कर चुके हैं, चुनांचे उनका (डा. पाठक का) नाम लेना ठीक नहीं रहेगा। समझा जाता है कि तब मनमोहन ने सोनिया गांधी से यह भी कहा कि चूंकि डा. पाठक का नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए चल रहा है, सो एक बार उन्हें नोबल मिल जाता है, तो ‘भारत रत्न’ के लिए उनके नाम की सहज घोषणा हो सकती है। विश्वस्त सूत्र तो यह भी दावा करते हैं कि उस वक्त स्वयं मनमोहन की नजर ‘भारत रत्न’ सम्मान पर टिकी थी। सूत्र बताते हैं कि तब उन्होंने अपने खास विश्वस्त मोंटेक सिंह अहलूवालिया के मार्फ्त सोनिया को यह संदेशा भी भिजवाया था, पर सोनिया ने इस मामले में चुप्पी साध ली। सुलभ ने अटल बिहारी वाजपेयी को ‘ऑनेस्ट मैन ऑफ द् ईयर’ अवार्ड देने की घोषणा तब की थी जब वाजपेयी नेता प्रतिपक्ष थे, और प्रधानमंत्री बनने के बाद वाजपेयी ने इस पुरस्कार को सहर्ष स्वीकार भी किया। डा. पाठक की उनके टू-पिट-पोर फ्लश तकनीक वाले सुलभ शौचालय के अन्वेषण, मैला ढोने के अमानवीय कार्य से जुड़े स्कैवेंजर्स के पुनर्वासन और वृंदावन, वाराणसी व उत्तराखंड की विधवा औरतों को एक नया जीवन और एक नया मायने देने के लिए देश-विदेश में काफी सराहना भी हुई है और समझा जाता है कि लगातार उनका नाम नोबल शांति पुरस्कार के लिए भी चल रहा है। सनद रहे कि ‘भारत रत्न’ की प्रस्तावना प्रधानमंत्री स्वयं राष्ट्रपति से करते हैं और प्रति वर्ष ज्यादा से ज्यादा 3 लोगों को ही यह सम्मान दिया जा सकता है। सन् 2014 के ‘भारत रत्न’ सम्मान के लिए वाजपेयी और डा. पाठक के अलावा सुभाष चंद्र बोस और कांशी राम के नाम की भी चर्चा है।
Posted on 13 December 2014 by admin
दिल्ली के निजाम को एक नया चेहरा-मोहरा, नया रंग-रोगन क्या मिला इसकी पूरी कार्यशैली ही बदल गई है, नहीं तो क्या यह महज इत्तफाक था कि इस बात की भारत की विदेश मंत्री, अमरीका और भारत के विदेश विभाग को कानों खबर नहीं हुई और 26 जनवरी के गणतंत्र दिवस परेड में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए अमरीका के सर्व शक्तिमान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पलभर में हामी भर दी। माना जाता है कि मूल रूप से यह आइडिया भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का था, इस बात का जिक्र उन्होंने अपने खास विश्वस्त अजित डोवल से किया और डोवल प्रधानमंत्री की इस इच्छा कोर् मूत्त रूप देने में जुट गए, उन्होंने सीधे अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निदेशक एडमिरल माइकल एस.रोजर्स से संपर्क साधा और बात बन गई। सबसे हैरत की बात तो यह रही कि स्वयं अमरीकी स्टेट डिपार्टमेंट भी इस बात से अनजान था, जब इस आशय की घोषणा होने वाली थी तब कहीं जाकर स्टेट डिपार्टमेंट को इस बात की भनक मिली।
Posted on 13 December 2014 by admin
नव वर्ष के मार्च महीने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में एक बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। संघ नेतृत्व की कोशिश संघ को एक बदले अवतार में सामने लाने की है, और इसे एक युवा, आधुनिक और प्रगतिशील मुलम्मा देने की भी तैयारी है। संघ में नंबर दो और इसके सर कार्यवाह (जनरल सेके्रटरी) सुरेश राव जोशी यानी भैय्या जी जोशी का दूसरा टर्म आने वाले मार्च में समाप्त हो रहा है, इनकी जगह लेने के लिए संघ के किसी सह सर कार्यवाह (ज्वाइंट जनरल सेक्रेटरी) का नाम सामने आ सकता है। इस वक्त संघ में तीन सह सर कार्यवाह हैं, ये हैं दत्तादेत्र होसबोले, सुरेश सोनी और कृष्ण गोपाल। गोपाल को पहले ही संघ की ओर से भाजपा का प्रभारी बनाया जा चुका है। उन्होंने यह जगह सुरेश सोनी से हासिल की है। चुनांचे फिलवक्त इस रेस में दत्तात्रेय होसबोले सबसे आगे दिखते हैं। उन्हें संघ में नरेंद्र मोदी का सबसे करीबी व्यक्ति माना जाता है, होसबोले मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं, उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में एमए किया है, और संघ के एक पूर्व सरकार्र्यवाह दिवंगत एच.