Posted on 23 October 2016 by admin
सूरत में केजरीवाल की रैली में पूरी चाकचौबंद व्यवस्था थी और व्यवस्था भी ऐसी कि कोई परिंदा भी पर ना मार सके। केजरीवाल को गुप्त सूत्रों से खबर मिली थी कि इस रैली में उनके ऊपर जूते-चप्पल, स्याही या गोबर फेंका जा सकता है। सो रैली के आयाजकों ने मोदी की पुलिस पर भरोसा करने के बजाए, बकायदा रैली के चारों द्वारों पर बाऊंसर तैनात किए गए। आगे की पंक्ति में बैठने वाले 500-700 लोगों की कड़ी सुरक्षा जांच हुई और उनकी कलाईयों पर एक ’रिस्टबैंड’ लगाया गया। मंच के आसपास 15 फीट की टीन की चादरों से दीवारें खड़ी की गई ताकि इसे लांघ कर कोई अंदर ना आ सके। केजरीवाल जब स्वयं रैली स्थल पर पहुंचे तो उन्हें चारों ओर से बाऊंसरों ने घेर रखा था। ’मेरे साथ रहता था साया हमेशा, मगर इन दिनों हम अलग हो गए हैं।
Posted on 23 October 2016 by admin
बीते शुक्रवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिवाली के मौके पर अपने घर पत्रकारों के संग ’चाट पे चर्चा’ रखी, सबसे खास बात यह कि इस आयोजन में मैडम जावड़ेकर भी शरीक हुईं। पत्रकारों के संग चाय की चुस्कियां लेते मंत्री जी जब अपने विभाग की 100 दिनों की उपलब्धियां गिना रहे थे, ऐन मौके पर मौजूद पत्रकारों के बीच एक पत्रिका का वितरण भी हुआ, मानव विकास मंत्री के तौर पर मेरे 100 दिन। फिर पत्रकारों को इस पत्रिका की संकल्पना के पीछे की कहानी पता चली। दरअसल, जावड़ेकर विदेश मंत्रालय के एक कार्यक्रम में गए थे, जहां उपस्थित महत्त्वपूर्ण लोगों का परिचय उद्घोशिका दे रही थी। जब जावड़ेकर का नंबर आया तो यकबयक उद्घोशिका बोल पड़ीं-’यह हैं हमारे पर्यावरण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर।’ उसी वक्त जावड़ेकर ने तय कर लिया कि वह एक प्रकाशन का प्रारूप तय करेंगे और पुस्तिका को ज्यादा से ज्यादा लोगों में वितरित किया जाएगा, ताकि लोग जान सकें उनका कल का पर्यावरण मंत्री अब देश को शिक्षा की खुराक पिला रहा है। जाहिर है इसकी शुरूआत पत्रकारों से हुई।
Posted on 23 October 2016 by admin
मोदी और शाह की जोड़ी ने तय किया है कि गुजरात के विधानसभा चुनाव भी मार्च में यूपी-उत्तराखंड के साथ करा दिए जाए। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों नेताओं का मानना है कि इससे भगवा असंतोष से उपजे तमाम छोटे-बड़े आंदोलनों की हवा निकल जाएगी, चूंकि इस वक्त पूरे देश में सर्जिकल स्ट्राइक की वजह से भाजपा के पक्ष में माहौल बन गया है। इस बात की भनक कांग्रेस को भी लग चुकी है, सो गुजरात कांग्रेस के प्रभारी गुरूदास कामत पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी से मिले और इन दोनों नेताओं ने मिल-बैठ कर यह तय कर दिया है कि गुजरात में भी पार्टी प्रत्याशियों को टिकट दिसंबर में ही बांट दिए जाएं। इससे कांग्रेस उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए किंचित वक्त भी मिल जाएगा और वे पार्टी कार्यकर्त्ताओं को वक्त रहते मुस्तैद भी कर पाएंगे। वैसे गुजरात चुनाव की तय शुदा मियाद दिसंबर 2017 है, चुनांचे भाजपा नेताओं को ऐसा लग रहा है कि शायद तब तक सर्जिकल स्ट्राइक की कोख से उपजे राष्ट्रवाद के नए उभार को संभाल कर रख पाना मुमकिन नहीं होगा।
Posted on 17 October 2016 by admin
