Posted on 29 December 2014 by admin
दिल्ली का निााम भले ही बदल गया हो, पर प्रसार भारती के नियंत्रण वाले दूरदर्शन का ना तो चेहरा-मोहरा ही बदल पाया और न ही इसकी नियति। प्रकाश जावड़ेकर ने मंत्री रहते डीडी के स्वायतत्ता को लेकर तमाम खटराग अलापे थे, पर वास्तव में हुआ कुछ नहीं। जब से अरुण जेतली नए सूचना प्रसारण मंत्री बने हैं, उनके पास डीडी के लिए वक्त ही नहीं, उनके जूनियर राजवर्ध्दन राठौर तो बस अपनी ही ठसक में रहते हैं। पूर्व पत्रकार सूर्य प्रकाश जो 2-3 वर्ष जी न्यूज में भी नौकरी कर चुके हैं, उनसे डीडी वालों को बड़ी उम्मीदें थीं, मसलन जब धर्मांतरण का मसला संसद में गूंज रहा था तो दूरदर्शन इस मसले पर कुछ खास कार्यक्रम बनाना चाहता था, इस मामले पर अपने स्टूडियो में बड़ी बहस करवाना चाहता था, पर इस मामले को ‘ऊपरी दखल’ के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। स्वयं सूर्य प्रकाश जब दूरदर्शन की मीटिंग में आते हैं तो चैनल के ‘फील’ और ‘लुक’ के बारे में ज्यादा बातें करते नार आते हैं। मसलन हर बैठक में सूर्य प्रकाश दूरदर्शन की वाचिकाओं के मेकअप का मुद्दा जरूर उठाते हैं, कहते हैं-‘मेकअप थोड़ा हैवी हो रहा है, आंखों का मेकअप खास कर आई शेडो भी अलग से पता चलता है…।’ अब तक दूरदर्शन वाले समझ चुके हैं कि सूर्य प्रकाश भी कंटेंट से कहीं ज्यादा, सौंदर्यबोध की समझ रखने वाले हैं।
Posted on 29 December 2014 by admin
जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने को लेकर भाजपा नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी लगातार दोनों दलों के संपर्क में है। पर स्वयं नरेंद्र मोदी को पीडीपी के बजाए एनसी का साथ ज्यादा मुफीद लग रहा था, बीजेपी के 25, एनसी के 15 और 6 निर्दलीय को साथ लेकर मोदी जितेंद्र सिंह को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का इरादा रखते हैं, नेशनल कांफ्रेंस को वे उप मुख्यमंत्री का पद देने को तैयार थे, इस बाबत उनकी उमर अब्दुल्लाह से बात भी हो चुकी थी। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने उमर से यह भी वायदा किया है कि उन्हें फरवरी में राज्यसभा में भी लेकर आया जाएगा और केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री भी बनाया जा सकता है। पर 6 में से कुछ निर्दलीय लगातार पीडीपी के संपर्क में है, यही बात मोदी और भाजपा को परेशान कर रही है।
Posted on 29 December 2014 by admin
प्रधानमंत्री को शनै: शनै: अपने कैबिनेट साथियों से निराशा हो रही है, उनकी सरकार को केंद्र की सत्ता में आए सात महीने से ऊपर हो गए, पर कई मंत्रालयों मसलन वित्त, स्वास्थ्य, मानव संसाधन, ऊर्जा, पेट्रोलियम, कॉमर्स के कार्य व फैसलों में परिस्थितिजन्य जड़ता हावी दिखाई दे रही है। मोदी का आग्रह 2015 के आम बजट को लेकर इसे किसानोन्मुखी बनाने का है, मोदी चाहते हैं कि यह बजट ग्रामीण भारत की समग्रता में बात करें, तमाम मंत्रालयों व मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर पीएमओ की खास नजर है, और सरकार के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर रिपोर्ट कार्ड को सार्वजनिक भी किया जा सकता है, और तब कई मंत्रियों की छुट्टी भी मुमकिन है।
