Posted on 22 May 2021 by admin
’उड़ने वाले परिंदों की कैद से हैरां ये आसमां है
अब तो दीवारों पर भी हर तरफ खरोंचों के निशां हैं’
उठते सवालों के हाथों में हथकड़ियां पहनाने का और असहमति में उठे स्वरों को जेल भेजने का रिवाज किस लोकतंत्र में है? क्योंकि एक जनतांत्रिक व्यवस्था में शासक के लिए जवाबदेही पहले से तय है, और वैसे भी यह एक आज़ाद ख्यालों का मुल्क है, जहां अगर भक्त रहते हैं तो लोकतंत्र के पुजारी भी। सो, यह सवाल सत्य और शाश्वत है कि आज हम वैक्सीन की इतनी किल्लत से क्यों जूझ रहे हैं? सवा सौ करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस देश में आज भी वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने वाली आबादी की कुल तादाद महज़ 3 फीसदी है और तकरीबन 13-14 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्हें कोरोना वैक्सीन की महज़ 1 डोज़ मिली है। वैसे भी ऐसे वक्त में जब देश में सांसों का हाहाकार है और नित्य दिन आस की हजारों डोर टूट रही हैं। अप्रैल माह में जहां प्रतिदिन देश में 35 से 36 लाख लोगों को वैक्सीन लग रही थी, यह आंकड़ा लुढ़क कर 19 मई तक 11 लाख 66 हजार पर आ गया। ऐसे में हमारे नियंताओं से सवाल पूछे ही जाने चाहिए, पोस्टर-परचम भी लहराए जाने चाहिए। अप्रैल माह में सीरम ने अपने उत्पादित वैक्सीन का एक बड़ा हिस्सा ‘ग्लोबल एलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेशन’ यानी ’गावी’ को दे दिया था, ’गावी’ डब्ल्यूएचओ और ‘बिल गेट्स फाऊंडेशन’ का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसके तहत वैसे गरीब देशों को मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई जाती है जिनके पास वैक्सीन खरीदने के पैसे नहीं है, सीरम से खरीदी गई वैक्सीन में से ही ’गावी’ ने लगभग डेढ़ करोड़ वैक्सीन की डोज़ पाकिस्तान भेजी थी, कहते हैं ’गावी’ ने काफी पहले ही सीरम इंस्टीट्यूट को वैक्सीन उत्पादन के लिए एक बड़ा पैसा एडवांस के तौर पर दिया था। अब राज्यों को वैक्सीन देने से केंद्र ने हाथ झाड़ लिए हैं, लिहाजा अब राज्य सरकारों को अपने लिए वैक्सीन की खरीद खुद करनी होगी, अभी केंद्र ने वैक्सीन की 11 करोड़ डोज़ के लिए सीरम को पेशगी की तौर पर लगभग 1,700 करोड़ रूपए दिए हैं, कहते हैं सीरम के मालिकों ने इसके बाद ही लंदन के पास अपने एक नए प्लांट को शुरू करने के लिए 2,500 करोड़ रूपए लगाए हैं।
Posted on 22 May 2021 by admin
’बुझा के सूरज हमने भी अपनी जेब में रख लिया है
हमें भी ज़िद है कि हम जुगनुओं सा चमकेंगे’
लड़ना, गिरना, गिर कर उठना, फिर शिद्दत से भिड़ना इस देश की तासीर में है, तभी कोरोना की इस काली रात के बाद हर भारतवासी को यकीन है कि ये अंधियारा अपना दामन समेट लेगा और एक नए दिन का नया सूरज हमारी धौंकती चलती सांसों को उम्मीदों का नया उजाला देगा। इन दिनों कोरोना से लड़ने के लिए ’मुंबई मॉडल’ की बहुत चर्चा है, दिल्ली समेत अन्य कई राज्यों को कोरोना से निपटने में फिसड्डी रहने पर अदालत ने उन्हें फटकार लगाते हुए ’मुंबई मॉडल’ से कुछ सीखने की सलाह दी। देवेंद्र फड़णवीस अपना खटराग अलापते रहे कि महाराष्ट्र सरकार गलत आंकड़े दिखा रही है, वहीं नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने खुल कर ’मुंबई मॉडल’ की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए। यहां तक कि 10 मई को प्रधानमंत्री मोदी का महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन चला गया और पीएम ने उद्धव को ’मुंबई मॉडल’ की सफलता के लिए बधाई दे डाली। आइए जानते हैं ’मुंबई मॉडल’ के शिल्पकार 1989 बैच के आईएएस अफसर इकबाल चहल के बारे में, सबसे कम उम्र 22 साल की उम्र में यूपीएससी एक्जाम पास करने का रिकार्ड भी इनके नाम है। इन्हें पिछले साल ही उद्धव ने बीएमसी यानी मुंबई नगरपालिका का चैयरमेन बनाया था। चहल ने कोरोना की पहली वेब को भी ठीक से हेंडिल किया। उद्धव ने दूसरी लहर के समय चहल को कोरोना उन्मूलन की कमान देते हुए कहा था ’आप जो भी अच्छा करें उसका श्रेय ले सकते हैं, अगर कुछ नाकामी हुई तो उसे मैं अपने सिर लेने को तैयार हूं।’ इसीलिए जब देश पहली लहर में ताली-थाली के चक्कर में फंसा हुआ था, वे मुंबई को उत्सव मोड से बाहर ले गए, राज्य में अस्पतालों में बेड की संख्या, वेंटिलेटर और आईसीयू बेड्स की फिक्र करते दिखे और उन्होंने ऑक्सीजन की उत्पादकता बढ़ाने में सारा जोर लगा दिया। चहल अपनी टीम को अब तीसरी लहर के लिए तैयार रहने को कह रहे हैं। आज मोदी सरकार का हर मंत्री चाहे वे हरदीप पुरी हो या निर्मला सीतारमण ये चहल की तारीफ करते नहीं थक रहे, वहीं चहल जब दिल्ली में थे और 2014 में केंद्र में मोदी सरकार आई तो इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, क्योंकि ये कभी मनमोहन सरकार के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के ओएसडी हुआ करते थे, सो इन्हें 2015 में अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया था और आज इस अकेले अधिकारी ने दिल्ली के बड़े सूरमाओं की छुट्टी कर दी है।
Posted on 22 May 2021 by admin
विदेश मंत्री एस जयशंकर जी-7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अपने लाव-लश्कर के साथ लंदन पहुंचे थे, चूंकि उनकी टीम के दो मेंबर कोरोना पॉजिटिव पाए गए सो उन्होंने अपने को आइसोलेशन में रखते हुए वर्चुअल मीटिंग में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, पर सवाल उठता है कि वर्चुअल मीटिंग तो नई दिल्ली से भी हो सकती थी। दरअसल, उनका लंदन जाने का असली मकसद क्या था? सूत्र बताते हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट के नाराज़ बॉस अदार पूनावाला को मनाने और उनसे निर्णायक बातचीत करने के लिए ही जयशंकर लंदन गए थे, क्योंकि इन दिनों अदार पूनावाला भी अपने परिवार के साथ लंदन में ही बने हुए हैं। यह तो सबको मालूम है कि जयशंकर एक अच्छे वार्ताकार हैं, जिसके मुरीद होकर पीएम ने उन्हें विदेश सचिव से विदेश मंत्री बना दिया था।
Posted on 22 May 2021 by admin
’तुझे क्यों फिक्र है अपने आशियाने की इस कदर
जो दर-बदर हुए हवाओं के मौजों पर है उनका सफर’
