Posted on 04 February 2015 by admin
सरकार के मंत्रियों का एक दूसरे से मेल जोल, एक दूसरे के घर आना-जाना, आव-भगत करना इसमें कुछ अजूबा नहीं, न ही किसी खबर का प्रस्फुटन है। लेकिन जब एक दिन यूं अचानक सुषमा स्वराज लंच के लिए राजनाथ सिंह के सरकारी आवास पर पहुंचती है और इन दोनों नेताओं के बीच लंच के बहाने घंटों गुफ्तगू होती है तो सियासी नेपथ्य में छुपी बैचेन आहटों की करवटों को सहज महसूस किया जा सकता है, विरोधी खेमे में मची हलचल की तीव्रता को भी समझा जा सकता है और नए सियासी इशारों के प्रस्फुटन को भी।
Posted on 18 January 2015 by admin
संघ और मोदी के अंतर्संबंधों में नए आयाम विकसित हुए हैं, समझा जाता है कि बदले सियासी परिदृश्य में संघ मोदी के पीछे आंख-मूंद कर चलने को तैयार नहीं, और वह मोदी के आई, मी, मायसेल्फ की राजनीति को आत्म प्रवंचना की छाया से मुक्त कराना चाहता है, शायद यही वजह है कि अब भाजपा के अंदरूनी मसलों पर भी संघ सरचालक मोहन भागवत बढ़-चढ़कर बयान दे रहे हैं। हालिया दिनों में संघ नेताओं की कई मैराथन बैठकें हुई है, संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव बतौर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के लिए आखिरी चुनाव साबित हो सकते हैं। नवंबर में भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना है, सूत्रों की मानें तो संघ अमित शाह पर दोबारा दांव लगाने के पक्ष में नहीं। मोहन भागवत एक से ज्यादा मौकों पर मोदी से कह चुके हैं कि उनकी राय में प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष दोनों को एक ही राज्य से नहीं होने चाहिए। चुनांचे अगर यह ‘भागवत थ्योरी’ परवान चढ़ती है तो फिर पार्टी के अगले अध्यक्ष के लिए नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा के नाम रेस में आगे आ सकते हैं, और अगर इन तीनों नामों में से ही चुनना पड़ा तो सियासत के चतुर सुजान मोदी अपना फैसला नड्डा के हक में सुना सकते हैं।
Posted on 18 January 2015 by admin
अगर राजनीति अवसर का लाभ उठाने की सही रणनीति का नाम है तो पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी इसमें स्वयं सिद्धा हैं, दिल्ली भाजपा के कई पुराने धुरंधरों को चित्त करते हुए उन्होंने अपनी नई सियासी पारी का आगाज किया है। भाजपा में शामिल होने से पूर्व जब वो अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री से मिलने पहुंची, तो मोदी की स्पष्ट मंशा उन्हें चुनावी अखाड़े में केजरीवाल के खिलाफ उतारने की थी, भाजपा के नवअवतरित चाणक्य शाह के लिए भी यह एक बड़ा झटका था जब बेदी ने विन्रमतापूर्वक मोदी के इस आग्रह को ठुकराते हुए अपनी ओर से चार विधानसभा सीटों के नाम लिए जहां से वह चुनाव लड़ने की इच्छुक हैं। इस कड़ी में पहला नाम हर्षवर्ध्दन द्वारा रिक्त की गई कृष्णा नगर सीट का था, जहां हर्षवर्ध्दन ने वाकई काफी काम किए हैं और इसे सहज रूप से भाजपा की एक आसान सीट मानी जा सकती है। सूत्रों का कहना है कि बेदी ने इसके अलावा कस्तूरबा नगर, मालवीय नगर या फिर शालीमार गार्डन विधानसभा सीट से लड़ने की इच्छा जताई है। बेदी के भगवा अभ्युदय से न सिर्फ भाजपा की अंदरूनी राजनीति में उफान है, बल्कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस बाबत अपनी सार्वजनिक नाखुशी जाहिर कर दी है। बेदी को लेकर भाजपा और ‘आप’ की ‘ई-आर्मी’ भी आमने-सामने है। ‘आप’ की ‘ई-आर्मी’ खुलकर मांग कर रही है कि अगर बेदी में हिम्मत है तो वह केजरीवाल के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर दिखाएं, वहीं किरण बेदी के इरादे कुछ और हैं उनकी नारें कहीं किसी बड़े अंजाम पर टिकी हैं।
