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बदले अवतार में स्मृति

Posted on 07 August 2016 by admin

देश की नई कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी इन दिनों एक बदले अवतार में सामने आई है, अब वह एचआरडी मिनिस्ट्री की दिनों की बात नहीं जब मैडम पूरे ठसक के साथ सांसदों के सामने से गुजर जाती थीं, सांसदों के औपचारिक अभिवादन भी कई दफे अनुत्तरित रह जाते थे। सेंट्रल हॉल जाने या वहां बैठने की जहमत भी वह कम ही उठाती थीं, कम ही सांसदों को उनके नाम से जानती थीं। इन दिनों मैडम ईरानी सांसदों के संग सहज होने का उपक्रम साध रही हैं, उनसे हंस-बोल बतिया रही हैं, जब से उन्होंने अपना नया मंत्रालय संभाला है, उन्होंने सेंट्रल हॉल में भी सांसदों के साथ समय बिताना शुरू कर दिया है। जिन सांसदों को वह नहीं जानतीं, विनम्रता से उनका परिचय पूछ रही हैं। कुछ यही हाल इन दिनों बादल परिवार की बहू और केंद्र में मंत्री हरसिमरत कौर बादल का भी है, जिन्हें शायद पंजाब में बदलाव की बयार की आहट लग गई है, कभी संसद में उनके उग्र तेवरों के दर्शन होते थे, आज वह सदन में शांति व धैर्य की प्रतिमूर्त्ति बन गई लगती हैं, संसद में अपने मंत्रालय से जुड़े प्रश्नों के जवाब देते वक्त भी वह विनम्रता का आवारण ओढ़ने का प्रयास करती दिखती हैं। वक्त से बड़ा शिक्षक कोई नहीं, वह जीवन के हर प्रिय-अप्रिय पाठ को कंठस्थ करने के लिए सदैव प्रेरित करता है।

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मनी मनी आप

Posted on 07 August 2016 by admin

पंजाब ने आम आदमी पार्टी के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं, जब से विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों में यह खुलासा हुआ है कि इस दफे पंजाब में आप की सरकार बन सकती है। अप्रवासी भारतीयों ने अपनी थैली का मुंह एकबारगी पुनः केजरीवाल के लिए खोल दिया है। कल तक फंड की कमी से दो-चार हो रही पार्टी की इस वक्त बल्ले-बल्ले है, कई अप्रवासी भारतीय पंजाब के अलग-अलग विधानसभा चुनाव क्षेत्र का पूरा चुनावी खर्च उठाने को तैयार हैं, अब पार्टी के आईटी सेल वाले उनसे कह रहे हैं कि उन्हें पंजाब की एक विधानसभा के साथ गोवा के भी एक विधानसभा को एडॉप्ट करना होगा, कई अप्रवासी भारतीय इस प्रस्ताव पर भी सहमत हो गए हैं। कभी आप सुप्रीमो केजरीवाल कहा करते थे कि उनकी पार्टी एक वक्त में एक ही राज्य का चुनाव लड़ सकती है क्योंकि उनकी पार्टी को फंड की कमी है, लेकिन अब लगता है आप के पास मनी ही मनी है।

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पीके ने फूंकी कांग्रेस में नई जान

Posted on 07 August 2016 by admin

यूपी में कांग्रेस के नए प्रस्फुटन की आहट सुनी जा सकती है। चुनांचे जब मोदी के गढ़ में सोनिया ने रोड शो किया तो वाराणसी में उनका काफिला कई किलोमीटर तक भीड़ के रेलमपेल से सजा रहा, तो इसके चंद रोज पूर्व रविवार के दिन लखनऊ के रमा बाई आंबेडकर स्थल पर राहुल गांधी ने कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं की बैठक ली तो भारी बारिश के बावजूद उसमें 50 हजार से ज्यादा लोग जुटे। इस कार्यक्रम को मूर्त्त रूप देने वाले प्रशांत किशोर की दक्षता देखते ही बनती थी। 65 फीट लंबा एक एक्सटेंडेड रैंप बनवाया गया, जिस पर चल कर राहुल गांधी कार्यकर्त्ताओं से मिलते, हाथ मिलाते और उनसे बतियाते देखे गए। समारोह स्थल पर बड़े-बड़े स्क्रीन लगाए गए थे, कई जिमी जीप पर कैमरे लगे थे, 2 ड्रोन कैमरे तैनात थे, राहुल के साथ-साथ शीला दीक्षित और राज बब्बर ने भी पार्टी कार्यकर्त्ताओं के हर तरह के सवाल स्वीकार किए। राहुल से तो कई चुभते हुए सवाल पूछे गए, मसलन-‘आप तो यूपी आते ही नहीं है, दिल्ली में आपसे मिलना दूर की कौड़ी है, प्रियंका गांधी बस चुनावों के वक्त क्यों नज़र आती हैं? बाकी समय वह कहां रहती हैं? और अपने को सिर्फ अमेठी और रायबरेली तक ही क्यों सीमित रखती हैं? आदि-आदि।’ सबसे खास बात तो यह कि राहुल ने अप्रिय से अप्रिय सवालों के जवाब भी मुस्कुरा कर दिए, लखनऊ का मीडिया यह सारा नज़ारा देख कर हतप्रभ था।

