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महाराज इतना क्यों हैं नाराज़?

Posted on 20 June 2020 by admin

केंद्रीय मंत्रिमंडल के बहुप्रतीक्षित विस्तार को कोरोना की आड़ में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, यही बात है जो कांग्रेस से ताज़ा-ताज़ा भाजपा में आए नवांतुक भाजपाई महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया को खल गई है, उनकी नाराज़गी का आलम यह है कि उन्होंने अपने ट्विटर हेंडिल पर अब तक बीजेपी प्रोफाइल को जगह नहीं दी है, क्या उनका यह बागीपन एक बार फिर से आकार ले रहा है? सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों से सिंधिया पीएम मोदी से बात करना चाहते थे, सो उन्होंने कोई तीन दफे पीएमओ को फोन लगा दिया कि उन्हें प्रधानमंत्री से बात करनी है, पर अपनी व्यस्तताओं की वजह से पीएम लाइन पर नहीं आ पाए, समझा जाता है कि पीएमओ की ओर से उन्हें संदेशा आया कि वे अमित शाह से इस बारे में बात कर लें, कहते हैं फिर सिंधिया ने शाह को फोन लगाया, वहां से उन्हें मैसेज मिला कि वे भाजपाध्यक्ष जेपी नड्डा से बात कर लें। जब सिंधिया का नड्डा को फोन गया तो व्यवहार कुशल नड्डा ने अपने विनयशील और सौम्य व्यवहार से सिंधिया का दिल जीतने का हर मुमकिन प्रयास किया, पर शायद सिंधिया की सुई वहीं अटकी हुई थी कि उन्हें केंद्र में मंत्री कब बनाया जा रहा है? इस पर सिंधिया को बताया गया कि फिलवक्त तो भाजपा संगठन में फेरबदल की तैयारियां चल रही हैं, चूंकि स्वयं प्रधानमंत्री देश को कोरोना संकट से निकालने में दिन-रात एक कर रहे हैं सो ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार के बारे में कैसे सोचा जा सकता है? जाने महाराज सिंधिया अब क्या सोच रहे हैं?

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आखिर राहुल की कब तक सुनेंगे पीएम

Posted on 06 June 2020 by admin

लॉकडाउन की शुरूआत से ही सोनिया और राहुल गांधी मोदी सरकार को समय-समय पर सलाहें देते रहे हैं, जैसे राहुल के आह्वान के बाद श्रमिकों के खाते में सीधे एक हजार रूपए डाले गए। राहुल ने पीएम से आग्रह किया था कि पीएम अपने संबोधन में श्रमिकों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने की घोषणा करें, उसके बाद श्रमिकों के लिए बसें और श्रमिक रेल की व्यवस्था की गई। इसके बाद राहुल ने हर श्रमिक के खाते में सीधे 7 हजार 500 रूपए डालने की बात कही।
प्रधानमंत्री इस पर अभी विचार ही कर रहे थे कि संघ और कुछ भाजपा नेताओं के दबाव सामने आ गया कि अगर बार-बार कांग्रेस की डिमांड पर कान धरा जाएगा तो कांग्रेस पब्लिक में इसका श्रेय लूटने लगेगी, सो, फिलवक्त आरजी के इस डिमांड को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

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शिवराज का राज द्विविधा का शिकार

Posted on 06 June 2020 by admin

मध्य प्रदेश के भगवा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इसी एक जून को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहते थे। काफी माथा-पच्ची करने के बाद उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए मंत्रियों की एक लिस्ट फाइनल की थी और उसे स्वीकृति के लिए दिल्ली भेज दिया था। पर भाजपा शीर्ष की ओर से अब तक इस लिस्ट को हरी झंडी नहीं मिल पाई है। वैसे भी इस दफे मंत्रियों के नाम फाइनल करना शिवराज के लिए आसान न था, क्योंकि कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए कई सिंधिया वफादार मंत्री बनने की कतार में हैं। इसके लिए शिवराज को अपने कई वफादारों के नाम काटने पड़े। जैसे शिवराज ने अपने विश्वासपात्र और पूर्व नेता प्रतिपक्ष सागर गोपाल भार्गव को स्पीकर पद ऑफर किया जिसके लिए भार्गव ने सीधे मना कर दिया है। लॉकडाउन के इस दौर में शिवराज को पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के मंत्रियों से घर खाली कराने में भी पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। क्योंकि कमलनाथ ने सरकार में आते ही मंत्रियों के बंगलों की साज-सज्जा पर 38 करोड़ से ज्यादा रूपए फूंक दिए थे, अब उनके वे वफादार सरकारी घर छोड़ना नहीं चाहते। लेकिन कमलनाथ स्वयं 6 श्यामला हिल स्थित अपना मुख्यमंत्री का बंगला खाली
कर रहे हैं, उन्हें भी अपने पुराने घर में शिफ्ट होना है।

