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कोई गल नहीं राहुल

Posted on 22 March 2016 by admin

कांग्रेस के उत्साही उपाध्यक्ष अपनी कार्यशैली बदलने को आमदा जान पड़ते हैं, अपनी आदत से अलहदा अब राहुल मीडिया वालों को अपने घर आमंत्रित कर रहे हैं। उनसे अपनी दिल की बातें शेयर कर रहे हैं। सबसे पहले राहुल ने न्यूज़ चैनल व अखबार मालिकों को न्यौता भेजा, वक्त की नज़ाकत को भांपने में माहिर बस गिनती के ही मीडिया स्वामीगण राहुल के घर पहुंचे, इसके कोई एक महीने यानी पिछले सप्ताह अखबार के संपादकों व ब्यूरो प्रमुखों को राहुल के यहां से आमंत्रण मिला दिल्ली के एक खोजी अंग्रेज़ी दैनिक के युवा मालिक अपने संपादक को साथ लेकर राहुल की महफिल में शरीक हुए।विदेश से पढ़े-लिखे ये युवा अखबार मालिक महीने भर पहले भी राहुल से मिल आए थे, जब राहुल की ओर से अखबार मालिकों को न्यौता गया था। पर उस रोज़ राहुल उन्हें पहचान नहीं पाए और उनका परिचय पूछ बैठे, युवा अखबार मालिक ने इसका बुरा माना और उन्हें इस बात का ज्यादा रंज़ था कि उनके ही अखबार के संपादक ने उनका परिचय फिर राहुल से करवाया। राहुल की इस छोटी-सी भूल ने उस अखबार मालिक को इतना आहत कर दिया कि वे चंद मिनटों में ही वहां से निकल गए, राहुल के रोकने पर भी न रूके।

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दांव पर राजनाथ

Posted on 22 March 2016 by admin

आने वाले यूपी चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति अभी से स्पष्ट कर दी है कि वह यूपी चुनाव में अपने प्रधानमंत्री की साख दांव पर नहीं लगाएगी। बिहार में इसका हश्र देखकर टीम अमित शाह ने यूपी चुनाव में कद्दावर ठाकुर नेता राजनाथ सिंह का चेहरा सामने रखने का फैसला किया है। भगवा पार्टी ने अभी मंडल स्तर पर छह रैलियां घोशित की हैं, समझा जाता है इन रैलियों में मोदी के बजाए शाह और सिंह की जोड़ी सामने रहेगी। चंद रोज़ पूर्व पश्चिमी यूपी के चार विधायक मिठाई का डिब्बा लेकर राजनाथ सिंह के घर पहुंचे और उनका मुंह मीठा कराया कि ’अब तो बस आप ही हैं हमारे नेता’पर राजनाथ के लिए यह मिठाई न निगलते बन रही थी और न उगलते। जाने-अनजाने अंदर ही अंदर उन्हें यह भय सता रहा है कि मोदी निर्देशित टीम शाह कहीं उन्हें यूपी में बलि का बकरा बनाने का इरादा तो नहीं रखती है?

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अकेले पड़ते अज़मल

Posted on 22 March 2016 by admin

असम में मौलाना बदरूद्दीन अज़मल अपने ही जाल में फंस गए लगते हैं। सूत्र बताते हैं कि चूंकि अंदरखाने से उन्होंने भाजपा से अपने हाथ मिला रखे थे, चुनांचे बड़े मुस्लिम नेता और संगठन उनके साथ आने से हिचकिचा रहे हैं। इतना ही नहीं उनकी कंपनी द्वारा उत्पादित ’अगर’(एक तरह की खुशबू) के खरीददार और मौलाना को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले खाड़ी देशों के शेख भी इस बात से खुश नहीं है कि मौलाना का किसी प्रकार का घोषित या अघोषित जुड़ाव भाजपा के साथ हो। चुनांचे पिछले दिनों जब अज़मल ने बारपेटा की अपनी चुनावी रैली के लिए जमीयते हिंद समेत कुछ अन्य मुस्लिम संगठनों को न्यौता भेजा तथा एमआईएम के ओवेद्दीन ओवैसी को बकायदा फोन कर रैली में शामिल होने की गुजारिश की, पर इनमें से कोई भी नहीं आया। इन मुस्लिम संगठनों व नेताओं का ऐसा मानना था कि वे जितना ज्यादा एक्टिव होंगे, चुनाव में इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। सो, ये शांत रह कर अंदरखाने से कांग्रेस की मदद करना चाहते हैं।

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श्री श्री और माल्या में क्या है कॉमन?