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सिद्धू को मनाना आसान नहीं

Posted on 07 August 2016 by admin

भाजपा है कि उसने अब भी नवजोत सिंह सिद्धू से अपने तार जोड़ रखे हैं। पिछले दिनों दिल्ली के एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक के एक पत्रकार जेतली का संदेश लेकर सिद्धू से मिले, सूत्र बताते हैं कि सिद्धू से कहा गया है कि अगर वे अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को तैयार हैं तो उनकी मुलाकात पीएम से हो सकती है। सूत्रों की माने तो सिद्धू से यह भी कहा गया है कि अगले कुछ दिनों में पीएम अपने गठबंधन साथियों तेलगुदेशम, शिवसेना और अकाली दल के सांसदों को अपनी सरकार में जगह देने के लिए अपने मंत्रिमंडल का एक और विस्तार करने जा रहे हैं, चुनांचे अगर ऐसे में सिद्धू फिर से भाजपा के साथ आने को तैयार हो जाते हैं तो अकाली सांसदों की जगह उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। कहते हैं कि इस प्रस्ताव को सिद्धू ने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया है, यह कहते हुए कि-‘अब इन बातों के लिए बहुत देर हो चुकी है।’

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क्या हो जो राम और कृष्ण में ठन जाए ?

Posted on 31 July 2016 by admin

संघ के भाजपा प्रभारी डा. कृष्ण गोपाल इन दिनों अपनी रणनीतियां बदलने पर मजबूर हुए हैं, संघ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि उनसे कहा गया है कि वे अपने हर निर्णय से पहले भैयाजी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले व सुरेश सोनी जैसे नेताओं से मंत्रणा करें। सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ दिनों में डा. गोपाल के व्यवहार को लेकर संघ व भाजपा शीर्ष नेतृत्व के पास कई गंभीर शिकायतें आई हैं। इसमें सबसे पहली शिकायत है कि वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं, अब भी एक शिक्षा मंत्री की तरह आचरण कर रहे हैं। कहते हैं स्मृति ईरानी और रमाशंकर कथीरिया को इनसे नजदीकियों का ही खामियाजा उठाना पड़ा है। संघ की कानपुर की बैठक में भी कई प्रचारकों की इस बाबत शिकायतें आईं। डा. गोपाल के बारे में एक शिकायत आम है कि वे संघ व भाजपा कार्यकर्त्ताओं के फोन नहीं लेते और न ही कॉल बैक करते हैं, सूत्र बताते हैं कि इसका ठीकरा डा. गोपाल ने अपने निजी सचिव पर फोड़ते हुए उन्हें पद से हटा दिया है, यह कहते हुए कि सचिव ऐसे फोन कॉल्स की उन्हें सूचना ही नहीं दिया करते थे। डा. गोपाल पर एक आरोप जो पहले से लगते आए हैं कि वे ब्राह्मणवाद के मुखर पोषक हैं। सूत्र बताते हैं कि इन दिनों डा. गोपाल और भाजपा के रामलाल में भी ठनी हुई है, कृष्ण गोपाल को ऐसा लग रहा है कि रामलाल उनके खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहे हैं। पर रामलाल तो वही कर रहे हैं जो राम की इच्छा।

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दीदी के मिशन’19 को धार देंगे तृणमूल सांसद

