Posted on 03 May 2015 by admin
अमित शाह और उनकी टीम ने बिहार चुनाव को अपनी नाक का सवाल बना लिया है, लिहाजा बिहार के चुनावी घमासान में भगवा पार्टी एक आक्रामक तेवरों से लैस नजर आ सकती है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने बिहार में एक सर्वेक्षण कराया है कि नीतीश के 5 साल के राज में कितने यादवों की हत्याएं हुई हैं, जल्द ही इस आंकड़े को सार्वजनिक किया जा सकता है, राज्य के 15 फीसदी से ज्यादा यादवों को यह बताने के लिए कि नीतीश उनके असली हितैषी नहीं है, पर भाजपा यह भूल रही है कि एक वर्ष पहले तक वह भी इसी नीतीश सरकार की पार्टनर रही है। सो, ऐसे किसी पाप में भागीदारी भी बराबर की है।
Posted on 26 April 2015 by admin
‘नजरें बदलती हैं तो नजारे बदल जाते हैं, सुबह होती है तो सितारे बदल जाते हैं’ भाजपा सांसदों और मंत्रियों के लिए भी प्रधानमंत्री का वह उद्बोधन उनके लिए एक नई सुबह के मानिंद थे, अब से पहले वाला क्लास रूम का नजारा बदला हुआ था, मोदी के सुर और तेवर भी बदले हुए थे, प्रधानमंत्री ने भगवा सांसदों को दुलारते हुए कहा-‘आप मेरे हाथ हो, आप सब मेरे हीरे हो’ वरना अब से पहले हुई मुलाकातों में प्रधानमंत्री का अंदाज कटाक्ष से तबरेज तल्खी भरा होता था, मसलन-‘आप लोगों से तो बात करनी भी मुश्किल है, आप लोग तो बात भी समझ नहीं पाते, लगता नहीं कि आपको अगली बार पार्टी टिकट की दरकार है…’ यानी मोदी के संवाद का तरीका बेहद हमलावार हुआ करता था। जब सांसदों का यह दल प्रधानमंत्री के उद्बोधन की समाप्ति के बाद बाहर निकला तो एक सीनियर मंत्री ने महाराष्ट्र के अपने साथी सीनियर मंत्री से अर्ज किया-‘दिल्ली की हार के बाद, हम हाथ और हीरे हो गए हैं, बिहार भी हार गए तो गले लगाने के लिए उतावले हो जाएंगे हमारे प्रधानमंत्री जी । सियासी दुपट्टा वाकई किसी के आंसुओं से तर नहीं होता है।’
Posted on 26 April 2015 by admin
सीताराम येचुरी ने जब से प्रकाश कारत के हाथों से सीपीएम की बागडोर ली है, कांग्रेस व वामदलों के अंतर्संबंधों में एक नए रिश्ते की प्रस्फुटन दिखाई देने लगी है, यह भी कयास लगने लगे हैं कि बिहार और बंगाल में कांग्रेस और वामपंथी एक फ्रेंडली फाइट की नई इबारत लिख सकते हैं। अपने पति को पार्टी की कमान मिलने की खुशी में येचुरी की पत्नी सीमा चिश्ती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बेहद करीबी मित्रों की एक पार्टी रखी। 10-11 लोगों की इस पार्टी में दिग्विजय सिंह, गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेसी दिग्गज दिखाई पड़ गए। वैसे भी येचुरी के पार्टी महासचिव बनने के बाद सीपीएम में बंगाल बनाम केरल का झगड़ा भी खुलकर सामने आ गया है। इसका नाारा तब देखने को मिला जब पार्टी की एक ‘क्लोज डोर मीटिंग’ में केरल के कुछ पार्टी नेता बंगाल के सीपीएम नेता विमान बोस पर चढ़ बैठे और येचुरी खेमा असहाय होकर यह सब देखता रहा, उसके बाद ही यह जुमला बेतरह उछला कि- ‘बेंगाल टाइगर हैज गॉन फॉर ए स्लीप’ यानी बंगाल टाइगर सोने चला गया।
Posted on 26 April 2015 by admin
गांधी परिवार के भगवा चिराग वरुण गांधी अपने एक नए बौद्धिक अवतार में सामने आए हैं, भले ही मोदी-युगीन पार्टी उनके लिए नई भूमिका पारिभाषित नहीं कर पा रही हो, पर भाजपा के इस पूर्व महासचिव व सुल्तानपुर के सांसद इन दिनों लगातार विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विचारोत्तेजक लेख लिखने में जुटे हैं- अब तक वरुण-रेलवे रिफॉर्म, स्मार्ट सिटी, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीति और किसानों की दुर्दशा को लेकर कई लेख लिख चुके हैं, अब इस 29 तारीख को उनकी कविताओं का संग्रह ‘स्टिलनेस’ यानी स्थित प्रज्ञता बाजार में आने को तैयार है। इस पुस्तक को हार्पर कॉलिंस ने छापा है, वरुण ने अपना यह संग्रह अपनी दिवंगत नानी श्रीमती अमतेश्वर आनंद की स्मृतियों को समर्पित किया है। इस कविता संग्रह की ‘होप’ यानी आशा कविता में वरुण लिखते हैं, (उसका हिंदी तर्जुमा पेश है)-
‘तेरी आवाज मुझे देती है अतीत को बिसराने की ताकत
जब भी देखता हूं प्रतिच्छाया अपनी
तब इल्म होता है मुझे अपनी अंतस की यात्रा का
और तब रहता है मुझे इंतजार वक्त के पुरस्कार का।’
क्या इन पंक्तियों में वरुण की अपनी मौजूदा राजनीति की झलक दिखाई नहीं देती?
