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भाजपा-एनसीपी में क्या खिचड़ी पक रही है?

Posted on 13 December 2016 by admin

सूत्रों की मानें तो अपने दिल्ली प्रवास के दौरान एक से ज्यादा बार उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगा पर उन्हें नाकामी ही हाथ लगी। जानकार इसकी वजह भाजपा के चाणक्य अमित शाह के उस रणनीति को मानते हैं, जिसके तहत टीम शाह महाराष्ट्र में अपने लिए नए दोस्तों की तलाश में जुटी है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार व प्रधानमंत्री की पिछली मुलाकात को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है कि भाजपा व एनसीपी के बीच कुछ तो खिचड़ी पक रही है। यूं भी महाराष्ट्र में अभी बीएमसी (बृहन मुंबई नगर पालिका) के चुनाव होने वाले हैं, जिसे भाजपा अपने दमखम पर जीतना चाहती है, मुमकिन है इससे पहले वे अपने गठबंधन साथी शिवसेना को सरकार से बाहर का रास्ता दिखा दे और उनकी कमी एनसीपी पूरी कर दें। बीएमसी चुनाव को लेकर टीम शाह के पास एक मेगा प्लॉन है जिसके तहत स्वयं प्रधानमंत्री मुंबई चुनाव प्रचार के लिए जा सकते हैं। पीएम मुंबई की हर संसदीय क्षेत्र में एक चुनावी सभा को संबोधित कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो पीएम की 6 रैलियों का ताना-बाना कहीं पहले ही बुना जा चुका है। अगर भाजपा-एनसीपी की यह नई दोस्ती परवान चढ़ी तो एनसीपी की केंद्र सरकार में भी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो सकती है और उन्हें मोदी सरकार में एक कैबिनेट व एक राज्य मंत्री का कोटा मिल सकता है, सच है कि सियासत अनिश्चिताओं का सबसे बड़ा खेल है।

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राष्ट्रपति के मेहमान ठाकरे परिवार

Posted on 13 December 2016 by admin

क्या यह माननीय प्रणब मुखर्जी की ‘प्रेंसिडेशियल डिप्लोमेसी’ का हिस्सा है कि वे ताकतवर क्षत्रपों को चुन-चुन कर राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर रहे हैं और उन्हें अपना मेहमान बना रहे हैं। अभी चंद रोज पूर्व यह सौभाग्य ठाकरे परिवार को नसीब हुआ, सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति भवन की ओर से मिले आमंत्रण पर उद्धव, रश्मि व आदित्य ठाकरे माननीय राष्ट्रपति के मेहमान बने और उनकी आवभगत का लुत्फ उठाया। कालांतर में ऐसा सौभाग्य विभिन्न सियासी दलों के कई अन्य क्षत्रपों को भी मिल चुका है। जानकार इसे प्रणबदा की पीआर एक्सरसाइज करार देते हैं और यह भी बताते हैं कि मोदी और उनकी सरकार के प्रति माननीय का एक बेहद सॉफ्ट नज़रिया उनकी इसी रणनीति का एक हिस्सा मात्र है।

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मोदी हैं तो क्या गम है

Posted on 05 December 2016 by admin

नोटबंदी के बाद उपजे हालात का जायजा लेने भाजपा सांसदों की एक अहम बैठक आहूत की गई, इस बैठक को प्रधानमंत्री ने स्वयं संबोधित किया। मंच पर मोदी के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता अडवानी को भी जगह मिली थी, वित्त मंत्री अरूण जेटली भी मंचासीन थे और वेंकैया नायडू एमसी की नई भूमिका में अवतरित हुए थे। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के खत्म होने के उपरांत पार्टी सांसदों से पूछा-’किन्हीं का कोई सवाल या सुझाव?’ पर हर ओर चुप्पी छाई रही। इस चुप्पी के मर्म को भांपते हुए, दिल्ली से भाजपा सांसद रमेश विधूड़ी ने जोर का हरकारा लगाया-’ हर हर मोदी, हर घर मोदी’ और आत्ममुग्धता के इस नोट पर बैठक खत्म हो गई।

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सांसद चले विदेश, छोड़ के अपना भेष