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क्या कोरोना की आड़ में केंद्र राज्य सरकारों को बर्खास्त कर सकता है?

Posted on 06 June 2020 by admin

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे का राज-काज कतई नहीं सुहा रहा। सो, यदा-कदा वे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संघ के कान उद्धव के खिलाफ भरते ही रहते हैं। जिस तरह महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव के पेंचोखम को वहां के माननीय ने उलझा दिया था कि फड़नवीस को लगा कि अगर उद्धव विधान परिषद में चुन कर आ नहीं पाएं तो उन्हें अपनी गद्दी छोड़नी ही पड़ सकती है। जब उद्धव को हर तरफ हाथ पैर मार कर
कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्होंने सीधे पीएम को फोन लगा कर बतिया लिया और पीएम के चाहने पर आनन-फानन में वहां चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई और वे चुन कर विधान परिषद में पहुंच भी गए। सूत्रों की मानें तो एक बार मुंह की खाने के बाद फड़नवीस ने भगवा शीर्ष को एक नायाब आइडिया दिया कि ’123 साल पुराने एपेडमिक डिज़ीज एक्ट 1897’ को कुछ रंग-रोगन के बाद महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में लागू किया जा सकता है जहां कोरोना
के मामले तेजी से पैर पसार रहे हैं। सनद रहे कि 1897 में मुंबई में ’ब्यूबोनिक प्लेग’ फैलने के बाद इसकी रोकथाम के लिए यह एक्ट बनाया गया था। इससे फड़नवीस का आशय था कि केंद्र सरकार इस एक्ट का सहारा लेकर राज्यों को शक्तिविहीन कर वहां राज-काज चलाने का जिम्मा खुद संभाल ले। उसके बाद जब कानूनविदों से इस बारे में राय ली गई तो ज्ञात हुआ कि इस एक्ट के तहत केंद्र सरकार राज्यों के संपूर्ण अधिकारों का अधिग्रहण नहीं कर सकती, बल्कि वह
सिर्फ इस बीमारी की रोकथाम हेतु जरूरी कदम उठा सकती है, यानी केंद्र का दखल सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी नीतिगत फैसलों में ही हो सकता है। किसी आसन्न संकट की आहटों को भांपते दिल्ली सरकार ने फौरन अपने यहां ’दिल्ली एपेडमिक 2020’ और महाराष्ट्र सरकार ने ’कोविड-19 रेग्यूलेशन 2020’ लागू कर दिया। वैसे भी इस बात की संभावना अभी शेष है कि अगर कोई राज्य सरकार ’एपेडमिक एक्ट’ को ठीक से बहाल नहीं करती है तो उस सरकार को बर्खास्त करने
का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। पर ये कानूनी पेंचोखम किंचित उलझे हुए हैं।

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भाजपा कर्णधारों के ज्ञान चक्षु कैसे खुले?

