Posted on 06 December 2015 by admin
मोदी राज में दो मंत्रियों के काम-काज से प्रधानमंत्री प्रभावित जान पड़ते हैं, ये दो मंत्री हैं नितिन गडकरी और पीयूष गोयल। सो, मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में इन दोनों मंत्रियों के कद में इजाफा हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि नितिन गडकरी को रेलवे या नागरिक उड्डयन मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिल सकता है। पीयूष गोयल को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल हो सकता है। सुरेश प्रभु से अगर रेल मंत्रालय लिया जाता है तो इससे शिवसेना के जख्मों पर भी मरहम लग सकता है, जो हर हाल में प्रभु को बिना कुर्सी देखना चाहते हैं। बिहार के कम से कम दो मंत्री ड्रॉप हो सकते हैं, यूपी से दो या तीन नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। वित्त, पेट्रोलियम जैसे कई अहम मंत्रालयों में भी फेरबदल मुमकिन है।
Posted on 06 December 2015 by admin
सुभाष चंद्र बोस से जुड़े गुप्त दस्तावेजों के खुलासे के माध्यम से मोदी सरकार ने बंगाल चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को धूमिल करने के कार्य का श्रीगणेश कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि जैसे-जैसे नेताजी से जुड़े रहस्यों से पर्दा उठेगा, गांधी-नेहरू परिवार को इसकी तपिश झेलनी पड़ सकती है। सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि नेताजी से जुड़े तमाम दस्तावेजों और कागजातों का मोदी सरकार ने बड़े कायदे से वर्गीकरण किया है। इसमें टॉप सीक्रेट, सीक्रेट, क्लासीफाइड, अनक्लासीफाइड फाइलें वर्गीकृत की गई है। इसके अलावा 29 फाइलें विदेश मंत्रालय के कब्जे में है। लगभग 10 लाख पेपर अलग से होम मिनिस्ट्री के पास है। जिसमें मूलतः खुफिया विभाग व पुलिसिया रिपोर्ट शामिल हैं। टॉप सीक्रेट फाइलें सीधे पीएमओ के कब्जे में है, जिनमें उन दो महत्त्वपूर्ण रहस्यों से पर्दा उठ सकता है कि नेताजी अचानक गायब कैसे हो गए थे? और किन रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हुई? सीक्रेट फाइल मूलतः जस्टिस मुखर्जी कमेटी की रिपोर्ट है, जो दो फाइलों में सिमटी हुई है। क्लासीफाइड फाइलों के अंतर्गत रूस, जापान, इंडोनेशिया,बर्मा, ब्रिटेन जैसे देशों से नेताजी के बाबत भारत सरकार के तमाम पत्राचार शामिल हैं। अनक्लासीफाइड वैसी जानकारियां हैं जिन्हें अभी ठीक से खंगाला नहीं गया है। इसमें नेहरू व बोस के रिश्तों की पड़ताल समाहित हो सकती है। इन सभी श्रेणियों की जानकारियां पीएमओ के पास है। जैसे-जैसे इन रहस्यों से पर्दा उठेगा तृणमूल और भाजपा ये दोनों ही पार्टियां इसका सियासी लाभ उठाने को तत्पर दिखेंगी।
Posted on 06 December 2015 by admin
सोनिया गांधी और नरेंद्र मोदी की मुलाकात में भी सवा सौ साल पुरानी राजनैतिक पार्टी को सियासत की बू आ रही है। दस जनपथ से जुड़े एक विश्वस्त सूत्र का दावा है कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री ने अपने कक्ष में एक सौहार्द्र मुलाकात के लिए आमंत्रित किया था। पर प्रधानमंत्री के कक्ष में बैठने की व्यवस्था एक ’समिट मीटिंग’ की तरह रखी गई थी। बस दो कुर्सियां साथ रखी गई थी और सामने सोफा था। प्रोटोकॉल का हवाला देकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को तो कुर्सी पर बिठाया गया, पर सोनिया के पास सामने लगे सोफा पर बैठने के सिवा और कोई चारा नहीं था। जबकि प्रधानमंत्री सदन को सुचारू रूप से चलने देने के लिए कांग्रेस से संवाद स्थापित करना चाहते थे, जीएसटी बिल पर रजा़मंदी और जरूरी संशोधन के लिए कांग्रेस से बात करना चाहते थे, ऐसे में उनका सीधा संबोधन सोनिया गांधी को होना चाहिए था ना कि मनमोहन सिंह को, क्योंकि पार्टी और सदन में कांग्रेस की भूमिका परिभाषित करने का जिम्मा सिर्फ और सिर्फ सोनिया का है। ऐसे में कांग्रेस के अंदर एक नई बहस ने जन्म ले लिया है कि क्या जाने-अनजाने मोदी सोनिया को नीचा दिखाना चाहते थे?
