Archive | मुख्य

राजनाथ को राज?

Posted on 26 May 2015 by admin

भूमि की कठोर परतों को तोड़ने से ही मिलती है नए जड़ों को पनपने की राह, पर सिर्फ ओम माथुर के नाम को अगर छोड़ दिया जाए तो भाजपा के अगले अध्यक्ष की रेस में शामिल राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी पहले भी अध्यक्षीय दायित्व निभा चुके हैं, वैसे भी अमित शाह से संघ की मूल नाराजगी इस बात को लेकर है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ामीन से जुड़े किसी नेता को शायद ही आगे बढ़ाया है। केंद्र सरकार के मौजूदा स्वरूप में यूपी के कद्दावर ठाकुर नेता राजनाथ सिंह अपने को ‘अनफिट’ पा रहे हैं, गाहे-बगाहे पीएमओ या फिर अरुण जेतली से उनकी तकरार की खबरें सुनाई देती रहती हैं, सो केंद्रीय गृह मंत्री अपना मंत्रालय छोड़ने को एक दम तत्पर बताए जाते हैं, इस नाते इस रेस में वे सबसे आगे भी हैं, संघ और नितिन गडकरी में रिश्तों की एक अटूट डोर है, पर गडकरी इस वक्त मंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार नहीं बताए जाते हैं, क्योंकि अपने सड़क परिवहन, राष्ट्रीय राजमार्ग व शिपिंग मंत्रालय में वे लाखों-करोड़ की कई महत्त्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी का वरदहस्त और वीटो ओम माथुर को प्राप्त है, पर संघ नेतृत्व फिलवक्त उनके नाम पर उत्साहित नजर नहीं आ रहा, चुनांचे अगर शाह गए तो भाजपा में राजनाथ के राज की वापसी की प्रबल आसार हैं।

Comments Off on राजनाथ को राज?

मोदी सरकार के 365 दिन

Posted on 26 May 2015 by admin

सत्ता के कंगूरे से सबसे बड़े दर्प का यहर् शत्तिया ऐलान है, मोदी सरकार केंद्र में अपने कार्यकाल के एक वर्ष 26 मई को पूरे करने जा रही है, सरकार के रणनीतिकार इसे एक वर्ष के बजाए 365 दिन कहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, पहले तय था कि 20 मई के दिन एक औपचारिक प्रेस कांफ्रेंस कर उसमें सरकार की उपलब्धियां गिनाई जाएंगी, बाद में तय हुआ कि सरकार के सभी प्रमुख मंत्री अलग-अलग प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार की उपलब्धियों का बखान करे, 22 मई से यह सिलसिला शुरू हो चुका है, अरुण जेतली, नितिन गडकरी, मनोहर पार्रिकर, रविशंकर प्रसाद जैसे मंत्रियों ने यह सिलसिला शुरू कर दिया है, जो मंत्री प्रेसवार्ता नहीं कर पा रहे वे अनौपचारिक रूप से पत्रकारों को बुलाकर उनके समक्ष अपनी बातें रख रहे हैं, मंत्री अलग-अलग राज्यों की राजधानियों में प्रेस व लोगों के समक्ष सरकार की उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं। पर इस दफे कांग्रेस भी पलटवार को तैयार है, कांग्रेस के कोई 135 प्रमुख नेतागण दिल्ली व राज्यों की राजधानी व अन्य प्रमुख शहरों का रुख कर रहे हैं, प्रेस वार्ताएं कर रहे हैं, टीवी डिबेट में हिस्सा ले रहे हैं और मोदी सरकार के ‘पोल खोल’ का उपक्रम साध रहे हैं, वहीं इन बातों से बेखबर केंद्र सरकार 26 मई को बेहद शोर-शराबे के साथ किसान टीवी लांच करने जा रही है।

