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सुषमा स्वराज हो सकती हैं देश की अगली राष्ट्रपति

Posted on 19 June 2017 by admin

सब कुछ अगर यूं ही योजनाबद्द तरीके से आगे बढ़ा तो केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस दफे रायसिना हिल्स पर काबिज हो सकती हैं। एक ओर वह प्रधानमंत्री मोदी की निजी पसंद बताई जाती हैं, तो संघ भी उनके नाम की पुरकश वकालत करता नजर आ रहा है, संघ में नंबर दो की हैसियत रखने वाले भैय्या जी जोशी पिछले काफी समय से सुषमा का नाम आगे बढ़ाते रहे हैं। विश्वस्त सूत्र खुलासा करते हैं कि इस शुक्रवार को जब वेंकैया नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की तो राष्ट्रपति पद के एक सर्वमान्य उम्मीदवार के तौर पर सुषमा का नाम उभर कर सामने आया। हालांकि आधिकारिक तौर पर कांग्रेस इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रही है, पर दस जनपथ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि वेंकैया जितने नामों की फेहरिस्त लेकर गए थे, उनमें बस सुषमा के नाम पर ही सोनिया को किंचित कोई आपत्ति नहीं थी। हालांकि भाजपा के अंदर रायसिना हिल्स पर नज़र गड़ाए रखने वाले नेताओं व नेत्रियों की एक लंबी फौज है। इस सूची में भाजपा के बिसरा दिए गए भीष्म पितामह लाल कृष्ण अडवानी के अलावा मुरली मनोहर जोशी, वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, सुमित्रा महाजन, अरुण जेटली जैसे नेतागण भी शुमार हैं। इसके अलावा भाजपा के ही कुछ सीनियर नेता मेट्रोमैन ई.श्रीधरन का नाम भी चला रहे हैं। नाम तो गवर्नर विद्यासागर राव और द्रौपदी मुर्मू के भी चल रहे हैं। शिवसेना ने तो संघ प्रमुख मोहन भागवत और एम एस स्वामीनाथन के नाम का भी शिगूफा उछाला, पर मौजूदा वक्त में सुषमा इस रेस में सबसे आगे दिखाई दे रही हैं। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर प्रधानमंत्री, अमित शाह और राम माधव के बीच एक लंबी मुलाकात चली, इस बैठक में भी सुषमा स्वराज के नाम पर चर्चा हुई और यह माना गया कि सुषमा की न केवल एक निर्विवाद छवि है अपितु अन्य दलों में भी उनकी स्वीकार्यता सबसे ज्यादा है। शायद यही वजह है कि राष्ट्रपति पद की दौड़ में फिलवक्त सुषमा सबसे आगे दिखाई दे रही हैं।

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ऐसे कटा वेंकैया का पत्ता

Posted on 19 June 2017 by admin

यह पिछले हफ्ते की बात है वेंकैया नायडू पीएम मोदी से मिलने पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि चतुर सुजान वेंकैया ने मोदी से अर्ज किया कि-’मैं आपका ’ब्लाइंड फॉलोअर’ रहा हूं, इन दिनों मेरा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा है, अगर ऐसे में आप मुझे कोई बड़ी जिम्मेदारी (राष्ट्रपति) देते हैं तो सेवादार की तरह अपना कर्तव्य निभाऊंगा।’ प्रधानमंत्री ने इस पर एक सुविचारित चुप्पी साध ली, कहते हैं कि तब तक वहां मुरली मनोहर जोशी का भी पदार्पण हो जाता है, पीएम ने उन्हें भी मिलने का वक्त दे रखा था। जोशी और वेंकैया एक-दूसरे को वहां देखकर एकदम से चौंक गए। सूत्रों की मानें तो फिर जोशी ने पीएम से कहा-’आपसे अकेले में दो मिनट बात करनी है’ कहते हैं इस पर पीएम ने कहा कि ’वेंकैया जी भी अपने हैं, आप अपनी बात यहां भी कह सकते हैं’, जोशी ने खुद को ठगा सा महसूस किया और बस इतना ही कह पाए-’मैंने अपना पूरा जीवन पार्टी की सेवा में लगाया है, मेरे साथ न्याय होना चाहिए।’ पीएम की अधरों पर स्मित की एक रेखा कौंध गई और उनकी उसी मुस्कान में उनका राजनैतिक संदेश निहित था। एक संदेश वेंकैया के लिए भी था, सो उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय करने वाली कमेटी में डाल दिया गया, राजनाथ व जेटली का भी यही हश्र हुआ। शनैःशनैः रायसिना हिल्स के रहस्यों से धुंध छंटने लगी है।

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वेंकैया देश के अगले राष्ट्रपति ?