Posted on 06 December 2015 by admin
इन दिनों भाजपा और मोदी का सारा ध्यान यूपी के आने वाले विधानसभा चुनावों पर टिका है। संविधान सभा को लेकर प्रधानमंत्री ने हमारे संविधान के सूत्रधार बी आर अंबेडकर की तारीफ में जिस तरह कसीदे पढ़े, उससे मायावती को भी इस बात का इल्म हो गया था कि दरअसल सियासी बाजीगरी में माहिर हमारे गुणी प्रधानमंत्री के हाथ यूपी के दलित समुदाय की नब्ज पर हैं। बिहार की गलतियों से सीख लेकर यूपी में चुनावी व्यूह रचना गढ़ी जा रही है। यूपी के नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए स्वतंत्र देव सिंह और राम शंकर कथीरिया का नाम चल रहा है। पार्टी के बुजुर्ग नेता और केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र को चुनाव अभियान समिति का सिरमौर बनाया जा सकता है, ताकि राज्य में पिछड़े और अगड़े की जुगलबंदी को सुर दिए जा सके। पार्टी कार्यकर्ताओं की यह पुरकश मांग है कि इस दफे के चुनाव में पार्टी अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का चेहरा सामने रखकर चुनाव में जाएं। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर वरूण गांधी को पेश किए जाने की जोरदार मांग हो रही है, इस मांग को संघ का मूक समर्थन हासिल बताया जाता है, पर मोदी व शाह की इस नाम को लेकर अपनी कुछ उलझने हैं, जिससे उन्हें बाहर निकलना होगा। राजनाथ सिंह अपनी ओर से प्रदेश अध्यक्ष के लिए धर्मपाल का नाम आगे बढ़ा रहे हैं, तो रामलाल कथीरिया के नाम का प्रस्ताव रख रहे हैं, तो वहीं अधिसंख्यक संघ नेताओं की राय स्वतंत्र देव सिंह के पक्ष में है, वे सिंह को प्रदेश भाजपा का अगला अध्यक्ष देखना चाहते हैं।
Posted on 06 December 2015 by admin
इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद मुकुल राय सेंट्रल हॉल में तृणमूल के अपने पुराने मित्र सांसदों की भीड़ में घिरे दिखते हैं, हंस-हंस कर बतियाते, बेबात पर ठहाके लगाते, न पुराने वाले मुकुल रहे, न साथी सांसदों से उनकी पुरानी वाली दोस्ती, पर जब ऐसे में एक नई मित्रता की फसल लहलहा रही हो तो बात की तह तक पहुंचना जरूरी है। दीदी से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि संभवतः मुकुल और दीदी में संधि हो गई है, पुराने वैर भुलाने की तैयारी है, दीदी ने भी अपने पार्टी के सांसदों को कथित तौर पर यह निर्देश जारी किए हैं कि वे न सिर्फ मुकुल के निरंतर संपर्क में रहें, अपितु उन पर पूरी नज़र भी रखें कि वे भाजपा वालों से ज्यादा घुले-मिले नहीं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व में भाजपा के कुछ सीनियर नेताओं ने मुकुल से बड़े-बड़े वायदे किए थे, उनसे यह भी कहा गया था कि बंगाल के आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा उन्हें ठीक वैसे ही तैयार करेगी, जैसा पार्टी ने बिहार में नीतीश को तैयार किया था। और अगर उनका यह गठबंधन चुनाव में विजयी रहा तो मुकुल वेस्ट बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। पर बिहार की करारी हार के बाद इन दिनों कमल थोड़ा कुम्हलाया हुआ है, भाजपा नेताओं के कंधे तनिक झुके हुए हैं और पुराने वादे उन्हें याद भी नहीं रह गए हैं, चुनांचे ऐसे में मुकुल राय ने भी पाला बदलने में ही भलाई समझी।
Posted on 30 November 2015 by admin
नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख रणनीतिकार अरूण जेटली के घर सियासी अनुगूंजों के बीच अब शहनाई की धुन मुखरित होने वाली है। आगामी 7 दिसंबर को उनकी पुत्री सोनाली जेटली की शादी उनकी ही लीगल फर्म में पार्टनर जयेश बख्शी के साथ होने जा रही है। इस विवाह समारोह को यादगार बनाने के लिए जेटली परिवार ने बेहद खास तैयारियां की हैं। इस विवाह समारोह से जुड़े अलग-अलग 5 कार्यक्रमों में आमंत्रितों की सूचियां भी अलग-अलग हैं। मसलनए 5 दिसंबर को एक भजन-संध्या आहूत है, इस भजन-संध्या में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अलावा संघ और इसके अनुशांगिक संगठनों से जुड़े नेताओं को आमंत्रण भेजा गया है। मेंहदी-रस्म का आयोजन जेटली के खास मित्रों में शुमार होने वाले मुकुल रोहतगी के उनके मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित निवास पर हुआ है, इसमें जेटली परिवार के सगे-संबंधी और खास पारिवारिक मित्रों को बुलाया गया है। इसके बाद जेटली के कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके आवास पर संगीत का आयोजन है, संगीत समारोह को लेकर पिता-पुत्री के बीच मीठी नोंक-झोक भी हुई है, क्योंकि स्वयं जेटली इसमें किसी शास्त्रीय संगीत के पारंगत को आमंत्रित करना चाहते थे तो बेटी सोनाली इसमें मीका सिंह को बुलाना चाहती थी। संगीत पर वर-वधु पक्ष से जुड़े नजदीकी रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया है। 7 तारीख की संध्या पर अपनी पुत्री के परिणय के मौके पर जेटली ने गिने-चुने मेहमान बुलाए हैं। 9 दिसंबर को रिस्पेशन है। इस मौके पर जेटली ने प्रमुख लोगों को कृष्ण मेनन मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर होने वाले आयोजन के लिए न्यौता भेजा है। उम्मीद जताई जा रही है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो-तीन आयोजनों में शामिल हो सकते हैं। जेटली सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को आमंत्रण देने निजी तौर पर इनके घर पहुंचे थे। तो वहीं प्रियंका व रॉबर्ट से उन्होंने खास तौर पर फोन पर बात की और उन्हें इस विवाह समारोह में आने का न्यौता दिया। समझा जाता है कि सोनाली जेटली के विवाह समारोह में राजनीति, बिजनेस, मीडिया व खेल जगत से जुड़ी प्रमुख हस्तियों का जमावड़ा दिख सकता है, क्योंकि अरूण जेटली को दोस्तों का दोस्त माना जाता है। और यह मौका यही साबित करने का भी है।
Posted on 30 November 2015 by admin
यूपी विधानसभा चुनाव हालांकि वर्ष 2017 की शुरूआत में होने वाले हैं, पर सियासी आहटों का बाजार अभी से गर्म है। यूपी चुनाव को लेकर कांग्रेस में भी सरगर्मियां बढ़ गई है। पिछले दिनों नई दिल्ली के हिमाचल भवन में यूपी के प्रमुख कांग्रेसी नेताओं का एक बड़ा जमावड़ा जुटाए, सू़त्रों की माने तो यूपी के कई कद्दावर कांग्रेसी नेताओं मसलन रीता बहुगुणा जोशी, संजय कपूर और अबरार रिज़वी ने प्रियंका लाओ कांग्रेस बचाओ का अपना पुराना खटराग अलापना शुरू किया, तो इस पर यूपी कांग्रेस के एक प्रमुख दलित नेता पी एल पूनिया उखड़ गए और उन्होंने किंचित तल्खी से कहा कि राहुल जी अभी देश देख रहे हैं, यूपी भी देख रहे हैं और हमें उनके ही नेतृत्व पर पूरा भरोसा है, सो 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान उनके पास ही रहनी चाहिए। वहीं रीता बहुगुणा समेत कई अन्य नेताओं के विचार थे कि राहुल गांधी को राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बने रहना चाहिए और उन्हें यूपी में तभी झोंकना चाहिए जब तक कि ऐसा करना पार्टी के लिए बहुत जरूरी न हो। चुनांचे अगर प्रियंका को यूपी के आने वाले चुनाव में नेतृत्व की बागडोर सौंपी जाती है तो पार्टी संगठन में एक नई जान फूंक सकती हैं। अब ये दोनों ही पक्ष अपने.अपने विचारों से पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को वाकिफ कराने वाले हैं, क्योंकि आखिरी निर्णय तो एक मां का ही होना है।
Posted on 30 November 2015 by admin