Posted on 05 December 2016 by admin

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन यूं तो बेहद मिलनसार स्वभाव की हैं, लेकिन जब बात सांसदों के परफॉरमेंस की होती है तो उनका रुख किंचित कठोर हो जाता है। विभिन्न कमेटियों के तहत युवा सांसदों के विदेश जाने का चस्का पुराना है, सो सुमित्रा ताई चाहती हैं कि जो सांसद जिस उद्देश्य से विदेश यात्रा कर रहा है कम से कम उसके उद्देश्यों के साथ तो न्याय करे, यानी तयशुदा बैठकों में तो अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। पिछले दिनों स्पीकर ने अपने चैंबर में बुलाकर दो सांसदों की जमकर क्लास ली। इनमें से एक भाजपा के युवा उदीयमान सांसद एक हिंदी राज्य से हैं, वे ऐसे ही किसी कमेटी का हिस्सा बनकर नार्वे गए थे, इस जनाब ने वहां मीटिंग में कम हिस्सा लिया, अपने एक पूर्व सांसद मित्र के साथ वे नार्वे की एक चमकदार स्ट्रीट पर ज्यादा विचरण करते पाए गए। एक गैर भाजपाई महिला सांसद इजराइल और आस्ट्रेलिया की यात्रा पर गई थीं, उस महिला सांसद के होटल के कमरे में क्या खूब पार्टी हुई कि यह मोहतरमा पी कर बहक गईं और अपने होटल के कमरे में ही तोड़ फोड़ कर दी। इस तोड़-फोड़ का बिल बाद में भारतीय दूतावास को चुकाना पड़ा। सूत्र बताते हैं ताई ने इस महिला सांसद की भी जमकर क्लास लगाई और उनसे कहा कि ’जब आप विदेश में कहीं भारत का प्रतिनिधित्व कर रही होती हैं तो आपकी इमेज के साथ देश का ख्याल भी जुड़ जाता है। आप देश के एंबेसडर होकर वहां जाते हो, ऐसे भी कोई भी छोटी-बड़ी हरकत से देश की छवि को नुकसान पहुंचता हैं।’ सूत्र बताते हैं कि स्पीकर चाहती हैं कि विदेश भेजने से पहले सांसदों के चयन को लेकर किंचित और सावधानी बरती जाए। ताई ने अपनी भावनाओं से प्रधानमंत्री को भी अवगत करा दिया है।

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नोटबंदी पर अब पीएम संसद में गरजेंगे, चूंकि…

Posted on 01 December 2016 by admin

सियासी हलकों में यह खबर खूब जोर से उड़ी कि पीएम शुक्रवार को राज्यसभा में नोटबंदी पर बयान देंगे, कई न्यूज़ चैनलों व समाचार एजेंसियों ने नादानी में यह खबर लपक ली और शुक्रवार शाम तक कयासों की शक्ल पा चुकी यह खबर सोशल मीडिया पर भी धमाचौकड़ी मचाती रही, पर ऐसा हुआ नहीं। पीएमओ से जुड़े एक सूत्र की बातों पर अगर यकीन किया जाए तो नोटबंदी पर जनता का मिज़ाज भांपने और उनकी नब्ज़ को परखने के लिए पीएमओ ने आनन-फानन में अपने 80 विश्वासपात्र अफसरों की एक टीम गठित की और ये सदस्य जनता का मूड भांपने अलग-अलग राज्यों के लिए रवाना हो गए। उम्मीद जताई जा रही है कि ये सभी अफसर शनिवार तक दिल्ली वापिस लौट कर अपनी-अपनी रिपोर्ट से पीएमओ को बावस्ता कर देंगे, फिर शनिवार व रविवार को एक कोर टीम इन रिपोर्ट का विवेचन करेगी। प्रधानमंत्री देश के मूड को भांपने के बाद संसद में दिए जाने वाली अपनी स्पीच की तैयारी करेंगे और विपक्ष की मांग को सिर-आंखों पर उठाए सोमवार या मंगलवार को नोटबंदी पर संसद में अपना बयान दे सकते हैं। बाहर शोर बहुत है, चुनांचे पीएम के मन के ठहरे सन्नाटों को यह शोर बारंबार ललकार रहा है, इस चुनौती को स्वीकार करने से पूर्व पीएम अपने को ठीक से तैयार कर लेना चाहते हैं।

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एक दिन में बस 10 करोड़ नोट !

