Posted on 20 October 2020 by admin
हाथरस केस की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने यूपी सरकार से पूछा कि ’इस घटना के आलोक में अगर वहां के एसपी को निलंबित किया गया तो इतनी बड़ी घटना के बाद वहां के डीएम को क्यों बनाए रखा गया? जबकि पीड़िता के रातों-रात हुए अंतिम संस्कार के मामले में डीएम के रोल को संदिग्ध माना जा रहा है।’ इसके साथ ही इस बात की पड़ताल तेज हो गई कि आखिर योगी सरकार में वह कौन है जो डीएम को बचा रहा है? विशेष सूत्रों का दावा है कि इस मामले में योगी के एक मुंहलगे बड़े अफसर ने रात को ही डीएम को फोन कर मामले को रफा-दफा करने को कहा था। कहते हैं लखनऊ से फोन आने के बाद ही डीएम ने ऐसा ही कुछ आदेश एसपी को दिया था, और बेचारे एसपी बलि का बकरा बन गए।
Posted on 20 October 2020 by admin
बिहार में एनडीए गठबंधन की संभावनाओं को धार देने के लिए अब वहां प्रचार की बागडोर स्वयं पीएम मोदी संभाल रहे हैं। मोदी बिहार में 12 रैलियां करेंगे, जिसमें पहले चरण में 3 रैलियां प्रस्तावित है। इसके अलावा 4 लाख से ज्यादा स्मार्टफोन वॉरियर्स मोदी के भाषणों का राज्य भर में प्रचार करेंगे। बिहार चुनाव को भाजपा किंचित बहुत गंभीरता से ले रही है, शायद यही वजह है कि बिहार चुनाव की तारीखों के ऐलान के पांच दिन पहले से ही मोदी और नीतीश ने अपने वर्चुअल रैलियां के माध्यम से छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं शुरू कर दी थीं। पीएम ने कहीं पहले से ही बिहार चुनाव की आहटों के मर्म बूझ लिए थे तभी उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखते समय ‘जय श्रीराम’ की जगह ’जय सियाराम’ का उद्घोष किया था, माता सीता की बिहार के मिथिलांचल में घर-घर में मान्यता है, कहते हैं पीएम ने बिहारी जनमानस की इन्हीं भावनाओं को छूने का प्रयास किया था, इसके अलावा गलवान घाटी में शहीद हुए 20 में से 16 बिहार रेजीमेंट के बहादुरों की शहादत की दिल खोल कर तारीफ करना, दरभंगा में एम्स निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी देना, बिहार में कामेश्वर चैपाल के निर्माण
को हरी झंडी पीएम की इसी सोच का हिस्सा माना जा सकता है।
Posted on 20 October 2020 by admin
अगर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चिंताओं से रू-ब-रू हुआ जाए तो उनकी सरकार पर खतरों के बादल मंडरा रहे हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अभी कुछ रोज पहले हेमंत ने राहुल गांधी से बात कर राज्य के कांग्रेसी विधायकों से वन-टू-वन बात करने का आग्रह किया है, झारखंड के मुख्यमंत्री को डर है कि कांग्रेस के कुल जमा 15 विधायकों पर भाजपा डोरे डाल रही है, ताकि राज्य में ‘ऑपरेशन कमल’ की एक नई इबारत लिखी जा सके। राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के 28, कांग्रेस के 15, आरजेडी, एनसीपी और सीपीआईएल के 1-1 विधायकों से मिल कर बनी सरकार है, वहीं जवाब में भाजपा के 26, एजेएसयू के 2 और 2 निर्दलीय विधायक विरोध में अलख जगा रहे हैं। बेरमो से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र सिंह की कोविड से मौत के बाद उस सीट पर उप चुनाव हो रहा है, चूंकि हेमंत सोरेन ने राज्य की 2 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी, सो उन्होंने दुमका सीट छोड़ दी है, वहां भी उप चुनाव हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि सोरेन की चेतावनी के बाद आरपीएन सिंह और अहमद पटेल एक-एक कर के राज्य के कांग्रेसी विधायकों से बात कर उनकी चिंताओं को दूर करने के प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस जानती है कि सियासी जोड़-तोड़ के खेल में भगवा चाणक्य को परास्त करना उसके वष का नहीं। नहीं तो 2014 से 2019 के बीच जिन 18 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए वहां भाजपा सिर्फ 2 राज्यों यूपी और गुजरात में ही पूर्ण बहुमत के साथ पुनर्वापसी कर पाई, नहीं तो हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश व बिहार जैसे राज्यों में भाजपा दलबदल करवा कर ही वहां अपनी सरकार बनवा पाई है, यही प्रयास राजस्थान में हुआ जहां उसे सफलता नहीं मिली।
Posted on 20 October 2020 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 20 October 2020 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 06 October 2020 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 06 October 2020 by admin
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Posted on 06 October 2020 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 06 October 2020 by admin
Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.
Posted on 13 September 2020 by admin
’दास्तां जब भी तूफानों की लिखी जाएगी, ये जलते चिरागों की कतारों से बयां होगी’
यूं ही नहीं दहाड़ रहा है भगवा एंकर कि ‘उद्धव तेरे दिन गिनती के बचे हैं’, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले महाअघाड़ी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, और इस बार भी घर को आग लगेगी घर के चिराग से। पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ में पिछले सप्ताह एनसीपी नेता अजीत पवार एक अस्पताल का उद्घाटन करने गए थे, ज़रा सोचिए तो उनके साथ मंच शेयर कौन कर रहा था? महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस। यानी कि अजीत पवार का भाजपा प्रेम अब भी बचा हुआ है। बताया जाता है कि उन्हें अब भी एनसीपी के अंदर 15-16 विधायकों का समर्थन हासिल है। अजीत के बेटे पार्थ पवार अब खुल कर अपने दादा शरद पवार की सोच के खिलाफ अपनी भावनाओं के उद्गार व्यक्त कर रहे हैं, इसकी शुरूआत तब हो गई थी जब पार्थ ने बीजेपी लाइन का सपोर्ट करते हुए सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच की मांग कर दी थी। सूत्र बताते हैं कि अब महाराष्ट्र में पूरे खेल की कमान भाजपा के हाथों में आ गई है, दांव पर हैं शरद पवार। या तो अब वे राज्य में भाजपा को सरकार बनाने के लिए खुला समर्थन दें या फिर अपनी पार्टी में दोफाड़ के लिए तैयार रहें, दोनों ही सूरतों में गद्दी तो उद्धव की ही जाएगी।