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यूं टली निर्मला पर बला

Posted on 25 September 2017 by admin

अब बात करते हैं चुप सधे कदमों से सियासी फासले तय करने में सिद्दहस्त निर्मला सीतारमण की। सूत्र बताते हैं कि जैसे ही निर्मला से इस्तीफा मांगा गया, बगैर वक्त गंवाए वह शीर्ष नेतृत्व के पास पहुंची दोनों हाथ जोड़ उनका आभार व्यक्त किया और विनम्र शब्दों में कहा-’अपने साथ काम करने का मौका देकर आपने वाकई मुझे अनुग्रहित कर दिया है, मेरे लिए आपके मंत्रिमंडल में काम करना सबसे गौरव के क्षण रहें, मैं जीवन भर आपका यह अहसान नहीं भूलूंगीं।’ सूत्र बताते हैं कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से भी मिलकर कमोबेश उन्होंने यही बातें दुहराईं। उन्होंने शाह से यहां तक कह डाला कि अगर पार्टी उन्हें संगठन में लेना चाहती है तो इसके लिए उन्हें किसी पद की भी आवश्यकता नहीं, वह निःस्वार्थ भाव से पार्टी संगठन में काम करने को इच्छुक हैं। और अगर फिलवक्त पार्टी में भी उनके लायक कोई काम नहीं है तो वह अपने गांव जाकर अपने पति के साथ सुकून के दो पल गुजारना चाहती हैं। मौजूदा पार्टी नेतृत्व को सचमुच ऐसे ही विनम्र स्वयंसेवकों की जरूरत हैं, जिनका समर्पण भाव सत्ता के दर्प के समक्ष कभी सिर न उठा सके।

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और अंत में

Posted on 25 September 2017 by admin

इस दफे जबसे राहुल गांधी अमेरिका गए हैं, वे नए रंग-रौगन में सराबोर हैं, उनका खोया आत्मविश्वास भी लौट आया है और उनके अंदर एक नई अंतदृष्टि भी विकसित हो गई हैं। आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ दल को इस बात का अंदाजा हो जाएगा। इसकी पहली मिसाल राज्यसभा में स्थायी समितियों के अध्यक्ष की नियुक्तियों में दिख सकता है। जैसे न्याय व कानून पैनल की अध्यक्षता भाजपा कांग्रेस के बजाए अपने नए सहयोगी अन्नाद्रमुक को देना चाहती है। संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने इस बाबत राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद से बात की पर यह बातचीत बेनतीजा रही। अनंत कुमार इस मसले पर सोनिया व राहुल से भी बात करना चाहते हैं, पर वहां से इस बाबत कोई सकारात्मक संदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। राहुल अब कांग्रेस को एक जुझारू चेहरा देना चाहते हैं, पर इसके लिए उन्हें पहले राजनीति को पूर्णकालिक तौर पर अपनाना होगा। (एनटीआई-gossipguru.in)

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उड़ रहे हैं पायलट

Posted on 18 September 2017 by admin

राहुल के साथ अमेरिका जाने वाली कोर टीम में मिलिंद देवड़ा, शशि थरूर के साथ राजस्थान के युवा नेता सचिन पायलट का भी नाम शामिल था। पर ऐन वक्त सचिन ने अपनी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए अमेरिका जाने से मना कर दिया। सचिन से इस बाबत जब स्वयं राहुल ने बात की तो सचिन ने बताया कि भाजपा सांसद सांवरलाल जाट की निधन से रिक्त हुए अजमेर सीट पर लोकसभा के उप चुनाव होने हैं, शेखावटी व सीकर में किसानों का आंदोलन चल रहा है, उसकी सुध लेनी है। सूत्र बताते हैं कि सचिन ने राहुल को बताया कि उनके अमेरिका में जितने भी कनेक्शन हैं, वह उन्होंने कोर टीम से शेयर कर दिए हैं, ऐसे में उनका अमेरिका जाना या न जाना बहुत मायने नहीं रखता है। सूत्र बताते हैं कि इस पर राहुल ने चुटकी लेते हुए सचिन से कहा-’इसमें कोई शक नहीं कि आप बहुत अच्छा काम कर रहे हो, पर यह न भूलो कि राजस्थान का रास्ता भी दिल्ली से होकर जाता है।’