संघ के एक प्रमुख नेता कृष्ण गोपाल के खिलाफ संघ संगठन में ही आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ समय में संघ के कई प्रांत प्रचारकों ने संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैय्याजी जोशी से मिलकर इस बात की शिकायत लगाई कि शाह-मोदी-जेटली के समक्ष कृष्ण गोपाल की आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है। संघ के प्रमुख नेताओं के वरदहस्त के बावजूद बतौर संगठन मंत्री कृष्ण गोपाल अपनी वह हैसियत नहीं बना पा रहे हैं जो वाजपेयी-युग में संघ के कद्दावर नेता मदनदास देवी की थी। यहां तक कि बाद के दिनों में संगठन मंत्री के पद का निर्वहन करते सरेश सोनी ने भी कई मौकों पर भाजपा नेतृत्व को झुकने पर मजबूर कर दिया, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी के अध्यक्षीय काल में इस बात की मिसाल दिखाई पड़ जाती है। संघ के स्वयंसेवकों ने अब कृष्ण गोपाल को एक नया नाम दे डाला है.लड्डू गोपाल, जिनका सारा ध्यान इन दिनों मानव संसाधन विकास मंत्रालय पर ही फोकस है। सूत्र बताते हैं कि विभिन्न विश्वविद्यालयों में उप-कुलपतियों की नियुक्तियों के लिए कृष्ण गोपाल की ओर से जो अनुसंशाएं भेजी गई थीए इनमें से ज्यादातर नामों को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की हरी झंडी मिल गई है, जाहिरा तौर पर कृष्ण गोपाल इसे अपने लिए और संघ के लिए एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। समझा जाता है कि जब संघ के शीर्ष नेतृत्व ने इस बाबत कृष्ण गोपाल से बात करनी चाही तो उन्होंने इस बारे में अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके संगठन मंत्री का दायित्व संभालने के बाद भी अभी भी सरेश सोनी भाजपा में संघ के दृष्टिकोण को प्रतिपादित करने के लिए खासे सक्रिय हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बात से रूठ कर कृष्ण गोपाल ने तो शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपने इस्तीफे की पेशकश भी कर दी थीए संघ नेतृत्व के समक्ष भी सांप-छूछंदर वाली स्थिति पैदा हो गई है, उनसे न निगलते बन रहा है, ना उगलते।
Posted on 30 November 2015 by admin
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस के मौके पर भले ही चतुर सुजान अमर सिंह अपने पुराने आका मुलायम के बगलगीर दिखे, पर सपा के अन्य नेताओं मसलन अखिलेश, रामगोपाल की ओर से उन्हें कोई खास तव्ज्जो मिलती नहीं दिखी। वैसे भी इन दिनों अमर सिंह नोएडा के 44 सेक्टर स्थित अपने एक प्लॉट को लेकर चिंता में हैं। सनद रहे कि यह प्लॉट भी उन्हीं प्लॉट की कडि़यों में से एक है जिसकी वजह से नीरा यादव को जेल की हवा खानी पड़ी। सूत्र बताते हैं कि अमर ने अपनी चिंताओं से नेताजी को वाकिफ कराया तो फिर यूपी सरकार की ओर से कोर्ट में एक एसएलपी लगाई गई है कि इस प्लॉट को छोड़ कर अन्य प्लॉटों पर स्टे बरकरार रखा जाए। सनद रहे कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इन विवादित भूखंडों पर स्टे आर्डर जारी किया गया है। वैसे तो अमर अपने एक पुराने मित्र अशोक चतुर्वेदी से भी बकायदा पुरानी वसूली को लेकर तत्परता से पेश आ रहे हैं, क्योंकि इन दिनों चतुर्वेदी उनका साथ छोड़ कर नरेश अग्रवाल और राजीव शुक्ला के पाले में चले गए हैं।
Posted on 30 November 2015 by admin
सहाराश्री सुब्रत राय की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है, कोर्ट के आदेश के बाद एक ओर जहां तिहाड़ में उनकी सुविधाओं में कमी कर दी गई है, जहां उन्हें चौबीसो घंटे इंटरनेट की सुविधायों से लैस एक लैपटॉप मुहैया कराया गया था और उनकी सुरक्षा में 34 जवान बहाल किए गए थे, कोर्ट के ताजा आदेश के बाद सहाराश्री को उनके पुराने सेल में वापिस भेज दिया गया है। पीएमएलए यानी प्रीवेंशन ऑफ मनी लांडरिंग एक्ट में भी उनकी पत्नी और दोनों बेटों पर ईडी का शिकंजा कसता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों हुई छापेमारी के दौरान उनके प्राइवेट जेटए लंदन स्थित उनके होटल और अपार्टमेंट्स पर भी आंच आई है, इतना ही नहीं सूत्रों का दावा है कि पिछले दिनों सुब्रत के छोटे भाई जयव्रत के पुत्र जाग्रतो राय दुबई में पुलिस के हत्थे चढ़ गए। सच है जब मुसीबतें आती है तो बस एक ओर से नहीं आती है।