Posted on 07 May 2017 by admin
क्या अरविन्द केजरीवाल को नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत मारक टिप्पणियां करनी महंगी पड़ सकती हैं? कहते हैं मोदी के अतिप्रिय रणनीतिकार अमित शाह ने दिल्ली के लिए अपनी नई व्यूह रचना बना ली है और अगर सब कुछ इसी प्लॉन पर चला तो आने वाले कुछ महीनों में केजरीवाल के हाथ से दिल्ली की गद्दी जा सकती है। इस बात के संकेत भाजपा के दिल्ली प्रभारी श्याम जाजू के उस बयान से मिलते हैं जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अगले 3-4 महीनों में दिल्ली की सरकार गिर सकती हैं। राजौरी गार्डन उप चुनाव में करारी हार के बाद इस वक्त दिल्ली में आप के पास 66 विधायक हैं, जिसमें से 3-4 तो पहले से मुकदमों में फंसे हुए हैं। 21 आप विधायकों की सदस्यता को लेकर चुनाव आयोग का फैसला आने वाला है, अगर वे असंबद्द घोषित किए जाते हैं, तो भाजपा से जुड़े सूत्रों का दावा है कि 15 अन्य आप विधायक निरंतर उनके संपर्क में है। संपर्क सूत्र का कार्य कर रहे हैं, स्वराज पार्टी के योगेंद्र यादव और पार्टी से नाराज चल रहे कुमार विश्वास। कुछ आप विधायक सीधे भाजपा के संपर्क में बताए जाते हैं। भाजपा सही मौके के इंतजार में हैं, केजरीवाल के इरादों व मंसूबों पर तब झाड़ू फेरने की तैयारी है जब आप की अंदरूनी कलह सतह पर आ जाएगी।
Posted on 07 May 2017 by admin
कोई दो दिन पूर्व केजरीवाल के कोर ग्रुप के तीन अहम सदस्य संजय सिंह, आशीष खेतान और आशुतोष केजरीवाल से मिलने उनके घर पहुंचे। साथ में पार्टी के असंतुष्ट माने जाने वाले कुमार विश्वास भी थे। दिल्ली के एमसीडी चुनाव में पार्टी की करारी हार ने इन केजरीवाल करीबियों को अंदर तक हिला दिया था। इन चारो नेताओं ने समवेत स्वर में केजरीवाल से गुहार लगाई कि अब पार्टी को नकारात्मक राजनीति छोड़नी होगी। सूत्र बताते हैं कि इन नेताओं का स्पष्ट तौर पर मानना था कि अब ईवीएम के मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालना ही पार्टी के लिए श्रेयस्कर रहेगा। सूत्रों का यह भी दावा है कि कोर कमेटी की इस बैठक में कुमार विश्वास सबसे खुल कर बोले और एक तरह से उन्होंने अपने मन की पूरी भड़ास निकाली।
Posted on 24 April 2017 by admin
जिसकी जितनी ऊंची छतरी, उसकी उतनी धाक, चुगने वाले सारी गर्मी ऊपर ही ऊपर चुग बैठे, हमने जलाई थी आग, पर मुट्ठी आई राख!’ कवयित्री अनामिका से उधार ली गई इन चंद पंक्तियों से अपनी बात शुरू करता हूं कि बदले सियासी परिदृश्य में मोदी की बम-बम है। कांग्रेस समेत अन्य दलों में भगदड़ मची है, तमाम नेताओं को सिर्फ भाजपा में ही फिलवक्त अपना भविष्य दिख रहा है। सो, बीजेपी में शामिल होने की मारा मारी है, बात सिर्फ अरविंदर सिंह लवली या बरखा सिंह जैसे दिल्ली के नेताओं की नहीं है। कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं की भाजपा में शामिल होने की अटकलें उफान पर हैं, भाजपा से जुड़े सूत्र खुलासा करते हैं कि कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ, नारायण राणे, बी.