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अंदर की बात

Posted on 18 September 2017 by admin

खबर गर्म है कि बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी से भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बेतरह नाराज़ है। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इस दफे जब बिहार में नीतीश व भाजपा गठबंधन की सरकार फिर से बन रही थी तो भाजपाध्यक्ष अमित षाह इस बात के कतई पक्ष में नहीं थे कि सुशील मोदी को फिर से सरकार में लिया जाए। कहते हैं अपनी विकेट गिरती देख सुशील मोदी तुरंत संघ की शरण में चले गए। सूत्रों की मानें तो संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच-बचाव के बाद सुशील मोदी को फिर से बिहार सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाया गया। कहते हैं इस पूरे वाकया से अमित शाह इस कदर नाराज़ हुए कि उन्होंने अपने इस्तीफे की पेशकश कर डाली और कहा कि वे केंद्र सरकार में आकर काम करने को तैयार हैं, कहना न होगा ऐसे में शाह के लिए गृह मंत्रालय उनकी पहली पसंद थी, वे गुजरात सरकार में पहले भी यह महकमा संभाल चुके थे। कहते हैं जब यह खबर राजनाथ सिंह को लगी तो वे एकदम से उचट गए, सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि राजनाथ को रक्षा मंत्रालय संभालने का ऑफर दिया गया। राजनाथ तुरंत जाकर भागवत से मिले और अपने विभाग बदले जाने पर ऐतराज जताते हुए कहा कि इससे लोगों में यह संकेत जाएगा कि वे एक असफल गृह मंत्री साबित हुए हैं, अगर ऐसा है तो फिर उन्हें संगठन में ले लिया जाए, बतौर अध्यक्ष वे पार्टी की सेवा करने को तैयार हैं। मोहन भागवत के हस्तक्षेप के बाद ही यह मामला निपट पाया, सुना तो यह भी जा रहा है कि मंत्रिमंडल फेरबदल से पूर्व राजनाथ सिंह के घर पर जो मंत्रियों की बैठक हुई थी, वह भी काफी हंगामीखेज रही।

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चुनाव की ओर बिहार

Posted on 18 September 2017 by admin

जदयू और भाजपा के रिश्तों में अब पहली वाली बात नहीं रह गई है, वैसे भी इस हालिया गठित सरकार में भाजपा जूनियर पार्टनर के बजाए बराबर की भागीदार है, महत्वपूर्ण फैसलों से पहले नीतीश के लिए भाजपा की राय लेना भी जरूरी हो गया है। नहीं तो पिछली सरकार में नीतीश सुशील मोदी को बस फैसलों के बाबत जानकारी दे दिया करते थे और सुशील मोदी भी नीतीश के ’यस मैन’ की भूमिका में थे। पर इस बार दांव पलट गया है, अमित शाह का सुशील मोदी पर पहले जैसा भरोसा नहीं रह गया है, सूत्र बताते हैं कि शाह कहीं न कहीं यह मानने लगे हैं कि सुशील मोदी पार्टी हित के बजाए अपने निजी हित को ज्यादा तरजीह देते हैं। चुनांचे बिहार में अब भाजपा के पक्ष से तमाम अहम फैसले दिल्ली से लिए जा रहे हैं। अभी एक रोज पहले ही अमित शाह ने बिहार की कोर कमेटी की अहम बैठक दिल्ली में बुलाई और उसमें पार्टी नेताओं को साफ तौर पर निर्देश मिले हैं कि नीतीश के समक्ष उन्हें किसी हाल में झुकना नहीं है। शाह बिहार में समय से पूर्व चुनाव करवाने की रणनीति पर भी काम कर रहे हैं, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में अगले साल अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होने हैं, भाजपा चाहती है कि लोकसभा के चुनाव भी राज्यों के चुनाव के साथ करवा लिए जाए, इसी कड़ी में बिहार को भी जोड़ा जा सकता है, अगर यह मुमकिन नहीं हुआ तो इन राज्यों के चुनावों को ही 2019 तक टाला जा सकता है ताकि राज्यों के विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ कराए जा सके।

