Posted on 25 November 2014 by admin
नितिन गडकरी बतौर केंद्रीय मंत्री एक नए अवतार में सामने आने को बेकरार दिखते हैं, सनद रहे कि वे जब सेना-भाजपा सरकार में महाराष्ट्र में मंत्री थे तो उनका नाम ही ‘रोडकरी’ पड़ गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने भी इस बाबत उनकी दिल खोलकर तारीफ की थी। वाजपेयी ने तब उन्हें प्रधानमंत्री सड़क योजना पर काम करने को कहा था। इन दिनों गडकरी का एक मात्र एजेंडा महाराष्ट्र की अपनी ‘सक्सेस स्टोरी’ को दोहराने का है। सो, पिछले दिनों गडकरी अपने छह दिवसीय विदेश यात्रा पर स्वीडन, नीदरलैंड, ब्रसेल्स और यूके के वेल्स गए। गडकरी की इस यात्रा का उद्देश्य भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विकास के लिए विदेश निवेश लेकर आना था। वेल्स में उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली को बेहतर व आधुनिक बनाने के लिए तथा सड़क सुरक्षा को लेकर वहां के उच्च अधिकारियों के साथ मंत्रणा की, प्रधानमंत्री के विदेश दौरों से अभिप्रेरित होकर गडकरी ने भी अपनी इस विदेश यात्रा को ‘हाई पैक्ड’ रखा, उनके इस अतिव्यस्त कार्यक्रम में जहां इंफ्रास्ट्रक्चर और शिपिंग सेक्टर में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना था, वहीं बंदरगाहों को विकसित करने के लिए बड़े निवेश की तलाश करते भी वे दिखे और कहीं न कहीं वे इस बात के लिए भी चिंता करते देखे गए कि कैसे उनकी इमेज मोदी सरकार के सबसे ‘प्रो-एक्टिव’ मंत्रियों की सूची में शुमार हो जाए। यही वजह है कि अपनी लंदन यात्रा के दौरान वे यूके इंडिया बिजनेस काऊंसिल के प्रतिनिधियों से मिले और उनकी यात्रा का समापन यूरोपियन यूनियन में भारत के राजदूत द्वारा उनके सम्मान में दिए गए डिनर से हुआ।
Posted on 25 November 2014 by admin
अरुण जेतली का मन रक्षा मंत्रालय में रम गया था, अब भले ही मनोहर परिक्कर देश के नए रक्षा मंत्री हों, पर रक्षा मंत्रालय से जेतली के तार अब भी बकायदा जुड़े हुए हैं, न सिर्फ जेतली की सुरक्षा में मिलिट्री पुलिस पहले की तरह मुस्तैद हैं, बल्कि सेना ने उनके कृष्ण मेनन मार्ग आवास पर स्थित जो मेडिकल रूम बनाया था वह अब भी पहले की तरह काम कर रहा है, सेना की नर्स और डॉक्टरों की मौजूदगी बकायदा उस मेडिकल रूम में अब भी देखी जा सकती है, और सेना के इन डॉक्टरों पर भी जेतली का भरोसा पहले की तरह अब भी बना हुआ है। नए रक्षा मंत्री ने भी अपना कार्य-भार ग्रहण करने के बाद यह साफ कर दिया है कि जेतली के इस आधिकारिक आवास से ‘मेडिकल रूम’ हटाने का उनके मंत्रालय का कोई इरादा नहीं है। जेतली को रक्षा मंत्री रहते सेना का जहाज इस्तेमाल करना पसंद था, पर अब वे अपनी इस आदत में किंचित बदलाव ला रहे हैं।
Posted on 25 November 2014 by admin
देश के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पिछले दिनों अपने साथ सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर फिनलैंड और नार्वे के दौरे पर गए थे, प्रणबदा को पढ़ने-लिखने का अब भी उतना ही शौक है, और जिन देशों की यात्रा पर वे निकलते हैं, उसकी तैयारी कहीं पहले से कर लेते हैं, उन देशों की संस्कृति व इतिहास से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन करते हैं और जरूरी नोट्स बना लेते हैं। उन देशों का इतिहास तो जैसे उन्हें कंठस्थ याद रहता है। अपनी हालिया यात्रा में जब प्रणबदा फिनलैंड और नार्वे पहुंचे तो उनके भाषण को वहां के राष्ट्र प्रमुख व राजा-रानी भी इतनी ही तन्मयता से सुनते देखे गए जैसे वे इतिहास की किसी क्लास में बैठे हों। नार्वे की रानी तो प्रणबदा का भाषण सुनकर इतनी अभिभूत हो गईं कि वे बेसाख्ता बोल पड़ीं-‘बहुत खूब, आपकी स्पीच से मैंने अपने देश के बारे में बहुत सी नई जानकारियां प्राप्त कीं।’
