Posted on 14 September 2016 by admin
पार्लियामेंटेरियन पत्रिका, बिजनेस वर्ल्ड और जनता का रिपोर्टर ने ’माय मेंडेट’ से जो यूपी में ताज़ा जनमत सर्वेक्षण करवाया है, उसमें किसी भी प्रमुख दल को राज्य में पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। सनद रहे कि 25 हजार सैंपल साइज के साथ यह यूपी का अब तक का सबसे बड़ा जनमत सर्वेक्षण है। 2012 के 25 फीसदी की तुलना में बसपा के मत प्रतिशत में 9 फीसदी का उछाल देखने को मिल रहा है, इस दफे 34 फीसदी मत शेयर के साथ बसपा 169 सीटें जीतने की स्थिति में है। भाजपा की जबर्दस्त छलांग देखी जा सकती है, 2012 में उसे जहां 15 फीसदी वोट शेयर से संतोष करना पड़ा था, इस बार यह वोट शेयर जंप करके 30 फीसदी तक पहुंच सकता है। और भाजपा पिछले बार की 47 सीटों से इस दफे 135 सीटों का सफर तय कर सकती है। यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश अपना ग्राउंड खोते नज़र आ रहे हैं, 2012 में सपा ने 29 फीसदी वोट हासिल कर अपनी झोली में 224 सीटें झटक ली थी, इस बार सपा को वोट प्रतिशत गिर कर 24 फीसदी रह सकता है, और उसको मिलने वाली सीटों का आंकड़ा मात्र 74 पर सिमट सकता है। अगर यूपी के अगले सीएम के तौर पर वोटरों की राय देखें तो इसमें मायावती 28 फीसदी मतों के साथ सबसे आगे दिखाई दे रही है। अखिलेश 25 फीसदी मत हासिल कर दूसरे नंबर पर हैं, तो वहीं तीसरे नंबर पर बेहद हैरतअंगेज तरीके से 23 फीसदी मत हासिल कर वरूण गांधी ने अपना दबदबा बनाया हुआ है। जबकि भाजपा ने आधिकारिक रूप से यूपी में अपना मुख्यमंत्री का चेहरा अब तलक पेश नहीं किया है, वहीं भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री के दावेदारों के बीच भी वरूण ने 53 फीसदी मत हासिल कर सबको चौंका दिया है। यूपी के इस दफे के चुनाव में कानून व्यवस्था 29 फीसदी मतों के आधार पर सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा रह सकता है। हैरत इस बात पर ये हो सकती है कि गोविंद बल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे दिग्गजों को लोकप्रियता में पछाड़ते हुए मायावती 32 फीसदी मतदाताओं की राय में यूपी की अब तक की सबसे बेस्ट सीएम हैं। वहीं इस सर्वे में सबसे ज्यादा 35 फीसदी लोगों ने नरेंद्र मोदी को आजाद भारत का सबसे बेस्ट प्रधानमंत्री माना है वहीं प्रदेश के युवा वोटरों ने 30 फीसदी अंक के साथ अखिलेश यादव को युवाओं के सिरमौर का ताज पहनाया है। मायावती ने भले ही कभी किसानों की राजनीति न की हो पर किसान नेता अजीत सिंह (12 फीसदी) की तुलना में 30 फीसदी मत हासिल कर वह यूपी की सबसे बड़ी किसान नेता के तौर पर अवतरित हुई हैं। ’माय मेंडेट’ का यह सर्वेक्षण यूपी के चुनावी घमासान में एक ’आई ओपनर’ का काम कर सकता है।
Posted on 14 September 2016 by admin
खान सचिव बलविंदर कुमार ने एक विचारोत्तेजक पुस्तक लिखी है-’अवेकनिंग ए थिंकिंग माईंड’, इस पुस्तक के विमोचन के लिए उन्होंने अपने विभाग के मंत्री पीयूष गोयल को आमंत्रित कर लिया। जब गोयल बोलने को खड़े हुए तो अपनी रौ में बस बोलते ही चले गए, उनका कहना था कि जब से केंद्र में मोदी जी की सरकार आई है, अधिकारियों ने अपने-अपने पसंदीदा शगलों पर विराम लगाकर बस काम पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। गोयल जी का कहना था कि अखबारों में खबरें छप रही है, सरकारी कार्यालयों में बातें हो रही है कि अब मंत्रालय के सचिवों का गोल्फ खेलना बंद हो