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सिसौदिया का शिक्षा सुधार

Posted on 12 July 2020 by admin

दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में पहले भी कई अभिनव प्रयोग किए हैं, और शिक्षा में सुधारों को लेकर उनके प्रयासों को काफी वाहवाही भी मिल चुकी है। लॉकडाउन के इस दौर में जब सभी स्कूल-कॉलेज बंद हैं और तमाम पब्लिक स्कूल ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से इसकी भरपाई में जुटे हैं तो सिसौदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के माध्यम से कोई 10 लाख से ज्यादा फोन कॉल्स इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को करवाए, इस कोरोना काल में उनका कुशलक्षेम पूछा, साथ ही यह भी पता लगाया कि व्हाट्स ऐप्प के माध्यम से कितने बच्चों तक शैक्षिक सामग्री ससमय पहुंच रही है। तो उन्हें पता चला कि सिर्फ 75 फीसदी ही ऐसे बच्चे हैं,जो इस व्हाट्स ऐप्प सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं, जिन्हें टीचर दैनंदिन आधार पर वर्कशीट उनके ‘व्हाट्स ऐप्प’ पर शेयर कर रहे हैं। जिन बच्चों या उनके अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है, शिक्षकों से कहा गया है कि वे इस वर्कशीट का प्रिंटआउट ऐसे बच्चों के साथ शेयर करें। वर्कशीट को लेने के लिए बच्चों के अभिभावकों के लिए रोल नंबर के हिसाब से उनके लिए अलग-अलग दिन मुकर्रर कर दिए गए हैं। ’जल रहा हूं तेरी ख़ातिर मुझे डर क्या होगा/इस दीये पर किसी मौसम का असर क्या होगा।’

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पीएम का लेह जाना काम आया

Posted on 12 July 2020 by admin

इस दफे कॉलम का आगाज़ मुनव्वर राना के एक नश्तर से चुभते शे’र से- ‘सोचता हूं गिरा दूं सभी रिश्तों के खंडहर / इन मकानों से किराया भी नहीं आता
उसकी फैयाज़ी का अंदाज़ा लगा तो इससे / उसके दरवाजे पे कुत्ता भी नहीं आता।’ एक ऐसे वक्त जब सबको धौंस दिखाने वाला चीन अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ता जा रहा है और भारत के लिए पश्चिमी देशों का सपोर्ट मुखर होने लगा है, प्रधानमंत्री मोदी ने भी चीन का नाम लिए बगैर उस पर चौतरफा हल्ला बोल दिया है। पिछले दो-ढाई महीने से विदेश मंत्रालय की चीन से लगातार बातचीत चल रही थी, पर यह बेनतीजा रही। गलवान में हमें लगातार चीन का
हिंसक रूख देखने को मिला। तब भारत की ओर से पहला स्ट्राइक हुआ, जिसमें चीनी कंपनियों के भारत में सरकारी ठेके बंद कर दिए गए, जिससे चीन को थोड़ा बहुत ही सही, एक आर्थिक सुस्ती की ओर धकेला जा सके। भारत ने रूस और फ्रांस से हथियार खरीदे, फ्रांस की उसके बाद समर्थन में चिट्ठी आ गई और चीन के स्वाभाविक मित्रों में शुमार होने वाले रूस के रूख में भी बदलाव दिखने लगा। इस बीच हमारा विदेश मंत्रालय अन्य राष्ट्र प्रमुखों से भी संपर्क साधता रहा जिसमें उसे बहुत हद तक कामयाबी भी मिली। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात कि भारत ने पहली बार हांगकांग के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में सपोर्ट किया, नहीं तो अब से पहले तक भारत ने चीन के प्रति अपना गुडविल रवैया दिखाने की चाह में न तो तिब्बत के लिए कभी आवाज उठाई और न ही चीन में सज़ा के पात्र बन गए उइगर मुसलमानों के लिए ही संवेदना के दो बोल बोले। इसके बाद 59 चीनी ऐप्प को भारत में प्रतिबंधित कर चीन की बोलती बंद कर दी, जब लद्दाख बार्डर से पीएम ने चीन का नाम लिए बगैर उसे ललकारा तो चीन को बोलना पड़ गया कि ’हमने अपने 14 पड़ोसी देशों में से 12 से अपने सीमा विवाद शांति से सुलझा लिए हैं।’ इस बयान को भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा सकता है।

