Posted on 11 April 2016 by admin
पूर्व स्पीकर और सांसद पूर्णो संगमा की मृत्यु के बाद उनका परिवार तय नहीं कर पा रहा है कि संगमा के निधन से रिक्त हुई मेघालय की तुर्रा सीट से परिवार का कौन सा व्यक्ति चुनाव लड़ेगा। सूत्र बताते हैं कि दिवंगत संगमा की पत्नी चाहती हैं कि इस सीट से उनकी पुत्री अगाथा संगमा, (जो यूपीए काल में पहले भी इस सीट से जीत दर्ज कर मनमोहन सरकार में मंत्री रह चुकी हैं,) फिर से चुनावी मैदान में उतरें। वहीं संगमा द्वारा नवगठित एनपीपी के लोग चाहते हैं कि इस सीट से दिवंगत संगमा के पुत्र कॉन्रेड संगमा चुनाव लड़ें, जो अभी राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं। कांग्रेस ने पूरे परिदृश्य पर नज़र बनाए रखी है, अगर संगमा परिवार का कोई उत्तराधिकारी भाजपा के टिकट या उसके समर्थन से चुनावी मैदान में उतरता है तो उसके खिलाफ कांग्रेस भी अपना उम्मीदवार देगी। अगर संगमा परिवार का यह व्यक्ति निर्दलीय या फिर एनपीपी के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतरता है तो कांग्रेस उसके र्निविरोध चुने जाने का रास्ता साफ कर सकती है। सूत्र बताते हैं कि अभी कुछ दिनों पूर्व स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने दिवंगत संगमा की पत्नी को फोन किया और उनसे कहा कि उन्हें परिवार की बेहद चिंता है, सो परिवार मिल-बैठ कर तय कल लें कि पुत्र या पुत्री किसको चुनावी मैदान में उतारना है, ताकि भाजपा उन्हें अपना पूरा समर्थन दे सके। पर दिवंगत संगमा की पत्नी ने मोदी को टालते हुए कहा कि उनका परिवार अभी सदमे में हैं, सो ऐसी बातें सोचने का यह सही वक्त नहीं है।
Posted on 08 April 2016 by admin
क्या यूपी में अखिलेश राज में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है? और सत्ता की कुंजी को लेकर भी तमाम तरह के कयास जारी है। मुलायम के गृह क्षेत्र सैफई में एक शानदार एलिवेटेड हाईवे का निर्माण होना है, इसके निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारों से निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं, सूत्र बताते हैं कि ऐसे में एक दिन जिले के संबंधित अधिशासी अभियंता के पास राज्य के पथ निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव का फोन आ धमकता है और वे अपनी पसंद के एक व्यक्ति (ठेकेदार) को काम देने को कहते हैं, फिर बारी-बारी से उस अधिशासी अभियंता के पास पहले मुलायम सिंह और फिर स्वयं मुख्यमंत्री का फोन आ जाता है, जो अपनी-अपनी पसंद के ठेकेदार या निर्माण कंपनी को काम आबंटित करने को कहते हैं। बिचारे ये अधिशासी अभियंता चक्कर में फंस जाते हैं कि किसके आदेश की तामील करें, सो यह मामला लंबित रह जाता है। एक दिन जब सैफई के हैलीपैड पर मुख्यमंत्री उतरे तो उन्होंने डीएम से कह कर उस अधिकारी को वहीं बुलवा लिया और उतरते ही उन्हें जमकर डांट पिलाई, अधिशासी अभियंता के मुंह से निकल गया कि ’वह चाचा जी (शिवपाल) ने किसी और को काम देने को कहा था’। सूत्रों की मानें तो इस पर अखिलेश उखड़ गए, बोले-’मुख्यमंत्री मैं हूं या चाचा जी?’ मुख्यमंत्री के जाने के बाद उस अधिशासी अभियंता ने पिता-पुत्र व चाचा द्वारा अनुमोदित उन तीनों ठेकेदारों को तलब किया और उनके समक्ष हाथ जोड़ लिए-’भैया, आप तीनों आपसी सहमति से आपस में काम बांट लो और मेरी जान बख्श दो।’ ऐसा ही हुआ, और उस अधिकारी की नौकरी भी सलामत रह गई।