Posted on 25 November 2014 by admin
देश के दो शीर्षस्थ उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अदानी के बीच दोस्ती का नया फलसफा लिखा जा रहा है और अघोषित तौर पर इस पटकथा को शब्दबद्द करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है। वर्ष 2014 से पहले तक अदानी-अंबानी के संबंधों में खासी तल्खी रही है, इसकी एक वजह इन दोनों परिवारों का खासकर अनिल अंबानी का पॉवर बिजनेस में होना बताया जाता है। पर हालिया दिनों में इनके संबंधों में नए बीज के अंकुरण को देखा जा सकता है, शुरूआत हुई जब मुकेश व नीता अंबानी गौतम अदानी के बड़े बेटे के विवाह समारोह में हिस्सा लेने के लिए गोवा पहुंचे। उसके जवाब में अभी हाल में रिलायंस फाऊंडेशन ने मुंबई में प्रधानमंत्री के कर कमलों से शुरू होने वाले एच.एन.अस्पताल के उद्धाटन समारोह में खास तौर पर गौतम अदानी को बुलाया। इससे पूर्व इनकी सितंबर में अमरीका में मुलाकात हुई, जब अमरीका में भारत के राजदूत जयशंकर ने न्यूयॉर्क के पियरे होटल में डिनर दिया, अदानी-अंबानी के एक कॉमन एनआरआई मित्र, जो संघ से अपने नजदीकी रिश्तों के लिए भी जाने जाते हैं, इन्होंने इन दोनों उद्योगपतियों के रिश्ते को मधुर बनाने की दिशा में महती कार्य किए, ये वही अप्रवासी भारतीय बिजनेसमैन हैं जिन्होंने अभी हाल में वाशिंगटन डीसी के रिट्ज्स कार्लटन होटल में मुकेश अंबानी की मुलाकात राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी से करवाई। गौतम अदानी को उनके ऑस्ट्रेलिया स्थित कोल माइन्स के लिए भारतीय स्टेट बैंक से 5 हजार करोड़ रुपयों का लोन दिलाने का श्रेय भी मोदी को जाता है, जब उन्होंने अपनी हालिया ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान स्टेट बैंक की चैयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य को वहीं बुलवा लिया, क्योंकि अदानी उनके साथ ही सफर कर रहे थे।
Posted on 25 November 2014 by admin
नार्वे में प्रणब दा के सम्मान में एक डिनर का आयोजन था। उसमें भारतीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को भी आमंत्रित किया गया था। इस डिनर में नार्वे के प्रिंस और प्रिंसेस भी शामिल थे। प्रिंसेस कांग्रेसी सांसद राजीव शुक्ला की बगलगीर थीं, बातों ही बातों में राजकुमारी ने शुक्ला जी को बताया कि वे भारतीय योग-पद्धति की दीवानी हैं और इन दिनों अष्टांग योग सीखने का प्रयास कर रही हैं। राजीव शुक्ला भी नियमित रूप से योगा करते हैं, सो उन्होंने वहीं डिनर टेबुल पर प्रिंसेस को अनुलोम-विलोम और कपाल भारती के बारे में बताया। प्रिंसेस शुक्ला जी की बातों से इतनी प्रभावित हुईं कि वहीं डिनर पर ही वो कपाल भारती की प्रैक्टि्स करने लगीं और वहां मौजूद अतिथियों के आकर्षण का केंद्र बन गईं।
Posted on 15 November 2014 by admin