Posted on 29 May 2017 by admin

सब कुछ अगर योजनाबद्द तरीके से चला तो मोदी के नए हनुमान में शुमार होने वाले संकट मोचक वेंकैया नायडू देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं। सियासत की नब्ज पढ़ने वाले मोदी को इस बात का बखूबी इल्म है कि एक दक्षिण भारतीय को रायसिना हिल्स में काबिज कराने पर दक्षिण भारतीय राज्यों में इसका अच्छा संकेत जाएगा। सनद रहे कि इन दिनों दक्षिण के राज्यों में भाजपा के कदम जमाने के लिए मोदी व शाह ने पूरा दम लगा रखा है। अभी दो रोज पूर्व नए राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर मोदी ने राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली व नितिन गडकरी के साथ एक अहम बैठक की थी, सूत्र बताते हैं कि अपने वरिष्ठ मंत्रियों की इस बैठक में मोदी ने अपना पत्ता खोलते हुए वेंकैया के नाम को आगे किया और इस पर साथी मंत्रियों की राय ली। सूत्र यह भी बताते हैं कि मोदी पर वेंकैया का एक पुराना कर्ज़ है। जब मोदी गुजरात दंगों के झंझावत से जूझ रहे थे तब वेंकैया पार्टी अध्यक्ष थे। माना जाता है कि उस समय मोदी और हरेन पंडया के बीच तनातनी थी। सूत्र बताते हैं कि तब मोदी को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भरसक यह समझाने की कोशिश की थी कि ’वे अनावश्यक रूप से पंडया को अपना प्रेस्टीज इश्यू ना बनाएं।’ पर समझा जाता है कि इस पर मोदी ने जवाब दिया कि ’गुनाह किसी और का और गुनहगार मुझे ठहराया जा रहा है?’ सूत्रों का यह भी दावा है कि तब मोदी की भावनाओं की कद्र करते हुए तब के पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने हरेन पंडया को गुजरात चुनाव से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए थे। मोदी अपने ऊपर इसे वेंकैया का अहसान मानते हैं, चुनांचे यही वजह है कि एक असफल संसदीय कार्य मंत्री साबित होने के बावजूद आज वेंकैया के पास शहरी विकास व सूचना प्रसारण जैसे दो अहम मंत्रालयों का जिम्मा है। वहीं पार्टी का एक तबका ऐसा भी है जो यह अंदेशा जता रहा है कि अगर एक बार राष्ट्रपति पद के लिए वेंकैया का नाम आगे आया तो उनके पुराने किस्से भी आगे आ जाएंगे। इसमें से एक प्रमुख आरोप वेंकैया पर यह भी हैं कि जब वाजपेयी सरकार में वे ग्रामीण विकास मंत्री थे तो आंध्र के पैकेज में 100 करोड़ की गड़बड़ी हो गई थी, इसी संवाददाता की रिपोर्ट तब पंजाब केसरी अखबार की पहली ख़बर बनी थी, जिस पर विपक्ष ने लगातार चार दिनों तक संसद चलने नहीं दी थी।

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एक डॉक्टर भाजपा के अंदर

Posted on 29 May 2017 by admin

ये शख्स कभी दिल्ली के अपोलो अस्पताल में एक मामूली डॉक्टर थे, आज उनके हाथ दो राज्यों में भगवा सत्ता की नब्ज है। वे पार्टी अध्यक्ष के बेहद दुलारे हैं सो, पार्टी संगठन में न सिर्फ उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है अपितु दो अहम राज्यों का प्रभारी भी बनाया गया है। इन दोनों राज्यों में तो बकायदा भाजपा की सरकार भी है। पार्टी अध्यक्ष की नजरें इनायत ने उन्हें इन दोनों प्रदेशों का एकछत्र शाह बना दिया है। उन्हें पार्टी के केंद्रीय कार्यालय 14, अशोक रोड में एक दमकता-चमकता कमरा दिया गया है, जहां इनकी सियासी दुकान चल निकली है। सत्ता का दर्प व उसकी बादशाहत इनके हाव-भाव से भी झलकने लगी है। उन्होंने भाजपा शासित एक उत्तर भारतीय राज्य के तमाम सांसदों को एक अघोषित फरमान जारी किया कि वे उनसे मिलने पार्टी दफ्तर में पधारें और उनसे दिशा निर्देश हासिल करे, पार्टी के विधायकों व पदाधिकारियों के लिए भी कमोबेश यही आदेश थे, सो लोग आते गए, उनकी चरणों में शीश नवाते रहे और सत्ता के इस महान डॉक्टर से दिशा निर्देश प्राप्त करते रहे। पर उसी प्रदेश से आने वाले एक दबंग सांसद ने डॉक्टर साहब के आदेश को शिरोधार्य करने से मना कर दिया और कहा कि उन्हें जो दिशा निर्देश चाहिए वे पार्टी अध्यक्ष व प्रधानमंत्री से मिल जाते हैं, चुनांचे हर जगह सिर झुकाने और पत्रम-पुष्पम चढ़ाने की क्या आवश्यकता है? दोनों के दरम्यान तलवारें खींच गई हैं, डॉक्टर साहब ने सांसद महोदय के समक्ष महत्ती चुनौती उछाल दी है कि ’अगली बार पार्टी टिकट लेकर दिखाना।’ सांसद भी कम नहीं हैं, उन्होंने भी ठान लिया है कि वे इस दुबले-पतले डॉक्टर को सियासी पटकनी देकर रहेंगे।