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मंदिर निर्माण की तिथि आगे खिसकी

Posted on 01 July 2020 by admin

विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तारीख फिर से आगे खिसका दी है। राम मंदिर के लिए जो भूमि पूजन होना था उसे 2 जुलाई तक के लिए टाल दिया गया है, तर्क दिया जा रहा है कि लद्दाख की गलवान घाटी में शहीद हो गए 23 भारतीय सैनिकों की शहादत के नमन के लिए ऐसा किया जा रहा है, पर सूत्र बताते हैं कि विश्व हिंदू परिषद और मोदी सरकार के बीच चल रही कुछ पुरानी खटपट की वजह से ऐसा हुआ है, यह तारीख और भी आगे खिसकाई जा सकती है।

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फैक्ट चेकर या फेक टेकर?

Posted on 01 July 2020 by admin

पीआईबी ने जब से अपना ’फैक्ट चेक’ मैकनिज्म शुरू किया है, कई सही खबरों को भी फेक करार दिया है। जैसे कि एक खबर आई कि यूपी के स्पेशल टास्क फोर्स के जवानों से कहा गया है कि वे तत्काल प्रभाव से अपने मोबाइल से चीनी ऐप्प डिलीट कर दें और अपने परिवार के सदस्यों से भी ऐसा करने को कहें। इसके लिए उन्हें 52 चीनी ऐप्प की एक सूची भी प्रदान की गई थी, यह मामला तब का है जब लद्दाख की गलवान घाटी में भारत व चीन की फौजों के दरम्यान तनाव बढ़ना शुरू ही हुआ था। पीआईबी के फैक्ट चेकर ने फौरन इस खबर को फेक करार दिया और कहा कि एसटीएफ ने ऐसी कोई ‘एडवाइजरी’ जारी नहीं की है। इसके बाद कई न्यूज चैनल ने ट्वीट कर इस ‘एडवाइजरी’ की कॉपी लोगों के सामने रख दी। कई स्ट्रिंगर ने भी अपने-अपने ट्विटर हैंडिल से यूपी एसटीएफ की इस ‘एडवाइजरी’ की कॉपी ट्वीट कर दी।

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गलती हमारी भी है

Posted on 01 July 2020 by admin

कांग्रेसी नेता राहुल गांधी ने जब मोदी सरकार से सवाल पूछा कि हमारे सैनिकों के पास हथियार क्यों नहीं थे तो विदेश मंत्री एस जयशंकर की ओर से फौरन इसका जवाब आया ’पेट्रोलिंग के वक्त हमारे सैनिकों के पास हथियार नहीं होंगे यह एक संधि के अनुसार है।’ जबकि सेना से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ऐसा उस वक्त से चलन में है जब 1993, 1996 और 2005 में चीन के साथ हमारी संधि हुई थी कि ’गश्त के दौरान हमारे सैनिक हथियार लेकर नहीं जाएंगे, नहीं तो कहीं कोई गलती हो गई तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारी फजीहत हो सकती है।’ सूत्र बताते हैं कि चीफ और डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत ने सेना प्रमुख को इस बात पर आगाह किया था। जनरल विपिन रावत तब आर्मी चीफ थे तो उनके कई फैसलों को लेकर तब भी अंगुलियां उठी थीं-’वन रैंक, वन पेंशन’ के मामले को भी इससे जोड़ कर देखा जाता है। सेना सूत्रों के मुताबिक खुफिया जानकारियां को भी कई बार जाने-अनजाने सेना के बड़े अधिकारी नज़रअंदाज कर देते हैं। जैसा कि पिछले वर्ष 2019 में 600 बार चीनी घुसपैठ की खबरें आयीं, पर सेना के बड़े अधिकारियों ने इस पर कान नहीं धरे।

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क्या डोवल से भी चूक हुई?