Posted on 18 January 2015 by admin
देश के तमाम प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को सोनिया गांधी की चिट्ठी के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में अब राहुल गांधी ही पूरी तरह से कांग्रेस के खेवनहार होंगे। सोनिया ने अपनी चिट्ठी में साफ कर दिया है कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ही कांग्रेस के भावी नेतृत्व के प्रतीक हैं। जल्द ही इस आशय का ऐलान मुमकिन है। अपनी चहुंओर से हो रही आलोचनाओं के मद्देनजर राहुल भी अब खुद को बदलने का जतन कर रहे हैं, राहुल पर सबसे बड़ा आरोप यह है कि वे पार्टी नेताओं की सुनते नहीं, अपनी कोटरी के कहने पर मनमाने फैसले लेते हैं। चुनांचे इस अवधारणा को तोड़ने के लिए हालिया दिनों में राहुल देश भर से आए 300 कांग्रेसी नेताओं से 10-10 के ग्रुप में मिले और एक ग्रुप को तकरीबन 3 घंटे का वक्त दिया। वहीं पार्टी फोरम पर भी वे तर्कसंगत फैसले लेते दिख रहे हैं, दिल्ली विधानसभा चुनावों के परिप्रेक्ष्य में आहूत एक बैठक में जब अधिकांश पार्टी नेताओं की राय बन रही थी कि चूंकि इस दफे यहां मुकाबला भाजपा बनाम ‘आप’ है, और दोनों पार्टियों के बीच मत प्रतिशत का मामूली अंतर है सो कांग्र्रेस को अंदरखाने से ‘आप’ उम्मीदवारों का समर्थन कर भाजपा का खेल बिगाड़ना चाहिए, तो वहीं राहुल का कहना था कि 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तकरीबन 25 फीसदी वोट हासिल हुए थे। सो, कांग्रेस को मजबूती के साथ यह चुनाव लड़ना चाहिए और अपने मत प्रतिशत में बढ़ोत्तरी करनी चाहिए, पुराने व खर्च हो चुके चेहरों के बजाए नए चेहरों पर दांव लगाना चाहिए, कांग्रेस उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट कहीं न कहीं राहुल की भावनाओं की ऐसी ही खुली अभिव्यक्ति है, वहीं कांग्रेस के ताजा चुनावी अभियानों में ‘आप’ पर सीधा निशाना साधा जा रहा है, यही वजह है कि ताजा जनमत सर्वेक्षणों में कांग्रेस की सीटें अब 8 की गिनती छूने लगी है।
Posted on 18 January 2015 by admin
कोयला घोटाले की आंच की तीव्रता जिस मानिंद परवान चढ़ रही है, इसकी जद में आने वाले नेतागण कानूनी सहायता और बड़े वकीलों के साथ के बावजूद देवी-देवताओं की शरण में हैं। काशी से लेकर कामख्या तक में पूजा-पाठ के दौर जारी हैं। सूत्रों की मानें तो श्रीप्रकाश जायसवाल, प्रफुल्ल पटेल और विजय दरदा की ओर से पूजा-पाठ अनुष्ठान के अलावा निरंतर जाप भी कराए जा रहे हैं। एक पूर्व मंत्री ने तो गाजीपुर के शिवजी के मार्कण्डेय महेश मंदिर में बगलामुखी का जाप भी करवाया है। सनद रहे कि इस मंदिर की बड़ी मान्यता है और इसे मनोकामना पूर्ण करने वाले मंदिर के रूप में जाना जाता है। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि पूर्व कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने तो जेल योग से बचने के लिए एक नामचीन तांत्रिक के कहने पर लगातार दो महीने तक जेल में बनी रोटियां मंगवाकर खाई है। जब संकट में होता है इंसान, तब ही क्यों याद आते हैं भगवान?