Comments Off on मोदी सरकार के 365 दिन

अर्जुन की रथी

Posted on 26 May 2015 by admin

जिंदगी चाहे जैसी भी हो अपने ठसक में गाती रहती है गीत उत्सव के, मौका था नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम का, यह कार्यक्रम राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी कृतियों ‘परशुराम की परीक्षा’ और ‘संस्कृति के चार अध्याय’ के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर आहूत था, बिहार के एक प्रमुख नेता सीपी ठाकुर इस कार्यक्रम केर् कत्तर्ाधत्ता थे और स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। सुबह के साढ़े दस मोदी को कार्यक्रम में आना था, कोई 9.40 बजे के आसपास झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा अपनी एक महिला मित्र के पास मुख्य द्वार पर पहुंचे। पर गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, क्योंकि मुंडा और उनकी महिला मित्र के पास कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र तो था, पर अपना कोई पहचान पत्र नहीं था, कोई आधे घंटे की हील-हाुत के बाद सुरक्षाकर्मियों ने इन्हें अंदर जाने दिया, तब तक इनके अंदर का गुबार बाहर आ चुका था।

Comments Off on अर्जुन की रथी

भाजपा का यूपी चैलेंज!

Posted on 26 May 2015 by admin

भले ही राष्ट्र को बदलने के दंभ में खुद को बदलने की चाहत मलिन पड़ चुकी हो, पर संघ नेतृत्व यूपी में आनन-फानन में बड़ा बदलाव चाहता है। सो, यूपी में नए भगवा अध्यक्ष को लेकर कयासों के बाजार गर्म है। संघ की राय में वरुण गांधी यूपी में पार्टी का सबसे करिश्माई चेहरा हो सकते हैं, पर इसको लेकर मोदी व शाह की अपनी अलग निजी राय है। सो, स्वतंत्र देव सिंह का नाम भी चल पड़ा है जो एमएलसी रहे हैं और बुंदेलखंड में खासे प्रभावी भी हैं। इसके अलावा गोरखपुर के शिवप्रताप शुक्ला, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व गुजरात प्र्रभारी दिनेश शर्मा और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी के नाम भी अध्यक्षीय रेस में शामिल हैं। वरुण गांधी जहां यूपी के भाजपा कार्र्यकत्ताओं की पसंद बनकर उभरे हैं, स्वतंत्र देव सिंह को संघ से नजदीकियों का लाभ मिल रहा है, दिनेश शर्मा को अमित शाह का वरदहस्त प्राप्त है, वहीं शिवप्रताप शुक्ला अपने धन-बल के चलते रेस में बने हुए हैं, वहीं लक्ष्मीकांत वाजपेयी के कर्मों का एक पूरा चिट्ठा संघ के पास बताया जा रहा है और यही वाजपेयी जी के गले का फांस बन गया है।

Comments Off on भाजपा का यूपी चैलेंज!

अमेठी में राहुल इफेक्ट!

Posted on 26 May 2015 by admin

आदिम जादू की स्मृतियां भर रह गई हैं शेष, जो अनगढ़ यथार्थ से टकराकर खुल रही है परत दर परत, यह भाजपा के एक महामंत्री की आंखों-देखी है वे उसी रोज सड़क मार्ग से अंबेडकर नगर जा रहे थे, जिस रोज कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का अमेठी आगमन था, भाजपा नेता ने देखा कि रास्ते में आने वाले हैदरगढ़, गौरीगंज, इन्होना और मुसाफिरखाना में राहुल के लिए जर्बदस्त भीड़ जुटी थी, हजारों की भीड़, जो स्वतर्:स्फूत थी। वहीं दूसरी ओर भाजपा के स्थानीय नेता अपनी केंद्रीय नेत्री स्मृति ईरानी के दौरे को सफल बनाने के लिए पिछले 15 दिनों से जुटे थे, स्थानीय किसानों के बीच यह तुर्रा भी उछाला गया कि स्मृति के साथ कृषि मंत्री भी आ रहे हैं किसानों को उनकी बर्वाद हो गई फसलों के मुआवजे का चेक बांटने। अमेठी में ठाकुरों के एक गांव में एक पुराने भाजपाई के घर मंत्री जी के लिए सभा रखी गई, जिसमें बस गिनती के लोग जुटे। उसी सभा में गांव के एक पुराने स्वतंत्रता सेनानी एक पंडित जी को बोलने के लिए माइक दी गई, पर माइक संभालते ही उन्होंने मोदी सरकार के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया और महंगाई के लिए केंद्र सरकार को कोसने लगे तो उनसे जबरन माइक वापिस ले लिया गया, सभा में हंगामे का माहौल बना रहा। और उन्हीं आंदोलित लम्हों को हथेलियों में समेट कटु स्मृति लिए मंत्री जी दिल्ली लौट आईं।