गया है। कहते हैं मंत्री जी ने अपने विभागीय सचिव से पूछ ही डाला कि उन्होंने अपनी इतनी व्यस्त दिनचर्या में पुस्तक लिखने का वक्त कहां से निकाल लिया? कहते हैं कि लगे हाथ मंत्री जी ने बलविंदर कुमार को यह हिदायत भी दे डाली कि ’चलो एक किताब लिख ली तो कोई बात नहीं, पर अगर आगे भी यह उपक्रम दोहराया जाएगा तो यही माना जाएगा कि आप काम नहीं करते, बस लिखते रहते हैं। ’बलविंदर कुमार यकीनन उन लम्हों को कोस रहे होंगे जब उन्होंने अपनी पुस्तक के विमोचन के लिए अपने मंत्री जी का नाम पक्का किया होगा।’
Posted on 14 September 2016 by admin
सत्ता और नौकरशाही का भले ही चोली दामन का साथ हो, पर जब नौकरशाही ही सियासत के खेल में उतर आए तो यकीनन सत्ता के चेहरे को विद्रूप होने से कोई नहीं रोक सकेगा। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में एक अजीब सा नज़ारा देखने को मिल रहा है। सूत्र बताते हैं कि सपा और बसपा के कुछ टिकटों को बांटने का जिम्मा भी यूपी कैडर के कुछ आईएएस अफसरों ने उठा रखा है। वह न सिर्फ अपने मनमाफिक लोगों को इन पार्टियों के टिकट दिलवाने की पैरवी कर रहे हैं बल्कि पार्टी आलाकमान से यह सुनिश्चित भी कर रहे हैं कि इन उम्मीदवारों को चुनाव लड़वाने का सारा खर्च भी वे स्वयं उठाएंगे और उन्हें जिताने में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा देंगे। देखिए ज़रा सियासत भी क्या-क्या रंग बदलती है!
Posted on 14 September 2016 by admin
पंजाब के आसन्न विधानसभा चुनाव में अकाली दल जिस कदर पिछड़ता नज़र आ रहा है, उसने बादल परिवार की पेशानियों पर बल ला दिया है। अपने को चुनावी रेस में बनाए रखने के लिए अकालियों ने अलग-अलग तरह के सियासी उपक्रम साधने शुरू कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी भी इस खेल में पूरी तरह से उतर आई है। अभी पिछले दिनों सोषल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें बादल परिवार के साथ कैप्टन अमरिंदर को उनके डिनर में ठहाके लगाते देखा जा सकता है। सूत्रों का दावा है कि अकालियों ने भी आप के कई नेताओं के स्टिंग ऑपरेशन कर कुछ सेक्स सीडी बनवा ली हैं, अरविंद केजरीवाल ने यह कह कर गुब्बारे की हवा निकाल दी है कि उनकी पार्टी के नेताओं के फर्जी सीडी तैयार करवाए गए हैं और ऐसी सीडी की संख्या 50 के आस पास हो सकती है। बादल परिवार यह भी जानता है कि इस दफे के चुनाव में बड़े बादल अपनी उम्र की दुहाई देकर पार्टी के लिए वोट नहीं जुटा सकते तो चुनाव की ऐन घड़ी में वे कोई बड़ा दांव चल सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि सतलुज यमुना लिंक के पानी का मामला अभी कोर्ट में लंबित है, जिसमें पंजाब और हरियाणा को पानी का बंटवारा होना है। जैसे ही यह फैसला आएगा प्रकाश सिंह बादल इसके विरोध में अपना पद छोड़ सकते हैं और गवर्नर से अपनी सरकार को भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं। पर यह फैसला एक दुधारी तलवार की मानिंद है, क्योंकि सरकार से बाहर रह कर पंजाब में चुनाव में जाना कभी भी इतना आसान नहीं होता है।
Posted on 14 September 2016 by admin