Posted on 18 January 2015 by admin
दिल्ली में ज्यों-ज्यों चुनाव की घड़ी करीब आ रही है, ‘आप’ और भाजपा के बीच वोटों का अंतर कम होता जा रहा है। किरण बेदी और शाज़िया इल्मी को भाजपा में लाकर भगवा पार्टी ने ‘आप’ के समक्ष एक महती चुनौती उछाली है, युवा व महिला वोटरों में नए सिरे से पैठ बनाने की कोशिश की है। नहीं तो अगर 2013 के विधानसभा चुनावों की तुलना में ‘आप’ 2014 लोकसभा चुनावों मोदी लहर में भाजपा से बुरी तरह पिछड़ गई थी। खासकर मध्यवर्गीय इलाकों में ‘आप’ का असर तेजी से कम हुआ था। ‘आप’ झुग्गी-झोपड़ी इलाकों के अलावा दलित व मुस्लिम बहुल्य इलाकों में ही अच्छा प्रदर्शन कर पाई थी। मिसाल के तौर पर ‘आप’ के स्टार नेता मनीष सिसौदिया के पटपड़गंज विधानसभा सीट को लें तो सिसौदिया ने 2013 के विधानसभा चुनाव में यहां के 181 पोलिंग बूथ में से 122 पर जीत दर्ज की थी, वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में ‘आप’ की जीत सिर्फ 28 पोलिंग बूथ पर ही सिमट कर रह गई। 2014 के चुनाव में ‘आप’ अपने गढ़ में भी पिछड़ गई, यानी विनोद नगर में 41, मंडावली में 26, मयूर विहार में 22 पोलिंग बूथ पर ही पार्टी बढ़त बना सकी। 13 के चुनाव में लक्ष्मी नगर में ‘आप’ ने कुल 164 पोलिंग बूथ में से 97 पर जीत का परचम लहराया था तो वहीं 14 के चुनाव में ‘आप’ लक्ष्मी नगर में महज 10 पोलिंग बूथ पर ही जीत दर्ज करा पाई।
Posted on 18 January 2015 by admin
मुलायम को लेकर लालू प्रसाद का नया प्रेम सियासी पेंचोखम की अजीबोगरीब दास्तां है, नहीं तो अब से पहले तक ये दोनों कद्दावर यादव नेतागण एक-दूसरे को ललकारते दुत्कारते रहे हैं, मुलायम सार्वजनिक मंचों से खुलासा कर चुके हैं कि देवेगौड़ा के गद्दी से उतरते वक्त ये लालू ही थे जिन्होंने मुलायम को प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया। वहीं यूपी में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद लालू ने मुलायम को पानी पी-पीकर कोसा था, अब ये दोनों यादव नेता समधी बन चुके हैं। और नई सियासी पारी के आगाा में जुटे हैं, 2016 में सपा कोटे से राज्यसभा की 7 सीटें भरी जानी है, इनमें से एक सीट मुलायम लालू की पत्नी राबड़ी देवी के लिए और दूसरी सीट के.सी.त्यागी के लिए छोड़ने को तैयार बताए जाते हैं।
Posted on 11 January 2015 by admin
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मकर सक्रांति के बाद अपनी टीम को नया चेहरा-मोहरा देने का इरादा रखते हैं, संगठन के रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां हो सकती है, ऐसा संगठन के कई लोगों के केंद्र में मंत्री बनने की वजह से हुआ है। सबसे ज्यादा लॉबिंग पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव को लेकर है, सूत्रों की मानें तो महासचिव पद के लिए जेतली अपने दो खास विश्वस्तों श्रीकांत शर्मा और अनुराग ठाकुर का नाम आगे बढ़ा रहे हैं, पर अनुराग ठाकुर के लिए मोदी व शाह की जोड़ी यशवंत सिन्हा वाले फार्मूले को आजमाना चाहती है, जिस तरह यशवंत सिन्हा के सक्रिय राजनीति से किनारा कर लेने के बाद भगवा पार्टी ने उनके ‘फॉरेन रिटर्न’ पुत्र जयंत सिन्हा को आगे बढ़ाया, वैसे ही मोदी-शाह की जोड़ी चाहती है कि अपने पुत्र अनुराग को आगे बढ़ाने से लिए पहले धूमल सक्रिय राजनीति का चस्का छोड़े। हरियाणा विधानसभा चुनावों में अच्छे प्रबंधन कौशल के लिए कैलाश विजयवर्गीय को पुरस्कृत कर उन्हें महासचिव बनाया जा सकता है, बिहार के आसन्न चुनावों के मद्देनजर पार्टी महासचिव के लिए नंद किशोर यादव का नाम भी चर्चा में है, अनंत कुमार के केंद्र में मंत्री बनने से रिक्त हुए स्थान के लिए अनंत कुमार स्वयं जहां सांसद आर.अशोक का नाम आगे बढ़ा रहे हैं, तो वहीं येदुरप्पा खेमा अरविंद लिंबावली के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहा है। युवा मोर्चा के अध्यक्ष के लिए यूपी के सांसद हरीश द्विवेदी का नाम रेस में आगे बताया जा रहा है।
