Posted on 29 December 2017 by admin
ममतादीदी के खास विश्वासपात्र और तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन जिनकी ख्याति एक क्विज मास्टर के तौर पर ज्यादा है, पिछले दिनों उन्होंने संसद कवर करने वाले पत्रकारों से एक क्विज पूछा-’ क्या आप बता सकते हैं कि राज्यसभा की अग्रिम पंक्ति में लगी यह नेम प्लेट’ ए अनिल चंद्रा’ पर आप किस नए सदस्य को बैठा देखेंगे।’ सभी पत्रकार सोच में पड़ गए, कहीं से जब कोई जवाब नहीं मिला तो डेरेक का उत्तर सामने आया-अमित अनिल चंद्रा शाह यानी अमित शाह!’(एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 19 December 2017 by admin
राज्यसभा टीवी, उप राष्ट्रपति सेक्रेटिएट और प्रसार भारती के सीईओ के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पति के पास राज्यसभा टीवी के एडिटर इन चीफ का भी जिम्मा है। गैर आईएएस शशि शेखर दूरदर्शन और आरएस टीवी का पूरा चेहरा-मोहरा बदलना चाहते हैं, पर उप राष्ट्रपति सचिवालय शशि शेखर के इस रवैये से किंचित नाखुश नजर आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि दरअसल वेंकैया नायडू अपने अधीनस्थ आने वाले राज्यसभा टीवी के एडिटर इन चीफ के पद पर अपने खासम खास रहे रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर डॉ. आईवी सुब्बा राव को बिठाना चाहते हैं, वे वर्तमान में उप राष्ट्रपति के सचिव भी हैं। वहीं इस पूरे मामले में नया पेंचोखम पीएमओ ने डाल दिया है, सूत्रों की मानें तो स्वयं पीएमओ अब आरएस टीवी पर अब अपना पूरा नियंत्रण चाहता है। इसी आपसी खींचातानी में आरएस टीवी गुजरात चुनाव को कवर करने के लिए अपनी टीम वहां नहीं भेज पाया, जबकि पहले यह तय हुआ था कि आरएस टीवी की कम से कम तीन से चार कैमरा टीम गुजरात चुनाव को कवर करेंगी और मैदाने जंग से सीधी रिपोर्ट भेजेंगी। पर शशि शेखर बनाम डॉ. राव की लड़ाई में यह हो न सका और अब यह आलम है कि दो बिल्लियों की लड़ाई में पीएमओ एक जज की भूमिका में अवतरित हो गया है और शिकार पर उसकी उतनी ही नज़र है।
Posted on 19 December 2017 by admin
कांग्रेस के नव नवेले अध्यक्ष राहुल गांधी गुजराती द्वय मोदी-शाह से चाहे जितनी रार ठान लें पर एक बात तो तय है कि गुजराती व्यंजनों ने युवा राहुल को अपना दीवाना बना दिया है। पूरे गुजरात चुनाव प्रचार के दौरान राहुल ने घूम-घूमकर गुजराती व्यंजनों का लुत्फ उठाया, जब वे आणंद के तारापुर में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे तो उन्होंने वहां की फेमस भाजी पाव का मजा लिया वह भी सड़क किनारे नुक्कड़ की एक दुकान पर। जब अहमदाबाद में उन्होंने अपने तीन महीने के गुजरात चुनाव प्रचार का समापन किया तो उस प्रेस कांफ्रेंस में खास तौर पर शहर के मशहूर खान पान की दुकान स्वाति स्नैक्स से लंच के प्रबंधन को कहा गया। गुजराती पत्रकारों से बात करते हुए राहुल ने स्वयं स्वीकार किया कि पूरे कच्छ के चुनावी दौरे में उनका पसंदीदा व्यंजन खाकड़ा, अचार और मूंगफली रहा, जो उनके साथ-साथ ट्रैवल करता रहा। सबको मालूम है कि राहुल और उनकी मां सोनिया को मीठे का बहुत शौक है, चुनांचे जब अहमदाबाद की एक फेमस मिठाई की दुकान में राहुल वहां के मशहूर श्रीखंड का स्वाद चख रहे थे तब उन्होंने अपनी मां और बहिन के लिए भी श्रीखंड के डिब्बे पैक करवाए। लिहाजा गुजरात चुनाव के नतीजे चाहे कितने भी तीखे रहें राहुल के मुंह के जायके में गुजराती व्यंजनों के स्वाद जैसे अब भी घुले हुए हैं।
Posted on 19 December 2017 by admin
राजनैतिक निर्वासन की पीड़ा झेल रही बसपा सुप्रीमो मायावती को यूपी के हालिया निकाय चुनावों के नतीजों से एक नई संजीवनी मिली है। पिछले दिनों बहिन जी ने लखनऊ में अपने घर पर पार्टी के क्षेत्रीय कॉर्डिनेटरों की एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में इतने दिनों बाद बहिनजी प्रसन्नचित दिख रही थीं। बहिनजी ने सबसे पहले दिल खोलकर अपने कॉआर्डिनेटर्स की तारीफों के पुल बांधे और इसके बाद उनसे भविष्य की रणनीति यानी 2019 के लोकसभा चुनावों की बाबत सुझाव मांगे गए। ऐसे आम सहमति से एक सुझाव उभर कर सामने आया कि पार्टी ने जहां-जहां मुस्लिम प्यार के राग को हवा दी वहां उसको मुंह की खानी पड़ी है, सो बहिनजी