Posted on 23 February 2015 by admin
काले धन को लेकर मोदी, उनकी सरकार के मंत्रिगण और खासकर मोदी के हनुमान व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयानों को लेकर बाबा रामदेव और राम जेठमलानी सरकार से बेतरह नाराज बताए जाते हैं, काले धन की वापसी को लेकर वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के पास कुछ खास ‘प्लॉन’ बताया जाता है। सूत्रों का यह भी दावा है कि जेठमलानी अपने ये ‘आइडियाज’ प्रधानमंत्री के साथ शेयर करना चाहते हैं, पीएमओ से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि राम जेठमलानी अब तक कोई 6 बार प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांग चुके हैं, पर उन्हें अब भी मोदी के बुलावे का इंतजार है।
Posted on 23 February 2015 by admin
कभी ममता के सबसे दुलारों में शुमार होने वाले तृणमूल सांसद मुकुल राय अब दीदी के निशाने पर हैं। हालिया दिनों में मुकुल राय के विधायक पुत्र शुभ्रांशु द्वारा ममता व तृणमूल के खिलाफ दिए गए बयानों को भी तृणमूल नेत्री ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रतिक्रिया स्वरूप दीदी ने मुकुल के दिल्ली स्थित सांसद फ्लैट से ‘ट्रेड मिल’ समेत अपना पूरा सामान अपने सांसद भतीजे अभिषेक के घर पर भिजवा दिया है, यह इन दोनों की कुट्टी की इंतहा है। ममता को शक है कि मुकुल राय अरुण जेतली करीबी सिद्धार्थ नाथ सिंह के लगातार संपर्क में हैं, पर राय की भाजपा में एंट्री कब होगी यह मोदी व शाह की संयुक्त रणनीति पर निर्भर है। अगर राय को भाजपा की ओर जल्दी से कोई विधिवत आमंत्रण नहीं मिलता है तो वे बंगाल में अपने अलग क्षेत्रीय दल का भी गठन कर सकते हैं।
Posted on 23 February 2015 by admin
नई दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मास कम्युनिकेशंस (आइआइएमसी) यानी भारतीय जन संचार संस्थान अपने गोल्डन जुबली ईयर यानी पचासवां वर्ष सेलिब्रेट कर रहा है,पर बीते कुछ दिनों जिस तरह इस प्रतिष्ठित संस्थान की गरिमा का हनन हुआ है वह निश्चित ही चिंता का विषय है। कभी दूरदर्शन के न्याू रीडर रहे सुमित टंडन संस्थान के मुखिया हैं, कहते हैं कांग्रेसनीत यूपीए सरकार से नजदीकियों की वजह से जरूरी पात्रता के बगैर भी टंडन यह पद पाने में कामयाब रहे। टंडन के नौकरशाहों से भी बहुत अच्छे रिश्ते हैं, संस्थान से जुड़े सूत्र बताते हैं कि निदेशक नौकरशाहों को उपकृत करने का हरसंभव प्रयास करते नार आते हैं, सूत्रों का दावा है कि संस्थान की ज्यादातर गाड़ियां बड़े नौकरशाहों की बीबीयों के सेवा में सुपुर्द रहती है। सूत्रों के मुताबिक सूचना प्रसारण सचिव बिमल जुल्का की पत्नी के सेवा में संस्थान की एक गाड़ी व ड्राईवर सदैव समर्पित होता है। कहते हैं कि टंडन समय-समय पर नौकरशाहों को महंगे उपहारों से भी लादते रहते हैं,ताकि संस्थान के अंदर उठ रहे बगावती स्वरों के बीच भी उनकी कुर्सी सलामत रहे।
