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ब्रांड-मोदी का करिश्मा

Posted on 02 November 2014 by admin

क्या मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा की लोकप्रियता का फायदा भाजपा को बिहार चुनावों में मिलेगा? क्योंकि मोदी के अमरीका के ‘मेडीसन स्वॉयर’ में दिए गए भाषण का भाजपा ने हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में पूरा इस्तेमाल किया। क्योंकि महाराष्ट्र और हरियाणा में भगवा कैंपेन के एक मात्र ‘पोस्टर ब्यॉय’ मोदी ही रहे, चुनावी नारा बदल कर भले ही ‘अबकी बार मोदी सरकार’ की जगह ‘चलो चले मोदी के साथ’ हो गया हो, पर पार्टी ने मोदी के मेडिसन स्वॉयर के भाषण को दूर-सूदर गांवों तक पहुंचाने के लिए 20 हजार डिजिटल वैन्स का सहारा लिया, वैसे गांवों तक मोदी के भाषण को पहुंचाया गया, जहां अखबार भी नहीं पहुंच पाते हैं। अकेले महाराष्ट्र में 7 मराठी चैनलों पर मोदी के इस स्पीच को प्रसारित किया गया। डिजिटल वैन्स द्वारा स्पीच दिखाने पर पार्टी को 80 लाख से 1 करोड़ के बीच खर्च आया, तो वहीं हरियाणा और महाराष्ट्र में ब्रांड मोदी को चुनावी धार देने में भगवा पार्टी को तकरीबन 25 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े। यानी मोदी की प्रचार टीम का नजरिया बेहद साफ है कि विरोधी दलों के भ्रष्टाचार पर हमला और मोदी के गवनर्ेंस व ग्रोथ का महिमा मंडन, इसी सूत्र वाक्य के सहारे टीम मोदी बिहार चुनाव में भी उतरना चाहती है।

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अंबानी परिवार की तैयारियां

Posted on 02 November 2014 by admin

नीता अंबानी के नेतृत्व में पूरा अंबानी परिवार इस कार्यक्रम की तैयारियों में पिछले एक हफ्ते से जुटा था, वंदे मातरम से लेकर वेद पाठ तक की प्रैक्टि्स हो रही थी। प्रैक्टि्स को लेकर अंबानी परिवार में इतना जुनून देखा जा रहा था कि कभी-कभी सुबह के 5 बजे तक यह प्रैक्टि्स सेशन र्निबाध भाव से चलती रहती थी। नीता अंबानी स्वयं संस्कृत के एक श्लोक का पाठ कर रही थीं। सो, इसके उच्चारण में उनको पारंगत बनाने के लिए पंडितों का एक पूरा दल जुटा था। योग के प्रति मोदी के रूझान को देखते हुए रिलायंस फाउंडेशन के इस ‘एच एन हॉस्पिटल’ में योग को प्रमोट करने के लिए अलग से एक ‘योग सेंटर’ बनाया गया है। मुकेश और नीता दोनों ही योग व अध्यात्म में निजी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, लिहाज़ा इसे देखते हुए टेक्सॉस विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले एमडी एंडरसन ने योग क्लासेस के लिए नीता अंबानी को अपना विजिटिंग फेलो भी बनाया है।