Posted on 26 May 2020 by admin

आखिरकार भाजपा कर्णधारों के ज्ञान चक्षु कैसे खुले कि जो उन्हें कांग्रेस द्वारा बसों की लिस्ट भेजी गई है, उसकी गिनती कराई जाए और उनके फिटनेस टेस्ट हों। जब तक कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार को यह लिस्ट भेजी गई तो भाजपा सरकार को इस बात का किंचित भी कोई इल्म न था कि बसों की संख्या में गड़बड़ी भी हो सकती है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि एक प्रमुख कांग्रेसी नेता के भीतरघात की वजह से ऐसा मुमकिन हो पाया। कहते हैं इसी कांग्रेसी नेता ने भाजपा सरकार को यह ज्ञान दिया था कि बसों की लिस्ट में कुछ गड़बड़ है, जितनी बसों का दावा किया जा रहा है, उतनी बसें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। सूत्रों की मानें तो राजस्थान के
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वहां के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और प्रियंका गांधी के सचिव संदीप सिंह के बीच कथित तनातनी इसकी मुख्य वजह हो सकती है। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस कदम से अशोक गहलोत को साधने की कोशिश हुई है? क्या बसों की संख्या में जानबूझ कर गड़बड़ी की गई थी कि जिससे गहलोत को ‘फिक्स’ किया जा सके? प्रियंका को इस बात की जांच तो जरूर करवानी चाहिए क्योंकि इन तमाम प्रकरणों में नाम तो उनका ही
खराब हुआ है।

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योगी को प्रियंका के खिलाफ करने में इस अफसर का हाथ है

Posted on 26 May 2020 by admin

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का रास्ता कितना दुरूह और दारूण है, इसे देखते हुए जब हर तरफ से आवाज़ें उठनी शुरू हुई तो कांग्रेस और प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे को धार देनी शुरू कर दी। प्रियंका ने यूपी सरकार से एक हजार बसों के लिए इजाज़त मांगी जिससे मजदूरों को राजस्थान से उनके घर यूपी तक पहुंचाया जा सके। पहली नज़र में यूपी के मुख्यमंत्री को इस प्रस्ताव में बहुत कुछ राजनीति नहीं दिखी, सो उन्होंने प्रियंका के उस ट्वीट को सहजता से
लिया। तब तक इस मामले में राज्य के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी की एंट्री होती है जो कांग्रेस से इस बात को लेकर खासा नाराज़ थे कि यूपी कांग्रेस के गौरव पांधी ने उनकी पत्नी मालिनी अवस्थी को लेकर एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में गौरव ने सवाल उठाए थे कि हर बड़े सरकारी समारोह में मालिनी अवस्थी को गाने का मौका कैसे मिल जाता है, क्या सिर्फ इस वजह से कि वे अवनीश अवस्थी की पत्नी हैं? कांग्रेस नेता ने इसे अवस्थी द्वारा अपने पद का घोर दुरूपयोग करार दिया था। कहते हैं इस बात को लेकर अवस्थी ने सीएम योगी के समक्ष अपना दुखड़ा रोया। चूंकि अवस्थी योगी के बेहद लाडले हैं, सो अवस्थी से उन्होंने बस वाले मामले पर उचित कार्यवाई करने को कहा। इसके बाद अवस्थी की ओर से कांग्रेस को कहा गया कि रात दस बजे तक ये सारी एक हजार बसों को लखनऊ लाया जाए, उनकी लिस्ट जमा कराई जाए और उनका फिटनेस टेस्ट कराया जाए। कांग्रेस ने अपने जवाबी प्रतिवेदन में कहा चूंकि इन बसों को नोएडा होकर यूपी में एंट्री लेनी है, तो आप इन बसों की जांच नोएडा में करा लें। पर अवस्थी इसके लिए तैयार नहीं हुए। फिर जब इन एक हजार बसों की लिस्ट चेक की गई तो इसमें से 850 बसें तो ठीक थी, बाकी दोपहिए और तीन पहिए वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर दिए गए थे। बस फिर क्या था पूर्णबंदी उल्लंघन, गलत सूची को लेकर धोखाधड़ी के मामले में यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के ऊपर मुकदमा दर्ज हो गया।

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कॉरपोरेट सेक्टर को मिल सकता है 8 लाख करोड़ का पैकेज

