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हर घड़ी गडकरी

Posted on 18 April 2015 by admin

मोदी सरकार के सबसे प्रो-एक्टिव मंत्री में शुमार होने वाले नितिन गडकरी मीडिया के एक सेक्शन के निशाने पर हैं, सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में गडकरी के कुछ कथित घोटालों को लेकर दिल्ली का एक अंग्रेजी समाचार पत्र समूह बड़ा धमाका करने जा रहा है, सनद रहे कि यह वही अंग्रेजी अखबार है जिसने ई-रिक्शा को लेकर गडकरी पर सीधा हल्ला बोला था। कई और प्रकरणों के भी खुलासे हो सकते हैं, भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर गडकरी सरकार के नए चैंपियन के तौर पर उभरे हैं, पर जब आज से तीन-चार साल पहले एयर बस के प्रमुख भारत आए थे और एयर बस के कुछ कल-पुर्जों का कारखाना लगाने के लिए नागपुर में जमीन चाहते थे, तब अपने तमाम रसूखों के बावजूद गडकरी एयर बस के लिए नागपुर में जमीन का अधिग्रहण नहीं करवा पाए थे, तब इस कंपनी ने नागपुर से सीधे बेंगलुरू की ठौर पकड़ ली थी और कंपनी को वहां वांछित जमीन भी मिल गई थी। मोदी जब फ्रांस में एयर बस की फैक्ट्री में गए थे तो एयर बस ने तब ऐलान किया था कि अब एयर बस विमान का निर्माण कार्य भारत में भी करेगा। पर क्या होगा निर्माण? विमान में बिछाए जाने वाले कार्पेट का निर्माण भारत में होगा, इसके कुछ अरसे बाद एशिया सेक्टर में प्रयुक्त होने वाले विमानों के दरवाजे भर भारत में बनेंगे। यानी बहुत शोर था पहलू में दिल का, पर ये तो कतरा ए खूं निकला।

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जोशी के जश्न में शहीद

Posted on 18 April 2015 by admin

इंदौर के एक नामचीन बिल्डर से संघ नेता संजय जोशी का पुराना रिश्ता है, बेहद नजदीक का रिश्ता है। समझा जाता है कि जोशी के इसी मित्र बिल्डर का आग्रह था कि इस दफे उन्हें अपना जन्मदिन धूम-धाम से मनाना चाहिए, ताकि मोदीमय हो गई भगवा सियासत में उनकी धमक दूर तक सुनाई दे सके। सो, आनन-फानन में जोशी ने अपनी उदात्त इच्छाओं से संघ के शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराया और वहां से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद उन्होंने अपनी नजदीकी लोगों को अपने मन की बात बताई। भाजपा में उनके पुराने लोग हैं, कभी वे मोदी को बनाने वाले नेता के तौर पर भी जाने जाते थे, 2003 के मोदी मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों की निष्ठा सिर्फ और सिर्फ संजय जोशी के साथ थी। सो, लोगों को जन्मदिन के बाबत फोन जाने शुरू हुए और तमाम राज्यों की राजधानियों और वहां के महत्त्वपूर्ण शहरों में संजय जोशी को जन्मदिन की बधाई देने वाले बड़े-बड़े होर्डिंग्स लग गए, शुभकामना देने के लिए कथित तौर पर भाजपा मंत्रियों ने अपनी निजी सचिवों के चेहरों का इस्तेमाल कर लिया। इसी बात का संज्ञान लेते हुए अमित शाह ने आनन-फानन में श्रीपद नायक, संजीव बालियान और सुदर्शन भगत जैसे मंत्रियों को तलब कर लिया, इन्हें चेतावनी मिली तो इन्हाेंने ठीकरा अपने निजी सचिवों के सिर फोड़ दिया। सचिवों की छुट्टी हो गई और किसी प्रकार से ये मंत्रिगण अपनी कुर्सियां बचाने में कामयाब रहे।