Posted on 31 July 2016 by admin

ममता बनर्जी को बंगाल की 16 की महाजीत ने 19 के सपने दिखा दिए हैं। 2019 के आम चुनाव के लिए दीदी ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी है, पिछले दिनों जब दीदी दिल्ली पधारीं तो सिर्फ इसी वजह से उन्होंने दो दिनों तक यहां प्रवास किया। तृणमूल सांसदों को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया और उनसे अपनी दिल की बातें शेयर की। दीदी को लगता है कि अगर अभी से जुटा जाए तो फिर अगले आम चुनाव में बंगाल में 35-36 सीटें लाई जा सकती हैं। दीदी ने 5 सांसदों का एक कोर ग्रुप बना सौगत राय को उसका संयोजक नियुक्त किया है, इस कमेटी का काम तीसरे मोर्चे को पुनर्जीवित कर इसके नेताओं से दीदी का सीधा संवाद स्थापित करवाना है। कोर कमेटी के हर सदस्य के जिम्मे कुछ राजनैतिक दलों को साधने का काम सौंपा गया है, कोर ग्रुप उस राजनीतिक दल से बेहतर संवाद स्थापित कर उसे दीदी के पक्ष में तैयार करेगा। मसलन सौगत राय को जैसे कांग्रेस व एनसीपी का जिम्मा दिया गया है, तो डेरेक-ओ-ब्रॉयन बीजू जनता दल के संपर्क में रहेंगे। सूत्र बताते हैं कि दीदी ने सांसदों की अपनी इस बैठक में साफ कर दिया कि पार्टी सांसदों को भाजपा के साथ भी अपने रिश्ते मधुर बना कर रखने चाहिए। जब इस कोर कमेटी से दिनेश त्रिवेदी को बाहर रखा गया तो त्रिवेदी ने अनुनय भाव से दीदी से विनती की-‘मेरा रिश्ता तो हर दल से है और आपने मुझे कोर कमेटी में ही नहीं रखा।’ तो मौके की नज़ाकत को भांपते दीदी ने पलटवार किया-‘सही है, आपके हर पार्टी से अच्छे रिश्ते हैं, सिवा हम से।’ और डिनर की मोमबतियां बुझ गईं।

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तीसरे मोर्चे के नेताओं पर डोरे

Posted on 31 July 2016 by admin

अगले रोज़ फिर से सांसदों के लिए रात्रि भोज का आयोजन था और डिनर में दीदी एक फड़कते आइडिया के साथ अवतरित हुईं। दीदी ने अपने सांसदों से कहा कि अगले कुछ रोज से तीसरे मोर्चे के संभावित दलों के नेताओं का स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से कोलकाता में भव्य स्वागत कार्यक्रम रखा जाएगा, स्थानीय क्षत्रपों के स्वागत समारोह में स्वयं दीदी व्यक्तिगत तौर पर मौजूद रहेंगी और इन नेताओं के सम्मान में अपनी ओर से एक रात्रि भोज का आयोजन भी करेंगी। इस कड़ी में पहला नाम एनसीपी नेता शरद पवार का चुना गया है, इसकी अगली कड़ी में तेलगु देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू को बुलाने की तैयारी है, फिर नीतीश कुमार व अरविन्द केजरीवाल सरीखे नेताओं का नंबर लग सकता है। डिनर में शामिल एक तृणमूल सांसद ने दीदी से यह जानना चाहा कि तमिलनाडु में द्रमुक या अन्नाद्रमुक किसके साथ रिष्ता बनाना है, तो दीदी ने समझाया-अन्नाद्रमुक के साथ ज्यादा नहीं दिखना है, तमिलनाडु की परंपरा के अनुसार 2019 के चुनाव में डीएमके ज्यादा बेहतर कर सकती है।