वी.शेषाद्रि के अनुयायी रहे हैं। संघ प्रमुख मोहन भागवत के लिए अपने लिए अपना उत्तराधिकारी चुनना कतई आसान नहीं रहने वाला, सर कार्यवाह स्वाभाविक रूप से सर संघचालक बनने का दावेदार होता है। पर सर कार्यवाह के चुनाव में इसके अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की एक महती भूमिका होती है, जो सर संघचालक के साथ मिल कर सर कार्यवाह का चुनाव करती है। प्रतिनिधि सभा की बैठक प्रति वर्ष होती है, पर पदाधिकारियों के चुनाव हर तीन वर्षों के उपरांत होते हैं। सो, अगर होसबोले संघ में नंबर दो बनते हैं तो प्रधानमंत्री मोदी को चंद बड़े निर्णय लेने में सहूलियत हो सकती है।
Posted on 13 December 2014 by admin
मोदी राज्य में सत्ता के दलालों और तमाम लॉबिस्ट की दुकानें उजड़ने लगी हैं, उनके मंसूबे बेनूर होने लगे हैं। देश में लंबे समय से पीआर की सबसे महंगी दुकान चलाने वाले और सोनिया-राहुल तक अपनी सीधी पहुंच रखने वाले एक शख्स को इस दफे पहली बार अपनी क्रिसमस पार्टी रद्द करनी पड़ी, क्योंकि उनकी पार्टी में भाजपा का कोई बड़ा नेता या सरकार का कोई मंत्री आने को राजी नहीं हुआ। इनकी पत्नी भी इस दफे अपने प्रयासों में बेअसर दिखीं, नहीं तो पेज-थ्री पार्टियों में मैडम की धूम रहा करती थी और देश के दामाद जी रॉबर्ट वाड्रा तक इनकी सीधी पहुंच थी। वैसे ही एक विज्ञापन एजेंसी की आड़ में कॉरपोरेट लॉबिंग करने वाले शब्दों के एक सेठ की भी हवा पस्त है, उनकी दुकान फीकी है, अरमान बेनूर से, उनके टि्वटर अकाऊंट से भी अब वह समा नहीं बंध रहा, वैसे ही देश के एक बड़े औद्योगिक घराने से ताल्लुक रखने वाले झारखंड के एक चर्चित राज्यसभा सांसद की दुकान भी मंथर गति से चल रही है, न सिर्फ उनका जलवा कम हुआ है, बल्कि सरकार के मंत्रिगण भी उनसे मिलने से कतरा रहे हैं।
Posted on 13 December 2014 by admin
नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस राय से पूरी तरह इत्तफाक रखते हैं कि 75 पार के नेता नेत्रियों को सक्रिय राजनीति से तौबा कर लेनी चाहिए। इससे न सिर्फ राजनीति को एक नया चेहरा-मोहरा मिलता है, बल्कि नए लोगों को राजनीति में आने का मौका भी मिलता है। इस कड़ी में जहां नजमा हेपतुल्ला को एक प्रमुख राज्य का गवर्नर बनाकर भेजे जाने की तैयारी है। वहीं आने वाले दिनों में इस कड़ी में गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल भी शामिल हो सकती हैं। आनंदी बेन इस वक्त 73 वर्ष की हैं, 75 वर्ष की आयु होने के बाद उन्हें भी सक्रिय राजनीति को अलविदा कहना पड़ सकता है। उन्हें भी किसी राज्य का गवर्नर बनाया जा सकता है। आनंदी बेन की जगह मोदी अपने किसी खास विश्वस्त को गुजरात का नया मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगे। इस कड़ी में अमित शाह का नाम रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है।
Posted on 13 December 2014 by admin
मदन मित्रा, ममता सरकार के परिवहन मंत्री, पहले ऐसे मंत्री हैं जिन्हें 2 हजार करोड़ के सारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया है। पर उन्हें जेल जाने का कतई इतना बड़ा अफसोस भी नहीं, अपनी गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्होंने खम्म ठोककर कहा, ‘कोई नेता जेल जा रहा है, इसमें कुछ नया तो नहीं, भारत के स्वतंत्रता संग्राम में भी हमारे कई बड़े नेताओं को जेल जाना पड़ा, महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस भी जेल गए, अब मैं जा रहा हूं, इसमें चौंकाने वाली क्या बात है?’