Posted on 26 April 2015 by admin
महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित जेजे बिल को जिसमें ज्यूविनाइल की उम्र 18 से 16 करने की बात कही गई है, इस बिल को कैबिनेट से पास कराने के लिए विभाग की मंत्री मेनका गांधी को न जाने कितने पापड़ बेलने पड़े। जब इस बिल का मसौदा कैबिनेट के समक्ष आया तो दो मंत्रियों यानी अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल और तेदेपा के अशोक गणपति राजू ने इसका खासा विरोध दर्ज कराया कि नाबालिगों से बचपने में कई अपराध हो जाते हैं। इस पर अरुण जेतली ने मोर्चा संभाला और इस बिल के समर्थन में जेतली के अकाटय तर्कों के समक्ष तमाम मंत्रियों ने हथियार डाल दिए और कैबिनेट से यह बिल क्लियर हो गया। कैबिनेट की मीटिंग से जब तमाम मंत्रिगण बाहर आने लगे तो मेनका खास तौर अरुण जेतली के पास गईं और विनम्र स्वरों में उनसे कहा-‘भले ही बाहर इस बिल का श्रेय मुझे मिले, पर इस श्रेय के असली हकदार तो आप ही हैं।’ मेनका की यह भंगिमा और उनकी इस विनम्रता ने जेतली को अंदर तक छू लिया।
Posted on 26 April 2015 by admin
जनता परिवार के ताजा एका प्रयासों के परिदृश्य में देश की एक प्रमुख जनमत सर्वेक्षण एजेंसी ने अभी बिहार में ताजा-ताजा पब्लिक ओपिनियन सर्वे करवाया है। इस सर्वे में लालू, नीतीश, वाम दल और कांग्रेस गठबंधन बनाम भाजपा की लड़ाई के आलोक में बिहार के आसन्न विधानसभा चुनावों की एक तस्वीर पेश करने की चेष्टा हुई है, इस सर्वेक्षण के नतीजों ने यकीनन भाजपा का विश्वास हिलाकर रख दिया होगा। इस सर्वेक्षण नतीजों में राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति को 38 में से 18, उपेंद्र कुशवाहा को 17 में से 7, जीतन राम मांझी को 22 में से 7 और भाजपा को 165 में से 57 सीटें मिलने की बात कही गई है, यानी अगर चुनावी नतीजे इसी अनुरूप रहे तो बिहार में एनडीए को 90-95 तथा एकीकृत जनता परिवार को 132-136 सीटें मिलने की संभावना है।
Posted on 26 April 2015 by admin
अपने लिए नई सियासी जमीन तलाश कर रहे पप्पू यादव हर तरफ हाथ-पैर मार रहे हैं, नरेंद्र मोदी से अपनी बहुचर्चित मुलाकात के बाद सूत्र बताते हैं कि हालिया दिनों में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से अर्थपूर्ण मुलाकात की, उनके साथ खाना खाया और भाजपा के साथ आने की संभावनाओं को टटोला। समझा जाता है कि शाह कि ओर से उन्हें प्रस्ताव मिला है कि पप्पू अगर उत्तर बिहार खासकर कोशी अंचल की 60 यादव-मुस्लिम बहुल सीटों पर अपने मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार उतारे तो भाजपा का काफी भला हो सकता है, एवज में भाजपा भी पप्पू का भला करने को तैयार है। समझा जाता है कि इसके उपरांत पप्पू कांग्रेस के बिहार प्रभारी से मिले और बिहार की राजनीति में अपने महत्त्व से उन्हें अवगत कराया। सूत्र बताते हैं कि पप्पू ने इसके बाद लालू यादव से मिलने का वक्त मांगा, तो लालू ने पप्पू से फोन पर ही दो टूक बात कर ली कि ‘अब उनसे रिश्तों में बचा क्या है?’ लालू अपनी पार्टी के लिए जनता परिवार से 110 सीटें मांग रहे हैं, 100 पर बात बन सकती है, नीतीश 100 मांग रहे हैं, 90 पर बात बन सकती है, बाकी बची 53 सीटें कांग्रेस व वामदलों के खाते में जा सकती है।
Posted on 18 April 2015 by admin