आंदोलन की राजनीति से सियासत का सफ़र तय करने में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को तिकड़मों के कई ककहरे याद करने पड़े हैं। केजरीवाल को इस बात का कहीं बखूबी इल्म है कि दिल्ली के तमाम मीडिया घराने किस कदर मोदी के मोहफांस में जकड़े हैं, सो, उन्होंने मीडिया घरानों में काम कर रहे पत्रकारों की सुध लेने की ठानी। कोई साल भर पहले केजरीवाल ने अपने कुछ मुंहलगे पत्रकारों के समक्ष उद्घाटित किया कि पत्रकारों के वेतन की एकरूपता के लिए ’वेज बोर्ड’ लागू करवाना उनका सबसे बड़ा धर्म है। इसके बाद केजरीवाल के एक भरोसेमंद नौकरशाह ने (जो अपनी समझदारी व तेजतर्रार पन के लिए जाने जाते हैं) पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार की ओर से एक हलफनामा तैयार करवाया। पर इससे पहले कि वह एफिडेविट अपने अंजाम तक पहुंचता उस सेक्रेटरी का तबादला हो गया। उस नौकरशाह की योग्यता को मद्देनजर रखते सरकार में नंबर दो मनीश सिसौदिया ने उन्हें अपने मंत्रालय में प्रतिनियुक्त करवा लिया। इसके बाद केजरीवाल की सेवा में एक अन्य सचिव महोदय की नियुक्ति हो गई। उन्होंने आनन-फानन में इस हलफनामे को रंग-रोगन कर कोर्ट में जमा करवा दिया। और इस हलफनामे को तुरंत ही कोर्ट की मंजूरी भी मिल गई। जब केजरीवाल के चंद शुभचिंतक पत्रकारों ने इस नए हलफनामे का प्रारूप देखा तो वे वाकई सकते में आ गए, उन्हें पता चला कि पहले वाले हलफनामे का पूरा स्वरूप ही बदल दिया गया है और यह नया हलफनामा पूरी तरह से मीडिया मालिकों के हक में है। पत्रकारों ने इसे अपने लिए सीएम का विश्वासघात माना और उन्होंने इस कृत्य के लिए केजरीवाल को खूब खरी-खोटी सुनाई। तब जाकर केजरीवाल को इस बात का इल्म हुआ कि नए सेक्रेटरी साहब ने तो पूरा दांव ही पलट दिया है, तो उन्होंने झटपट कोर्ट से इस हलफनामे को बदले जाने की गुहार लगाई, गनीमत रहा कि कोर्ट इस बात के लिए राजी हो गई है, केजरीवाल की जान में जान आई, उन्हें सचमुच पता नहीं कि आखिर उनकी नाक तले दिल्ली सरकार में चल क्या रहा है?
Posted on 17 October 2016 by admin
पिता-पुत्र के बीच चल रहे सियासी स्वांग पर सच्चाइयों के दाग लगने लगे हैं, यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता व चाचा की दंगली राजनीति से दीगर अपने लिए एक नया रास्ता बनाने में जुटे हैं। अखिलेश समर्थक इस पूरे परिवार की लड़ाई को यंग बनाम ओल्ड का रंग देना चाहते हैं। अखिलेश अपनी सरकार की उपलब्धियों का पिटारा लेकर चुनावी महासमर में उतर चुके हैं, डूबते को तिनके के सहारे की तर्ज पर उन्होंने अपने तार राहुल व कांग्रेस से जोड़ रखे हैं, जाट वोटों को अपनी ओर करने के लिए अखिलेश अजीत सिंह के साथ चुनावी गठबंधन करने को इच्छुक जान पड़ते हैं। वहीं पिता व चाचा के पास दशकों का सियासी तजुर्बा है, अमर सिंह की तरह तुरूप का इक्का है, जांची-परखी सियासी चालें हैं, पुराने मित्र हैं और संगठन की ताकत है, अगर कुछ नहीं है तो वह अखिलेश की नवअंकुरित राजनीति की ताजगी और उनका युवा-जोशीला चेहरा। सो, पिता व चाचा की मंडली ने इसकी काट के लिए उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव को आगे लाने का निश्चय किया है। प्रतीक भी अखिलेश की तरह युवा हैं, जोशीले हैं और उनमें भी मुलायम की छाया दिखती है। आमतौर पर प्रतीक के साथ सार्वजनिक रूप से दिखने में कन्नी काटने वाले नेताजी ने अभी पिछले दिनों धूमधड़ाके के साथ प्रतीक के नए ’जिम’ का उद्घाटन किया है। मुलायम पुराने पहलवान रह चुके हैं, सियासी अखाड़ों के दांव-पेचों से भी भली-भांति वाकिफ है, पर जब सामने अपना पुत्र ही खड़ा हो तो लड़ने की इच्छा-शक्ति बचाए रखना किंचित मुश्किल हो जाता है।