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मोदी का वैश्विक इफेक्ट

Posted on 02 November 2014 by admin

मोदी के दिल्ली की गद्दी पर काबिज होते ही योग व अध्यात्म की वैश्विक स्तर पर पूछ बढ़ गई है। प्रतिष्ठित हावर्ड यूनिवर्सिटी ने योग पर शोध के लिए एक अलग विभाग का गठन कर दिया है। एक अनिवासी भारतीय डॉक्टर ऋषभ मिश्र को इस विभाग का प्रमुख बनाया गया है। युनाइटेड नेशंस अंतरर्राष्टीय योग दिवस को बड़े पैमाने पर प्रचारित-प्रसारित करने के लिए पहले ही कमर कस चुका है। इटली में आने वाले दिनों में आयुर्वेद पर एक बड़ी कांफ्रेंस होने जा रही है। दत्तात्रेय होसबोले के नेतृत्व में संघ के कई प्रमुख नेताओं की टीम पहले से यूरोप में हिंदुत्व का अलख जगा रही है। राम वैद्य जैसे संघ के नेता लंबे समय तक लंदन में काम करते रहे हैं। वर्जिन एटलांटिक के मालिक रिचर्ड ब्रैन्सन संघ की विचारधारा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बीफ (गोमांस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर डाली है। ब्रैन्सन कहीं न कहीं मोदी से भी बेतरह प्रभावित दिखते हैं, ब्रैन्सन का मानना है कि बीफ को बैन करना पर्यावरण की दृष्टि से भी अनुकूल रहेगा। क्योंकि यह इको-फे्रंडली नहीं है।

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दस जनपथ पर क्यों पसरा है सन्नाटा?

Posted on 26 October 2014 by admin

शनिवार की सुबह जहां नरेंद्र मोदी अपने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में 500 से भी ज्यादा पत्रकारों से मिलने-जुलने और बतियाने में मसरूफ थे, वहीं लूटियंस जोंस के एक और बंगले 10 जनपथ में एक असहज सा सन्नाटा पसरा हुआ था। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी की ‘बॉडी लैंग्वेज’ बता रही थी कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कांग्रेस में ‘प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओ’ के तमाम शोर के बीच सोनिया अपने अंतर्मन की सुनने की कोशिश में है और एक मंझी राजनेत्री की मानिंद नेपथ्य की दीवारों पर लिखी वह इबारत साफ पढ़ पा रही हैं कि आने वाले दिन प्रियंका खासकर उनके पति राबर्ट वाड्रा के लिए मुश्किलों भरे हो सकते हैं। संकेत मिल रहे हैं कि राबर्ट वाड्रा की लैंड डील को लेकर मुकदमा कभी भी दायर हो सकती है, दुश्चिंताओं की इन्हीं आहटों को पढ़ते हुए कथित तौर पर राबर्ट ने पूरा मन बना लिया था कि अब वे एनआरआई (नॉन रेजीडेंट इंडियन) होकर दुबई या लंदन में बस जाएंगे। पर सोनिया ने कड़ा रूख अपनाते हुए रॉबर्ट वाड्रा से ऐसा कोई कदम उठाने से मना किया है, क्योंकि एक बार एनआरआई घोषित होने पर तमाम सरकारी रिकार्ड में इसकी प्रतिध्वनि सुनाई देगी, जो कि भाजपा व मीडिया को जाने-अनजाने एक बड़ा हथियार सौंप देगा। फिलहाल रॉबर्ट ने अपनी सासु मां की इस राय को मान ली है, पर कुछ दिनों के लिए दुबई जरूर चले गए हैं।

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मोदी-शाह को क्यों प्यारे हैं खुल्बे?