बगैर किसी शोर-शराबे के, गुपचुप सन्नाटों के बीच भगवा राजनीति के शिखर पर बड़े बदलाव की आहटें हैं, सरकार और संगठन का चेहरा-मोहरा बदलने की तैयारियों को मोदी व शाह के सूरमा अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आने वाले 26 मई को मोदी सरकार अपने कार्यकाल के एक वर्ष पूरे कर लेगी, 9 मई को लोकसभा का और 13 मई को राज्यसभा का सत्रावसान हो रहा है, इसके बाद किसी भी दिन मोदी मंत्रिमंडल में एक व्यापक फेरबदल का ऐलान हो सकता है। कई मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी मुमकिन है, कईयों को सरकार से हटाकर संगठन की सेवा में लगाया जा सकता है। शायद यही वजह है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपनी नई टीम की घोषणा में निरंतर देर कर रहे हैं, पहले तय था कि 2 अप्रैल को बेंगलुरू में आहूत पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पहले शाह अपनी नई टीम का ऐलान कर देंगे, सूत्र बताते हैं कि बाद में यह तारीख आगे सरका कर 6 अप्रैल का दिन मुकर्रर किया गया। पर इसके बाद मोदी व शाह के दरम्यान एक लंबी गुफ्तगू हुई और उसमें तय हुआ कि संगठन व सरकार में फेरबदल आस-पास हो जिससे सरकार से निर्वासित लोगों को संगठन में खपाया जा सके। बाद में यही आइडिया परवान चढ़ गया। अपनी कुर्सी बचाने के लिए केंद्र के कई मंत्रियों ने अभी से भाग दौड़ शुरू कर दी है, इनमें से ज्यादातर अभ्यर्थी संघ की शरण में है, बचे-खुचे देवालयों में शीश नवा रहे हैं।
Posted on 18 April 2015 by admin
नजमा आपा के केंद्रीय मंत्रिमंडल से रूखसती की इबारत लगभग तैयार हो चुकी है। चूंकि आपा 75 वर्ष की हो रही हैं, सो उन्हें असम का राज्यपाल बनाए जाने की प्रबल संभावना है। नजमा हेपतुल्ला मध्य प्रदेश से राज्यसभा की मेंबर हैं और अभी भी उनका कार्यकाल कोई डेढ़ वर्षों का शेष है। नजमा की रिक्त की जा रही सीट पर शाहनवाज हुसैन की नार है, जो बिहार के आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी उपयोगिता के आलोक में राज्यसभा की मांग कर रहे हैं। वहीं संघ के इशारों को समझते हुए अमित शाह यह सीट ओम माथुर को दिए जाने के पक्षधर हैं, शाहनवाज को समझाया जा रहा है कि वे थोड़ा इंतजार करें, उन्हें बिहार कोटे से राज्यसभा में लाया जा सकता है।
Posted on 18 April 2015 by admin
प्रचार के बेताज बादशाह माने जाने वाले नरेंद्र मोदी अपनी सरकार के कार्यकाल के 1 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में कोई बड़ा जश्न नहीं कर रहे हैं, यूरोपीय देशों की यात्रा से स्वदेश लौटने के बाद मोदी ने अपने कुछ मुंहलगे लोगों से अपनी दिल की बात शेयर की और कहा कि लोगों ने उन्हें 60 महीनों के लिए जनादेश दिया है, 12 महीनों के लिए नहीं, चुनांचे अभी सरकार के काम-काज के मूल्यांकन का वक्त नहीं आया है। सो, अपनी हर बात भव्य और अनोखे अंदाज में कहे जाने में माहिर मोदी ने अपनी सरकार की पहली वर्षगांठ सेलिब्रेट करने के लिए अब तक किसी भी प्राइवेट मीडिया या मार्केटिंग एजेंसी की सेवाएं नहीं ली है। हां, पार्टी व सरकार में सोशल मीडिया का जिम्मा संभालने वाले लोगों को जरूर चौकस कर दिया गया है कि प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों के टि्वटर हेंडिल से उनके संबंधित विभागों के उपलब्धियों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। इसके अलावा इसी रविवार को प्रधानमंत्री ने संसद परिसर स्थित बालयोगी ऑडिटोरियम में भाजपा सांसदों की एक अहम बैठक बुलाई है जिसमें सांसदों को इस बात के लिए दक्ष व प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे अपनी सरकार की उपलब्धियों को अपने-अपने संबंधित संसदीय क्षेत्रों में किस मानिंद प्रेषित करेंगे। मोदी और उनकी कोर टीम को बखूबी मालूम है कि ‘डिलिवरी’ के मामले में अभी उनकी सरकार का प्रदर्शन अच्छा नहीं, उनकी छवि किसान विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक सरकार की बनी है,बावजूद इसके कॉरपोरेट जगत भी सरकार से खुश नहीं है और यदाकदा अपनी नाराजगी दिखा रहा है। सो, बगैर किसी ज्यादा शोर-शराबे के मोदी सरकार नेपथ्य में रहकर अपनी एक साला उपलब्धियों का गान करने वाली है।