Posted on 17 October 2016 by admin
सियासी उड़ान भरने में सिद्दहस्त राजीव प्रताप रूढ़ी भले ही केंद्र में मंत्री हों, पर पेशे से पायलट भी हैं, उनके पास जहाज उड़ाने का कमर्शियल लाइसेंस भी है, जिसे बरकरार रखने के लिए हर माह उन्हें कम से कम 10 घंटे जहाज उड़ाना जरूरी होता है। अब अपनी इस उलझन को दूर करने के लिए रूढ़ी ने सरकारी उपक्रम एयर इंडिया की ओर मुंह करने के बजाए एक प्राइवेट एयरलाइंस को अपनी सेवाएं देना ज्यादा मुफीद समझा है। सूत्र बताते हैं कि अपना लाइसेंस बरकरार रखने के लिए मंत्री जी ने एक निजी विमान सेवा इंडिगो का सहारा लिया है। एयर इंडिया की ओर नहीं फटकने की एक खास वजह यह हो सकती है कि चूंकि यह एक सरकारी विमान सेवा है सो यहां आरटीआई का खतरा भी निरंतर बना रहता है, कोई भी व्यक्ति महज़ एक आरटीआई दाखिल कर उनके 10 घंटों की उड़ान की जानकारियां जुटा सकता है, जबकि प्राइवेट एयरलाइंस के साथ यह बाध्यता नहीं है, कौशल विकास मंत्री के इस कौशल की दाद तो देनी ही पड़ेगी।
Posted on 17 October 2016 by admin
दशहरे के बाद पीएम ने कौशल विकास मंत्रालय को तलब कर उससे प्रेजेंटेषन देने को कहा। दरअसल पीएम जानना चाहते थे कि इन ढाई वर्षों में मंत्रालय ने कितना काम किया है। पीएमओ के फरमान के बाद मंत्रालय तेजी से हरकत में आया और उपलब्ध सूचनाओं व आंकड़ों को खंगाला जाने लगा। मंत्रालय के आला अधिकारी इस तथ्य के सामने आने से वाकई हैरान रह गए कि ज्यादातर योजनाएं बस कागजों पर ही चल रही थीं। मंत्रालय ने एक वृहद अध्ययन-मनन के बाद कहीं पहले ही उन 41 सेक्टर की पहचान कर ली थीं जहां रोजगार के नए अवसरों की भरपूर संभावनाएं थीं। पर इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं किया जा सका। 141 नए आईटीआई खोले जाने थे, पर जब इसके लिए आए आवेदनों को खंगाला गया तो पता चला कि महज़ एक राज्य से आईटीआई खोलने के लिए चार लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। इन 41 सेक्टर के लिए व्यवसायिक घराने स्कीम बना रहे हैं सेक्टोरियल स्कीम के तहत, लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि आईटीआई के लिए जो नार्म्स बनाए गए हैं वे इसे पूरा नहीं करते हैं। पीएम के समक्ष प्रेजेंटेशन देने के लिए बाकायदा मंत्रालय को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा।
Posted on 10 October 2016 by admin
’अपने दरवाजे पर हर रोज़ लगा देता हूं तेरी शोहरत का टीका, हमने भी अपनी गुमनामियों को चेहरा एक नया दिया है’ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के ‘फैंस क्लब’ में सिरमौर बनने की धकमपेल मची है। ताज़ा आंकड़ो में 3500 से ज्यादा प्वाइंट हासिल कर पॉवर मंत्री पीयूष गोयल फिलवक्त सबसे आगे चल रहे हैं, उनसे ज़रा सी पीछे बीजेपी पार्टी है और हैरतअंगेज रूप से केंद्रीय लघु व सूक्ष्म उद्योग मंत्री कलराज मिश्र तीसरे नंबर पर बने हुए हैं। हमारे टेक्नो सेवी प्रधानमंत्री ने लोगों से खासकर अपने प्रशंसकों से चौबीसों घंटे कनेक्ट रहने का मूलमंत्र पा लिया है और उनके इस ’यूरेका’ को मूर्त्त रूप देने का काम किया है ‘एपल’ कंपनी के सीईओ टिम कुक ने। मोदी के मोबाइल एप को एक नए अवतार में पेश करने के लिए टिम और उसकी टीम ने दिन रात एक कर दिए थे। यह एक