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ईरानी की बात हुई पुरानी

Posted on 18 April 2015 by admin

चौतरफा मुसीबतों में घिरी स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बाहर का दरवाजा दिखाने के लिए बिसात बिछ गई है, अगर उनका भाग्य अनुकूल रहा तो वे देश की अगली पर्यटन मंत्री हो सकती हैं, अन्यथा उनसे मंत्री पद छिना भी जा सकता है। जब मोदी सरकार की नींव पड़ी तो उन्हें देश की शिक्षा नीति को नए सिरे से सजाने-संवारने का जिम्मा दिया गया था, पर अपनी बेलाग कार्यशैली से उन्होंने दोस्त कम, दुश्मन ज्यादा बना लिए। वह पहली मंत्री हैं, जिनके रहते शिक्षा मद के बजट में तकरीबन 30 फीसदी की कमी कर दी गई, उनकी ओर से विरोध के कोई स्वर सुनाई नहीं दिए। संजय काचरू के ताजा मामले से अलहदा उनके अब तक कोई चार पीएस बदले जा चुके हैं, उनके कार्यकाल में एक भी आईआईटी या आईआईएम बनना शुरू नहीं हुआ, एजुकेशन बिल पास नहीं हुआ। टीचर ट्रेनिंग पर काम नहीं हुआ। इंडियन टीचर सर्विस के गठन की बात बेमानी साबित हुई। चार सांसदों ने हालिया दिनों में उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, संयुक्त सचिव स्तर के चार अधिकारियों ने लिखकर दिया है कि वे ऐसे मंत्री के साथ काम नहीं कर सकते। सिर्फ प्रधानमंत्री से नजदीकियों की भ्रांतियां कब तक उन्हें बचा पाएंगी, और अब तो इन भ्रांतियों के हाथ-पैर भी टूट गए हैं।

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मोदी मंत्रिमंडल का फेरबदल मई में?

Posted on 12 April 2015 by admin

13 मई के बाद किसी भी दिन केंद्रीय कैबिनेट में एक बड़ा फेरबदल मुमकिन है। पिछले काफी समय से मोदी की एक कोर टीम मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड को अंतिम रूप देने में जुटी है। स्वयं प्रधानमंत्री आम जनमानस में व्याप्त इस भ्रांति से पीछा छुड़ाना चाहते हैं कि उनकी सरकार स्थितप्रज्ञता की शिकार बन रही है। सो, मुमकिन है कि 13 मई को संसद सत्र समाप्त होने के बाद सरकार का चेहरा-मोहरा बदलने की एक बड़ी कवायद होगी। कई हैवीवेट मंत्रियों की कद-काठी में कांट-छांट होगी, कईयों के विभाग बदले जाएंगे और कईयों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। उम्र और कार्यकुशलता को आधार बनाकर कुछ मंत्रियों को पार्टी संगठन के काम में लगाया जा सकता है। इस बाबत मोदी की संघ के शीर्ष नेतृत्व से एक तरह से निर्णायक बातचीत हो चुकी है, समझा जाता है कि संघ नेतृत्व ने कैबिनेट फेरबदल को प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार मानते हुए एक तरह से इस मामले में हथियार डाल दिए हैं। बस वह अपनी पसंद का मानव संसाधन मंत्री चाहता है। यानी स्मृति ईरानी के विभाग को बदलने की तैयारी है और उनकी जगह संघ की पसंद का एक हैवीवेट मंत्री मसलन राजनाथ सिंह को लाए जाने के कयास लग रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो फिर अरुण जेतली को गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है, वैसे भी काफी दिनों से ये कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री अपने किसी खास करीबी को वित्त मंत्रालय का जिम्मा देना चाहते हैं, जिससे कि आर्थिक सुधारों की रफ्तार में और गति आ सके।

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मंसूबा-ए-महबूबा

Posted on 12 April 2015 by admin

भले ही जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अपनी पुत्री महबूबा मुफ्ती के मोदी कैबिनेट में शामिल होने की अटकलों पर यह कहते हुए विराम लगा दिया हो कि ‘महबूबा केंद्र में मंत्री नहीं बनेंगी’। पर सूत्र बताते हैं कि अंदरखाने से भाजपा और पीडीपी में बातचीत जारी है, मसला सिर्फ ‘कैबिनेट’ व ‘स्वतंत्र प्रभार’ को लेकर अटका है। एक ओर जहां पीडीपी अपने लिए कैबिनेट मंत्री का पद मांग रही है तो अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा उन्हें राज्य मंत्री, ‘स्वतंत्र प्रभार’ ऑफर कर रही है।