भाजपा शासित राज्य के एक उत्साही राज्य मंत्री एक बड़े स्टील प्लांट के औचक निरीक्षण पर चले गए, दरअसल मंत्री जी यह पता लगाना चाहते थे कि उस प्लांट में श्रम कानूनों का कोई उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। यह प्लांट राजनैतिक रसूख रखने वाले एक बड़े उद्योगपति का है। जब मंत्री जी अपने औचक निरीक्षण के क्रम में अपने दल बल के साथ प्लांट के गेट पर पहुंचे तो उन्हें वहीं रोक दिया गया, उन्हें यह बताने के बाद भी अंदर नहीं जाने दिया गया कि वे सरकार में मंत्री हैं। काफी हील-हुज्जत के बाद वह उद्योगपति भी अंदर से बाहर निकल कर गेट पर आया, जहां मंत्री जी से उनकी गर्मागर्म बहस हो गई, बात धक्का-मुक्की तक आ पहुंची। उद्योगपति ने मंत्री जी को हड़काया कि बगैर सूचना दिए आपको यहां आने का कोई हक नहीं, और लगे हाथ उस उद्योगपति ने वहीं बाहर गेट से ही अपने मोबाइल से मुख्यमंत्री को फोन लगा दिया, मुख्यमंत्री ने कहा ज़रा मंत्री जी को फोन दीजिए, फिर उन्होंने फोन पर ही अपने मंत्री को डपट दिया-’आप मुझे इंफॉर्म किए बगैर वहां कैसे चले गए, तुरंत वापिस आइए आप।’ मंत्री जी अपना सा मुंह लिए वापिस लौट गए, पर उनके सम्मान को कौन वापिस करवाएगा?
Posted on 04 September 2016 by admin
सवाल सचमुच भीषण है कि क्या मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सत्ता में दिन बस गिनती के रह गये हैं ? भाजपा से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि पार्टी में शिवराज के विकल्प की तलाश जोर-शोर से शुरू हो गयी है, जिन दो नामों पर गंभीरतापूर्वक मनन चल रहा है उसमें से एक नाम संघ दुलारे और केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल माधव दवे का है, दूसरा नाम जयभान सिंह पवैया का है, जो न केवल शिवराज सरकार में वरिष्ठ मंत्री हैं, अपितु बजरंग दल के सर्वेसर्वा भी रह चुके हैं। आने वाले कुछ महीनों में प्रदेश को एक नया गवर्नर भी मिल सकता है, क्योंकि मध्य प्रदेश के मौजूदा गवर्नर रामनरेश यादव का टर्म अगले माह अक्टूबर में समाप्त हो रहा है। केन्द्र सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि मध्य प्रदेश के अगले गवर्नर के तौर पर यूपी के सीनियर भगवा नेता लालजी टंडन का नाम एक तरह से फाइनल है। जहां तक मुख्यमंत्री को बदलने का सवाल है यह मामला यूपी चुनाव तक टल भी सकता है, हालांकि संघ इस मसले पर फौरी अमल चाहता है।
Posted on 04 September 2016 by admin
भोपाल में आहूत हुई संघ की महत्वपूर्ण बैठक में संघ के दो दिग्गज नेताओं भैयाजी जोशी और कृष्ण गोपाल का शिवराज सिंह चौहान के प्रति रुख किंचित कठोर था। सूत्र बताते हैं कि उस बैठक में जो सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम के पांच बजे तक चली, शिवराज को कई अप्रिय सवालों के जवाब देने पड़े। शिवराज के राज में पिछले 11 सालों में जिस तरह भ्रष्टाचार की खबरें आती रही और खासकर जिस तरह हालिया दिनों में व्यापम घोटाले की सीबीआई जांच में तेजी आयी है वह शिवराज की पेशानियों पर बल डालने के लिए लिये काफी है। संघ की शिवराज को स्पष्ट चेतावनी के बाद प्रदेश भाजपा के अंदरुनी समीकरणों में बदलाव देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री की कुर्सी के नये दावेदारों ने दिल्ली और संघ की गणेश परिक्रमा अभी से शुरू कर दी है।
Posted on 04 September 2016 by admin
यूपी के खांटी समाजवादी नेता मुलायम सिंह की बड़ी पुत्रवधु डिंपल यादव राजनेत्री से कहीं ज्यादा भारतीय संस्कारों में ढली एक बहू नजर आती हैं। इसकी बानगी आपको यदाकदा सेंट्रल हॉल में देखने को मिल जाएगी, डिंपल शायद ही अपने सिर से कभी पल्लू को गिरने देती हैं, और जिस भी पार्टी का जो भी वरिष्ठ नेता से उनका आमना सामना होता है, या कोई उनका कुशलक्षेम पूछता है तो वह उनके पांव छूना नहीं भूलती है। डिंपल का सामना चाहे जया बच्चन से हो जाये या फिर अमर सिंह से उन्हें यह उपक्रम दुहराते देखा जा सकता है। बादल परिवार की बहू हरसिमरत कौर भी अपने सिर को ढंक कर रखना पसंद करती है।