कांग्रेस के अंदरूनी घमासान को मुखर स्वर देने वाले और पूर्व वित्त मंत्री पी.चिदंबरम के दोहरे व्यक्तित्व पर खुल कर निशाना साधने वाले हंसराज भारद्वाज ने कथित तौर पर कांग्रेस आलाकमान खासकर 10 जनपथ को इस बाबत कई बार चेताया था कि यूपीए सरकार बिलावजह मोदी और अमित शाह से पंगा न ले। समझा जाता है कि चिदंबरम के बारे में कर्नाटक के पूर्व गवर्नर और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री भारद्वाज ने सोनिया को यहां तक आगाह किया था कि चिदंबरम व डीएमके के बीच कोई अंदर की सांठ-गांठ है, यही वजह है कि वे डीएमके प्रमुख करुणानिधि के हाथों खेल रहे हैं। यहां तक कि कानून मंत्री रहते भारद्वाज ने मोदी, शाह, लालू, मायावती व मुलायम के प्रति सीबीआई के दुरूपयोग को लेकर भी चिंता जताई थी। जब कथित तौर पर चिदंबरम ने एक तत्कालीन अतिरिक्त सीबीआई डायरेक्टर जो कि दक्षिण भारत से आते हैं, उनसे कह कर अमित शाह को तुलसी प्रजापति केस में फंसाने की कोशिश की थी। वहीं कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के दो तत्कालीन केंद्रीय मंत्री प्रणब मुखर्जी और हंसराज भारद्वाज के गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से किंचित बहुत मधुर रिश्ते थे। समझा जाता है कि केंद्र में कानून मंत्री रहते भारद्वाज ने ही मोदी को सलाह दी थी कि वे गुजरात में ‘नाइट कोर्ट'(रात्रि अदालत) शुरू करें और बतौर मुख्यमंत्री मोदी का 2006 में किया यह प्रयोग गुजरात में काफी सफल रहा था।
Posted on 15 November 2014 by admin
केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार से पूर्व अमित शाह के संदेशे के बाद राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया कथित तौर पर दो बार प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली पहुंची, पर मोदी के अति व्यस्त कार्यक्रमों का हवाला देते हुए वसुंधरा को बता दिया गया कि अभी वह प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाएंगी। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद वसुंधरा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलीं, तो समझा जाता है कि इस मुलाकात में शाह ने वसुंधरा से कहा कि ‘अब वो राज्य से बड़ी नेता हो गई हैं, सो उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में होनी चाहिए’ पर वसु ने इसका कोई जवाब नहीं दिया और वह जयपुर लौट गईं। सनद रहे कि इससे पूर्व शाह ने अपने खास विश्वस्त भूपेंद्र यादव के मर्ाफ्त राजस्थान के छह विधायकों की सूची वसुंधरा को भेजी थी, जिसे मोदी-शाह जोड़ी वसुंधरा मंत्रिमंडल में जगह दिलवाना चाहती थी, इनमें से ज्यादातर नाम वसुंधरा विरोधी विधायकों के थे, जिन्हें वह किंचित मात्र भी पसंद नहीं करती थीं। पर पार्टी आलाकमान की इच्छाओं का सम्मान करते हुए राजे ने अपनी धुर विरोधी किरण महेश्वरी तक को अपने मंत्रिमंडल का हिस्सा बना लिया, बदले में वसु ने केंद्र में मंत्री बनाने के लिए अपनी ओर से दो नाम भेजे, एक तो जोधपुर के भगवा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत का और दूसरा नाम अपने पुत्र दुष्यंत सिंह का। पर इन दोनों में से कोई भी राजस्थान कोटे से मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं पा सका, जिन्हें जगह मिली वे मोदी-शाह की निजी पसंद थे। इस दफे जब मोदी अपने 10 दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो रहे थे तब उन्होंने राजे को मिलने का वक्त दिया, दोनों नेताओं के बीच दो-टूक बातचीत हुई। संबंधों में आई तल्खी साफ झलक रही थी, बातों-बातों में वसुंधरा मोदी को यह बताना नहीं भूलीं कि मोदी उन्हें रमण सिंह या शिवराज समझने की गलती न करें। मोदी मुस्कुराए, चुप लबों से शायद यह बता गए हों कि वे कभी कहते नहीं, बस करते हैं।
Posted on 15 November 2014 by admin
