Posted on 08 March 2015 by admin
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का हालिया चुनाव दिलचस्प रहा, मजबूरी में ही सही श्रीनिवासन खेमा ने जगमोहन डालमिया से हाथ मिलाकर शरद पवार खेमे की संभावनाओं को धूमिल कर दिया। हालांकि बीजेपी खुलकर पवार के समर्थन में उतर आई थी, अमित शाह और पवार के बीच इस बाबत लंबी बातचीत हुई, अगर ऐन चुनाव के वक्त अरुण जेतली को अपनी पत्नी के इलाज के सिलसिले में अमरीका नहीं जाना पड़ता तो बीसीसीआई में चुनाव नहीं होता, एक मिला जुला पैनल बनता। राजीव शुक्ला मात्र एक वोट से कोषाध्यक्ष का चुनाव हार गए, उन्हें अंत समय तक इस बात का इल्म नहीं हो पाया कि श्रीनिवासन से शिवलाल यादव और बड़ौदा से बात कर पांसा पलट दिया है, अनुराग ठाकुर की सचिव पद पर जीत जेतली खेमे के लिए मायने रखती है,जेतली ने अनुराग के लिए अमरीका में बैठकर फोन पर शरद पवार से बात की थी। अनुराग पवार पुत्री सुप्रिया सुले के पास जाकर भी अपना रोना रो आए थे। सूत्र बताते हैं कि सुप्रिया अनुराग को लेकर अपने पिता के पास गईं और उनसे अनुराग के लिए आशीर्वाद मांगा। इस बीच अमित शाह ने भी अनुराग ठाकुर के लिए पवार से बात की और अनुराग ठाकुर की गाड़ी चल निकली। वैसे भी मौजूदा बीसीसीआई में शरद पवार का रूतबा सबसे ज्यादा घटा है, श्रीनिवासन की बल्ले-बल्ले है और मजबूरी में ही सही डालमिया से उनकी दोस्ती के बाद भारतीय क्रिकेट की राजनीति में नई रणनीतियों के सूत्रपात हुए हैं।
Posted on 03 March 2015 by admin
कहते हैं मुहब्बत और जंग में सब वाजिब है, पर जब एक निहायत ही गैरवाजिब वजह से एक बड़े कॉरपोरेट के बॉस को जेल जानी पड़ी और पिछले एक साल से जब उनका डेरा-डंडा वहीं जमा है, और जेल में रहते हुए भी उनकी मुहब्बत की लत छूट नहीं पा रही है। इस समूह से जुड़े विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जहां बॉस की कंपनी के कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से तनख्वाह नहीं मिली है, वहीं जेल में रहते हुए भी बॉस की रंगरेलियों में कोई कमी नहीं आई है, अगर जेल प्रशासन से जुड़े सूत्रों के दावों पर यकीन किया जाए तो पिछले दिनों स्टिंग ऑपरेशन के लिए चर्चित एक वेबसाइट ने जेल में बॉस के विशेष कमरे का स्टिंग कर दिया, जिसमें बॉस अलग-अलग मुद्राओं में कैमरे में कैद हो गए बताए जाते हैं। जेल में कैद बॉस की हिम्मत और उनके रसूख का जरा अंदाजा तो लगाइए, कैमरे में कैद हुई कई युवतियां तो उनके ऑफिस में काम करने वाली हैं, तो कईयों को उनके काम के एवज में उचित भुगतान किया गया है। अब बॉस की कोशिश है कि यह स्टिंग बाहर नहीं आना चाहिए, चाहे इसकी कीमत जो भी हो, चुनांचे सौदे-मसौदों का बाजार गर्म है, ठंडे पसीने से नहाई नैतिकता बैचेन कदमों से सामाजिक लबादा तलाश रही है, जो ढंक जाए, वही अच्छा!