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राहुल को ना

Posted on 18 September 2017 by admin

राहुल गांधी भले ही अपनी दादी के जन्मदिन के 100 साल पूरे होने के मौके पर पार्टी का अध्यक्ष पद संभालने की तैयारियों में जुटे हों, पर कांग्रेस के अंदर उनकी स्वीकार्यता को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है। ताजा मामला कर्नाटक से जुड़ा हुआ है। सूत्र बताते हैं कि कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्दरमैया की ओर से पार्टी कर्णधारों को यह संदेषा मिला है कि कर्नाटक चुनाव में अगर राहुल के कम से कम प्रोग्राम लगें तो यही पार्टी हित में होगा। कई पार्टी हितैषी तो इसके आलोक में पंजाब चुनाव का हवाला देते हैं, जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी के पंजाब आने में कम दिलचस्पी दिखाई थी।

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…और अंत में

Posted on 18 September 2017 by admin

नवनीत सहगल एक ऐसे नौकरशाह रहे हैं, जिनकी मायावती और अखिलेश सरकार में तूती बोलती थी और वे अपने दोनों हाथों से मीडिया के समक्ष सरकारी खजाना लुटाने में सिद्दहस्त माने जाते हैं। पिछले दिनों नवनीत सहगल के पिता की पुस्तक का विमोचन समारोह था, इनके पिता पहले भी रामायण के ऊपर दो पुस्तकें लिख चुके हैं। उस पुस्तक विमोचन समारोह में अपने अज्ञातवास से निकलकर हेमंत शर्मा भी शामिल हुए। वे लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। (एनटीआई-gossipguru.in)

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गुरु की नकल पर गुरु घंटाल गुरमीत

Posted on 03 September 2017 by admin

डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम आज भले ही अपने किए की सजा भुगत रहे हैं और जेल की सलाखों के पीछे लगातार यह खटराग अलाप रहे हैं कि-’मैंणू की कित्ता?’ यानी मैंने क्या किया है? तो डेरा सच्चा सौदा से जुड़े इस गुरु घंटाल बाबा के एक पुराने सहयोगी खुलासा करते हैं कि आज से दस वर्ष पूर्व 2007 में गुरूमीत राम रहीम ने सदभाव का माहौल बिगाड़ने की पूरी तैयारी कर ली थी। वे सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह की वेश वूशा धर कर एक सफेद घोड़े पर बैठ कर और कंधे पर बाज बिठाकर अपने सिरसा आश्रम से अमृतसर की यात्रा करने का पूरा प्लॉन बना चुके थे। इसके लिए बकायदा काफी खोजबीन कर एक सफेद घोड़ा मुंहमांगी कीमत पर खरीदा गया था जिसका हुलिया पूरा का पूरा गुरुगोविंद सिंह जी के घोड़े से मेल खाता था, एक बाज को बकायदा आश्रम में रखकर महीनों प्रशिक्षण दिया गया था कि उसे किस भांति इस गुरु घंटाल बाबा के कंधों पर सुशोभित होना है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी के परिधान के नकल पर गुरु घंटाल ने ठीक उसके नकल पर वैसी ही ड्रेस बनवा ली थी, जिसे पहन कर उसने बकायदा फोटो-शूट कराए और मीडिया में इसकी तस्वीरें भी लीक की गई, जिससे देशभर में खासा बवाल मचा। गुरु घंटाल बाबा की अमृतसर यात्रा को अंतिम रूप दिया जा चुका था कि ऐन वक्त बाबा को पुलिस के एक आला अफसर से सूचना मिली की इस यात्रा में उनकी जान को खतरा है, उन पर आक्रमण हो सकता है, यह सुनते ही बाबा गुरु घंटाल ने अपना इरादा बदल लिया।