Posted on 15 February 2015 by admin
इस दफे जब कर्नाटक विधानसभा का संयुक्त सत्र राज्यपाल वजुभाई बाला के अभिभाशण से षुरू हुआ तो पहली बार किसी राज्यपाल ने अंग्रेजी से अलहदा अपना पूरा अभिभाशण हिंदी में दिया। राज्यपाल के अभिभाशण के धन्यवाद प्रस्ताव पर सबसे पहले नेता सदन एस आर पाटिल और फिर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष ईष्वरप्पा कन्नड़ में बोले। फिर भगवा पार्टी ने अपने बहुचर्चित एमएलसी लहर सिंह सिरोया को बोलने के लिए उतारा, और लहर सिंह ने जैसे ही हिंदी में बोलना षुरू किया, सदन में हंगामा मच गया। इसी षोर-षराबे के बीच लहर सिंह कोई 10-15 मिनट तक धाराप्रवाह हिंदी में बोलते रहे, तब स्पीकर ने उन्हें बताया चूंकि सदन के पास न तो हिंदी में कोई स्टेनो है और न ही अनुवादक, चुनांचे उनकी स्पीच रिकार्ड में नहीं जा पाएगी। लिहाजा वे कन्नड़ या अंग्रेजी में बोलें। लहर सिंह ने तब वैसा ही किया। यहां एक बात सोचने की है कि भाजपा ने अब तब अपने इस एमएलसी के निलंबन को रद्द नहीं किया है, जबकि लहर सिंह मोदी के पक्ष में अलख जगाने में सबसे आगे रहे हैं। क्या वाकई अब भी पार्टी में अडवानी का असर कहीं षेश है जो मोदी-षाह युगल लहर का इस्तेमाल तो कर रहे हैं पर उन्हें वापिस पार्टी में लेने से हिचक रहे हैं।
Posted on 15 February 2015 by admin
दिल्ली की हार से बांबे क्लब में एक बड़ा मैसेज चला गया है, यह उन उद्योगपतियों के लिए एक बड़ा झटका था, जो मोदी को अपराजेय मान बैठे थे और उन्हें लगता था कि मोदी की जीत के अष्वमेध घोड़े को रोकने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ है। सियासत में भ्रम टूटता है और धुंध भी छंटती है। सो, अब यही लोग मानने लगे हैं कि मोदी प्रधानमंत्री से ज्यादा विदेष मंत्री बन कर रह गए हैं और घरेलू मोर्चे पर उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है। नहीं तो जो मोदी विदेष नीति निर्धारण में स्वयं को नेहरू से बढ़ा-चढ़ा कर प्रोजेक्ट कर रहे थे। वे भूल गए कि जब नरसिम्हा राव भी अमेरिका में ‘हाउस आॅफ रिप्रजेंटेटिव्स’ को संबोधित करने गए थे तो उन्होंने अमरीका व पाकिस्तान के कष्मीर खटराग पर उन्हें आड़े हाथों लिया था और उन्हें मैक्सिको की मिसाल दी थी। तब राव ने गाांधी जी का एक किस्सा भी सुनाया था कि कैसे एक महिला उनके पास अपने बेटे को लेकर आई और उनसे निवेदन किया-‘बापू, यह चीनी बहुत खाता है, इसकी यह लत छुड़वाइए।‘ गांधी ने उस महिला को 15 दिन बाद आने को कहा, 15 दिन बाद जब महिला आई तो गांधी के कहने पर उसके बेटे ने चीनी खानी छोड़ दी। तब महिला ने गांधी से पूछा कि ‘बापू, यह बात तो आप 15 दिन पहले भी कह सकते थे’ तो गांधी का जवाब था कि ‘तब मैं भी चीनी खाता था।’ क्या मोदी जी चीनी खाना छोड़ेंगे?