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चले रघुवर निवेश जुटाने

Posted on 31 July 2016 by admin

झारखंड से बड़े पैमाने पर उद्योगपतियों का पलायन हो रहा है। उद्योगपतियों की आम शिकायत है कि उन्हें न तो जमीन वाजिब दाम पर मिल रही है, साथ ही राज्य में बिजली-पानी का भयंकर संकट है और नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में कुशल मजदूर मिलना भी टेढ़ी खीर है। इन बातों से बेखबर झारखंड के उत्साही मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने राज्य में आगामी 16-17 फरवरी को बड़े पैमाने पर ‘ग्लोबल इनवेस्टर मीट’ की अलख जगा रहे हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री अपने खास चार्टर्ड विमान से देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्राएं कर रहे हैं और संभावित निवेशकों को आमंत्रण देने का ताना-बाना बुन रहे हैं। जबकि हर बड़े उद्योगपति और पीएसयू की झारखंड में उपस्थिति पहले से ही देखी जा सकती है, यहां टाटा, बिड़ला, अदानी, जिंदल, सेल, एनटीपीसी, कोल इंडिया की पहले से उपस्थिति है। फिर भी लालफीताशाही की चपेट में आकर 22 माईन्स पहले से बंद हैं जो निवेशकों की चिंता की मुख्य वजह बनी हुई है।

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योगी का नैराश्य भाव

Posted on 31 July 2016 by admin

गोरखपुर में पीएम की रैली के बाद पूर्वांचल के एक कद्दावर नेता योगी आदित्यनाथ पार्टी में अनमना सा महसूस कर रहे हैं। दरअसल गोरखपुर की रैली को लेकर पीएम ज्यादा खुश नहीं हुए, सूत्र बताते हैं कि मंच पर वहीं बैठे-बैठे उन्होंने यूपी के प्रभारी ओम माथुर से अपनी नाराज़गी जता दी, एक तो जिस ग्राउंड में रैली का आयोजन हुआ था वह काफी छोटा था और उसमें भी कायदे से भीड़ नहीं जुटी थी। सूत्र बताते हैं कि इस रैली में भीड़ जुटाने का जिम्मा योगी और सुनील बंसल के जिज्मे था। बंसल ने अपने हाथ झाड़ लिए और ठीकरा योगी के सिर फोड़ दिया। यूपी के भाजपा प्रभारी ओम माथुर ने पीएम को सफाई देते हुए कहा-‘बारिश हो रही थी और इस समय किसान भी व्यस्त रहते हैं।’ कहते हैं इस पर मोदी ने दो-टूक कहा-‘मैं जमीन से जुड़ा व्यक्ति हूं, अगर बारिश हो रही है तो फिर किसान कैसे व्यस्त रह सकते हैं, वैसे भी बारिश सुबह 9 बजे रूक गई थी।’ इस रैली के अगले रोज योगी ने अपने समर्थकों की बैठक बुलाई और उस बैठक में वे किंचित भावुक हो गए, उन्होंने कहा कि भाग्य से उन्हें सब कुछ मिला, वे बाबा गोरखनाथ पीठ के सर्वेसर्वा हैं, अब उन्हें ज्यादा की आस नहीं है। इसके बाद ही उनका बयान आया कि वे सीएम पद की रेस में नहीं हैं। इसी कड़ी में योगी ने अपने झांसी और आगरा के कार्यक्रम रद्द कर दिए, सुना है कि अब पार्टी में उन्हें मनाने के प्रयास जारी है।

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…और अंत में

Posted on 31 July 2016 by admin

यूपी की बदलती बयार को लेकर स्वयं पीएम चिंता में बताए जा रहे हैं, दयाशंकर सिंह मामले के बाद पार्टी ने यूपी के हालात को समझने के लिए जो सर्वे करवाया है, उसके नतीजों ने पार्टी हाईकमान की पेशानियों पर बल ला दिए हैं। दयाशंकर मामले के बाद दलित और सवर्ण वोटों का विभाजन साफ दिखने लगा है। 2014 के इस लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को 35-37 फीसदी दलितों (गैर जाटव) के वोट मिले थे, इस सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 7-9 प्रतिशत पर सिमट आया है। 14 के चुनाव में भाजपा को तकरीबन 80-85 फीसदी अगड़ों के वोट हासिल हुए थे, अब यह आंकड़ा 55 फीसदी पर सिमट आया है। सूत्र बताते हैं कि पीएम ने अपने विश्वासपात्र हनुमान शाह को कायदे से समझा दिया है कि वे यूपी चुनाव को पीएम या स्वयं की प्रतिष्ठा का सवाल न बनाएं, व रोज-बरोज यूपी में अपना कार्यक्रम लगाने से बचे और पीएम की सभाएं भी महीने डेढ़ महीने में एक बार लगाएं, बदलती फिज़ाओं की आहटें मोदी से बेहतर और कौन भांप सकता है?

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