Posted on 03 March 2015 by admin
केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संबंधों में कटुता के बीज अंकुरित होने शुरू हो गए हैं, संघ से जुड़े सूत्रों के दावों पर यदि यकीन किया जाए तो केंद्र की मौजूदा सरकार में संघ वालों के काम अटक रहे हैं, ज्यादातर मंत्रिगण संघ वालों के कार्य करने से बच-बचा रहे हैं, वह तो भला हो केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का जिन्होंने संघ के लिए अपने दिल और मंत्रालय के दरवाजे खोज रखे हैं। सूत्र बताते हैं कि संघ के कुछ नेताओं के कहने पर स्मृति अपने मंत्रालय में एक ऐसा प्रोग्राम लेकर आईं हैं, जिसका संघ से जुड़े उच्च शिक्षण संस्थानों को सीधा फायदा मिल रहा है, अपने मंत्रालय में इस नेत्री 500 करोड़ के एक ऐसे फंड की व्यवस्था की है, जो कॉलेजों में कौशल केंद्र खोलने के मद में लगाए जाएंगे, इस कार्यक्रम में प्रति कॉलेज 5 करोड़ रुपयों के दर से देश भर के 100 कॉलेजों का चयन किया जाएगा। कहना न होगा कि स्मृति इस कार्यक्रम से ज्यादातर वैसे कॉलेजों को जोड़ने का प्रयास कर रही हैं, जिनके संचालन का जिम्मा कहीं न कहीं संघ से जुड़े लोगों के हाथों में है। पूर्वात्तर, झारखंड व छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संघ का सबसे ज्यादा काम है, चुनांचे कौशल केंद्र स्थापित करने का फंड ऐसे ही राज्यों में सबसे ज्यादा जाने वाला है।
Posted on 03 March 2015 by admin
आम बजट और रेल बजट, आम आदमी को लेकर कितना मुफीद रहा है, इसको लेकर भाजपा व संघ में दो अलग विचारधाराएं चल रही है, संघ के ज्यादातर लोग दबी जुबान से कह रहे हैं कि मोदी सरकार का आम बजट खास लोगों के लिए पेश किया गया है, कॉरपोरेट टैक्स घट गया है पर सर्विस टैक्स बढ़ गया है, जिससे आम लोगों को अपनी जेब पहले से कहीं ज्यादा ढ़ीली करनी पड़ेगी। वहीं भाजपा के अधिसंख्यक सांसद भी इस राय के बताए जा रहे हैं कि इन दोनों बजटों में कुछ भी ऐसा खास नहीं जिसका बखान वह जनता के बीच जाकर कर पाएं। सूत्र बताते हैं कि सरकार ने अपने सांसदों को इस संकट से उबारने का फैसला लिया है, भाजपा सांसदों के लिए आम व रेल बजट की प्रस्तावना को लेकर एक ‘किट’ डेवलप की जा रही है, इसके बाद भगवा सांसदों को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा कि बजट की किन विशेषताओं का उल्लेख उन्हें जनता के समक्ष करना है।
Posted on 03 March 2015 by admin
बड़ी सत्ता के साथ मोदी के हिस्से बड़ी जिम्मेदारी भी आई है। इसका नजारा पिछले दिनों नई दिल्ली के अशोका होटल में देखने को मिला, जहां 26 फरवरी को लालू की बेटी के साथ मुलायम के सांसद पोते तेजप्रताप यादव की शादी आहूत थी। वीआईपी एनक्लोजर में नीतीश व शरद के साथ लालू व मुलायम बैठे थे, जैसे ही इन्होंने सुना कि प्रधानमंत्री आ गए हैं, लालू-मुलायम मोदी को रिसीव करने गेट पर चले गए और मोदी को लेकर वहीं आ गए जहां नीतीश, शरद व के सी त्यागी पहले से बैठे थे। नीतीश को देखते ही प्रधानमंत्री ने उनसे गर्मजोशी से हाथ मिलाया और फाइनेंस कमीशन की प्रस्तावनाओं के बाबत बात की। वहीं नीतीश अपने पुराने मित्र अरुण जेतली से मिल गए। जेतली ने उन्हें अपने घर डिनर पर आमंत्रित किया। नीतीश अशोक होटल से बाहर निकल कर सीधे जेतली के कृष्णमेनन स्थित आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने जेतली के साथ डिनर किया और अपने इस पुराने मित्र से दो घंटों तक गुफ्तगू भी की।
Posted on 03 March 2015 by admin
अपनी पुत्री प्रतिभा अडवानी के कहने पर भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण अडवानी ने बेहद धूमधाम से अपनी शादी की पचासवीं वर्षगांठ सेलिब्रेट की। इस मौके पर बकायदा अडवानी और उनकी पत्नी कमला अडवानी ने एक-दूसरे के गले में वरमाला भी डाली, यह एक विवाह के मौके सा समां था। बड़ी राजनैतिक हस्तियों की उपस्थिति इसमें देखी गई, राजनाथ सिंह, रवि शंकर प्रसाद, प्रफुल्ल पटेल से लेकर अमर सिंह जैसे राजनेता इस मौके पर मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं आए पर उनका शुभकामना संदेश आया। सोनिया गांधी के ऑफिस ने इस मौके पर सोनिया की एक बेहद भावपूर्ण चिट्ठी रिलीज की, जिसमें सोनिया ने राजीव गांधी के साथ अपने 47 वर्षों के वैवाहिक जीवनपूर्ण करने का उल्लेख किया और सोनिया ने अपने पत्र में इस बात का कहीं शिद्दत से जिक्र किया कि उन्हें लगता है जैसे राजीव अब भी हर शै उनके साथ मौजूद हैं।
Posted on 03 March 2015 by admin