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जब अमिताभ के घर भोजन पर पधारे मोहन

Posted on 22 May 2017 by admin

यह पखवाड़े भर पहले की बात है, भगवा ध्वज के सबसे बड़े सिरमौर मोहन भागवत बॉलीवुड के सबसे बड़े ’आयकन’ अमिताभ बच्चन के निमंत्रण पर मुंबई उनके घर भोजन के लिए पधारे। सूत्र बताते हैं कि अमिताभ व जया ने अपने घर संघ प्रमुख की पूरी आवभगत की, उन्हें पूरा सम्मान दिया, कहते हैं बिग बी ने संघ प्रमुख के चरणस्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। उसके बाद जया संघ प्रमुख को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने गईं और काफी समय उन्होंने एयरपोर्ट लाऊंज में संघ प्रमुख के साथ गुजारा। जब उसी वक्त लाऊंज में मुंबई के एक स्थानीय सांसद (जो पुराने स्वयंसेवक भी हैं) दाखिल हुए तो जया ने भागवत से इजाजत ले ली। इसके कुछ दिन बाद एक संसदीय कमेटी की मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए जया दिल्ली पधारीं तो उनसे उस बैठक में यूपी से ताल्लुक रखने वाले एक केंद्रीय मंत्री टकरा गए, मंत्री जी ने जया से पूछा-’हमारे सर संघचालक से मिल कर आप लोगों को कैसा लगा?’ इस पर जया ने संघ प्रमुख की सादगी, मृदृभाषिता आदि की तारीफों के पुल बांध दिए। फिर बातों-बातों में जया ने मंत्री जी से कहा कि ’ अमित जी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र की सेवा में अर्पित कर दिया है, अब राष्ट्र को भी उनके बारे में कुछ सोचना चाहिए।’ मंत्री जी मजमून भांप गए और उन्होंने छूटते ही कहा-’क्या अमित जी देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं।’ कहते हैं जया ने इस पर कुछ नहीं बोला, पर उनकी आंखों में एक चमक की लकीर जरूर कौंध गई।

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भाजपा के द्वारपाल शिवपाल?

Posted on 22 May 2017 by admin

अभी पिछले दिनों अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव भाजपाध्यक्ष अमित शाह से मिलने पहुंचे। सूत्रों का दावा है कि इन दोनों के बीच 2019 के चुनाव के संदर्भ में एक निर्णायक बातचीत हुई। कयास लगाए जा रहे हैं कि 19 के आम चुनाव के ऐन पहले शिवपाल यादव अपने मोर्चा/पार्टी का विलय भाजपा में कर सकते हैं। भाजपा की रणनीति है कि वे शिवपाल के पुत्र आदित्य को अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव के समक्ष कन्नौज से चुनावी मैदान में उतारेगी, अगर डिंपल की जगह अखिलेश भी चुनावी मैदान में उतरे तो उनका सामना भी अपने चचेरे भाई से हो सकता है। कहते हैं इसके बाद शिवपाल को प्रस्ताव दिया गया कि वे भाजपा की टिकट पर मैनपुरी से चुनाव लड़ लें, पर शिवपाल ने अपने बड़े भाई मुलायम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया, फिर शिवपाल ने प्रस्ताव दिया कि अगर भाजपा चाहे तो वे ऐटा से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, क्योंकि वहां यादवों की एक बड़ी आबादी है। माना जाता है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार विमर्श कर रहा है, क्योंकि यह घोषित तौर पर कल्याण सिंह के कोटे वाली सीट है,जहां से फिलवक्त कल्याण के बड़े बेटे राजवीर सिंह सांसद हैं। चूंकि भाजपा ने कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह को यूपी के योगी सरकार में मंत्री बना दिया है, सो मुमकिन है कि ’एक परिवार से एक’ की दुहाई देकर राजवीर का टिकट काट दिया जाए, यानी ऐटा से शिवपाल के नाम को एक तरह से भगवा झंडी है।