Posted on 29 December 2014 by admin
मोदी सरकार की देखा-देखी शिवराज सिंह चौहान भी अपने मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करवा रहे हैं, शिवराज लगातार तीसरी बार सत्ता में है और इस दिसंबर में उनकी हैट्रिक सरकार ने एक वर्ष पूरे कर लिए हैं, पर मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड देखने के बाद शिवराज के होश फाख्ता हैं, मसलन उनके शिक्षा मंत्री पारस जैन के शिक्षा मंत्रालय में 850 करोड़ रुपयों के फंड का इस्तेमाल नहीं हो पाया, वहीं ज्यादातर सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हालत में है, 19 हजार स्कूल ऐसे हैं जहां शौचालय नहीं है। कृषि मंत्री के रिपोर्ट कार्ड से परिलक्षित हो रहा है कि राज्य में खाद की भारी किल्लत है, किसानों को फरवरी से पहले खाद मुहैया करा पाना मुमकिन नहीं होगा, तब तक ये खाद किसानों के किसी काम के नहीं रह जाएगी। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कार्ड से प्रतिध्वनित हो रहा है कि अभी मध्य प्रदेश के 21 जिले ऐसे हैं जहां ‘सिमी’ ने अपने जड़ें गहरी जमा ली हैं, बालाघाट में नक्सली गतिविधियों में तेजी आई है, कहां शिवराज को उम्मीद थी कि मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड से उन्हें हर ओर से वाहवाही मिलेगी, पर अब हो रहा है इसका उल्टा।
Posted on 29 December 2014 by admin
जनता परिवार अभी एक हुआ भी नहीं और इन पार्टियों के अंदर विरोध के स्वर शनै: शनै: मुखर होने लगे हैं, सपा नेताओं का एक बड़ा वर्ग है जो यह चाहता है कि लालू, नीतीश, चौटाला, देवेगौड़ा आदि की पार्टियों का विलय कर जो एक नई पार्टी बने उसका चुनाव चिन्ह साइकिल हो, पर लालू-नीतीश जैसे खांटी समाजवादी इस साइकिल की सवारी को राजी नहीं, वे कोई नया चुनाव चिन्ह चाहते हैं। पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के दर्जन भर राज्यसभा सांसदों का जमावड़ा जया बच्चन की अगुवाई में नई दिल्ली के पंचतारा होटल ओबरॉय में जुटा, नरेश अग्रवाल, रामगोपाल यादव सहित ये तमाम सांसद होटल के टेरिस फ्लोर पर अवस्थित एक चाइनीज रेस्तरां में डिनर का लुत्फ उठाते देखे गए, डिनर का मैन्यू भले ही चाइनीज रहा हो, वैचारिक एका का मैन्यू खालिस समाजवादी था, इन सांसदों ने एकमत से इस प्रस्ताव का सहमति की मुहर लगाई कि बगैर साइकिल जनता परिवार के मिलन की डगर है मुश्किल।
Posted on 21 December 2014 by admin
सियासत बदलते वक्त का आइना है अगर, तो उस आइने में स्याह चेहरों की हकीकत को बेपर्दा होते देखा जा सकता है। कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी की तबियत इन दिनों नासाज है, सांस की तकलीफ है, कांग्रेस भी कहीं न कहीं ऐसी ही तकलीफ से जूझ रही है। सोनिया का इलाज नई दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में चल रहा है, वहीं बीमार कांग्रेस राहुल के हवाले है। पहले कभी अगर सोनिया रूटीन चेकअप के लिए भी अस्पताल मेंर् भत्ती होती थीं, तो उनसे मुलाकात के इच्छुक अभ्यर्थियों की कतार लंबी से लंबी हुआ करती थी, पर जब से दिल्ली का निााम बदला है, सत्ता की रवायतें बदल गई हैं, मुलाकातियों