Posted on 08 April 2016 by admin
उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार के तख्ता पलट की सियासी पटकथा को अंजाम तक पहुंचाने में भाजपा के एक संगठन मंत्री शिव प्रकाश की एक महती भूमिका मानी जा रही है। सूत्रों की माने तो संघ के समर्पित कार्यकर्त्ता रहे शिव प्रकाश ही बागी कांग्रेसी नेताओं हरक सिंह रावत और विजय बहुगुणा के पुत्र साकेत बहुगुणा के बीच एक अहम कड़ी थे। कहते हैं कि एकबारगी ’ऑपरेशन हरीश रावत’ की योजना पर सहमति बनने के बाद शिव प्रकाश ने अपने भाई को मुरादाबाद से देहरादून शिफ्ट करवा दिया, जो कहीं न कहीं इस पूरी डील के केंद्र बिंदु बने। सूत्र बताते हैं कि इस बाबत शिव प्रकाश भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से कई बार मिले। शुरूआत में शाह का मानना था कि चूंकि बस साल भर ही उत्तराखंड में चुनाव होने हैं तो अभी रावत सरकार गिराने से जनता में इसका सही संदेश नहीं जाएगा। वैसे भी उत्तराखंड में भाजपा की वापसी हो रही है। इस पर भाजपा के इस संगठन मंत्री ने अपने पार्टी अध्यक्ष को भरोसा दिलवाया कि राज्य में एक बार हरीश रावत सरकार की विदाई से 6 महीने के अंदर परिस्थितियां बदल जाएंगी, और नई सरकार की जनप्रिय घोशणाएं भाजपा के चुनाव में जाने में सहायक बनेंगी, तर्क में दम था, सो शाह मान गए।
Posted on 08 April 2016 by admin
पर उत्तराखंड का यह शह-मात का खेल तब एक नए पेंचोखम में उलझ गया जब पार्टी अध्यक्ष शाह ने मजबूती से कहा कि अगर उत्तराखंड में सरकार बने तो फिर मुख्यमंत्री भाजपा का ही होना चाहिए। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले शिव प्रकाश उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ मंत्री हरक सिंह रावत से वादा कर आए थे कि मुख्यमंत्री हरक ही बनेंगे, और कांग्रेस के तमाम बागी विधायकों को हरक सिंह की अगुवाई वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया जाएगा और इस सरकार को भाजपा बाहर से समर्थन देगी। सूत्र बताते हैं कि अपने पार्टी अध्यक्ष से मिलने के बाद शिव प्रकाश पलट गए और अब उन्होंने हरक सिंह से कहा कि इस नवगठित सरकार का मुख्यमंत्री भाजपा से ही होगा, जबकि हरक सिंह को उप मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। कांग्रेस के बागी विधायकों से कहा गया कि वे हरक सिंह की अगुवाई में एक नई पार्टी का गठन कर उसका विलय भाजपा में कर दें। कई बागी कांग्रेसी विधायक, मसलन प्रणव सिंह चैंपियन और सुरेंद्र सिंघल इस नए प्रस्ताव से उखड़ गए, उनका कहना था कि वे एक मुस्लिम बहुल इलाके से जीत कर आए हैं, सो एक बार अगर वे भाजपा में शामिल हो गए तो अगले चुनाव में अपने संबंधित क्षेत्रों से उनका जीतना भी संदिग्ध हो जाएगा, भाजपा के इस नव अवतरित रणनीतिकार के दांव से भले कुछ हुआ न हुआ हो, हरीश रावत चित्त जरूर हो गए हैं।
Posted on 08 April 2016 by admin