Posted on 01 December 2016 by admin

नोटबंदी को लेकर देश में असमंजस का आलम अब भी बरबरार है, मोदी के कट्टर समर्थकों को भी कहीं ऐसा लग रहा है कि यह योजना तो बहुत अच्छी है, पर इसके क्रियान्वयन की तैयारियों को सही तरीके से अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया। बैंकों के आगे कतार भले ही किंचित छोटी हो गई हो पर आम भारतीयों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही, ग्रामीण हलकों तक में अब नोटबंदी की धमक सुनी जा सकती है। वित्त मंत्रालय से जुड़े एक विश्वस्त सूत्र का दावा है कि नोटबंदी से उपजने वाले इस संकट की तीव्रता हालिया दिनों में कम होने वाली नहीं। चूंकि देश भर में इस वक्त छोटी-बड़ी सभी को मिला कर कोई 2200 करोड़ की संख्या में करंसी प्रचलन में है। इस वक्त नोट छापने की जितनी भी प्रिंटिंग प्रेस देश में है, वे सब मिल कर संयुक्त रूप से 10 करोड़ तक की संख्या में हर रोज करंसी छाप सकती हैं। अगर दिन रात यह काम चला तो महीने में 300 करोड़ नोट छप सकते हैं, फिर भी यह नाकाफी है। क्योंकि 500 व 1000 की शक्ल में छह लाख करोड़ की रद्दी इकट्ठी हो चुकी है, जो आज रद्दी है, कल को वह बाजार की किंग थी। सो, प्रचलन में आने वाले नोटों की कमी आने वाले कुछ दिनों तक बनी रहेगी, चाहे विपक्ष कितनी रार छेड़े, या पक्ष अपनी पीठ थपथपा ले, आम भारतीयों के कंधे तो किंचित झुके ही रहेंगे।

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स्विट्जरलैंड से आई नोट छापने की मशीन

Posted on 13 November 2016 by admin

स्विस बैंक में जमा भारतीयों के काला धन भले ही मोदी सरकार वापिस देश में नहीं ला पाई हो, पर स्विट्जरलैंड की एक कंपनी ’दलारूई गिओरी’ अब ’केबीए गिओरी’ द्वारा सप्लाई किए गए उपकरणों से मैसूर स्थित भारतीय रिजर्व बैंक की प्रिंटिंग प्रैस से 2000 और 500 के नए नोट छप कर आए हैं। इन करेंसी में इस्तेमाल हुए खास तरह के पेपर को इटली, जर्मनी और ब्रिटेन से आयात किया गया है और अगस्त से सितंबर महीने के बीच 2000 और 500 मूल्य के कोई 480 मिलियन नोट छप कर आए हैं। भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, देश में पाक प्रायोजित नकली नोटों के चलन पर लगाम लगाने और आतंकवाद में हवाला राशि के इस्तेमाल पर ब्रेक लगाने की नीयत से ही मोदी सरकार ने इतना बड़ा फैसला लिया है। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही सरकार 100 व 50 रूपए के मूल्य के नए नोट भी छापेगी, पर 50 व 100 के वर्तमान नोट भी बदस्तूर चलन में रहेंगे। चुनांचे स्विट्जरलैंड की कंपनी ’केबीए गिओरी’को यह महत्त्वपूर्ण कार्य सौंपा गया है कि वह मध्य प्रदेश के देवास, महाराष्ट्र के नासिक और पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के सालबनी में करेंसी नोट छापने के आधुनिक मिंट प्रैस लगाने में मदद करे। अभी अकेले मैसूर प्रैस ही हमारी करेंसी की जरूरतों का लगभग 70 फीसदी प्रिंट करता है।

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14 लाख करोड़ की ब्लैक मनी

Posted on 13 November 2016 by admin

सरकार को इस बात का पुख्ता अनुमान है कि देश में इस वक्त कोई 14 लाख करोड़ ब्लैक मनी है, मोदी सरकार के इस नए फरमान से कि अब 1000 व 500 के पुराने नोट नहीं चलेंगे, देश में एक अफरातफरी का माहौल है। निजी खातों में ढाई लाख तक की रकम जमा कराने पर आयकर विभाग किसी तरह की पूछताछ नहीं करेगा, सरकार की ओर से यह आश्वासन प्राप्त हो जाने के बाद लोग धड़ाधड़ अपने खातों में नकदी जमा कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सरकार का अपना अनुमान है कि इससे लगभग 9 लाख करोड़ का काला धन देश के बैंकों के पास आ जाएगा, इसके बाद रिजर्व बैंक में वोलेंटरी डिस्क्लोजर स्कीम के तहत बड़ी जमा धन राशियों की घोषणा हो सकती है। आय से ज्यादा धन प्राप्त होने की सूरत में 200 फीसदी पेनेल्टी का प्रावधान है, यानी इस सूरत में किसी व्यक्ति के 1 करोड़ की धन राशि में कोई 85 लाख तक सरकार का हो सकता है। इतना ही नहीं आय कर के नए प्रावधानों के तहत अब इसमें सात साल की कैद का भी प्रावधान है। विपक्षी दलों को डर सता रहा है कि इस नियम का सहारा लेकर मोदी सरकार अपना राजनैतिक स्कोर सैटल कर सकती है, जिसको चाहे जेल की हवा खिला सकती है और जिसको चाहे बचा सकती है।