Posted on 13 March 2016 by admin

विजय माल्या ट्वीट कर के कह रहे हैं कि ’वे भगोड़े नहीं’, जीने का सलीका सिखाने वाले धर्म गुरू श्री श्री रविशंकर खम्म ठोंक कर कहते रहे कि चाहे भेज दो जेल में पर वे एनजीटी द्वारा लगाया गया 5 करोड़ का जुर्माना नहीं भरेंगे, अब सवाल उठता है कि चार्वाक दर्शन के एक पुजारी और एक अध्यात्मिक गुरू में यह कैसी तुलना है भला? वह यह कि बढ़-चढ़ कर बयान देने वाले इन दोनों लोगों को सत्ता पक्ष का आशीर्वाद प्राप्त है, दुनिया जानती है कि माल्या को सात समंदर पार भगाने में मोदी सरकार के एक शक्तिशाली मंत्री की एक अहम भूमिका है, यह मंत्री महोदय साउथ से आते हैं और इनकी माल्या से दोस्ती तब से है, जब माल्या को जेडीएस के सहयोग से निर्दलीय राज्यसभा में आना था और देवेगौड़ा की पार्टी उनके लिए मात्र 7 सीटों का ही जुगाड़ कर पा रही थी, पेश 34 की गिनती भाजपा के साथ से ही पूरी हो सकी थी, तब इस भाजपा नेता ने कर्नाटक भाजपा के तत्कालीन प्रभारी अरूण जेटली से अनुनय-विनय कर माल्या की नैया पार करवाई थी। कहते हैं कि एवज में माल्या ने भी भाजपा नेता को अनुग्रहित किया, अपने महंगे यॉट्स, महंगे होटलों और महंगे तोहफों से उन्हें तर कर दिया, और इस दरम्यान कुछ अंतरंग पल कैमरे में ऐसे कैद हो गए जो मंत्री जी से मोलभाव करने के लिए काफी थे। सूत्र बताते हैं कि मंत्री जी के दबाव की वजह से सीबीआई को माल्या के लिए जारी अपने लुकआउट नोटिस की जुबान बदलनी पड़ी और अपनी लंदन की उड़ान के दौरान इमिग्रेशन वालों ने भी माल्या के ऊपर अपनी नज़रे इनायत बनाए रखी, दुनिया ने देखा कि श्री श्री के प्रोग्राम में कुदरत की तमाम बाधाओं (आंधी तूफान व ओलावृष्टि) को लांघते पीएम वहां पहुंचे, कार्यक्रम का आनंद लिया और ओजपूर्ण भाषण दिया। जब एनजीटी द्वारा लगाए गए जुर्माना को श्री श्री के लोगों ने यह कहते हुए भरने से मना कर दिया कि वह एक धार्मिक संगठन है और उनके पास पैसे नहीं। तब कांग्रेस व वाम नज़रिए को पोषित करने वाले एक न्यूज चैनल ने श्री श्री के संगठन के बैंक खातों के डिटेल को खंगालना शुरू किया, तो पता चला कि यह धार्मिक गुरू वाकई कितने अमीर हैं। चैनल का दबाव काम आया, आनन-फानन में जुर्माने की पहली किश्त 25 लाख भर दी गई। पीएम का दिल भी भर आया और सत्ता पक्ष भी भर-भर कर दोनों हाथों से नज़रे इनायत लुटाने को स्वतंत्र हो गया है।

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एक नए गांधी का अभ्युदय

Posted on 13 March 2016 by admin

गांधी परिवार के संस्कारों में पले-बढ़े सुल्तानपुर के भाजपा सांसद वरूण गांधी जानते हैं कि सियासत में जब प्रतिकूल वक्त हो तो किस दिशा चलनी चाहिए और अपने लिए कौन सी नई राह बनानी चाहिए। सो, इन दिनों देश के अलग-अलग अखबारों में उनके विचारोंत्तेजक लेख आ रहे हैं, संसद में वे गंभीर प्रश्न पूछ रहे हैं, कविता करना उनका सबसे प्रिय शगल है, लिहाज़ा इन दिनों उनका कवित्व उनके राजनेता पर कहीं ज्यादा हावी हो गया है, 13 मार्च को उनका जन्मदिन आता है, अपने जन्मदिन को मनाने का उन्होंने एक नायाब तरीका ढूंढा है, वे अपने जन्मदिवस के दिन यूपी में किसानों के बीच जा रहे हैं। वे मुरादाबाद के तीन गांवों धाकी, नीवाड़ खास और सरकारा परम जा रहे हैं, जहां वे उन किसान परिवारों को अपने संसदीय वेतन से 1-1 लाख की मदद की रकम का चेक सौपेंगे, जिन परिवारों के मुखियाओं ने खेती-किसानी से तंग आकर आत्महत्या कर ली हैं। सनद रहे कि वरूण पिछले वर्ष भी आगरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सीतापुर, सुल्तानपुर जैसे जिलों में जाकर किसान परिवारों की आर्थिक मदद कर चुके हैं। 1995 से पहले यूपी में किसानों की आत्महत्याओं के बारे में कभी सुनने को भी नहीं मिलता था, पर आज यूपी भी इस मामले में महाराष्ट्र के नक्शे कदम पर चल पड़ा है। अपनी एक कविता ’इन मॉय हार्ट’ (मेरे दिल में) में यह युवा गांधी कहते हैं-’मेरे हृदय में, मौत की सजावटी बानगियां हैं, पर मैं इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दूंगा, मैं उठूंगा, चलूंगा और शीर्ष पर पहुंचूंगा।’