ने तय किया है कि अब क्या खाक मुसलमां होंगे, सो मुस्लिम उम्मीदवार थोकभाव में सिर्फ पश्चिमी यूपी में उतारे जाएंगे। बुंदेलखंड, सेंट्रल यूपी और पूर्वांचल में एकबारगी पुनः अगड़ी जातियों को बसपा के साथ लाने का उपक्रम साधा जाएगा। सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में मायावती ने साफ कर दिया कि 2019 के आम चुनाव में बसपा किसी महागठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगी, इसके बजाए वह अकेले अपने दम पर यूपी के सभी लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, हालांकि बहिनजी ने अपने पार्टी नेताओं के समक्ष स्वीकार किया कि बसपा को इस महागठबंधन का हिस्सा बनाने के लिए अखिलेश उनसे कई-कई दफे बात कर चुके हैं, पर उन्होंने अपनी ओर से इस गठबंधन में शामिल होने का कोई वायदा नहीं किया है। बहिनजी ने एक ओर पते की बात बताई कि जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का भाजपा में दम घुट रहा है, बसपा के दरवाजे उनके लिए खुले हुए हैं।
Posted on 19 December 2017 by admin
गुजरात विधानसभा चुनाव में भगवा सिरमौर मोदी-शाह द्वय को कई नए सबक सीखने को मिले हैं। मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में महसूस किया कि राज्य के युवा किसी न किसी प्रकार भाजपा से नाराज़ हैं, चूंकि राहुल, हार्दिक, अल्पेश व जिग्नेश की चुनावी सभाओं में युवाओं की अभूतपूर्व भागीदारी थी। सो, चुनावी सियासत के माहिर बाजीगर मोदी 2019 के आम चुनावों में ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। चुनांचे देश के युवाओं खासकर बेरोजगार युवाओं को लुभाने के लिए मोदी सरकार कई नई योजनाओं को परवान चढ़ा सकती है। चुनांचे अगले बजट में नेशनल एम्प्लांयमेंट पॉलिसी (एनईपी) को लेकर बड़ी घोषणाएं मुमकिन हैं। सनद रहे कि राष्ट्रीय रोजगार नीति युवाओं के लिए नौकरियों की चिंता करता है। इसके तहत संगठित व असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के आर्थिक व सामाजिक बेहतरी के लिए नई लेबर पॉलिसी को भी सामने लाया जा सकता है। नए रोजगार सृजन के लिए लघु व मध्यम उद्योगों को कई प्रकार की रियायतें दी जा सकती हैं, वित्तीय संस्थानों से उनको कर्ज मिलने का मार्ग भी पहले से सुगम किया जा सकता है। जैसा कि नीति आयोग ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में चिंता जताई है कि भारत में 15-30 साल आयु वर्ग के 30 फीसदी से ज्यादा युवाओं को सही व सटीक ट्रेनिंग व शिक्षा का अभाव है। जो उन्हें कम वेतन की नौकरी के लिए बाध्य कर रहा है। इस मामले में चीन जैसे देश भी हमसे कहीं आगे है। सो, अगला बजट न सिर्फ चुनावी होगा, बल्कि युवा हितों की चिंता भी उसमें से झलकने वाली है।
Posted on 19 December 2017 by admin
मोदी-शाह द्वय को हर वक्त इलेक्शन मोड में रहना पसंद है। जैसे दिल की मद्दिम मद्दिम हलचल में दो रूहें तैर रही हों, जैसे अपने विकराल पंखों से सियासी आकाश की गहराईयों को तौल रही हो। गुजरात चुनाव की टंकार बस अभी होकर गुजरी है और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने खास मंत्रियों की टीम को कर्नाटक की यात्रा पर रवाना होने के लिए कह दिया है। सूत्र बताते हैं कि संसद के मौजूदा सत्र की समाप्ति के बाद मोदी-शाह के दुलारे मंत्रियों के दिल्ली में दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे, ये सप्ताह में कम से कम पांच दिन कर्नाटक में गुजारेंगे। पीयूष गोयल व निर्मला सीतारमण जैसे मंत्रियों ने अपने अधिकारियों की बैठक में इस बात के साफ संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में वे अपने संबंधित मंत्रालयों को बेहद कम समय दे पाएंगे। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 15 December 2017 by admin
गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल अपने पुत्र संजय को घाटलोडि़या विधानसभा सीट से टिकट दिलवाना चाहती थीं, इस बाबत उन्होंने टिकट वितरण के दौरान कई-कई दफे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से संपर्क साधना चाहा, पर कहते हैं तब शाह लाइन पर नहीं आए। वहीं कहीं इस विधानसभा सीट से भाजपा ने आनंदी बेन एक चिरंतन विरोधी को मैदान में उतार दिया। सूत्रों की मानें तो इस बात से नाराज़ होकर आनंदी बेन ने पटेल समुदाय के 9 विधायकों को अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया, कहते हैं राज्य के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल भी इसमें शामिल हुए। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में यह तय हुआ कि जिस भी सीट से कोई भी पटेल उम्मीदवार लड़ रहा है, पार्टी लाइन से इतर पटेल समाज उनका वहां साथ देगा। एक पटेल विधायक ने बैठक में यह मुद्दा भी उठाया कि भाजपा राज में पटेलों की अनदेखी हो रही है। सारे मलाईदार पोस्ट तो जैनियों के पास है। इस कड़ी में शाह और रूपाणी के नाम गिनाए गए। इस भोजन में शामिल रहे एक पटेल भाजपा विधायक ने सारी रिपोर्ट अमित शाह तक पहुंचा दी। सूत्रों की मानें तो पलक झपकते उसी रात शाह आनंदी बेन के घर जा पहुंचे, उन्हें मनाया गया, शाह ने अपने अंदाज में उनसे मनुहार की और कहा कि ’आपने अपने बेटे-बेटी के लिए कभी टिकट नहीं मांगा था, अपने जो लिस्ट सौंपी थी उसमें से 8 लोगों को पार्टी ने टिकट दे ही दिया।’ आनंदी बेन को मना लिया गया, पर पटेल समाज अब भी मानने को तैयार नहीं दिखता।
Posted on 15 December 2017 by admin
विरोधियों की गालियों को बोलियों में बुनने का हुनर कोई मोदी से सीखे, मणि शंकर अय्यर के बड़बोलेपन को जिस तरह उन्होंने चुनावी हथियार बना लिए उससे वाकई कांग्रेस की पेशानियों पर बल पड़ गए हैं। कभी मोदी की तुलना दाउद इब्राहिम से करने वाले एक और फायरब्रांड कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी के सियासी रंग में भगवा निखार आने लगा है। अतीत में कभी पानी पी-पी कर मोदी को कोसने वाले तिवारी सूत्रों की मानें तो पिछले दिनों विवेकानंद फाऊंडेशन के सौजन्य से अपनी इजराइल यात्रा पर थे, और ये सबको मालूम है कि विवेकानंद फाऊंडेशन के भीष्म पितामह अजीत डोवल प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी व्यक्तियों में शुमार होते हैं। तो क्या मनीष का मन भगवा रंगों में रंगने लगा है?
Posted on 15 December 2017 by admin
एक वक्त था जब मोदी सरकार में संघ से जुड़े लोगों के हर कार्य आसानी से हो जाया करते थे, पर अब वक्त बदल गया है। अब प्रधानमंत्री का सारा ध्यान अपनी शासन की पारदर्शिता को लेकर है। शायद यही वजह है कि संघ का शीर्ष नेतृत्व भी अब महज भाजपा को नीतिगत मामलों में ही सलाहें दे रहा है। पिछले दिनों जब एक प्रमुख संघी व्यापारी के यहां आयकर का छापा डालने विभाग की टीम पहुंची तो कहते हैं कि तत्कालीन वित्त राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस छापे को रूकवा दिया। सूत्र बताते हैं कि जब यह खबर पीएमओ को लगी तो स्वयं प्रधानमंत्री ने मेघवाल को तलब कर उनकी जबर्दस्त क्लास ली और कहा-उनके शासनकाल में कानून सबके साथ बराबर का व्यवहार रखेगा। और इसके कुछ दिनों बाद मेघवाल को वित्त मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
Posted on 15 December 2017 by admin
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के हालिया संपन्न चुनाव में बादशाह सेन व जतिन गांधी समर्थित पैनल को मुंह की खानी पड़ी और जीत का सेहरा गौतम लाहिरी पैनल के सिर बंधा। अब इस हार-जीत को नए सिरे से पारिभाषित करने के लिए एक दिलचस्प किस्सा उभर कर सामने आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि प्रेस क्लब चुनाव के एक रोज पहले तकरीबन डेढ़ सौ अहम पत्रकारों को एक संघ विचारक का फोन गया और उन्होंने पत्रकारों से बादशाह सेन पैनल को विजयी बनाने की अपील की। जाहिर है इस अपील का उलटा असर हुआ और स्वतंत्र विचार रखने वाले कई पत्रकारों ने अपने वोट बादशाह सेन पैनल को नहीं दिए। जब यह खबर बादशाह सेन पैनल वालों को लगी तो उन्होंने उस नामी संघ विचारक को फोन लगाकर पूछा कि आखिर वे क्यों पत्रकार मित्रों को ऐसा फोन कर रहे हैं, जबकि संघ की विचारधारा से इस पैनल का कोई लेना देना नहीं। दूसरी ओर से जवाब मिला कि वे चाहते हैं सेन पैनल विजयी हो और इसके लिए वे इस पैनल को बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं। सेन पैनल को अब अपने हार की वजह का पता चल चुका है क्योंकि जो पैनल जीता है संघ के प्रति किंचित उनके रुख में नरमी जरूर है।