के हरि प्रसाद जैसे सीनियर भी भाजपा शीर्ष नेतृत्व के निरंतर संपर्क में हैं। कमलनाथ की नाराजगी इस बात को लेकर हो सकती है कि कांग्रेस नेतृत्व मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को ज्यादा तरजीह दे रहा है, वैसे भी मध्य प्रदेश में कांग्रेस पहले से कई खेमों में बंटी है। कहते हैं कमलनाथ को भाजपा में लाने की जमीन सहारनपुर के भाजपा सांसद, राघव लखनपाल (जो कमलनाथ के नजदीकी रिश्तेदार भी हैं) तैयार कर रहे हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र की एक भगवा सांसद के मार्फत अमित शाह से संपर्क साधा है। बात सिर्फ इस पर अटकी है कि कमलनाथ के चाहने वाले उनके लिए राज्यसभा और केंद्र में मंत्रिपद चाहते हैं, भाजपा आलाकमान को यह मांग थोड़ी ज्यादा लग रही है। महाराष्ट्र के ओबीसी नेता नारायण राणे के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने काफी पहले से भाजपा से अपने तार जोड़ रखे हैं, उन्हें इंतजार बस एक सही वक्त का है। सबसे हैरतअंगेज नाम तो गांधी परिवार की कोटरी की राजनीति करने वाले बी.के. हरि प्रसाद का है, अब भाजपा के लिए वे क्या कर पाएंगे सवाल यही सबसे बड़ा है, पर अगर कांग्रेस का इतना बड़ा जहाज अगर सचमुच डूबने लगा है तो चूहे सबसे पहले भागेंगे ही।
Posted on 24 April 2017 by admin
उत्तर प्रदेश के नए नवेले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में ठाकुरों के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभर रहे हैं, वे न सिर्फ ठाकुरों को अपेक्षित संरक्षण दे रहे हैं अपितु यूपी की नई नौकरशाही में ठाकुर अफसरों की तूती बोल रही है। हालिया दिनों में योगी सरकार ने थोकभाव में नए डीएम व एसपी के तबादले किए हैं, आप इस लिस्ट पर गौर फरमा लें तो आपका यकीन सचमुच पक्का हो जाएगा। अब जरा योगी के करीबी नौकरशाहों पर नज़र डालें तो ये सब के सब ठाकुर हैं, मसलन सीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी मृत्युंजय कुमार सिंह, सेक्रेटरी टू सीएम अमित कुमार सिंह, डीजीपी सुलखान सिंह। फेहरिस्त लंबी है और योगी की यात्रा भी यकीनन उतनी ही लंबी है।
Posted on 17 April 2017 by admin
सूत्रों की मानें तो यूपी में भगवा परचम लहराने के ठीक दो सप्ताह बाद भाजपाध्यक्ष अमित शाह ने मुंबई की अपनी एक पसंदीदा सर्वेक्षण एजेंसी से देश का मूड भांपने के लिए एक बड़ा सर्वे कराया है। कहते हैं अभी कुछ रोज पूर्व इस एजेंसी ने अपनी फाइनल रिपोर्ट शाह के सुपुर्द कर दी है। सर्वेक्षण के नतीजों से भगवा पार्टी में एक नई ऊर्जा का संचार हो सकता है, क्योंकि इस सर्वे में 2019 के चुनाव में मोदी की भाजपा को 311 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (मुमकिन है कि कुछ रोज में कांग्रेस अपने युवराज को पार्टी अध्यक्ष का राज तिलक कर दे) को मात्र 39 सीटें मिलने की बात कही गई है। एनडीए की सीटें बढ़ कर 367 पहुंच सकती है। वहीं पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में भी भाजपा के बंपर जीत का आकलन है, जहां राज्य की 42 में से 12 लोकसभा सीट पर कमल खिलते दिखाया गया है। यूपी में भले ही भाजपा 73 के वर्तमान आंकड़े से 59 सीटों पर सिमट सकती है, पर जिन राज्यों में कभी भगवा रजधूलि के दर्शन नहीं हुए थे वहां भी कमल खिल सकता है मसलन तमिलनाडु में 4 व केरल में 1 सीट भाजपा के खाते में जा सकती है। असम में 9 और बिहार की 32 सीटों को एनडीए के खाते में दिखाया गया है। कर्नाटक की 28 में से 21 सीटें भाजपा की झोली में जा सकती हैं। इस सर्वेक्षण का एक हैरतअंगेज पहलू यह भी है कि देश की कई सीटों पर मुस्लिम और दलित वोटरों का झुकाव भी भाजपा की ओर दिखाया गया है। यानी ’हर-हर मोदी, हर घर मोदी’ के भगवा तान को 2019 में एक नया उफान, एक नई पहचान मिल सकती है।
Posted on 17 April 2017 by admin