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अडवानी मांगे पानी

Posted on 12 April 2015 by admin

बेंगलुरू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद मोदी-शाह जोड़ी भाजपा नेताओं और कार्र्यकत्ताओं को यह संदेश देने में कामयाब रही कि पार्टी व सरकार का सुर एक सा है, और पार्टी का मार्गदर्शक मंडल अब महज ‘दर्शक मंडल’ बनकर रह गया है। भाजपा के वयोवृद्ध नेता लाल कृष्ण अडवानी के राजनैतिक सफर में शायद यह पहला मौका था जब वे बेंगलुरू एयरपोर्ट पर उतरे और उन्हें वहां रिसीव करने वाला कोई नहीं था। अडवानी को एयरपोर्ट पर रिसीव करने के लिए भाजपा ने कर्नाटक के एक स्थानीय भगवा विधायक की डयूटी लगाई थी, पर ऐन मौके पर वह कहीं गायब हो गया। खैर, किसी तरह अडवानी समारोह स्थल होटल ललित पहुंचे और जब उन्होंने मंच पर मोदी के साथ वाली कुर्सी पर बैठना चाहा तो उन्हें विनम्रता से मना कर दिया गया। मंच पर भी स्वागत के दौरान मोदी व शाह जोड़ी का शॉल-माला और गुलदस्ते से स्वागत किया गया। वहीं अडवानी को महा एक अदद गुलदस्ते के स्वागत से ही संतोष करना पड़ा। यानी शॉल-माला से पार्टी ने अपने वरिष्ठतम नेता का स्वागत सत्कार नहीं किया। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम की बाबत और जानकारी पाने के लिए एक दूसरे से कुछ पूछते नजर आए, पर किसी को कुछ मालूम नहीं था। जिन्हें मालूम था, उन्हें सब मालूम था और ये भी मालूम था कि आज मंजर इतना बदला-बदला सा क्यों है?

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भाजपा पर हिटलर का असर

Posted on 12 April 2015 by admin

बेंगलुरू में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उसी परिसर में एक बुक स्टॉल भी लगा था, इस स्टॉल में स्वामी विवेकानंद, रमण महर्षि, रामकृष्ण परमहंस से लेकर नेल्सन मंडेला और एडॉल्फ हिटलर की किताबें शामिल थीं। एक युवा नेता जब स्टॉल पर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि एक पुस्तक है जो इस स्टॉल पर सबसे ज्यादा नजर आ रही है, वह पुस्तक थी एडॉल्फ हिटलर की जीवनी ‘माइन कंफ’, यह पुस्तक तीन पंक्तियों में लगी थी। युवा नेता ने बुक स्टॉल संचालक से इसका कारण जानना चाहा तो उसका जवाब था-‘यही किताब है जो यहां सबसे ज्यादा बिक रही है।’ क्या वाकई भाजपा एडॉल्फ हिटलर के विचारों से इन दिनों इस कदर अभिप्रेरित है? या हिटलर पार्टी के नए मार्गदर्शक के तौर पर अवतरित हुए हैं?