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मुख्तार की रफ्तार के मोदीय सरोकार

Posted on 14 May 2017 by admin

मोदी सरकार के ’सबका साथ, सबका विकास’ नारे को परवान चढ़ाने में केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक मंत्रालय भी उतनी ही शिद्दत से जुटा है। देश के 6 नोटिफाइड अल्पसंख्यक समुदाय यानी मुस्लिम, सिख, क्रिश्च्यन, बौद्ध, पारसी और जैन समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए जनवरी 2006 में इस मंत्रालय का गठन किया गया था, पर अब तक पूर्ववर्त्ती सरकारों में यह मंत्रालय पार्ट टाइम मंत्रालय ही बन कर रह गया था। जब मोदी ने अपने तेजतर्रार मुस्लिम फेस मुख्तार अब्बास नकवी को इस मंत्रालय का पूर्णकालिक जिम्मा सौंपा तो धीरे-धीरे मंत्रालय का चेहरा-मोहरा बदलने लगा। इस शुक्रवार को बकायदा एक प्रेस कांफ्रेंस कर नकवी ने अपने मंत्रालय की उपलब्धियों का बखान किया। एक ओर जहां केंद्रनीत मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं को अनिश्चय के भंवर से निकालने के लिए ‘ट्रिपल तलाक’ की पुरजोर मुखालफत कर रही है, वहीं मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए नई योजनाओं में ढेर सारे पैसे डाल रही है। मंत्रालय से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 15 अक्टूबर को मौलाना आजाद के जन्मदिन के मौके पर केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों की बेहतरी के लिए ’तहरीके तालीम’ नामक एक नई योजना लेकर आ रही है, इसके लिए 100 अल्पसंख्यक आबादी वाले जिलों को चिन्हित भी किया जा चुका है, इसके तहत नए स्कूल खोले जाएंगे, स्कूलों व मदरसों में शौचालयों का निर्माण होगा और कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। देश के 6 बड़े शहरों यानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, लखनऊ और गुवाहाटी में ‘उस्ताद सम्मान समागम’ होगा और मंत्रालय के महत्वाकांक्षी ‘3 एस’ योजना यानी शिक्षा, शौचालय व सदभावना मंडप पर फोकस हो रहा है। सदभावना मंडप सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में एक ऐसा कम्युनिटी सेंटर है, जो अल्पसंख्यक आबादी को अपने समारोहों को आयोजित करने के लिए एक मंच देता है और अब तक ऐसे 235 मंडपों के निर्माण को हरी झंडी दिखाई जा चुकी है।

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मिश्रा के ड्राईवर ने की गड़बड़

Posted on 14 May 2017 by admin

कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास के साझा योजना की पोल कैसे खुली? दरअसल कपिल मिश्रा के ड्राईवर की मनीष सिसौदिया के ड्राईवर से गहरी छनती है। सूत्र बताते हैं कि एक दिन बातों ही बातों में मिश्रा जी के ड्राईवर ने सिसौदिया के ड्राईवर को बताया कि ’उनके बॉस (कपिल मिश्रा) तो अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।’ यह खबर मनीष सिसौदिया को लीक हो गई, कहते हैं उन्होंने फौरन कपिल मिश्रा को तलब कर उनसे पूछा कि ’ये सब क्या चल रहा है?’ सिसौदिया ने मिश्रा को आगाह कर दिया कि ‘आने वाले कुछ दिनों में कैबिनेट में फेरबदल होने जा रहा है, हो सकता है कि आपकी छुट्टी हो जाए।’ कपिल ’अच्छा’ कह कर कमरे से बाहर निकले और लगभग 15 मिनट तक किसी से फोन पर बातें करते रहे। बात करने के बाद वे वापिस सिसौदिया के कमरे में आए और माना जाता है कि उन्होंने लगभग धमकी भरे अंदाज में अपने उप मुख्यमंत्री से कहा-’केजरीवाल को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।’ उसके बाद जो कुछ हुआ, वह सबके सामने है।

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आप नेता का ’इनडिसेंट प्रपोज़ल’ अपनी ही एक पार्टी कार्यकर्ता को