Posted on 01 July 2020 by admin

बशीर बद्र का एक शेर है-’अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया/जिसको गले लगा लिया वो दूर हो गया।’ पिछले लंबे समय से भारत और चीन के दरम्यान एनएसए (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) लेवल की वार्ता चल रही थी। 4 मई को जब चीनी सेना के लद्दाख क्षेत्र में फिर से घुसपैठ की खबर आई तो हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल ने अपने चीनी काऊंटर पार्ट को फोन किया और चीनी घुसपैठ की बाबत उनका स्पष्टीकरण मांगा। इस पर उनके चीनी काऊंटर पार्ट ने उन्हें यह कहते हुए घुमा दिया कि ‘यह इतनी बड़ी कोई बात नहीं है, सीमा पर छोटी-मोटी टेंशन तो चलती रहती हैं’, कहते हैं डोवल ने अपने भोलेपन में चीन की बातों का यकीन कर लिया।

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लद्दाख के अपने सांसद का मुंह बंद कराया

Posted on 20 June 2020 by admin

लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों की सक्रियता को लेकर जब भारत और चीन के दरम्यान तनाव बना हुआ था तो ऐसे में पहली बार लद्दाख से चुन कर आए भाजपा सांसद जाम्यांग झेरिंग नामग्याल कहां पीछे रहने वाले थे। रविवार को वे अपना ताम-झाम उठा कर एलएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के पास पहुंच गए और दूरबीन से विवादित स्थल का मुआयना करने गए, फिर एक बयान दे दिया कि हमारी एक इंच जमीन भी चीन के कब्जे में नहीं है। इसके बाद वे एक टीवी शो की डिबेट में चले गए और उस बहस में स्वीकार कर लिया कि भारत की जमीन चीन के कब्जे में है। इस पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें आड़े हाथों लिया, सूत्रों की मानें तो उनसे फोन कर पूछा गया कि वे किसकी इजाज़त से एलएसी पर चले गए और बिना तैयारी टीवी डिबेट में क्यों हिस्सा लिया? इस पर सांसद महोदय का जवाब था कि ’मैं लद्दाख का एमपी हूं मेरा भी कोई रोल होना चाहिए।’ इस पर पार्टी ने इन्हें समझाया कि मीडिया में पार्टी की बात रखने के लिए प्रवक्ता हैं, आप सीधे ऐसे डिबेट में पार्टी या सरकार का दृष्टिकोण सामने न रखें। कहते हैं अब भाजपा में नामग्याल का ग्राफ नीचे आ गया है। सनद रहे कि जब 2018 में लद्दाख के मौजूदा सांसद थुपस्टन चेवांग ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए सांसद पद से इस्तीफा दे दिया तो 2019 के चुनाव में आनन-फानन में नामग्याल को भाजपा ने टिकट दे दिया जो कि सांसद चेवांग के संसदीय क्षेत्र का सारा काम संभालते थे, और युवा नेता नामग्याल भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत भी गए।

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प्रियंका की सियासत का नया अंदाज

Posted on 20 June 2020 by admin

प्रवासी मजदूरों की घर वापसी में हुए बसों के विवाद के चलते यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू पिछले 19 दिनों से जेल में बंद हैं, योगी जी की कृपा से। इस बात को लेकर यूपी कांग्रेस में खासी छटपटाहट है, सो यूपी के कई बड़े कांग्रेसी नेताओं ने वीडियो कॉल के माध्यम से कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी से बात की और उनसे आग्रह किया कि लल्लू जी को जेल से छुड़ाने के लिए हमें सड़कों पर उतरना चाहिए, कोई बड़ा आंदोलन करना चाहिए। प्रियंका ने इन नेताओं को समझाया कि इस कोरोना काल में सड़कों पर उतरना ठीक नहीं रहेगा, बल्कि हम प्रदेश में गरीबों के लिए मुफ्त खाने का पैकेट वितरित करें और जो भी व्यक्ति पैकेट लेने आए उसे पैकेट देते हुए बताया जाए कि हमारे अजय भैया जेल में बंद हैं, सिर्फ इस वजह से कि हमने गरीब मजदूरों को उनके घरों तक उन्हें सुरक्षित पहुंचाना चाहा, अब प्रदेश के कांग्रेसी नेता गण समझ नहीं पा रहे कि सियासत का यह कौन सा नया दस्तूर है, या दोनों में वाकई ‘लल्लू’ कौन है?