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मुख्तार की रफ्तार

Posted on 12 April 2015 by admin

अपनी सरकार के मुखिया का अनुसरण करते हुए मोदी सरकार के मंत्री भी कुछ अलग दिखाने को तत्पर रहते हैं, मिसाल के तौर पर पिछले सप्ताह एक सुबह यूं अचानक मुख्तार अब्बास नकवी के पास प्रधानमंत्री का फोन आ धमका, और मोदी ने उन्हें फौरन जम्मू-कश्मीर जाने का निर्देश दिया, चूंकि घाटी में बाढ़ की विभिषिका रौद्र रूप ले रही थी, सो प्रधानमंत्री ने नकवी से वहां की स्थितियों का जायजा लेकर उन्हें रिपोर्ट देने को कहा। नकवी ने फौरन श्रीनगर की फ्लाइट पकड़ ली। सबसे पहले वे बारामूला गए और वहां पहुंच कर उन्होंने मुख्य मार्ग पर अपनी गाड़ी छोड़ दी और सड़क पर पैदल चलने लगे। तब उनके साथ बमुश्किल 20 लोग थे, धीरे-धीरे लोग जुटते गए और करीबन दो हजार लोगों का कारवां उनके पीछे-पीछे चलने लगा। लोग मुतमइन थे कि केंद्र सरकार का एक मंत्री सुरक्षा के ताम-झाम छोड़ उनके साथ-साथ चल रहा है। लोग बारी-बारी से नकवी से मिल रहे थे और उनसे अपना दुख दर्द सांझा कर रहे थे। बाद में श्रीनगर में लाल चौक और झेलम में भी नकवी ने यही उपक्रम दोहराया, लाल चौक में तो वहां के दुकानदार भी नकवी के कारवां में शामिल हो गए, वहां के स्थानीय लोग यह कहते देखे गए कि 20 साल बाद कोई मंत्री पैदल चलकर उनसे मिलने आया है, अब स्थानीय लोग चाहते हैं कि राज्य में सत्तासीन पीडीपी-बीजेपी सरकार के मंत्रिगण भी इसी मिसाल का अनुकरण करें।

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विपक्ष को पटाने में दक्ष

Posted on 12 April 2015 by admin

‘लैंड बिल’ को लेकर सरकार के संकटमोचकों ने भी कमर कस ली है, रूठों को मनाया जा रहा है, नए दोस्तों के लिए दाने डाले जा रहे हैं। भूमि बिल को राज्यसभा में पास कराने के लिए मोदी सरकार पूरी तरह से कटिबद्द जान पड़ती है। शरद पवार और उनकी पार्टी को पटा लिया गया है, पवार अब लैंड बिल पर भगवा सुर अलाप रहे हैं। ममता बनर्जी ने एक के बाद एक संशोधनों की एक लंबी फेहरिस्त भाजपा मैनेजरों के समक्ष पेश कर दी है, इनमें से कुछ मांगों को मानना भाजपा के लिए संभव नहीं, इसके लिए दीदी को मनाने की कवायदें हो रही है। मुलायम और उनकी सपा की ओर से भी सरकार को सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुलायम ने भगवा रणनीतिकारों को यह भरोसा दिलाया है कि लैंड बिल के मामले में भी जनता परिवार वही रणनीति अपनाएगा जो उसने कोल और इंश्योरेंस बिल के दौरान अपनाई थी। बसपा को भी वॉक-आउट के लिए तैयार कर लिया गया है। बस कांग्रेस और सीपीएम अपनी जिद पर अड़ी है और इस बिल का पुरकश विरोध कर रही हैं। रही बात भाजपा की तो वह इस विधेयक को संसद के संयुक्त सत्र में पास कराने की इच्छुक नहीं, क्योंकि संवैधानिक रूप से संसद का संयुक्त सत्र तभी बुलाया जा सकता है जब यह बिल सदन में गिर जाए और अगर बिल सदन में नहीं गिरता है तो फिर इसे सेलेक्ट कमेटी में जाना होगा, भाजपा ऐसा किंचित चाहती नहीं।

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…और अंत में

Posted on 15 March 2015 by admin

रंग बदलते चेहरों की शिनाख्त में नाकामयाब रहे ‘आप’ के मुखिया अरविंद केजरीवाल भी अब तेजी से अपने रंग-ढंग बदल रहे हैं, उनसे जुड़े एक नजदीकी सूत्र का दावा है कि केजरीवाल अब अपनी धर्मपत्नी सुनीता को सक्रिय राजनीति में उतारने की तैयारियों में जुट गए हैं। सनद रहे कि सुनीता भारतीय राजस्व सर्विस की एक सीनियर अधिकारी हैं। दिल्ली से केजरीवाल की पार्टी को आने वाले वर्षों में राज्यसभा की तीन सीटें मिलनी है, इसमें से एक सीट पर केजरीवाल अपनी पत्नी को उतार सकते हैं। ऐसे में वे सुनीता केजरीवाल अपनी नौकरी से त्याग पत्र देकर आने वाले दिनों में आप की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं।

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