राष्ट्रों के नियंताओं को अपने आशियाने की फिक्र इस कदर सताती है कि इसकी ताज़ातरीन मिसाल यूके है, जहां के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के 4 कमरों वाले 11 डाऊनिंग स्ट्रीट के पुननिर्माण और इसकी साज-सज्जा पर उनकी गर्लफ्रेंड कैरी सेमंड (जो एक बच्चे की मां भी हैं) ने टैक्सपेअर के 2 लाख पाऊंड लुटा दिए हैं, इस पर ब्रिटेन में खासा बवाल मचा हुआ है। वैसे तो इंग्लैंड के पीएम को उनके आवास के रख-रखाव के लिए सालाना 30 हजार पाऊंड का प्रावधान है, पर जॉनसान के पूर्ववर्ती डेविड कैमरून ने अपने सरकारी घर की साज-सज्जा या इसके रख-रखाव पर कभी सरकारी खजाने से पैसे नहीं लुटाए, बल्कि जब भी जरूरत पड़ी उन्होंने इसके लिए अपनी जेब से पैसे भरे। वैसे भी इंग्लैंड के प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास के लिए पहले 10 डाऊनिंग स्ट्रीट आबंटित था, जिसके थर्ड फ्लोर पर पीएम के परिवार के लिए रहने की व्यवस्था थी, बाकी के फ्लोर पर उनका ऑफिस हुआ करता था। पर जब टोनी ब्लेयर इंग्लैंड के पीएम बने तो पीएम के लिए आबंटित दो कमरों के फ्लैट से उनका काम नहीं चल रहा था चूंकि उनका परिवार काफी बड़ा था, तो उन्होंने साथ के 11 डाऊनिंग स्ट्रीट को अपना आधिकारिक निवास बना लिया जहां रहने के लिए चार कमरे थे, कालांतर में यही इंग्लैंड के पीएम के आधिकारिक निवास में शुमार हो गया। आइए अब लौट चलते हैं भारत की ओर जहां सुना है कि चूंकि संसद भवन छोटा पड़ रहा था, पीएम आवास में जगह कम पड़ रही थी इसीलिए भारत में ’सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को इतने आनन-फानन में लागू किया गया है। सनद रहे कि 13 हजार 450 करोड़ रूपयों से बनने वाला भारतीय पीएम का नया आवास दिसंबर 2022 तक बन कर तैयार हो जाएगा जो उनके जन्मदिन पर उनके लिए एक नया तोहफा होगा। उप राष्ट्रपति भवन अगले साल मई तक पूरा हो जाएगा। ’सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को 3 मई को पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (ईएसी) से मंजूरी मिल चुकी है जो राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक करीबन 3 किलोमीटर के एरिया में फैला हुआ है। ऐसे वक्त में जबकि लाखों भारतीयों की सांसों की डोर ऑक्सीजन और इलाज के अभाव में टूट रही है, ऐसे में सरकारी भवनों के बजाए देश के अस्पताल छोटे पड़ रहे हैं, मानवता छोटी पड़ रही है, और सब बेच सकने में सिद्दहस्त हमारे दर्द और संवेदनाओं को भी खुले बाजार में नीलाम कर सकने में सक्षम हैं।
Posted on 22 May 2021 by admin
’जब बौराई हवाओं से आने लगी थी बारूद की गंध,
तेरे कहने पर नासमझी का एक दीया हमने भी जलाया था,
पर तुम राजा-मंत्री खेलते रहे, हम घर फूंक तमाशा देखते रहे’
भारत में कोरोना के कहर ने इतना रौद्र रूप अख्तियार कर रखा है कि यह न सिर्फ मासूम जिंदगियों को बल्कि हमारी उम्मीदों को भी निगल रहा है। अमेरिका के ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ के एक आंकड़े के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से 3 करोड़ 20 लाख मिडिल क्लास भारतीय अब गरीब की श्रेणी में आ गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल से पहले भारत के मिडिल क्लास यानी मध्यम वर्ग का आकार 9 करोड़ का था जो अब सिमट कर 6.6 करोड़ पर आ गया है। कोरोना ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जिसकी वजह से दिहाड़ी मजदूरों की संख्या में रिकार्ड तोड़ वृद्धि हुई है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत की 138 