Posted on 26 October 2014 by admin

पश्चिम बंगाल कैडर के 1983 बैच के अफसर भास्कर खुल्बे को पीएमओ में एडिशनल सेक्रेटरी बनाए जाने से कहीं न कहीं इस बात का ऐलान जान पड़ता है कि मोदी-शाह द्वय का अगला पड़ाव पश्चिम बंगाल है। खुल्बे जो मूलत: उत्तराखंड के रहने वाले हैं इनकी गिनती एक सक्षम, ईमानदार और डायनामिक अफसर में होती है, जिन्हें बंगाल की राजनीति का हर फलसफा बखूबी याद है। जब बुध्ददेव भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने खुल्बे को दिल्ली में अपना रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया था, साथ ही वे उद्योग मंत्रालय में एडवाइजर भी थे, जब बंगाल की बागडोर ममता के हाथों में आई तो जाने-अनजाने खुल्बे ममता के निशाने पर आ गए, अपने इंडस्ट्री मिनिस्टर अमित मित्रा के साथ धक्का-मुक्की को गंभीरता से लेते हुए दीदी ने खुल्बे को रेजिडेंट कमिश्नर पद से हटा दिया और उन्हें कोलकाता तलब कर लिया। ममता की नाराजगी को भांपते हुए खुल्बे अपनी पत्नी की बीमारी का बहाना बनाते हुए लंबे अवकाश पर चले गए और इन लोकसभा चुनावों से ऐन पहले वे केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) में ज्वाइंट सेक्रेटरी लग गए और बाद में उनके पीएमओ में आने का रास्ता खुल गया। दरअसल, मोदी और अमित शाह को अपने लिए ऐसे किसी अफसर की सख्त तलाश थी जो न सिर्फ बंगाल की राजनीति की नब्ज जानता हो, बल्कि वहां की चप्पे-चप्पे की जानकारी भी रखता हो। कहना न होगा कि खुल्बे को सारदा चिट फंड और कोल ब्लॉक घोटाले की पूरी जानकारी है। बंगाल के आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा इन्हीं जानकारियों को अभिव्यक्ति के सर्वोत्तम हथियार के मानिंद इस्तेमाल कर सकती है।

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गजब ढा रहे हैं गडकरी

Posted on 26 October 2014 by admin

महाराष्ट्र का अगला सीएम कौन हो? इसको लेकर भाजपा और संघ की राय अलग-अलग है। संघ प्रमुख मोहन भागवत जहां नितिन गडकरी को महाराष्ट्र का अगला सीएम बनाना चाहते हैं वहीं नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पसंद बनकर उभरे हैं देवेंद्र फड़नवीस। सरकार बनाने की तमाम कवायदों के बीच अमित शाह ने गडकरी से उध्दव ठाकरे से बात कर उन्हें समर्थन देने को राजी करने को कहा, अब चूंकि उध्दव से गडकरी के रिश्ते उतने अच्छे नहीं हैं, चुनांचे गडकरी ने राज ठाकरे से बात कर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा। इन दिनों राज व उध्दव में गहरी छन रही है। सूत्र बताते हैं कि फिर राज ने उध्दव से बात की, तब उध्दव का फोन गडकरी को गया और काम की बातें हुई। सनद रहे कि महाराष्ट्र भाजपा में एक गुट ऐसा भी है जो राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर जलगांव के भाजपा विधायक संदीप मुत्तेमवार का नाम आगे बढ़ा रहा है।

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राहुल की रिसर्च टीम 200 से 10 पर

Posted on 26 October 2014 by admin

क्या राहुल गांधी ने अतीत की गलतियों से सबक लेना शुरू कर दिया है और बदली राजनैतिक परिस्थितियों में अपने नए सलाहकार की खोज में जुट गए हैं, जो उनके लिए और उनकी सवा सौ साल पुरानी पार्टी के लिए नई रणनीतियां बुन सकें। राहुल के हालिया फैसलों में उनके इस नए संकल्प की छाप दिखाई पड़ रही है, मसलन उनकी रिसर्च टीम का आकार अब बेहद छोटा हो गया है, पहले जहां इसमें 200 से ज्यादा लोग काम करते थे, अब ताजा छंटनी अभियान के बाद रिसर्च टीम के सदस्यों की संख्या घटकर अब महज 10 रह गई है। सनद रहे कि राहुल की इस रिसर्च टीम के लोगों को मोटी पगारों पर रखा गया था। राहुल पर लगातार यह दबाव बन रहा है कि वे ‘फुस्स’ साबित हुए अपने राजनैतिक सलाहकारों मसलन मधुसूदन मिस्त्री, मोहन प्रकाश जैसे लोगों से तौबा करें और अपने लिए सलाहकारों की एक नई टीम बनाएं।

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कनिष्क की गद्दी सलामत!