करीब डेढ़ माह पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर ने 11 अकाली/भाजपा नेताओं की एक लिस्ट पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को सौंपी कि ये वे लोग हैं जिन्हें उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार कर लिया है। राहुल गांधी व्यस्त रहे और कोई एक महीने तक उन्होंने कैप्टन के प्रस्ताव पर ध्यान ही नहीं दिया। अभी पिछले दिनों ’राहुल गांधी के ऑफिस से उनके विश्वासपात्र राजू ने कैप्टन को फोन कर कहा कि ’राहुल जी ने आपके प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है,’ कुपित कैप्टन ने किंचित उलाहने भरे अंदाज में कहा कि ’राहुल जी ने झंडी दिखाने में बड़ी देर लगा दी वे सभी लोग पिछले ही हफ्ते ’आप’ में शामिल हो गए हैं।’
Posted on 08 April 2016 by admin
पिछले सप्ताह दिल्ली में आहूत भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लगभग हर एक वक्ता ने नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांध दिए, स्वयं मोदी की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने एक भावपूर्ण भाशण दिया और उन्होंने मोदी-वंदना की सारी हदें लांध दीं, उन्होंने मोदी को एक ऐसा मसीहा बता डाला जो अंधकार में डूबे देशवासियों को उम्मीद की नई किरण दिखाने के लिए संकल्पबद्द है, इस पर तालियां भी खूब बजीं। ऐसे में मोदी विरोध का अलख जगाने वाले शत्रुघ्न सिन्हा की उस बैठक में उपस्थिति कईयों को हैरान करने वाली थी। पर शॉट गन थे जो अपनी पूरी ठसक में, बैठक शुरू होने से काफी पहले वे आ गए थे, और भाजपा नेताओं से एक-एक कर उनसे बड़ी बेतकल्लुफी से मिल रहे थे, पार्टी कर्णधारों के डर के मारे कई पार्टी नेता सिन्हा से आंखें चुराते दिखे और कई नेताओं से वे यह कहते सुने गए कि जब ’डिनर सेशन’ में मुलाकात होगी तब वे अकेले में बात करेंगे।
Posted on 08 April 2016 by admin
असम में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार व केंद्रीय मंत्री सर्बांनंद सोनोवाल अपने विधानसभा सीट मजूली में उलझ गए लगते हैं। सनद रहे कि मजूली एक ऐसा क्षेत्र है जो ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव का षिकार है, यूनेस्को की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर वहां स्थितियां न सुधरी तो एक दिन ब्रह्मपुत्र पूरी तरह से मजूली को निगल लेगा। दरअसल, सामाजिक कार्यकर्त्ता संजय घोश और छात्र नेता सौरव बोरा की हत्या के मामले में राजनैतिक विरोधियों ने सोनोवाल का नाम उछाल दिया है। इसके अलावा राज्य के एक प्रमुख क्षत्रप हेमंत बिस्व सरमा जो हालिया दिनों में भाजपा में शामिल हुए हैं, उनसे भी सोनोवाल का छत्तीस का आंकड़ा है। इसके अलावा तमाम समझाने-बुझाने के बाद भी भाजपा के 25 और अगप के 14 बागी उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर गए हैं। सोनोवाल स्वयं मजूली से चुनावी मैदान में हैं, जहां उन्हें एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है, नतीजन वे मजूली से बाहर निकल ही नहीं पा रहे हैं, जिससे वे भाजपा के अन्य 87 उम्मीदवारों के पक्ष में भी चुनाव प्रचार कर सके, विरोधियों की यह रणनीति असम में कामयाब होती दिख रही है।
Posted on 22 March 2016 by admin