खास तरह का ‘रिस्पांसिव एप’ है जिसके मार्फ्त मोदी अपने चाहने वालों से 24X7 जुड़े रहते हैं। पीएम का फोन इस बेहद विलक्षण एप से लैस है, जिसमें अलग-अलग ग्रुप मसलन सरकार, अपनी पार्टी, अपने कैबिनेट मंत्री, मशहूर लोगों व आम जनता से वे कनेक्ट रहते हैं। इस एप के एक विशेष फीचर के जरिए मोदी संग ज्यादा एक्टिव रहने वाले या उनके पास अपने ज्यादा से ज्यादा विचार या शुभकामनाएं पहुंचाने वाले पीएम प्रशंसकों को ’बैज’ मिलते हैं, 131 प्वाइंट्स पर पहला बैज मिल सकता है और फिर यह होड़ 5000 या उससे ज्यादा अंकों तक पहुंच सकती है, 1000 बैज हासिल करने वाले को ’एक्सपलोरर’ 2000 बैज पाने वाले ’आई नो इट ऑल’ और फिर 5000 या उससे ज्यादा अंक हासिल करने वालों को ’सुपर फैन’ का तमगा (बैज) मिल सकता है। सुपर फैन का तमगा हासिल करने की रेस में फिलवक्त पीयूष गोयल सबसे आगे बने हुए हैं, कोई है मोदी का उनसे बड़ा ज़बरा फैन जो उन्हें इस रेस में पछाड़ सके।
Posted on 10 October 2016 by admin
’जवानों के खून…’ वाला राहुल गांधी का जुमला असर कर गया है, भाजपा भी निरंतर पलटवार कर रही है और अमित शाह से लेकर पूरी पार्टी राहुल को उनके इस बोल के लिए पानी पी-पीकर कोस रही है। दरअसल जब राहुल की यात्रा पूर्वांचल से होकर अवध तक पहुंची तब तक उसे लोगों का और मीडिया का खासा रिस्पांस मिल रहा था, उनके स्वागत के लिए, उन्हें देखने-सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही थी। पर जैसे ही यात्रा आगरा, मेरठ, अमरोहा, मुरादाबाद जैसे जिलों में पहुंची, भीड़ छंटने लगी थी। प्रदेश के मुसलमान उनकी सभाओं में अब भी जुट रहे थे पर सुनने वालों से ज्यादा देखने वाले तमाशबीनों की भीड़ थी, ऐसे में राहुल का जोश कम हो रहा था, कांग्रेस का आत्मविश्वास डगमगाने लगा था। राहुल, पीके और उनकी टीम को लगने लगा था कि इन क्षेत्रों में भाजपा के राष्ट्रवाद की उछाल लोगों के दिल-दिमाग को ज्यादा आंदोलित कर रही है, जगह-जगह लगे भाजपा के पोस्टर इस बात की चुगली भी कर रहे थे-’पाक हारेगा, बीजेपी जीतेगी’ के उद्घोष के बीच टीम राहुल ने फैसला लिया कि अब मोदी पर सीधा हमला बोलना होगा, ताकि अल्पसंख्यक वोटरों को एकजुट किया जा सके। पीके समझ चुके थे कि सिर्फ बिजली, पानी, सड़क, विकास व किसान से बात नहीं बनने वाली है, सो राहुल गांधी ने जो कुछ कहा, बहुत सोच समझ कर कहा।
Posted on 10 October 2016 by admin
कांग्रेस के सबसे पुराने खजांची मोतीलाल वोरा से भी प्रशांत किशोर बेतरह नाराज़ हैं, पीके नाराज़ हैं कि वोरा जी ने उनकी यात्रा के बिल को लंबे समय से रोक रखा है, हालांकि यह रकम कोई इतनी बड़ी नहीं है जिस पर इस कदर हाय-तौबा मचे, पर बुजुर्ग कांग्रेसी वोरा जी को लगता है कि पीके पार्टी में नया दस्तूर ला रहे हैं। अब तक की कांग्रेसी परंपराओं में नेता के साथ चल रहे पार्टी कार्यकर्त्ताओं को पूरी-सब्जी के पैकेट से ही निबटा दिया जाता था, पर नए ज़माने के नए कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं को पीके होटल में रूकवा रहे हैं, रेस्टोरेंट के उनके लंबे-लंबे बिल हैं। सूत्र बताते हैं कि पीके ने अपनी परेशानी राहुल जी से षेयर की, फिर राहुल ने मोतीलाल वोरा से बात की। फिर भी यह मामला नहीं निबटा। वोरा जी अड़े हैं कि इन बिल को लेकर उनके कुछ सवाल हैं और पीके को इसके जवाब देने ही होंगे। अब इतने बुजुर्गवार वोरा से राहुल भला क्या बहस कर सकते थे?