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क्या 26 जून को मंत्री बनेंगे सिंधिया?

Posted on 20 June 2020 by admin

खबर आ रही है कि राज्यसभा चुनाव के आसन्न संकट को भांपते केंद्रनीत भाजपा ताजा-ताजा उनके पाले में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को एकबारगी फिर से महत्व देने लगी है, वैसे भी मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर उप चुनाव होने हैं, जहां से सिंधिया वफादारों ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था। विशेष सूत्र बताते हैं कि इस 26 जून को सिंधिया और सुरेश प्रभु को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। वहीं सिंधिया को इतना ज्यादा महत्व दिए जाने से भाजपा के अंदर गुटबाजी तेज हो गई है। नरेंद्र सिंह तोमर वफादारों का कहना है कि नाहक ही पार्टी के अंदर सिंधिया को इतना भाव दिया जा रहा है, अगर वे वास्तव में इतने बड़े नेता होते तो क्या प्रदेश में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से जिता नहीं लाते? इस गुट का दावा है कि आने वाले उप चुनाव में इस बात का फैसला हो जाएगा कि इस चुनाव में सिंधिया के दबदबे वाले चंबल क्षेत्र को छोड़ कर अन्य जगहों पर भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहता है? पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व सिंधिया को लेकर कोई बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहता क्योंकि शिवराज सरकार की भाग्य की डोर भी इस वक्त सिंधिया से बंधी हुई है।

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टाई वाले साहब डस्टिंग कर रहे हैं

Posted on 20 June 2020 by admin

कोरोना काल में बड़े साहबों का भी अंदाज बदल गया है। बड़े अधिकारी गण भी खुद कार ड्राईव कर मंत्रालय पहुंच रहे हैं, वे अपने साथ अपना खाना-पानी भी घर से पैक करा कर ला रहे हैं। खुद अपना सामान उठा अपने कमरे तक आते हैं, पहले कमरे की डस्टिंग करते हैं, फिर अपने हाथों से दरवाजों के हेंडिल, मेज, कुर्सियां, कंप्यूटर आदि को सेनिटाइज करते हैं। चाह कर भी वे अपने कमरे में चपरासी को तलब नहीं करते हैं। चाय की तलब हुई तो भी नहीं, साथ लाए थर्मस/फ्लास्क से अपने कप में चाय डाल लेते हैं। पर इस कोरोना काल में कुछ अधिकारी अब भी ऐसे हैं जिनकी अफसरी का भूत उनके सिर से उतरा नहीं है। ऐसे ही एक अधिकारी लेबर मिनिस्ट्री के एक संयुक्त सचिव हैं। हालांकि सरकार ने अब बॉयोमैट्रिक्स अटेंडेंस पर रोक लगा दी है, पर यह अधिकारी श्रमशक्ति भवन में अपने मातहतों के कमरे में अब तलक झांक कर देख रहे थे कि कितने लोग वक्त पर दफ्तर आ रहे हैं और अपना काम कर रहे हैं। पर बाद में पता चला कि इनके साथ-साथ मंत्रालय के 26 लोग संक्रमित हो गए हैं, अब तो इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि इन अधिकारी से कौन-कौन मिला था, ये कहां गए थे और इन्हें किन लोगों ने फाइलें पहुंचाई थी। समय का चक्र पलटते देर नहीं लगती।

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