रेल बजट आते ही भारत स्थित तीन देशों के दूतावास तेजी से हरकत में आ गए, ये देश हैं चीन, जापान और फ्रांस। और इन तीनों देशों के प्रतिनिधियों में केंद्र सरकार के साथ अपनी लॉबिंग तेज कर दी है, इन तीनों देशों की दिलचस्पी भारत में प्रस्तावित हाईस्पीड ट्रेन या बुलेट ट्रेन को लेकर है। इन देशों में इनकी रेल 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कहीं ज्यादा स्पीड से दौड़ती है, वहीं भारत में 200 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार तय की गई है, चुनांचे ये देश भारत को यह तकनीक देने को भी राजी हैं कि मौजूदा दौर में राजधानी व शताब्दी जैसी ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के लिए और क्या करने होंगे, इसके लिए कैसे ट्रैक मैनेजमेंट मैकनिज्म विकसित करना होगा।
Posted on 23 February 2015 by admin
पेट्रोलियम मंत्री के जासूसी कांड की आग भभकने लगी है और इसकी जद में जो कॉरपोरेट घराने आए हैं, उनके लिए भले ही यह एक सदमे की स्थिति हो, पर मोदी सरकार और इसके कुशल रणनीतिकार अजीत डोवल इस मामले को कहीं पहले से जानते थे, इस मामले की भनक डोवल को तब लग गई थी जब वे यूपीए सरकार में आईबी प्रमुख थे। पर कॉरपोरेट व सत्ता के शीर्ष के लिए एक-दूसरे की पीठ खुजलाने की परंपरा काफी पुरानी है, चुनांचे कई अहम मंत्रालयों में सरकार की नाक के नीचे यह खेल बदस्तूर चलता रहा और सरकार अनजान बनी रही। पर छोटी सी दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल की बड़ी जीत ने मोदी खेमे की नींद उड़ा दी और खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली की हार पर जो केंद्र को ‘फीडबैक’ दिया उसमें बड़े उद्योगपतियों और दिल्ली के निजाम की दोस्ती को आम जनता पचा नहीं पाई। सो, आने वाले बिहार विधानसभा के आलोक में मोदी का जनता को संदेश है कि उनसे दोस्ती की आड़ में कोई कॉरपोरेट अपनी मनमानी नहीं कर सकता। और न ही मोदी सरकार उद्योगपतियों की सरकार है। और अपनी पीठ पर सार्वजनिक रूप से हाथ रखने वाले थैलीशाहों के हाथ मरोड़ने में अब मोदी पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि यह उनकी राजनीतिक अस्मिता का सवाल है। अभी तो जासूसी कांड इस मामले का आगाज भर है, आने वाले दिनों में कॉरपोरेट बिंग व सत्ता की दलाली करने वाली कई और बड़ी मछलियों पर मोदी सरकार की गाज गिरने वाली है।
Posted on 23 February 2015 by admin
सुरेश प्रभु से प्रधानमंत्री को जो उम्मीदें थीं, प्रभु उस पर खरे उतरते नहीं दिख रहे। नहीं तो प्रभु को जिस धूम-धड़ाके के साथ मंत्री बनाया गया था, उसके राजनैतिक संदेश किसी से छुपे नहीं रह गए थे, सुबह उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलवाई गई और वे शाम तक रेल भवन में आसीन थे। पर हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि प्रभु अब न तो मोदी के नाक के बाल रह गए हैं और न ही प्रधानमंत्री ने उन्हें नाक का सवाल बना रखा था। पीएमओ से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मोदी की प्रभु से नाराजगी इस बात को लेकर है कि बतौर रेल मंत्री वे ‘डिलिवरी’ नहीं कर पा रहे हैं, कहते हैं कि मंत्री बनने से पहले उन्होंने प्रधानमंत्री से वादा किया था कि वे रेल सेक्टर में 1 लाख करोड़ का विदेशी निवेश लेकर आएंगे। पर यह पूरा मामला सिफर साबित हुआ। यहां तक कि सुधार की पटरी पर सरपट भाग रही भारतीय रेल भी बीते दिनों पटरी से उतरती चली गई, ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या बजट सत्र के बाद होने वाले मोदी कैबिनेट के संभावित फेरबदल में प्रभु का मंत्रालय बदला जा सकता है?
Posted on 23 February 2015 by admin
दिल्ली के इस हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा का ग्रामीण हलकों से पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया, कहते हैं कि किसानों की नाराजगी बेतरह मोदी सरकार के साथ बढ़ गई है, उनकी नाराजगी का असर हरियाणा, राजस्थान, यूपी के किसानों में भी देखा जा सकता है, आत्म-मंथन के दौर से गुजर रही भगवा पार्टी ने जब इसके कारणों की पड़ताल की, तो पता चला कि किसानों की नाराजगी केंद्र सरकार से इस बात को लेकर है कि इस बार न तो उन्हें समय से खाद मिल पाया और न ही कीटनाशक, पता चला कि केंद्रीय उर्वरक और रसायन मंत्रालय की कथित उदासीनता की वजह से ऐसा हुआ। दरअसल मोरक्को और टर्की दो ऐसे देश हैं, जहां से भारत फासफोरस व खाद का सबसे ज्यादा आयात करता है, पर जब से केंद्र में नए मंत्री आए हैं सप्लायर्स और मंत्रालय के बीच ठनी हुई है, मंत्रालय की ओर से तर्क दिया गया कि रेट को लेकर पुराने सप्लायर्स से बात नहीं पा बन रही थी, चुनांचे मंत्रालय नए सप्लायर्स की तलाश में जुटा था, इसी वजह से देर हो गई। कहते हैं मोदी ने विभाग के मंत्री अनंत कुमार को तलब कर इस बाबत उनकी पूरी क्लास ले ली है, आइंदा से वे एक अच्छे विद्यार्थी की तरह आचरण करते नजर आ सकते हैं।