Posted on 15 February 2015 by admin
सता के चिल्मनों से झांकते और आमजनों को मुंह चिढ़ाते अच्छे दिन की आहट सुनाई देने लगी है। ‘चुगने वाले ऊपर ही ऊपर सारी गर्मी चुग बैठे, हमने जलाई थी आग पर मुðी आई राख।’ सो, इस 11 फरवरी को जेट एयरवेज की लंदन से दिल्ली आने वाली फ्लाइट जब इंदिरा गांधी इंटरनेषनल हवाई अड्डे पर उतरी तो इस फ्लाइट के फस्र्ट क्लास में भाजपा महासचिव व संघ के स्टार प्रचारक राम माधव भी सवार थे। फस्र्ट क्लास के सहयात्रियों को इतने बड़े ‘भगवा नेता’ का ‘डाउन टू अर्थ’ स्वभाव बेतरह रास आया। न्यूयार्क से सिडनी, मिलान से लंदन और लंदन से दिल्ली की उड़ान भले ही बहुत थकाने वाली हो, पर राम माधव हमेषा की तरह एक नई ऊर्जा से ओत-प्रोत थे, क्योंकि यह उन्हीं की मेहनत थी कि जम्मू-कष्मीर में भाजपा-पीडीपी की संयुक्त सरकार के गठन को मूर्त रूप मिल गया था और इस भाजपा महासचिव को अब दिल्ली से श्रीनगर की उड़ान पकड़नी थी। चुनांचे चाहे 5 लाख की फस्र्ट क्लास की यात्रा हो या 10 लाख की कीमत वाला सूट हो, सत्ता के कंगूरे पर तो ‘अच्छे दिन’ ने धमा-चैकड़ी मचानी षुरू कर दी है।
Posted on 15 February 2015 by admin
राहुल गांधी ने मम्मा के डार्लिंग बेटे की तरह जिद पकड़ रखी है, वे षाीला और संदीप दीक्षित दोनों का इस्तीफा चाहते हैं। सोनिया इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहतीं। वहीं सोनिया वफादार चाहते हैं कि दिल्ली में कांग्रेस को षून्य पर निपटाने वाली राहुल मंडली यानी अजय माकन, पी सी चाको, मधुसूदन मिस्त्री और मोहन प्रकाष पर कार्यवाही होनी चाहिए। अकेले मोहन प्रकाष अब तक कांग्रेस को 5 चुनाव हरा चुके हैं। पर राहुल अड़े हैं कि उनका कोई भी आदमी इधर से उधर नहीं होगा। राहुल अब अपनी मम्मा से पूरे राइट्स चाहते हैं। तवाब में मम्मा कह रही हैं-‘टिकट तुम बांट रहे हो, चीफ व्हिप तक तुम बना रहे हो। मेरे लोगों के पास काम ही क्या बचा है, वे तो बस पार्टी के लिए संसाधन जुटा रहे हैं, पैसे इक्ट्ठे कर रहे हैं।’ पर पुत्र मोह के समक्ष मां को समर्पण करना ही पड़ रहा है। सब योजनाबद्ध रूप से चला तो इस सितंबर में राहुल पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी संभाल लेंगे। सोनिया पार्टी संरक्षक की भूमिका में अवतरित हो जाएंगी। राहुल कांग्रेस को एक नया चेहरा-मोहरा देने का इरादा रखते हैं, पर कांग्रेस का हाथ अब मुðी बन जाने में अषक्त होता जा रहा है।
Posted on 15 February 2015 by admin
छोटी सी दिल्ली में मोदी की बड़ी हार से भाजपा में नए सियासी समीकरण बनने-बिगड़ने लगे हैं। दिल्ली के चैंकाऊ नतीजों के आलोक से कैबिनेट की बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने अपने वैसे कुछ खास सहयोगियों के साथ दिल्ली के चुनाव परिणामों पर चर्चा की। इस बैठक में अरूण जेटली, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और वैंकेया नायडू जैसे भाजपा के बड़े नेता षामिल थे। इस बैठक में मोदी ने अपने सबसे खास मित्र की ओर मुखातिब होते हुए कहा, ‘9 तारीख को भी जब मेरी आपसे बात हुई तो आपने जोर देकर कहा था कि हर हाल में हमारी 24 सीटें तो आ ही रही हैं, और आपने उन सीटों के नाम भी गिनाए थे। आपने यह भी कहा था कि दिल्ली को आप से बेहतर कोई नहीं जानता, आप दिल्ली की नब्ज़ पहचानते हैं, वहीं इस चुनाव में 14 के लोकसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट षेयर में 14 फीसदी की गिरावट आ गई, यह 47 से 33 पर आ गया। क्या यही है असपका राजनीतिक आकलन?’ जाहिर है मोदी के इस सबसे करीबी मित्र से कोई जवाब देते नहीं बना।
Posted on 15 February 2015 by admin
भाजपा की दिल्ली में ऐसी बेरहम हार को संघ पचा नहीं पा रहा, चुनांचे हर दूसरे दिन दिल्ली चुनावी नतीजों को लेकर मंथन बैठकों को दौर जारी है। नई दिल्ली स्थित झंडेवालान के केषव कुंज में पिछले दिनों संघ के प्रमुख नेताओं मोहन भागवत, भैयाजी जोषी, दतात्रेय होसबोले, कृश्ण गोपाल, सुरेष सोनी आदि की मौजूदगी में भाजपा के तीन बड़बोले मंत्रियों स्मृति इरानी, निर्मला सीतारमण, रविषंकर प्रसाद की क्लास लगी। सनद रहे कि सीतारमण व रविषंकर ने अपनी चुनावी सभाओं में केजरीवाल को चोर कह दिया था, वहीं स्मृति ने केजरीवाल की षक्ल बंदर से मिला दी थी। और जोष-जोष में स्मृति आप नेता को देषद्रोही भी बता गई थीं। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में स्मृति ने 16, वैंकेया नायडू, पीयूश गोयल व धमेंद्र प्रधान ने 17, प्रकाष जावड़ेकर ने 11 और निर्मला सीतारमण ने 8 चुनावी सभाएं की थीं और अब तो यह बात किसी से छुपी नहीं रह गई कि इन नेताओं की सभाओं में बस गिनती के लोग जुटे थे।
Posted on 08 February 2015 by admin
भारत में इटली के राजदूत डेनियल मेनसीनी के लिए वाकई ये हैरत के क्षण थे, जब उन्हें यकबयक 10 जनपथ से मिलने का बुलावा आ गया, नहीं तो अपने भारत प्रवास के इन चार वर्षों में डेनियल ने न जाने कितनी ही बार सोनिया गांधी से मुलाकात का वक्त मांगा था, पर उनसे कहा गया कि वे विदेश मंत्री से मिलकर अपनी बात कह लें। इस 10 तारीख को डेनियल की नई दिल्ली में फेयरवेल पार्टी है, वे इटली के होली सी, वेटिकन सिटी के नए हाई कमिश्नर बन रहे हैं, किसी विदेश विभाग के अधिकारी के लिए वेटिकन एक प्रतिष्ठित नियुक्ति है। चुनांचे जब डेनियल सोनिया से मिलने 10 जनपथ पहुंचे तो उनका वहां बेहद गर्म जोशी से स्वागत हुआ, सूत्रों की मानें तो सोनिया ने डेनियल से यह भी आग्रह किया कि जब अगली बार वह इटली आएंगी तब वह पोप से मिलकर उनका आशीर्वाद लेना चाहेंगी, डेनियल ने इस बाबत अपनी सहर्ष स्वीकृति प्रदान की और कहा कि वे सोनिया को पोप से मिलवाने का पुख्ता इंतजाम करेंगे। सोनिया ने इटली के इस नर्िवत्तमान राजदूत से यह भी आग्रह किया कि उनकी यह मुलाकात गुप्त रहनी चाहिए, नहीं तो भाजपा बात का बतंगड़ बना सकती है। सोनिया से मिलने के बाद ही डेनियल को यह समझ में आ गया कि 10 जनपथ ने चार वर्षों में उन्हें मिलने का वक्त क्यों नहीं दिया था, क्योंकि इटली के नाविकों को लेकर भारत का विवाद चल रहा था, ऐसे में इटली के राजदूत से 10 जनपथ का मिलना और सोनिया के इतावली मूल का होना नए सियासी परिदृश्य की पटकथा रच सकता था।