करोड़ आबादी में कामकाजी यानि ‘वर्किंग पॉपुलेशन’ की तादाद 70 करोड़ है, शेष आबादी 15 वर्ष से कम आयु वर्ग की या फिर बुजुर्गों की आबादी है। पिछले वर्ष मई माह में 3.6 करोड़ से अधिक परिवारों ने सरकार से मनरेगा के तहत काम मांगा था, जून में मनरेगा के तहत काम मांगने वाले की तादाद बढ़ कर 4.36 करोड़ तक पहुंच गई। ताजा आंकड़े बताते हैं कि अभी 25 करोड़ भारतीयों ने मनरेगा में काम पाने के लिए आवेदन किया है, अगर कुल वर्किंग पॉपुलेशन की तुलना में देखा जाए तो यह आंकड़ा 40 फीसदी के आसपास ठहरता है। वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनरेगा के मद में 73 हजार करोड़ रूपयों का प्रावधान किया है, पिछले वित्तीय वर्ष के आबंटित बजट (111,500 करोड़ रूपये) से यह करीब 34.52 फीसदी कम है, जबकि काम मांगने वाले दिहाड़ी मजदूरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज हुई है। उत्तर प्रदेश में एक मनरेगा कार्ड धारक को प्रतिदिन मात्र 182 रूपए की मजदूरी मिलती है, जबकि इन्हें दिसंबर से अब तक भुगतान भी नहीं हुआ है। इस कोरोना काल में सचमुच जिंदगी सस्ती और जीना महंगा हुआ जा रहा है। करोड़ों भारतीयों के लिए जो दिन आए हैं, वे अच्छे तो नहीं।
Posted on 22 May 2021 by admin
गांधी नेहरू वंश के भगवा चिराग और तीन टर्म सांसद वरूण गांधी सियासत की नई इबारत लिखने के लिए जाने जाते हैं। कोरोना महामारी की इस दूसरी वेव में जब सारा देश त्राहिमाम कर रहा है, इस युवा सांसद ने अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में फ्रंटलाइन वर्कस यानी डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टॉफ, सफाई कर्मचारियों को मुफ्त कोरोना इंश्योरेंस देने का फैसला किया है, इस इंश्योरेंस कवर के बाद अगर ये फ्रंटलाइन वर्कस कोरोना संक्रमित होते हैं तो इन्हें 5 लाख तक का इंश्योरेंस कवर मिल जाएगा। इस कोरोना इंश्योरेंस के प्रीमियम भरने का खर्च स्वयं वरूण गांधी उठाएंगे। वरूण ने पीलीभीत के जिलाधिकारी और सीएमओ से ऐसे फ्रंट वर्कस की लिस्ट मांगी है ताकि जल्द से जल्द इस ’अभिनव योजना’ को परवान दिया जा सके। पिछले वर्ष भी जब देश कोरोना की पहली लहर से जूझ
रहा था तो वरूण ने पीलीभीत के अलग-अलग 12 वार्ड में मुफ्त लंगर और भंडारा शुरू करवाया था और 10-12 लाख मुफ्त भोजन के पैकेट भी वितरित करवाए थे। सोशल मीडिया खास कर अपने ट्विटर हेंडिल पर खासा एक्टिव रहने वाले वरूण गांधी ने पिछले दिनों ट्वीट कर अपनी सरकार से ही कुछ मुश्किल सवाल पूछ डाले हैं, वरूण ने ट्वीट कर यह पूछा है कि ’अगर भारत के पास वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता थी और देश इतने मुश्किल दौर से गुजर रहा है तो फिर हमने 80 देशों को अपनी वैक्सीन क्यों भेजी है, इसके बदले हमें क्या मिलने वाला है?’ इसके अलावा इस युवा सांसद ने यह मौजू सवाल भी उठाया है कि वैक्सीन का लाभ सिर्फ अमीर देशों को ही क्यों मिलना चाहिए, दुनिया की मात्र 16 फीसदी आबादी ने वैक्सीन के कुल उपलब्ध डोज के 60 फीसदी पर कब्जा कर लिया है। दुनिया की 7 बिलियन वैक्सीन डोज में 4.2 बिलियन डोज तो अकेले अमीर देशों के पास है। इसके अलावा वरूण कोरोना से बचाव और निज़ात के लिए वक्त-वक्त पर जरूरी जानकारियां भी ट्वीट के माध्यम से साझा कर रहे हैं। वरूण ने एक ट्वीट कर बताया कि ’आईआईटी के 3 दीक्षांत छात्रों ने एक ऐसा ऐप्प डेवलप किया है जिसमें देशभर के अस्पतालों में उपलब्ध बेड, ऑक्सीजन और प्लॉज़्मा की उपलब्धता की रीयल टाइम जानकारियां हैं।’ वरूण अपने एक अन्य ट्वीट में दिल्लीवासियों को बताते हैं कि कोविड पीड़ित परिवारों को कहां से ‘फ्री-मील’ की सुविधा मिल सकती है। वरूण गांधी ने अपने साथी सांसदों के लिए एक नजीर पेश की है कि ’अगर दिल में जज्बा हो, तो बदलाव की नई इबारत लिखी जा सकती है।’
Posted on 21 April 2021 by admin
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही मोदी सरकार को एक और बड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है वह है खाली पड़े राजभवनों में नए गवर्नर की नियुक्तियां। अभी भी 7-8 राजभवन खाली पड़े हैं और कई गवर्नर दोहरी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, कई गवर्नर 75 साल से ऊपर के हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार में इस बात को लेकर मंथन चल रहा था कि राजभवन की जिम्मेदारी रिटायर्ड नौकरशाह ठीक से निभाते हैं या मंझे राजनेता। जम्मू-कश्मीर में मनोज सिन्हा की नियुक्ति और उसके बाद के हालात से सरकार खुश बताई जाती है, वहीं एक सत्यपाल मलिक भी हैं जिन्होंने केंद्र सरकार की नाक में दम कर रखा है। फिर भी सरकार को लगता है कि रिटायर्ड नौकरशाह के बजाए मंझे राजनेताओं पर ही दांव लगाना ठीक रहेगा। जब से यह खबर बाहर निकली है
सियासी वनवास झेल रहे राजनेताओं ने अपनी संघ परिक्रमा तेज कर दी है।
Posted on 21 April 2021 by admin
ममता बनर्जी ने भी बंगाल चुनाव में अपनी पार्टी के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी है और भाजपा के मुकाबले ममता भी बढ़-चढ़ कर इस चुनाव में पैसे झोंक रही हैं। भाजपा का दावा है कि बंगाल चुनावों में अर्द्धसैनिक बलों की व्यापक नियुक्ति से ममता की पोल खुली है। एक तो अवैध रूप से बड़ी तादाद में बांग्लादेसी
नागरिक आकर चुनाव में पोलिंग बूथ पर कब्जा कर लेते थे। वहीं अब एक बदले परिदृश्य में ममता अपने जमीनी स्तर के कैडर तक ठीक से रूपए नहीं पहुंचा पा रही। भाजपा का दावा है कि तृणमूल के 250 करोड़ रूपयों से ज्यादा की नकदी अर्द्धसैनिक बलों ने जब्त किए हैं। वहीं तृणमूल को भरोसा है कि इस बार भी खींचतान कर राज्य में ममता की ही सरकार बन जाएगी, क्योंकि टीएमसी को राज्य के 29 फीसदी मुसलमानों के एकमुश्त वोट मिल रहे हैं। भद्रलोक और महिलाओं ने भी खुल कर ममता का साथ दिया है। सो, पार्टी नेताओं का दावा है कि तृणमूल डेढ़ सौ का आंकड़ा पार कर जाएगी। वहीं भाजपा सौ-सवा सौ पर सिमट सकती है।
Posted on 21 April 2021 by admin
बदलते वक्त की तासीर को भांपते झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो हेमंत सोरेन ने भाजपा से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी है। उन्हें लगातार इस बात का डर सता रहा है कि भाजपा जब चाहे झारखंड में खेल बदल सकती है, क्योंकि उनकी सरकार में शामिल कांग्रेस के 10 विधायक यकीनन भाजपा के संपर्क में हैं। वे कभी भी पाला बदल कर भगवा रंग में रंग सकते हैं। यही वजह है कि हेमंत जब पिछली बार दिल्ली आए तो वे राहुल गांधी से भी मिले और अमित शाह से भी। पिछले दिनों जब वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हेमंत केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े तो गडकरी ने हेमंत और झारखंड के लिए अपना दिल खोल कर रख दिया। गडकरी ने सोरेन से कहा कि ’अगर वे जमीन अधिग्रहण तथा वन व पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी कराएं और उन्हें