Posted on 07 May 2017 by admin

पंजाब में मिली करारी हार को अरविंद केजरीवाल अब तलक पचा नहीं पा रहे हैं, चुनांचे पंजाब को लेकर मंथन जारी है। सूत्र बताते हैं कि आप सांसद भगवंत मान ने अपने पार्टी सुप्रीमो केजरीवाल को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है कि ’हम पंजाब में क्यों हारे?’ इस रिपोर्ट में वर्णित तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे पार्टी के 4 प्रत्याशियों ने लिखकर दिया कि उन्होंने जो चुनाव में पैसे दिए वे पार्टी फंड में पहुंचे ही नहीं। पार्टी की आधा दर्जन महिला कार्यकर्ताओं ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ छेड़छाड़ हुई है। सूत्र बताते हैं कि अमृतसर के पास के एक गांव से आने वाली और दक्षिण भारतीय फिल्मों में अपनी खूबसुरती व अभिनय का डंका पीटने वाली एक अभिनेत्री ने पंजाब का काम काज देख रहे पार्टी के एक वरिष्ठ नेता पर कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों का तो यह भी दावा है कि वे फेसबुक व ट्विटर पर अपना एक वीडियो डालने वाली थी, जिसमें चंडीगढ़ के एक होटल का वह वाकया दर्ज है जिसमें आप के वही प्रमुख नेता उन्हें ’इनडिसेंट प्रपोज़ल’ देते दिख रहे हैं। अभिनेत्री के पिता पंजाब के एक प्रमुख वामपंथी नेता हैं, अभिनेत्री भी अमृतसर और उसके आस-पास के गांवों में जन-सरोकारों से जुड़े कार्य करना चाहती थी, इसीलिए वह आप पार्टी के संपर्क में आईं। कहते हैं जब अभिनेत्री की इस नाराजगी की भनक अरविंद केजरीवाल को लगी तो उन्होंने मनुहार करके इस युवती को किसी तरह मनाया और उन्हें इस बात के लिए तैयार किया कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बात को नहीं ले जाएंगी, वे (केजरीवाल) स्वयं इस मामले में दखल देकर उनके साथ न्याय करेंगे। सो, आप में तूफान की आहटों पर भले ही तत्काल ब्रेक लगी हो, पर कल को क्या होगा यह कोई नहीं जानता।

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गुजरात कांग्रेस में मच सकती है भगदड़

Posted on 07 May 2017 by admin

शह व मात की सियासत की नब्ज समझने वाले नरेंद्र मोदी और उनके अनुचर अमित शाह ने गुजरात फतह की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इस बात के कयास कहीं पहले से लगाए जा रहे हैं कि गुजरात में विधानसभा चुनाव समय से पूर्व हो सकते हैं। इस बात को मद्देनजर रखते भगवा आकांक्षाओं को मूर्त्त रूप देने के लिए निकट भविष्य में कांग्रेस के कई दिग्गज भाजपा के पाले में आ सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि गुजरात कांग्रेस के दिग्गज नेता शंकर सिंह वाघेला कांग्रेस नेतृत्व से बेतरह नाराज़ हैं, वे कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो रहे हैं, यहां तक कि जब पिछले दिनों राहुल गांधी गुजरात पधारे तो वाघेला उनके कार्यक्रम में भी नहीं पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद अपनी निजी पहल से राहुल ने सीधे वाघेला से बात की। बातचीत के क्रम में वाघेला ने राहुल के समक्ष कुछ कड़ी शर्त्तें रख दीं, इनमें से एक शर्त्त थी कि इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस अपना चेहरा बनाए, और शर्त्त नंबर दो कि उन्हें टिकट वितरण में पूरी छूट दी जाए, कम से कम 100 टिकट वे अपनी मर्जी से बांटना चाहते हैं। कहते हैं राहुल ने वाघेला से साफ कर दिया है कि इस चुनाव में कांग्रेस अपनी ओर से कोई सीएम प्रत्याशी घोषित नहीं करेगी। सूत्रों का दावा है कि मुंबई के एक मर्चेंट नामधारी बिजनेसमैन के मार्फत वाघेला निरंतर भाजपाध्यक्ष शाह के संपर्क में है। इस बिजनेसमैन को शाह का बेहद करीबी माना जाता है। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि टीम शाह ने अभी से गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी के पुत्र तुशार और माधव सिंह सोलंकी के पुत्र भरत सोलंकी से भी अपने तार जोड़ रखे हैं और ये दोनों कभी भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

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