की सूची सिकुड़ गई है, उफान लेती उम्मीदें भी आसमां से जमीं पर आ गई हैं। इस बार सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के परिदृश्य में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के समक्ष घोषणा की थी कि वह इस साल अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगी। चुनांचे अपने जन्मदिन के मौके सोनिया ने प्रियंका व रॉबर्ट के साथ डिनर का एक छोटा सा निजी कार्यक्रम रखा और वह नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक इटेलियन रेस्तरां ‘आरटूसी’ में रात्रि भोजन के लिए गईं तो रेस्तरां में मौजूद लोगों में कोई हलचल पैदा नहीं हुई, गांधी परिवार को डिनर टेबल पर ‘डिस्टर्ब’ करने कोई नहीं आया, न ऑटोग्राफ लेने वालों की कतार लगी और न ही सोनिया-प्रियंका के साथ फोटो खींचवाने के लिए कोई धकमपेल ही मची। पर यह बात ज्यादा पुरानी नहीं, सोनिया के पिछले जन्मदिवस के मौके पर जब गांधी परिवार सोनिया का जन्मदिन सेलिब्रेट करने नई दिल्ली के हयात होटल के लॉ-पियााा रेस्तरां में गया था, तब सोनिया का ऑटोग्राफ लेने और उनके साथ फोटो खिंचाने के लिए रेस्तरां में भारी भीड़ जमा हो गई थी। पर महज एक वर्ष के अंतराल ने सोनिया व कांग्रेस की सियासत से रूसवाई की कई सिलवटें चस्पां हो गई है।
Posted on 21 December 2014 by admin
भाजपा की इस पर पैनी निगाहें हैं कि जो आप और कांग्रेस के बीच इन दिनों खिचड़ी पक रही है, सूत्र बताते हैं कि नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित अमन होटल में कई प्रमुख कांग्रेसी नेताओं से अरविन्द केजरीवाल की गुपचुप मुलाकातें हो चुकी हैं और समझा जाता है कि इन मुलाकातों में इस बात को लेकर एक अघोषित सहमति भी बन चुकी है कि फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-आप मिलकर भाजपा के समक्ष एक महती चुनौती उछालेंगे। और सब ठीक-ठाक योजनाबद्द रूप से चला तो आने वाले डेढ़-दो वर्षों में केजरीवाल ‘आप’ का विलय कांग्रेस में करने की भी सोच सकते हैं। शायद यही वजह है कि ‘आप’ और कांग्रेस की ई-सेना अब मिलजुल कर एक दूसरे के बजाए सीधे भाजपा पर निशाना साध रही है। और ‘आप’ के मुकाबले दिल्ली में कांग्रेस का प्रचार अभियान भी ठंडा पड़ा हुआ है।
Posted on 21 December 2014 by admin
मोदी सरकार के संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के समक्ष लोकसभा की तुलना में राज्यसभा में चुनौतियां कहीं ज्यादा बड़ी हैं, क्योंकि ऊपरी सदन में कांग्रेस का नंबर कहीं ज्यादा है। कांग्रेसी दिग्गजों समेत अन्य पार्टियों के दिग्गज नेताओं मसलन शरद यादव, लालू यादव, मायावती, सीताराम येचुरी आदि का यहां जमावड़ा जुटा रहता है। चुनांचे ऐसी सूरत में राज्यसभा को चला पाना सत्ता पक्ष के लिए टेढ़ी खीर ही है। विरोधी दल जहां हर छोटे बड़े मसले पर सीधे संसद में प्रधानमंत्री का बयान या स्पष्टीकरण चाहते हैं, तो भाजपा व नकवी के समक्ष सबसे महती चुनौती नरेंद्र मोदी की मजबूत नेता की इमेज को खर्च होने से बचाने की रहती है। सो, ऊपरी सदन में नकवी विपक्षी दलों के नेताओं से अपने अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए सदन को सुचारू रूप से चलाने की जद्दोजहद करते दिखे, अगर काम-काज की दृष्टि से देखें तो राज्यसभा लगातार विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ती रही। कुल मिलाकर महज चार दिन ही काम-काज के रहे, पर चतुर सुजान नकवी 11 महत्त्वपूर्ण बिल इस सदन से पास कराने में कामयाब रहे।