Posted on 20 May 2020 by admin

कोरोना की वजह से पैदा हुए लॉकडाउन की मार से देश के आर्थिक हालात को ग्रहण लग रहा है, मोदी सरकार ने भी लगातार हालात पर नज़र रखी हुई है। डैमेज कंट्रोल के मानकों को ध्यान रखते सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 30 फीसदी कटौती कर दी गई है। वहीं राजस्व विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि अप्रैल 2021 तक राजस्व विभाग के सारे कर्मचारी हर माह अपने एक दिन का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराएंगे। अगले साल अप्रैल तक डीए फ्रीज हो गया है। संघ समर्थित भारतीय मजदूर संघ के दावों पर यकीन किया जाए तो अब इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा, 35 फीसदी लोग ही एक शिफ्ट में काम करेंगे। एक अनुमान के अनुसार वेतन में कटौती और महंगाई भत्ता फ्रीज कर सरकार को तकरीबन 3 लाख करोड़ रुपयों की बजत होगी। वहीं देश का कॉरपोरेट सेक्टर 15 लाख करोड़ का पैकेज मांग रहा है, माना जा रहा है कि वित मंत्रालय कॉरपोरेट जगत की इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रहा है। सो, मुमकिन है कि कॉरपोरेट जगत को 7-8 लाख करोड़ का पैकेज देने पर सहमति बन जाए।

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नीतीश को लग सकता है भगवा झटका

Posted on 20 May 2020 by admin

प्रवासी बिहारी मजदूरों की कथित उपेक्षा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारी पड़ सकती है। भाजपा समर्थित एक ऑनलाइन सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई है उस काल में नीतीश की लोकप्रियता में भयंकर गिरावट दर्ज हुई है। इस सर्वे में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि अगर नीतीश आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से अलग हट कर अकेले चुनाव लड़ते हैं तो उनके 20 विधायक भी बमुश्किल चुनाव जीत पाएंगे। अगर नीतीश-भाजपा के साथ मिल कर चुनाव में जाते हैं तो जदयू के उम्मीदवारों की जीत की संभावना जहां 40 से 50 फीसदी है, वहीं भाजपा उम्मीदवारों के जीत का प्रतिशत 70-72 प्रतिशत हो सकता है। अब भाजपा जदयू में सीटों के बंटवारे का पेंचोखम भी उलझ सकता है, जहां नीतीश भाजपा के मुकाबले अपने लिए बंटवारे में भगवा पार्टी से 15-20 सीटें ज्यादा चाहते हैं, वहीं भाजपा अब बराबर-बराबर सीटों के फार्मूले पर जोर लगा सकती है। अगर नीतीश अपने बड़े भाई के रूतबे पर अड़े रहे तो भाजपा उन्हें लड़ने के लिए सांकेतिक रूप से 2-5 सीटें ज्यादा दे सकती है, इस शर्त के साथ कि मुख्यमंत्री का फैसला तो निर्वाचित विधायकों द्वारा ही होगा।

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हुजूर बड़ी देर लगा दी रेल चलाते-चलाते

Posted on 20 May 2020 by admin

लॉकडाउन के कोई 50 दिनों बाद जब तक सरकार की तंद्रा टूटी तब तक बहुत सारे प्रवासी मजदूर पैदल ही हजारों किलोमीटर के सफर पर निकल चुके थे, भूख, धूप या गर्मी की परवाह किए बगैर। कुछ गतंव्य तक पहुंचे, कुछ कोरोना शिविर के आइसोलेशन में अटक गए, कुछ ऐसे भी थे जिन्हें मंजिल की चाह में रास्तों ने निगल लिया। एक अनुमान के मुताबिक देश में इस वक्त कोई 8 करोड़ ऐसे प्रवासी मजदूर हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में दर-बदर होकर अपने घर से दूर निकले थे। रेलवे ने प्रति दिन 300 ट्रेन चलाने का फैसला लिया है, एक ट्रेन में सोशल डिस्टेंसिंग को मद्देनज़र रखते 1200 मजदूर आ रहे हैं। तो अगर हिसाब लगाएं तो 8 करोड़ मजदूरों की घर वापसी के लिए रेलवे को 66 हजार 666 रेल गाड़ियां चलानी होंगी। अगर एक दिन में 300 ट्रेनें चल रही है तो इस हिसाब से इस कार्य में 182 दिन लगेंगे। रेलवे का दावा है कि वह मजदूरों पर कुल खर्च का मात्र 15 फीसदी ही श्रमिक या राज्य सरकार से वसूल रही है। क्योंकि ये स्पेशल ट्रेन बस वन वे का ही सफर तय कर रही हैं, आना उसे खाली ही होता है। सोशल डिस्टेंसिंग को मद्देनजर रखते मिडिल बर्थ को हटा लिया गया है, श्रमिक यात्रियों को रास्ते में भोजन व पानी भी प्रदान किया जा रहा है। इस हिसाब से रेलवे को प्रति मजदूर 6-8 हजार रूपए का खर्च आ रहा है जिसका वे 15 फीसदी ही टिकट के मद में चार्ज कर रहे हैं। सनद रहे कि श्रमिकों को घर पहुंचाने के मद में सरकार ने रेलवे को कुल एक लाख करोड़ रूपयों का बजट आबंटित किया है, सूत्रों की मानें तो रेलवे का दावा है कि उसे एक ट्रेन चलाने में 50 लाख तक का खर्च आ रहा है।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार मानसून सत्र से पहले