Posted on 04 September 2016 by admin
सीडी कांड में अपनी कुर्सी गंवा चुके संदीप कुमार के बचाव में कई चेहरे अवरतरित हुये हैं। इनमें से कुछ आप से हैं, कुछ सोशल मीडिया के धुरंधर खिलाड़ी, तो कुछ नामचीन पत्रकार, इनमें से कुछ का तर्क है कि यह सीडी 4-5 साल पुरानी है क्योंकि सीडी में कैद महिलाओं के साथ संदीप किंचित दुबले पतले नजर आ रहे हैं। आप नेता आशुतोष तो संदीप के बचाव में कुछ इस हद तक आक्रामक हो आये हैं कि उन्होंने गांधी-नेहरु को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। जो लोग आशुतोष की पत्रकारिता और और उनकी नयी नवेली राजनीति से वाकिफ हैं, उन्हें इसमें असहज कुछ नहीं लग रहा। पर आम आदमी पार्टी के कुछ उत्साही कार्यकर्ताओं ने अपनी पर्टी के कुछ अन्य संदीप कुमारों की पड़ताल शुरू कर दी है। यूपी के एक उत्साही युवा नेता जो आप की ओर से कई राज्यों में बकायदा चुनाव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं, उनको लेकर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। आप से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि इस नेता जी के फोन बिल को लेकर पार्टी परेशान है, कि इस जमाने में जबकि मोबाइल फोन के कॉल रेट्स इतने सस्ते हैं, नेताजी के बिल अब भी 40 से 50 हजार आ रहे हैं। कहते हैं जब इनके बिल डिटेल्स को खंगाला गया तो यह हैरान करने वाला था, गर्म खून वाले इस नेता जी ने रात-रात भर पेड नंबरों पर गर्म बातें की हैं। सो दिल थामकर रखिये आने वाले दिनों में आपको ऐसे कई और सीडी के भी दीदार हो सकते हैं।
Posted on 04 September 2016 by admin
जियो मोबइल के विज्ञापन में पीएम के चेहरे के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर भले ही विवाद गहराता जा रहा हो, पर एक सुलझे हुये रणनीतिकार के तौर पर मुकेश अंबानी की दाद देनी ही होगी, क्योंकि मौकों और चेहरों के इस्तेमाल में उनका कोई सानी नहीं। मुकेश अपनी आक्रामक व्यापार नीति को अपने इरादों व मीडिया के अचूक इस्तेमाल से धार देने का काम पहले भी करते रहे हैं। कहते हैं अकेले हिन्दुस्तान में 200 से ज्यादा टीवी चौनलों में उनकी हिस्सेदारी है, बड़े पत्रकारों को उपकृत करने के लिहाज से ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ कहीं पहले से काम कर रहा है, तो वैश्विक स्तर पर बोद्धिक सोच को प्रभावित करने के लिए उनका उपक्रम ‘इनोवेशन काउंसिल’ भी चर्चा में है, कहते हैं इस काउंसिल में मुकेश ने 7-8 नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों को भी जगह दी है। अपने उत्पादों को वैज्ञानिक सम्मत और बाजार की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिये मुकेश सोची-समझी रणनीति बुनते हैं और उस पर अमल करते हैं, ‘जियो’ इसका एक नायाब उदाहरण है। जिसमें भारत में जमे जमाये दूरसंचार कंपनियों के लिए खतरे की घंटी बजायी है। सूत्र बताते हैं कि जियो के खतरे को भांपते हुये देश में टेलीकॉम की अग्रणी कंबनी भारती ने अपने ज्यादातर शेयर सिंगापुर टेलीफोंस को बेच दिये हैं। आइडिया इस झटके से उबर नहीं पा रहा है, और वोडाफोन आनन-फानन में अपने लिए आक्रामक बाजार नीति तैयार करने जुटा है।