नरेंद्र मोदी कृष्णपाल गुर्जर से खासे नाराज बताए जाते हैं, कृष्णपाल विरोधी गुट का दावा है कि इस विधानसभा चुनाव में फरीदाबाद के तिगांव से अपने पुत्र को पार्टी टिकट नहीं मिलने से नाराज कृष्णपाल ने पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया है। वहीं इन चुनावों में जब भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी तो गुर्जर ने पार्टी की सीनियर नेता सुषमा स्वराज द्वारा मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर अपना नाम चलवाया। पर पार्टी हाईकमान ने उनके नाम पर विचार करने की जहमत भी नहीं उठाई। हां, पार्टी ने इस बात का विश्लेषण अवश्य किया है कि इस हालिया विधानसभा चुनाव में गुर्जर ने पार्टी की कितनी मदद की है, तो पता चला कि कृष्णपाल के अपने गृह क्षेत्र मेवला-महाराजपुर में भाजपा को मात्र 16 वोट मिले और उससे जुड़े 7 गुर्जर बहुल गांवों को मिलाकर भाजपा को मिले कुल वोट 146 थे। सो, मोदी इन्हें अपने मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाना चाहते थे, पर जम्मू-कश्मीर आसन्न विधानसभा चुनाव में गुर्जर मतदाताओं के महत्त्व को समझते हुए मोदी ने फिलवक्त इनका विभाग बदल दिया है। इनकी किस्मत का असल फैसला जम्मू-कश्मीर चुनावों के अंतिम नतीजे में आने के बाद होगा।
Posted on 15 November 2014 by admin
मुलायम सिंह यादव की छोटी पुत्रवधु अपर्णा यादव के राग-मोदी की वजह से यादव परिवार में अंतर्कलह मच गई है। पिछले दिनों जिस तरह मुलायम के छोटे पुत्र प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा ने सार्वजनिक मंचों पर खुल कर मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़े उससे यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश बेतरह भड़क गए और समझा जाता है कि इस बात की शिकायत उन्होंने अपने पिता से की। नेताजी ने अपर्णा को बुलाकर उन्हें समझाने की कोशिश की है, पर बदले में अपर्णा ने नेताजी से यह जानना चाहा कि आखिरकार इस बात की क्या वजह रही कि उन्होंने अपने द्वारा रिक्त की गई मैनपुरी सीट से प्रतीक की जगह तेज नारायण को तरजीह दी, जबकि प्रतीक ने उनसे कभी कुछ नहीं मांगा। समझा जाता है कि नेताजी ने अपर्णा को आश्वासन दिया है कि वे प्रतीक के राजनैतिक कैरियर के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं और वक्त आने पर इसका खुलासा करेंगे। सनद रहे कि प्रतीक की पत्नी अपर्णा अपना कांम्पटीशन अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव से मानती हैं, डिंपल की तरह वह भी उत्तराखंड की रहने वाली हैं, एक पत्रकार की पुत्री हैं और उन्हें भी अपने साथ ढेर सारे लाव-लश्कर लेकर चलना पसंद है।
Posted on 15 November 2014 by admin
हर्षवर्ध्दन की हेल्थ-मिनिस्ट्री से विदाई के पक्ष में चाहे लाख तर्क गढ़े जा रहे हों कि सुषमा स्वराज से नजदीकियों की वजह से उन पर गाज गिरी है, या दिल्ली के आने वाले चुनाव में पार्टी उन्हें अपना चेहरा बना सकती है आदि-आदि, पर सच तो यह है कि एक पॉवरफुल मेडिकल माफिया केतन देसाई से पंगा लेना उन्हें भारी पड़ गया। केतन देसाई और मेडिकल काऊंसिल ऑफ इंडिया एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। सो, हर्षवर्ध्दन एमसीआई में चल रहे भ्रष्टाचार को आड़े हाथों लेते हुए देसाई से लोहा लेना चाहते थे।देसाई की मोदी सरकार के कई प्रभावशाली मंत्रियों में गहरी छनती है, शाह और मोदी तक उनकी पहुंच बताई जाती है, शायद हर्षवर्ध्दन अतिउत्साह में इस बात को भूल गए थे। इसके अलावा देश की ताकतवर तंबाकू लॉबी भी हर्षवर्ध्दन के पीछे पड़ी थी, क्योंकि गाहे-बगाहे मंत्री जी तंबाकू पर बैन की बात करते आ रहे थे। सो, जैसे ही हर्षवर्ध्दन का विभाग बदला, अगले रोज देश की एक शीर्षस्थ सिगरेट उत्पादक कंपनी का शेयर बल्लियों उछल गया।