Posted on 11 January 2015 by admin
एक ओर जहां भाजपा और ‘आप’ जैसी पार्टियों ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है, रोज-बरोज़ चुनावी रणनीतियां बुनी जा रही हैं, सियासत में नई संभावनाओं को खंगाला जा रहा है, वहीं कांग्रेस के युग-पुरुष राहुल गांधी मोदी की दिल्ली रैली से 3 दिन पहले तक विदेश में नए साल की छुट्टिïयां मना रहे थे। एक ओर जहां कांग्रेस के चारण वृंद राहुल को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं, (उम्मीद तो यह भी जताई जा रही है कि मंगलवार को आहूत कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इस मांग पर सोनिया की सहमति की मुहर भी लग सकती है और मार्च में इसका ऐलान भी हो सकता है) तो वहीं कहीं नाराज कांग्रेसियों का एक बड़ा वर्ग खुलकर अब पार्टी फोरम पर अपनी बात रख रहा है। कुछ तो यहां तक कह रहे हैं कि तुगलक लेन में रहते हुए राहुल की सोच भी कहीं न कहीं तुगलकी हो गई, यही वजह है कि पार्टी नेताओं को अक्सर वे अपना तुगलकी फर्मान सुना जाते हैं। राहुल पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि वे कांग्रेस को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं, और पार्टी के बड़े नेताओं से भी रूखाई से पेश आते हैं। अब राहुल दिल्ली विधानसभा चुनाव की पूर्व बेला में अपने पसंदीदा और नफीस अंग्रेजी बोलने वाले पीसी चाको को दिल्ली का प्रभारी और ए.के.एंटोनी को स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बना खुद क्रिसमस और नया साल मनाने विदेश चले गए, अब हिंदी भाषी दिल्ली में कांग्रेस का टिकट चाहने वाले अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मुश्किल यही रही कि चाको व एंटोनी से संवाद कैसे स्थापित हो, क्योंकि ये दोनों नेता सिर्फ अंग्रेजी बोलते व समझते हैं। वैसे भी इन दिनों राहुल की कोर टीम का चेहरा-मोहरा बदल गया है, दिग्विजय सिंह और कनिष्क सिंह किनारे लगा दिए गए हैं, जयराम रमेश का भी कमोबेश यही हाल है। जयराम और मोहन गोपाल में 36 का आंकड़ा है, राहुल दरबार में इन दिनों शंकर, सचिन राव, मोहन गोपाल, मधुसूदन मिस्त्री और भंवर जितेंद्र सिंह की तूती बोलती है। मोहन गोपाल की थ्योरी है कि जब मोदी ‘अनपॉपुलर’ होंगे तो आप से आप राहुल का ‘ग्राफ’ चढ़ जाएगा, शायद यही वजह है कि राहुल हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
Posted on 11 January 2015 by admin
राहुल गांधी के कई फैसलों को लेकर पार्टी में असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं, मसलन कैप्टन अमरिंदर की जगह बाजवा को पंजाब में पार्टी की कमान सौंपना, इस बाबत कैप्टन ने दिल्ली आकर सोनिया से अपनी नाराज़गी जता दी है, अगला नंबर भूपिंदर सिंह हुड्डï का है, जाटों में जिनकी सरपरस्ती को नज़रअंदाज करते हुए हरियाणा में विपक्षी नेता की कमान किरण चौधरी को सौंप दी गई है, वैसे ही अगर राहुल झारखंड में झामुमो के साथ और जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस के साथ चुनावी गठबंधन नहीं तोड़ते तो कांग्रेस का प्रदर्शन इन राज्यों में कहीं बेहतर हो सकता था, अकेले जम्मू-कश्मीर में कम से कम 8 विधानसभा सीटें ऐसी थी जहां कांग्रेस हजार मतों के कम अंतर से हार गई। वहीं कांग्रेस में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि राहुल जितनी भी स्क्रीनिंग कमेटी गठित करते हैं, उसमें दीपक वावरिया, प्रकाश जोशी और भंवर जितेंद्र सिंह के हाथों में ही कमान क्यों सौंप दी जाती है? भंवर जितेंद्र सिंह के साथ राहुल का एक खास रिश्ता तब से कायम है जब वे प्रियंका व रॉबर्ट के साथ छुट्टिïयां मनाने अक्सर जिम कार्बेट पार्क जाया करते थे और तब भंवर जितेंद्र के श्वसुर जिम कार्बेट के डायरेक्टर हुआ करते थे।