अच्छे अधिकारी दें तो वे झारखंड की सड़कों को तीन वर्षों में पचिश्मी यूरोप और अमेरिका की तरह बना देंगे।’ गडकरी ने यह भी कहा कि ’केंद्र सरकार राज्य के सड़क निर्माण विभाग को पांच हजार करोड़ रूपए देने को तैयार है।’ गडकरी की इस मेहरबानी में दूरगामी संकेतों की रवानी छुपी है, जो कहीं न कहीं इस बात का ऐलान है कि अगर हेमंत सोरेन भाजपा की शरण में आ जाते हैं तो वे मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। यही खेल भाजपा महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे गैर भाजपाई राज्यों में खेलने को भी बेकरार बताई जाती है।
Posted on 21 April 2021 by admin
असम के चुनावी नतीजे चाहे जो हो, पर वहां आमने-सामने की लड़ाई दिलचस्प हो गई है, यह लड़ाई भाजपा बनाम कांग्रेस गठबंधन के दरम्यान है। भले ही चुनावी नतीजे 2 मई को आने हों पर भाजपा अभी से सरकार बनाने की प्रयासों में जुट गई लगती है, निषाने पर कांग्रेस गठबंधन के वे उम्मीदवार हैं जो जीतने का दंभ दिखा रहे हैं। अपने उम्मीदवारों के पाला बदल की आहटों को भांपते कांग्रेस गठबंधन ने अपने 20 उम्मीदवारों को अपनी सुरक्षा में लेकर जयपुर एक रिसॉर्टस में भेज दिया है, यहां तक कि उनके मोबाइल फोन भी उनके नहीं रह गए हैं। ये जीत की संभावनाओं वाले उम्मीदवार हैं, जिनमें बदरूद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के उम्मीदवारों की संख्या कहीं ज्यादा है। गठबंधन के अन्य उम्मीदवारों के जयपुर पहुंचने का सिलसिला भी जारी रह सकता है, क्योंकि कांगे्रस गठबंधन को खरीद-फरोख्त की आषंका सता रही है। भाजपा से जुड़े सूत्र साफ करते हैं कि भगवा पार्टी राज्य में अपने बड़े नेता हेमंता बिस्वा सरमा के आचरण को लेकर चिंता में हैं, जिन्हें साफ तौर पर ऐसा लगता है कि राज्य में अगर एक बार फिर से भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ तो उनके सीएम पद की दावेदारी को दरकिनार कर दिया
जाएगा। हेमंता को लगता है कि ‘हंग असेंबली’ आने पर उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा हो सकता है। हरियाणा में भी जब एक दफे भजनलाल वहां के प्रदेश अध्यक्ष थे और प्रदेश का चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा गया था तो पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी ने उनकी जगह भूपेंद्र सिंह हुड्डा को राज्य की कमान सौंप दी थी। विरोधी दलों को यह डर सिर्फ असम में ही नहीं सता रहा जहां चुनाव के अधबीच ही कांग्रेस गठबंधन का एक उम्मीदवार पाला बदल कर भाजपा में आ गया। जबकि विपक्षी दलों को केरल और बंगाल में भी यही डर सता रहा है, जहां भाजपा रणनीतिकारों को यूडीएफ और टीएमसी की उन कमजोर कड़ियों का भली-भांति इल्म है जो जीत के बाद भी पाला बदल सकते हैं।