Posted on 07 December 2014 by admin
राष्ट्रीय स्वयंसेवक का विदेश विभाग इन दिनों पूरी दक्षता व तन्मयता के साथ मोदी के वैश्विक विचारों को संघ के मूल सिध्दांतों की कड़ी से जोड़ने में जुटा है। संघ का विदेश विभाग लंबे समय से इसके एक प्रमुख नेता मदनदास देवी के भरोसे रहा है। पिछले काफी समय से मदनदास जी की तबियत नासाज चल रही है, चुनांचे इस कार्य में उन्हें दत्तात्रेय होसबोले और नागेंद्र का पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है। यूं भी मदनदास और नरेंद्र मोदी के संबंधों में एक अलग किस्म का ताना-बाना बुना है। मदनदास काफी पहले से मोदी के पक्ष में अलख जगाते रहे हैं, इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि वे और मोदी दोनों एक ही गांव से आते हैं। पिछले दिनों जब दत्तात्रेय होसबोले अपनी यूरोप यात्रा पर गए थे तो उन्हें यूरोप में संघ का परचम लहराने में रामवैद्य और सौमित्र गोखले का भरपूर साथ मिला था। लंदन और पेरिस जैसे शहरों में दत्तात्रेय पब्लिक ट्रांसपोर्ट से यात्रा करते रहे। सनद रहे कि होसबोले का धर्म और कला के बारे में खासा अध्ययन है। सो, अपनी पेरिस व नीदरलैंड की यात्रा में उनका बहुत सारा वक्त वहां के अलग-अलग म्यूजियम में गुजरा। संघ की योजना 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मनाने की है, इस दिन पूरी दुनिया में एक साथ योग दिवस को मनाया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग देशों में संघ से सहानुभूति रखने वाले और इसके कार्यों को आगे बढ़ाने वाले लोगों की शिनाख्त की जा रही है। जैसे संघ के एक स्वयंसेवक नार्वे में मंत्री रह चुके हैं, त्रिनिदाद के चीफ जस्टिस संघ के करीबी रहे हैं, ब्रिटेन के कम से कम दो एमपी संघ के करीबी रहे हैं। संघ का दायरा बढ़ाने के लिए अमरीका और यूरोपीय देशों में काम कर रहे युवाओं खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को संघ की शाखाओं में लाने के प्रयास हो रहे हैं। जैसे सिलिकन वैली में संघ की ओर से यह जिम्मा येलो जी राव, वॉशिंगटन डीसी में राधेश्याम त्रिवेदी व वेद प्रकाश नंदा और इंग्लैंड में धीरज भाई शाह संभाल रहे हैं। यानी संघ इन दिनों पूरी तरह ग्लोबल होने के प्रयासों में जुटा है।
Posted on 07 December 2014 by admin
अपनी राज्य मंत्री साध्वी निरंजना ज्योति के उस विवादास्पद बयान से नरेंद्र मोदी इतने आहत और उद्वेलित थे कि वे साध्वी को तत्काल प्रभाव से अपने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाना चाहते थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने साध्वी के मामले में विपक्ष का अड़ियल रवैया देखा उन्होंने अपना इरादा बदल लिया। मोदी से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री का कहीं शिद्दत से मानना है कि अगर उन्होंने एक बार विपक्ष की बात मान ली तो जाने-अनजाने वह सत्ताधारी दल के खून का प्यासा हो जाएगा, और ऐसे वक्त में जबकि केंद्र सरकार के खिलाफ तमाम विपक्षी दल लामबद्द होने में जुटे हों, ऐसे में सरकार का थोड़ा भी झुकना उनके लिए विरोध की नई जमीन मुहैया करा देगा। यही वजह है कि मोदी ने तय कर लिया है कि चाहे कुछ भी हो जाए विपक्ष के आगे उनकी सरकार नहीं झुकेगी।
Posted on 07 December 2014 by admin
जेल में बंद संजय दत्त का पसंदीदा शगल इन दिनों रात-दिन शिव पुराण पढ़ना है। दत्त परिवार से जुड़े एक करीबी सूत्र का दावा है कि हालिया दिनों में अब तक उन्होंने तीन दफे शिव पुराण को आद्योपांत पढ़ लिया है। पर लगता है भोले बाबा ने उनकी अभी सुनी नहीं है, संजय दत्त ने 14 दिनों के पैरोल के लिए आवेदन किया है क्योंकि आमिर खान के साथ उनकी पिक्चर ‘पीके’ आने वाली है। संजय इस फिल्म में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका में है, चुनांचे इस फिल्म के प्रमोशन की भी काफी जिम्मेदारी उनकी है। वहीं आईजी जेल को लगता है कि चूंकि अभी संसद सत्र चल रहा है, चुनांचे जेल प्रशासन नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार की कंट्रोवर्सी पैदा हो, लिहाजा संजय दत्त को उनके पैरोल के लिए संसद सत्र के समाप्त होने का इंतजार करना पड़ सकता है।