मुंबई की इसी एजेंसी ने नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी की लोकप्रियता को मापने के लिए भी अपनी प्रश्नावली में कई प्रश्न रखे थे, इसके नतीजे किंचित चौंकाने वाले नहीं हैं। पर पीएम मोदी ने लोकप्रियता की ग्राफ में राहुल को इतना पीछे छोड़ दिया है कि इस आंकड़े को यहां उद्घाटित करना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी सर्वेक्षण एजेंसी ने कई राज्यों के आसन्न विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते वहां के लोगों की राय जानी है। जनमत का रूझान मोदी युग के नए अभ्युदय की ओर है, गुजरात, हिमाचल जैसे राज्यों में भगवा पताका लहरानी तय मानी जा रही है। त्रिपुरा कर्नाटक में भाजपा जीत की ओर अग्रसर है, ओडिशा में भी भगवा संभावनाएं सबसे बेहतर दिख रही हैं। इस सर्वेक्षण में सीपीएम के सबसे बड़े पतन की भी भविष्यवाणी हुई है, सर्वे कहता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कभी लालकिला कहे जाने वाले पश्चिम बंगाल में सीपीएम का खाता खुल पाना भी मुश्किल में है, उसे देश भर में मात्र 4 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है, इनमें से दो सीटें त्रिपुरा से तो दो अन्य सीटें केरल में आ सकती हैं। सो, भारत में लेफ्ट के प्रादुर्भाव पर मोदी के राइट ने निर्णायक मुहर लगा दी है।
Posted on 10 April 2017 by admin
सूत्र बताते हैं कि उत्तराखंड की त्रिवेंद रावत सरकार में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है, पार्टी के अंदर असंतोष नित्य प्रति नई अंगड़ाईयां ले रहा है। खास कर कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं ने अभी से तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा के अपने लोगों में भी असंतोष कम नहीं है, जैसे 3 बार के विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने राज्य के निवर्त्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत को 12 हजार से ज्यादा वोटों से हराया और किच्छा में भी रावत को हराने वाले राजेश शुक्ला को भी भगवा पार्टी ने ज्यादा तरजीह नहीं दी। न तो यतीश्वरानंद और न ही शुक्ला को भाजपा सरकार मंत्री मंत्री बनाया गया। विजय बहुगुणा के लोगों को हालांकि थोकभाव में भाजपा ने टिकट दिए, पर बहुगुणा के पुत्र सौरभ को भी मंत्री नहीं बनाया गया। राज्य के पहले विधानसभा अध्यक्ष हरबंस कपूर को भी मंत्री बनने का मौका नहीं मिल पाया। विजय बहुगुणा के जिन लोगों को सरकार में लिया गया है उन्हें भी हल्के-फुलके मंत्रालय दिए गए हैं। वैसे भी सरकार में सीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ओम प्रकाश की तूती बोलती है, इस बात को लेकर भी भगवा विधायकों में किंचित नाराजगी है।
Posted on 10 April 2017 by admin
भगवा सियासत में नवधूमकेतु से चमकने वाले पत्रकार हेमंत शर्मा की पुत्री ईशानी की सगाई के मौके पर नई दिल्ली के ताज मान सिंह होटल में हाइप्रोफाइल लोगों का एक बड़ा जमावड़ा जुटा था। हेमंत शर्मा भाजपाध्यक्ष अमित शाह से नजदीकियों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। इनकी पुत्री ने कानून में डिग्री हासिल की है और इनके होने वाले दामाद मध्य प्रदेश में आईपीएस अफसर हैं। इसी बुधवार को आहूत इस सगाई के मौके पर कई-कई दफे एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जैसे सपा के दो भाईयों शिवपाल यादव और राम गोपाल यादव इत्तफाकन एक ही वक्त पर पहुंचे, दोनों स्टेज पर भी साथ ही आ धमके, दोनों ने एक-दूसरे की ओर छुपी नजरों से देखा पर आपस में कोई बात नहीं हुई। ठीक ऐसे ही कांग्रेस के दो दिग्गज जिनका आपस में छत्तीस का आंकड़ा है, यानी मोतीलाल वोरा और जनार्दन द्विवेदी, इन दोनों के सगाई समारोह में पहुंचने का वक्त भी एक था, ये दोनों भी साथ-साथ स्टेज पर तशरीफ लाए, प्रमोद तिवारी और नरेश अग्रवाल के साथ भी लगभग यही वाकया घटित हुआ। नृपेंद्र मिश्र जल्दी आए और जल्दी चले गए।