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अकालियों का दबाव काम आया

Posted on 03 September 2017 by admin

15 वर्ष पूर्व जब 2003 में पीडि़त साध्वियों का गुमनाम पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को प्राप्त हुआ था उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग की सरकार थी, इस गठबंधन सरकार के अकाली भी पार्टनर थे। जैसे ही इस पत्र की भनक अकालियों को लगी उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी पर यह दबाव बना दिया कि वे इस पूरे मामले को सीबीआई के सुपुर्द करें। क्योंकि अकालियों और डेरे में छत्तीस का आंकड़ा था। कहते हैं कि अकालियों के दबाव में ही वाजपेयी ने फौरन यह मामला सीबीआई को निश्पक्ष जांच के लिए सौंप दिया और तमाम उतार-चढ़ाव के बाद यह जांच एक निर्णायक मुकाम तक पहुंच पाई।

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डिजिटल होता कमल

Posted on 03 September 2017 by admin

मोदी और शाह की जोड़ी अपने माइक्रो मैनेजमेंट के लिए ख्यात है। सो इस दफे जब मानसून सत्र की समाप्ति के बाद मोदी और शाह ने भाजपा सांसदों की क्लास ली तो मोदी का अपने सांसदों से इस बात पर खास जोर था कि सांसदगण अपने काम-काज का प्रचार सोशल मीडिया पर जरूर करें। मोदी का कहना था कि सांसदों का यह कर्तव्य है कि वे केंद्र सरकार की जन कल्याणकारी नीतियों को सीधे जनता तक पहुंचाए और इसके लिए जरूरी है कि वे अपने मोबाइल में ’माई गॉव डॉट इन’ या ’मोदी ऐप्प’ को डाउनलोड करें और इसके सटीक इस्तेमाल से वे केंद्र सरकार और जनता के बीच एक सेतु का काम कर सकते हैं। सनद रहे कि मोदी ऐप्प में एक स्पेशल फीचर माई नेटवर्क है। मूलतः यह एपल कंपनी के सीईओ टिम कुक का आइडिया था जिन्होंने अपनी भारत यात्रा के दौरान यह खास तोहफा पीएम मोदी को दिया था, यह ऐप्प आइओएस व एंडरॉयड दोनों ही प्लेटफॉर्म पर बखूबी काम करता है। माई नेटवर्क मोदी का अपना निजी ब्रह्मांड है जहां वे ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़कर उनसे सीधा संवाद स्थापित कर सकते हैं। मोदी ने अपने चाहने वालों का अलग-अलग ग्रुप बनाया हुआ है, ग्रुप के मेंबर प्राइवेट रूप से मोदी से चैट कर सकते हैं और ट्विटर की तरह यहां कोई शब्द सीमा भी नहीं है। यहां पर यूजर या फॉलोअर के लिए रिवार्ड अंकों का भी प्रावधान है। सबसे ज्यादा 5 हजार या उससे ज्यादा रिवार्ड प्वाइंटस बटोरने वाले को ’सुपर फैन’ का तमगा मिलता है और इनके लिए ’ऑरेंज टिक’ का प्रावधान है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भी सुपर फैन का यह तमगा हासिल है। 2000 तक प्वाइंट हासिल करने वाले मोदी फैन को ’आई नो इट ऑल’ का बैज मिलता है तो 1000 अंक बटोरने वाले फैन को ’द एक्स प्लोरर’ के बैज से संतोष करना पड़ता है।

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