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इसीलिए गडकरी मिट्टी पे बैठ जाते हैं अक्सर

Posted on 06 November 2016 by admin

नई दिल्ली का परिवहन भवन। यहीं पांचवीं मंजिल पर अवस्थित है केंद्रीय भूतल परिवहन व शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी का कार्यालय। गडकरी के कमरे के साथ लगे प्रतीक्षा कक्ष की दीवारों पर कवि हरिवंश राय बच्चन की एक कविता फ्रेम करके लगाई गई है, इसकी चंद पंक्तियां हैं-’एक अजीब सी दौड़ है ये जि़ंदगी, जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं, और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं, बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर…क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है…।’ लिहाज़ा जिंदगी की तरह गडकरी के सियासत का अंदाज भी निराला है-बिंदास व बेपरवाह। उन्हें इस बात की भी फिक्र नहीं कि नए निज़ाम के दस्तूर भी कितने नए हैं, सो जब वे अपने एक विश्वासपात्र अधिकारी को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में मेंबर ट्रैफिक रखवाना चाहते थे तो पीएमओ की ओर से कुछ अड़चनें आ गईं। अभी ये मामला और तूल पकड़ता कि सरकार के प्रमुख को संघ प्रमुख का फोन आ गया, ’ अच्छे अधिकारी हैं, विदर्भ के हैं, संघ के विश्वासपात्र हैं, इनका कीजिए।’ और इसके अगले ही कुछ रोज़ में उस अधिकारी की नियुक्ति को हरी झंडी मिल गई। बच्चन की पंक्तियां चरितार्थ हो उठीं और नितिन गडकरी का अक्स उन शब्दों में झिलमिलाने लगा-’अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे। क्योंकि जिसकी जितनी जरूरत थी। उसने उतना ही पहचाना मुझे।’

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सुलह का मैन्यू, लंच पर करात व येचुरी

Posted on 06 November 2016 by admin

सुलह का मैन्यू, लंच पर करात व येचुरी
माकपा की घटती ताकत और पार्टी के बड़े नेताओं के बढ़ते अहं व टकराव को दूर करने के लिए केरल के एक बड़े अखबार समूह मातृभूमि के स्वामी संपादक वीरेंद्र कुमार ने पहल की है। सनद रहे कि कुमार पूर्व में सांसद रह चुके हैं। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि कुमार की पहल पर इस दिवाली को पार्टी के दोनों बड़े नेता यानी महासचिव सीताराम येचुरी अपनी पत्नी सीमा चिश्ती के साथ तो प्रकाश करात अपनी पत्नी वृंदा करात के साथ दोपहर के भोजन में शामिल हुए। सूत्रों की मानें तो यह लंच पॉश साउथ दिल्ली के एक मशहूर राजस्थानी रेस्तरां ’कठपुतली’ में रखा गया था। इस लंच पर करात और येचुरी के बीच समझौते की एक नई इबारत लिखी गई और यह तय हुआ कि अगर येचुरी अपना महासचिव पद छोड़ते हैं तो वे अपनी ओर से इसके लिए वृंदा करात का नाम प्रस्तावित करेंगे। इसके पहले तक करात यह खटराग अलाप रहे थे कि पार्टी महासचिव को राज्यसभा नहीं दी जानी चाहिए। यानी एक तरह से इस बात पर सहमति बन गई है कि अगर येचुरी को राज्यसभा में निरंतर बने रहना है तो उन्हें पार्टी की सिरपरस्ती छोड़नी होगी। कहते हैं भावुक करात ने यह कहते हुए वृंदा का नाम आगे किया कि ’उन्हें मेरी पत्नी के नाते नहीं, बल्कि पार्टी को समर्पित एक कॉमरेड के नाते आगे बढ़ाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपना सारा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया है, इसके लिए उन्होंने अपना परिवार भी नहीं बढ़ाया।’ अगर इस राजस्थानी खाने की तासीर अपना काम कर गई तो आने वाले दिनों में करात व येचुरी के अंतर्संबंधों को एक नई दिशा मिल सकती है।

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