Comments Off on अमेठी में राहुल इफेक्ट!

अच्छे दिन बाल-बाल आए

Posted on 17 May 2015 by admin

क्या वास्तव में यह नश्वरता की पहली आहट है, नई चीजो के होने और आने की उम्मीद? भाजपाध्यक्ष अमित शाह के इकलौते पुत्र जय शाह न सिर्फ अपने पिता के लाडले हैं, अपितु महत्त्वपूर्ण राजनैतिक मसलों पर अपनी बेबाक राय से भी समय-समय पर उन्हें अवगत भी कराते रहते हैं। सो, 2014 के आम चुनाव की बेला में जब मोदी व शाह की जोड़ी देश की जनता को ‘अच्छे दिनों’ के दिवास्वप्न दिखा रही थी, लगभग उसी दौर में जय ने अपने गिरते बालों से परेशान होकर ‘हेयरट्रांसप्लांट’ कराना ही मुनासिब समझा, क्योंकि आठ-नौ महीने बाद ही उनकी शादी होने वाली थी, जिस दिन दिल्ली चुनाव के नतीजे आए, जय की शहनाई भी उसी दिन बजी। और अच्छे दिनों की आहट के आलोक में आज न सिर्फ जय के लिए अच्छे दिन आ गए हैं, अपितु उनके सिर पर भी बालों की उन्नत फसल लहरा रही है।

Comments Off on अच्छे दिन बाल-बाल आए

साब! दाल में कुछ काला है

Posted on 17 May 2015 by admin

अब यह सवाल तूल पकड़ने लगा है कि भाजपा शासित राज्य के एक युवा मुख्यमंत्री, मोदी के मुंहलगे उद्योगपति के साथ एक बड़े हथियार निर्माता कंपनी के आमंत्रण पर क्यों आनन-फानन में स्वीडन जा पहुंचे, और ‘साब’ के साथ मिलकर इस कंपनी ने एक ज्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया और सबसे अहम बात यह कि इन दोनों महत्त्वपूर्ण भारतीयों के होटल बिल भी इसी हथियार निर्माता कंपनी ने अदा किए। तूफान की आहट भांपकर कुछ पंक्षी हड़बड़ाहट में घोंसले से बाहर निकलते हैं, कुछ तेजी से घोंसलों की ओर वापिस लौटते हैं, दोनों के अपने-अपने सच हैं।

Comments Off on साब! दाल में कुछ काला है

लाडवा का लेबर पेन

Posted on 17 May 2015 by admin

असफलता हमेशा पीछे से आवाज देती है, सफलता सामने से पुकारती है, 2014 के चुनावों में मोदी के चुनावी अभियान को एक नई धार देने वाले मनोज लाडवा इस बार ब्रिटेन में सियासी हवा के रुख को भांपने में चूक गए। लंदन में रहने वाले लाडवा ने अपना सारा दांव लेबर पार्टी व एड मिलीबैंड पर लगा दिया था, क्योंकि एक वक्त चुनाव पूर्व सर्वेक्षण लेबर पार्टी की मामूली बढ़त दिखाने लगे थे। भाजपा के कई बड़े नेता लाडवा के सौजन्य से लेबर पार्टी के संसर्ग और भरोसे में थे। लंदन में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों को लेबर पार्टी के पक्ष में लामबद्द करने के कई भगवा उपक्रम भी साधे गए थे, पर जैसे ही वहां की जनता ने जेम्स कैमरून और उनकी कंजरवेटिव पार्टी के पक्ष में फैसला सुनाया लाडवा इन दिनों मुख्य सियासी परिदृश्य से ओझल हो गए हैं। वे इन दिनों कहां है, किसी को कानों कान खबर नहीं।