Posted on 26 October 2014 by admin

कांग्रेस के लगातार गिरते ग्राफ ने वैसे कांग्रेसी नेताओं के मुंह में भी जुबान मयस्सर करा दी है जो अब तक गांधी परिवार की कृपा पर ही राजनीति में बने रहे हैं, मसलन पी.चिदंबरम जो अब टीवी इंटरव्यू में भी कहने लगे हैं कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष गैर गांधी परिवार का भी हो सकता है। जो कांग्रेसी नेता पहले सोनिया गांधी तक पहुंच नहीं पा रहे थे, अब सोनिया के समक्ष खुलकर दिल की बात रख रहे हैं। ज्यादातर नेतागण राहुल गांधी के आंख-नांक-कान माने जाने वाले कनिष्क सिंह की शिकायत करते दिखे। अपने खिलाफ नाराजगी का ऐसा माहौल बनता देख चतुर सुजान कनिष्क ने अब राहुल के बाद प्रियंका की भी ठौर पकड़ ली है और अब तो आधिकारिक तौर पर प्रियंका का काम देखने लगे हैं, सो राहुल रहें या प्रियंका आए कनिष्क की गद्दी तो सलामत है।

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भाजपा की 10 सीटें कम

Posted on 26 October 2014 by admin

हरियाणा में भाजपा के विधायकों की संख्या में कम से कम 10 का इजाफा हो सकता था, सिर्फ और सिर्फ अगर अपनों ने अपनों के साथ दगा न किया होता। भाजपा में जयचंदों की एक लंबी फेहरिस्त रही, मसलन सोनीपत में अपने भाई को टिकट नहीं मिलने से नाराज रमेश कौशिक खेमे ने कथित तौर पर भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया, सूत्र बताते हैं कि फरीदाबाद के तिगांव विधानसभा सीट से अपने बेटे का टिकट कट जाने से नाराज कृष्णपाल गुर्जर ने फरीदाबाद संसदीय सीट पर गुर्जरों का वोट भाजपा की ओर नहीं जाने दिया। ऐसी ही कुछ शिकायत जींद से भी आई है। क्या अमित शाह इन बातों को गंभीरता से लेंगे?

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सीएम की रेस में फड़नवीस आगे

Posted on 21 October 2014 by admin

देवेंद्र फड़नवीस का नाम महाराष्ट्र के अगले सीएम के तौर पर सबसे आगे है, फड़नवीस विदर्भ के ब्राह्मण हैं और कालांतार में नागपुर के मेयर भी रह चुके हैं, वे नागपुर से विधायक हैं और प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को पूरी उम्मीद है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में पार्टी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा छू लेगी। ऐसे में महाराष्ट्र के लिए पहला नाम नितिन गडकरी का चल रहा था, जिन्होंने परोक्ष तौर पर पार्टी हाईकमान से महाराष्ट्र जाने में अनिच्छा जताई है, पर गडकरी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि महाराष्ट्र का सीएम बनना गडकरी का बहुत पुराना सपना है, इत्तफाक से इस रेस में उन्हें चुनौती उस देवेंद्र फड़नवीस से मिल रही है जो राजनीति में उनसे काफी जूनियर हैं। पर गडकरी और फड़नवीस में कुछ समानताएं भी हैं, मसलन कभी देवेंद्र का वजन भी 120 किलो हुआ करता था, उन्होंने ‘बैरिएट्रिक’ सर्जरी कराने की पहल की और उनका वजन सीधे कम होकर 70 किलो हो गया, उन्होंने फिर गडकरी को प्रेरित किया कि वे भी सर्जरी द्वारा अपना वजन कम करा लें, गडकरी ने फड़नवीस की सलाहों पर अमल करते मुंबई में अपनी सर्जरी करवा ली और वजन कम करके पहले से काफी चुस्त-दुरस्त हो गए, सीएम के तौर पर मोहन भागवत की पहली पसंद अब भी गडकरी ही हैं, पर मोदी कैंप का तर्क है कि किसी विधायक को ही मुख्यमंत्री बनना चाहिए। सो, फिलवक्त रेस में फड़नवीस कहीं आगे है।

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