Posted on 02 April 2017 by admin
यह बात कोई सप्ताह भर पहले की है, गांधी परिवार की जाज्वल्यमान भविष्य प्रियंका गांधी को राजस्थान के रणथंबौर नेशनल पार्क में छुट्टियां बिताने जाना था, अपने परिवार के साथ, उनका बेटा अपनी आंख की चोट से उबर रहा था, कि प्रियंका को एक नई अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई, गांधी परिवार से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि प्रियंका ने गांधी परिवार के पुराने वफादारों को अपने घर चाय पर बुलाया। इनमें से एक नामधन्य टेक्नोक्रेट हैं, दूसरे सज्जन कालांतर में बड़े पत्रकार और एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक के संपादक रह चुके हैं। प्रियंका ने इन लोगों से कहा कि इनका जुड़ाव इंदिरा जी के जमाने से कांग्रेस के साथ रहा है, पर अभी समय थोड़ा ठीक नहीं चल रहा है, उन्हें भाई राहुल के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और वह चाहती हैं कि आने वाले दिनों में राहुल को कांग्रेस की पूरी तरह से जिम्मेदारी मिले, उन्हें पार्टी अपना अध्यक्ष घोषित करे और 2019 का आम चुनाव राहुल के नेतृत्व में लड़ा जाए। और अगर उसके बाद सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चलता है तो वह भी सक्रिय राजनीति में उतर आएंगी। सूत्रों का दावा है कि प्रियंका ने अपने शुभचिंतकों से यह भी कहा कि रॉबर्ट (वाड्रा) सक्रिय राजनीति में आने को बेहद उत्सुक हैं और हो सकता है कि 2019 का चुनाव वे कांग्रेस की टिकट पर मुरादाबाद से लड़ें। वहां से बाहर निकल कर गांधी परिवार के ये पुराने वफादार खान मार्केट के एक रेस्तरां में जाकर बैठे और समवेत स्वर में एक गुहार लगाई गई कि कांग्रेस का समय आने वाले दिनों में और बुरा हो सकता है।
Posted on 02 April 2017 by admin
हालिया विधानसभा चुनाव में एक मंझे राजनेता और एक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शख्स का बड़ा पैसा उनके किसी नजदीकी दोस्त और बिजनेसमैन ने गड़प कर लिया। सूत्रों का दावा है कि इन विधानसभा चुनावों से पूर्व एक तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अपनी एक बड़ी नकद रकम अपने बेटे के मार्फत प्रदेश के एक बड़े बिजनेसमैन के पास रखी थी, हालांकि यह मुख्यमंत्री चाहते थे कि रकम कुछ अलग-अलग लोगों के पास रखी जाए, पर पुत्र ने परिवार के भरोसेमंद उस बिजनेसमैन पर भरोसा किया और सारी की सारी रकम उनके सुपुर्द कर दी। मुख्यमंत्री का भरोसा था कि हंग असेबंली आने की सूरत में यह रकम विधायकों के खरीद-फरोख्त में उनके काम आएगी। पर वे चुनाव हार गए, बुरी तरह से। तो अपने बेटे को उस बिजनेसमैन के पास अपनी रकम वापिस लेने के लिए भेजा। बिजनेसमैन ने सिर धुनते हुए कहा कि ’यह सारी रकम उन्होंने बोरों में भर कर अपने अनाज के गोदाम में रखवा दी थी, अचानक उन्हें मालूम पड़ा कि सारे नोट चूहों ने कुतर दिए हैं।’ पूर्व सीएम के बेटे ने सिर पकड़ लिया, पूछा-’कितना नुकसान हो गया।’ बिजनेसमैन ने उससे दुगुनी गति से विलाप करते हुए कहा-’कुछ भी नहीं बचा, अब मैं क्या करूं?’ पूर्व मुख्यमंत्री जानते हैं कि सियासत की दशा-दिशा बदल चुकी है, ऐसे में अपने पैसे निकलवाना आसान नहीं, सो उन्होंने इस बिजनेसमैन से कहा, ’वे किश्तों में पैसे लौटा दें।’बिजनेसमैन का कहना है कि उनकी इतनी औकात कहां जो इतनी रकम जुटा सकें, दो-चार-पांच करोड़ की बात होती तो वे फिर भी सोच सकते थे। पूर्व सीएम साहब अब पानी पी-पीकर अपने बेटे को कोस रहे हैं, जिन्होंने सारे अंडे एक ही टोकरी में रख दिए थे।