Comments Off on लाडवा का लेबर पेन

अब नहीं लुभाता नक्सलवाद

Posted on 17 May 2015 by admin

आईबी की एक हालिया रिपोर्ट में नक्सलवाद के घटते असर का संकेत मिलता है, सूत्र बताते हैं कि देश की इस प्रमुख खुफिया एजेंसी ने अभी अपनी एक संवेदनशील रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि कल्याणकारी और रोजगार परक सरकारी योजनाओं मसलन मनरेगा, ग्रामीण सड़क योजना के प्रभावी होने के बाद ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कार्यरत नक्सल संगठनों में नईर् भत्तियां में तेजी से गिरावट आई है। इस बाबत एक प्रमुख माओवादी नेता गणपति ने भी स्वीकार किया है कि विगत दिनों में माओवादी संगठनों से जुड़े अतिवादी समूहों में आत्मसमर्पण करने की एक नई परंपरा का आगाज हुआ है, नक्सली संगठन भी अपनी ओर से यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या वाकई नक्सलवाद से लोगों खासकर आदिवासी लोगों का तेजी से मोहभंग हो रहा है? सच है, दुख की सघनता और मन की व्यग्रता जब कोई पता नहीं ढूंढ पाती है, तो नई रोशनी का दामन थाम लेती है।

Comments Off on अब नहीं लुभाता नक्सलवाद

मोदी का ‘लोंग कोट’ 12 लाख का?

Posted on 09 May 2015 by admin

शब्दों को अभिव्यक्ति के सर्वोत्तम हथियार के मानिंद इस्तेमाल करना उनसे बेहतर कौन जान सका है, चुनांचे उनके महंगे कपड़ों को लेकर जब देश भर में आलोचनाओं का माहौल बना, तो चतुर सुजान मोदी ने ज्ञान दिया कि ‘उनके अंदर ‘डिजाइनर सेंस’ भगवान प्रदत है’ इस दफे वे जब जर्मनी, फ्रांस व कनाडा की यात्रा पर गए, तो पेरिस पहुंच कर उन्हें आत्मज्ञान हुआ कि बर्लिन और ओटावा(कनाडा) में ज्यादा ठंड झेलनी पड़ सकती है। आनन-फानन में उनके एक मुंहलगे उद्योगपति मित्र को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे प्रधानमंत्री के लिए गर्म कपड़ों का प्रबंध करे। सूत्र बताते हैं कि पीएम के डिजाइनर टेस्ट को मद्देनजर रखते हुए पेरिस स्थित एक प्रमुख इटेलियन डिजाइनर लोरनो पियेना (Lorno Piana) के एवेन्यू मोंटेगनी (Avenue Montaigne)स्थित स्टोर से कोई एक दर्जन सूट और लोंग सूट उनको दिखाने के लिए उनके होटल प्लाजा ऐथिना में लाया गया। इन कपड़ों की कीमत 4 हजार से लेकर 20 हजार यूरो के बीच थी। प्रधानमंत्री को स्कार्फ के साथ जो लोंग कोट पसंद आया, भारतीय मुद्रा में उसकी कीमत कोई 12 लाख रुपए बताई जाती है। बाद में प्रधानमंत्री ने इस लोंग कोट को बड़े शौक से बर्लिन और कनाडा की यात्राओं में पहना और पूरी दुनिया में उनकी पसंद की वाहवाही हुई। सच है भारत में लोकतंत्र एक ऐसा प्रहर है जहां सूरज के डूबने और उगने की कोई आवाज नहीं होती।

Comments Off on मोदी का ‘लोंग कोट’ 12 लाख का?

Download
GossipGuru App
Now!!