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प्रशांत का राहुल-कनेक्शन

Posted on 13 March 2016 by admin

मोदी के लोगों को वे फूटी आंखों नहीं सुहाते, पर कार्यशैली और कांग्रेस है कि उन्हें आंखों में भर कर रखते हैं। संदीप दीक्षित और अजय माकन की राय से उलट राहुल व प्रियंका को लगने लगा है कि प्रशांत किशोर वाकई बहुत काम के हैं, उनकी जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ाना चाहिए। पर कम लोगों को ही पता है कि प्रशांत ने भारत में अपनी पारी की शुरूआत राहुल के साथ की थी। तब प्रशांत एक दक्षिण अफ्रीकी देश में अपनी रणनीति बुनने वाली कंपनी चलाते थे, राहुल तक पहुंचने का जब उन्हें कोई माध्यम नहीं मिला तो वे एक दिन राहुल के घर जुटने वाले जनता दरबार में जा खड़े हो गए, राहुल उनसे मिले तो उनकी बातों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके, उन्हें काम पर रख लिया गया, 50 हजार की तनख्वाह पर और किशोरी लाल के साथ उन्हें अमेठी में लगा दिया गया। मोदी को अपनी चुनावी रणनीति बुनने के लिए राहुल के घर का कोई आदमी चाहिए था, जो राहुल को और उनकी कार्यशैली को करीब से जानता हो, प्रशांत काम के थे, काम में आ गए और वे मोदी की कोर चुनावी टीम में शामिल हो गए, जहां से उन्होंने सफलता की एक नई उड़ान भरी।

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निर्मला से मन हुआ मैला

Posted on 13 March 2016 by admin

अगर गौर से देखें तो मोदी कैबिनेट में केवल जेटली करीबी मंत्रियों की ही तूती बोलती है, इनमें से एक कॉमर्स मिनिस्टर निर्मला सीतारमण भी हैं, मुहतरमा जेएनयू की प्रोडक्ट हैं, सो मौके का लाभ उठाना वाकई जानती भी हैं। महज़ बोल-बोलकर और अच्छा बोल कर केंद्र में मंत्री बन गईं, अच्छा मंत्रालय भी पा गईं। पर समय काल से वह अपने मंत्रित्व के आनंद में इस कदर डूब गईं कि अपने कर्णधारों की सुध लेने की भी उन्हें जरा इल्म नहीं रहा। डीडीसीए मुद्दे पर जब उनके तीखे और बड़बोले बालों की जेटली जी को जरूरत थी तो वह एक कांफ्रेंस में साउथ अफ्रीका चली गईं। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों एक महत्त्वपूर्ण कैबिनेट नोट बनना था और उस पर उनके दस्तखत होने थे, तो पता चला कि मंत्री महोदया हैदराबाद चली गईं हैं। इन बातों से खिन्न जेटली ने उन्हें समझा दिया है, अगर वे फिर भी न समझीं, तो फिर आने वाला वक्त उन्हें समझा ही देगा।

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निरूपम पर भरोसा

Posted on 13 March 2016 by admin

कांग्रेस हाईकमान ने विरोधी गुट (गुरदास कामत) के समक्ष यह स्पष्ट कर दिया है कि मुंबई कांग्रेस की कमान फिलवक्त वहां के निवर्त्तमान अध्यक्ष संजय निरूपम के पास ही रहेगी। मुंबई में अभी स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं, जहां शिवसेना -भाजपा का कब्जा है, कांग्रेस हाईकमान चाहता है कि निरूपम अभी अपना सारा ध्यान इन चुनावों पर ही फोकस करे। निरूपम विरोधी गुटों को समझा दिया है कि या तो वे निरूपम के कामों में हाथ बंटाए, या फिर पार्टी विरोधी कार्यवाही के लिए तैयार रहें। निरूपम से भी कहा गया है कि वे तमाम गुटों को साथ लेकर चलने का प्रयास करें।

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अनुराग से नाराज़गी

Posted on 13 March 2016 by admin

हिमाचल भौच्चक है कि दो राजनैतिक परिवारों की व्यक्तिगत लड़ाई में भारत-पाकिस्तान के टी-ट्वेंटी का मैच धर्मशाला की झोली से फिसल कर कोलकाता की झोली में जा गिरा है। सूत्र बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की नाराज़गी अनुराग ठाकुर से इस बात को लेकर ज्यादा है कि वे क्रिकेट मैच को भी हिमाचल में पार्टी इवेंट बना देते हैं, जब भी वहां कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच होता है अनुराग के सौजन्य से पूरा शहर बड़े-बड़े होर्डिंग्स-बैनर से पट जाता है, जिसमें पिता-पुत्र (धूमल-अनुराग) की बड़ी-बड़ी तस्वीरें होती है। वीरभद्र की असल दिक्कत भी यही है कि अनुराग क्रिकेट मैच से भी राजनैतिक लाभ लेने की कोशिश करते हैं। अनुराग से अनुराग रखने वाला कोई उन्हें यह बात समझाता क्यों नहीं है?

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(English) Who will be Congress’ face in UP?

Posted on 08 March 2016 by admin

Leider ist der Eintrag nur auf English verfügbar.

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