Posted on 15 May 2020 by admin

ठहरे हुए कयासों की फिर से त्यौरियां चढ़ रही हैं, पीएमओ से जुड़े सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि संसद के आनेवाले मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी अपने मंत्रिमंडल को नया चेहरा-मोहरा दे सकते हैं। अप्रैल माह के आखिरी सप्ताह में नौकरशाही में हुए एक बड़े फेरबदल से इन संभावनाओं को बल मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी केंद्र पर लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि जितनी जल्दी हो सके जद-यू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे देखते हुए नीतीश जल्द से जल्द अपने मंत्री केंद्र सरकार में सुशोभित करना चाहते हैं। वैसे हालिया ब्यूरोक्रेटिक फेरबदल से उन मंत्रियों को भी साफ संदेश देने की कवायद हुई है जो ऊंची परवाज भरने की कोशिश कर रहे थे। उनकी उड़ान के लिए अब मोदी ने सियासी आसमान को थोड़ा और ऊंचा कर दिया है। जैसे कोराना संकट के इस दौर में स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्द्धन से कहीं ज्यादा तो मंत्रालय के प्रवक्ता लव अग्रवाल और मंत्रालय की सचिव प्रीति सूदन के चेहरे सामने दिख रहे हैं। प्रीति सूदन को तो 3 माह का एक्सटेंशन भी मिल गया है ताकि जब 3 माह बाद मंत्रालय का नया सचिव पदभार संभाले तो उसे एक क्लीन स्लेट मिल सके और कोरोना का पतनाला पूर्ववर्ती के सिर फोड़ा जा सके। संभावना व्यक्त की जा रही है कि प्रीति सूदन की जगह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में ओएसडी राजेश भूषण ले सकते हैं। अपनी विशिष्ट और अभिनव कार्यशैली के लिए ख्यात नितिन गडकरी की लोकप्रियता को बैलेंस करने के लिए पीएमओ में तैनात अरविंद कुमार शर्मा को एमएसएमइ का सेक्रेटरी तैनात किया गया है। वहीं आंध्र के आईएएस गिरिधर अरामाने, जिनके बारे में मशहूर है कि वे सिर्फ वही करते हैं जो उनको ठीक लगता है वे किसी की नहीं सुनते। गिरिधर को गडकरी के एक अन्य मंत्रालय सड़क परिवहन का सचिव नियुक्त किया गया है। मंत्री पद के दावेदार तो कहीं पहले से भगवा हाईकमान के समक्ष शीर्षासन कर रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा ने राज्यसभा दे दी है उनके केंद्र में मंत्री बनने की प्रचुर संभावना है। सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा जैसे युवा कांग्रेसियों पर डोरे डाले जा रहे हैं। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य और वकील विवेक तन्खा भी भाजपा से अच्छे रिष्ते रखने के लिए जाने जाते हैं। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी माधव राव सिंधिया को अपना मेंटर घोषित कर भगवा आंगन में अपने घर की खिड़की खोल दी है। क्योंकि सिंघवी माधव राव के पुत्र ज्योतिरादित्य की तारीफों के पुल बांधने में वे कभी पीछे नहीं हटते। मसलन मोदी मंत्रिमंडल के अगले विस्तार में कुछ ऐसे चौंकाऊ चेहरों को जगह मिल सकती है जो कयासों के बाजार में कहीं दूर-दूर तक नहीं दिखते।

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