पंजाब की राज्यसभा सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा में बेतरह कोहराम मचा। चुनावी आहटों को भांपते हुए पंजाब कांग्रेस प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी ओर से दो नाम फाइनल कर दिए, इसमें से एक पंजाब विधानसभा में कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता (स्वर्गीय बलराम जाखड़ के पुत्र) सुनील जाखड़ थे और दूसरे प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायक हंसराज हंस थे। हंसराज हंस चूंकि दलित हैं सो कैप्टन ने सोचा इससे प्रदेश के दलितों में एक अच्छा संदेश जाएगा, ये दोनों नाम लेकर कैप्टन दिल्ली जाकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया से मिले और इस बाबत उनका समर्थन भी हासिल कर लिया। पर राहुल गांधी ने अपनी कोर टीम की सलाह पर मां के फैसले को बदलते हुए इन दो राज्यसभा सीटों के लिए बाजवा और ढिल्लों के नाम फाइनल कर दिए। सूत्र बताते हैं कि इस बात से नाराज़ अमरिंदर ने अपने खास 27 विधायकों को अलग से बुलाया और उन्हें कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों की विकेट गिराने को कहा। एक कांग्रेसी विधायक ने फोन कर यह खबर सोनिया तक पहुंचा दी, इसके बाद सोनिया ने आनन-फानन में कैप्टन को दिल्ली तलब किया और उन्हें अच्छी-खासी डांट पिला दी, सोनिया का कहना था कि अभी जो पंजाब से रिपोर्ट आ रही है उसमें 80 सीटें तो आम आदमी पार्टी के हक में बताई जा रही हैं, षेश बची 37 सीटों में आप कौन सा तीर मार लोगे? अमरिंदर शांत भाव से चंडीगढ़ लौटे और कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल कर ली।
Posted on 22 March 2016 by admin
बवाल तो भाजपा में भी खूब मचा था। नाराज़ पार्टी नेता नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने के लिए, कहा जाता है कि स्वयं प्रधानमंत्री ने पहल की और उन्हें मिलने के लिए बुलाया। सिद्धू समर्थकों का दावा है कि पीएम ने सिद्धू को न सिर्फ राज्यसभा देने का वादा किया, बल्कि सिद्धू को यह भी वचन दिया है कि जीत के बाद वे उन्हें अपनी सरकार में मंत्री भी बनाएंगे। कहते हैं कि सिद्धू ने अपने समर्थकों के बीच इस बात का ऐलान कर दिया कि राज्यसभा में जीत के बाद वे भाजपा के समर्थन में अमृतसर में एक लाख लोगों की रैली करेंगे, पर जब अगले दिन लिस्ट आई तो उसमें से सिद्धू का नाम ही नदारद था। सूत्र बताते हैं कि सिद्धू अब अपने समर्थकों से कह रहे हैं कि उन्हें यह वचन मिला है कि उन्हें मनोनीत कोटे से राज्यसभा में लाया जाएगा। और मंत्रिपद? यह तो सर्वशक्तिमान जानें।
Posted on 22 March 2016 by admin
सैंया भए कोतवाल तो अब डर काहे का, जब से बिहार में लालू यादव की पुनर्वापसी हुई है, वहां की रंगे-फिज़ा में पुरानी रवायतों के दौर लौटने लगे हैं। भाजपा वाले इसे जंगलराज पार्ट-2 का नाम दे रहे हैं, पर इतना तो सच है कि बिहार में एक बार फिर से अपराध और अपराधियों की तूती बोलने लगी है, उनके लिए प्रदेश एक सुरक्षित चारागाह बनता जा रहा है। पिछले दिनों खुफिया तंत्रों की रिपोर्ट पर स्थानीय पुलिस ने ’गैंग्स ऑफ बनुछपार’ पर दबिश दी, राज्य के पश्चिम चंपारण जिले में यह अपराधियों का एक ऐसा संगठित गिरोह था, जो बकायदा सोशल मीडिया पर खासा एक्टिव था, इसके फेसबुक पेज थे और ’व्हाट्स एप’ग्रुप थे। इसके फेसबुक पेज पर हाथों में बंदूक लिए बकायदा बदमाशों की फोटो इस टैगलाइन के साथ लगी थी-’अगर आपको भगवान से मिलना है तो बनुछपार चले आओ। बेतिया में भी बिहार पुलिस ने ऐसे ही युवा अपराधियों के ’व्हाट्स एप’ ग्रुप को टैकडाउन किया जो अपने गिरोह में शामिल होने के लिए सोशल मीडिया साइट्स का इस्तेमाल कर बेरोजगार युवकों को बहला-फुसला रहे थे और धड़ल्ले से क्राइम नेटवर्क के विस्तार में जुटे थे।