Posted on 21 December 2014 by admin
जेल से पेरौल मिलने में हो रही देरी से संजय दत्त खासे नाखुश बताए जाते हैं। संजय के वकीलों का भी दावा है कि साल में दो दफे 30 दिनों के पेरौल पर तो उनका कानूनी हक बनता है। संजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘पीके’ भी इस शुक्रवार को रिलीज हो चुकी है और बॉक्स ऑफिस पर खासी धमाल मचा रही है, संजय चाह कर भी इस फिल्म के प्रमोशन में हिस्सा नहीं ले पाए। सनद रहे कि संजय दत्त पुणे की यरवदा जेल के एक अंडाकार सेल में बंद है। इस सेल में उनके साथ 75 वर्षीय एक बुजुर्ग कैदी भी हैं, जिनकी देखरेख का जिम्मा भी संजय ही उठाते हैं। भले ही संजय अपने इस सेल में पूरी तरह पैर फैलाकर नहीं सो पा रहे हों, पर वे जेल में भी अपने खान-पान और कसरत का पूरा ध्यान रखते हैं। दाल-चावल की जगह वे फल-सब्जी खाना पसंद करते हैं। कसरत के लिए दो बाल्टियों में पानी भर कर उसको डंबल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जेल में वे नियम से पूजा-पाठ करते हैं, विशष तौर पर शिवपुराण का पाठ करते हैं, वैसे भी उनकी माफी की अर्जी गृह मंत्रालय में पेंडिंग पड़ी है, उनकी सजा की मियाद भी अब मात्र आठ महीने शेष है। सो, माफी मिलने को लेकर उनमें कोई बहुत ज्यादा उत्साह शेष नहीं रह गया है।
Posted on 21 December 2014 by admin
21 जून को ‘विश्व योग दिवस’ के तौर पर मनाने की नरेंद्र मोदी और संघ की इस मुहिम को 177 देशों का समर्थन हासिल हुआ, इस बात से उत्साहित होकर संघ के करीबी माने जाने वाले अप्रवासी बिजनेसमैन अंशुमान मिश्र ने पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी और उनसे मांग की है कि भारत के तमाम बड़े रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर एक ‘योग रूम’ का प्रावधान किया जाए। बकौल अंशुमान, यह मांग कतई बेतुकी नहीं, क्योंकि मिडिल ईस्ट के तमाम एयरपोर्ट्स पर मुस्लिमों के लिए नमाज अता करने के लिए अलग से कमरा होता है, यही व्यवस्था जापान के हवाई अड्डों पर भी रहती है। जहां एक ‘प्रेअर रूम’ की व्यवस्था होती है। यहां तक कि अमरीका के सैन फ्रेंसिस्को, अल्बुकरेक, डलास, शिकागो और नॉर्थ कैरोलिना के रालेग हवाई अड्डों पर ‘योग रूम’ पहले से मौजूद है, फिनलैंड के हेलसिंकी एयरपोर्ट पर भी यह व्यवस्था है। नॉर्थ कैरोलिना जो बाइबिल के बोलबाले वाला राज्य है, और जहां कैथोलिक आबादी का बड़े पैमाने पर प्रभुत्व है, वहां भी ‘योग रूम’ से अलहदा एयरपोर्ट पर एक ‘मेडिटेशन रूम’ बनाया गया है। एक कदम आगे बढ़कर कभी महर्षि महेश योगी के करीबी रहे अंशुमान मिश्र बौध्द धर्मावलंबियों के लिए भारतीय रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर प्रधानमंत्री से ‘जेन रूम’ बनाने की भी मांग कर रहे हैं। अब इस अपील में कितनी सियासत और कितना अध्यात्म निहित है, इसका फैसला तो प्रधानमंत्री को ही करना है।