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प्रभु कुछ तो करो

Posted on 04 February 2017 by admin

केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु की गिनती मोदी सरकार के सबसे काबिल मंत्रियों में होती है पर अगर उनके मंत्रालय के परफॉरमेंस को आधार माना जाए तो वे कहीं चूकते हुए नज़र आ रहे हैं। यह पहली बार है जब रेल मंत्रालय का बजट भी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ही इसे आम बजट के साथ पटल पर रखा, पर रेल मंत्रालय के लिहाज से देखें तो पिछला वित्तीय वर्ष उसके लिए उतना शुभदायी नहीं रहा। सुरेश प्रभु के बारे में माना जा रहा है कि वे योग्य भी हैं और मेहनती भी, पर वे अपने विभाग के अधिकारियों के बजाए फ्री-लांस इकॉनोमिस्ट और कॉरपोरेट लीडर्स की ज्यादा सुनते हैं। चुनांचे पिछले वर्ष प्रभु की गाड़ी उस कदर सरपट पटरी पर नहीं दौड़ पाई, कहीं न कहीं इसे रेल दुर्घटनाओं के साल के तौर पर याद किया जाता रहेगा। वहीं पैसेंजर ट्रैफिक में रेल को तकरीबन 25 हजार करोड़ का घाटा उठाना पड़ा, पहली बार माल ढुलाई के रेवन्यू में गिरावट दर्ज की गई, माल ढुलाई के परिचालन से रेलवे को 45 हजार करोड़ का फायदा दर्ज हुआ, मुनाफे का यह ग्रोथ पिछली बार की तुलना में कम है। प्रभु सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहते हैं, जो उन्हें देश के युवाओं के बीच लोकप्रिय बना रहा है। प्रभु से मिलना-जुलना भी आसान है, वे सबकी सुनते हैं पर अब बारी कुछ करने की है।

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क्या होगा पहले चरण में?

Posted on 04 February 2017 by admin

यूपी में पहले चरण के 71 सीटों पर जहां 11 फरवरी को वोट पड़ने वाले हैं, दिलचस्प मुकाबला नज़र आता है, 2012 में इन 71 सीटों में से 22 सपा के हिस्से में गई थीं, पर लगता है इस दफे सपा को यहां 6-7 सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। मुमकिन है कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन इसकी क्षतिपूर्त्ति कर दे। इस दफे भी दलित वोटों में कोई दरार नहीं दिख रही, वे मजबूती से बसपा के साथ खड़े हैं, अगड़ी जातियों का झुकाव भाजपा की ओर है तो और कुछ सीटों पर यह कांग्रेस के पक्ष में नज़र आता है। जाट पूरी तरह से अजीत सिंह की रालोद की तरफ जाते दिख रहे हैं, सपा को मुस्लिम व यादव वोटरों का सहारा है, तो पूरे चुनावी खेल को परिणाम तक ले जाने का माद्दा रखने वाली पिछड़ी व अति पिछड़ी जातियों का रुख अभी भी साफ नहीं दिख रहा है। वे सीट दर सीट या उम्मीदवार के आधार पर अपना फैसला कर सकते हैं, फिलवक्त तो ओबीसी जातियों को तुरुप का इक्का माना जा रहा है, वे जिस ओर गए, उस उम्मीदवार या पार्टी के लिए जीत की लाटरी निकल सकती है।

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क्या कांग्रेस को ये साथ पसंद है?

Posted on 04 February 2017 by admin

सपा और कांग्रेस के बीच भले ही चुनावी तालमेल हो गया है, पर दोनों दलों के कार्यकर्त्ताओं के अभी दिल नहीं मिले हैं। अब पश्चिमी यूपी को ही ले लें, जहां कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं की आम शिकायत है कि हर जगह सपा के झंडे तो दिख रहे हैं पर सपाई उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में कांग्रेस का झंडा लगाने से परहेज कर रहे हैं। पर जहां से कांग्रेसी उम्मीदवार मैदान में है, वहां उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में सपा के झंडे भी लगा रखे हैं। कांग्रेसी कार्यकर्त्ताओं ने यह षिकायत अपने हार्हकमान तक पहुंचा दी है, बचाव में सपा कांग्रेसी नेताओं से उस बड़े प्रचार अभियान का हवाला दे रही है, जिसमें राहुल व अखिलेश की तस्वीरें एक साथ है, इस स्लोगन के साथ कि-’यूपी को ये साथ पसंद है।’

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माया से दूर मुस्लिम

Posted on 04 February 2017 by admin

भले ही मायावती व बसपा ने मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए इस चुनाव में उन पर टिकटों की बरसात कर दी हो, पर पश्चिमी यूपी में अभी भी ज्यादातर मुस्लिम वोटरों का रूझान सपा की ओर ही बना हुआ है। कहा जा रहा है कि युवा मुस्लिम तो एक तरह से अखिलेश की दीवाने बने हुए हैं। पष्चिमी यूपी के इंचार्ज और मायावती के बेहद करीबियों में शुमार होने वाले नसीमुद्दीन सिद्दिकी हैं और उनके ही कहने पर मायावती ने थोकभाव में (97 सीटें) मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है, पर कहीं न कहीं वे कमजोर जमीन पर नज़र आ रहे हैं।

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…और अंत में

Posted on 04 February 2017 by admin

पश्चिम यूपी का जाट मतदाता भाजपा से नाराज़ जान पड़ता है, सो इस दफे के यूपी चुनाव में वे थोक भाव में अजीत सिंह के साथ जाते दिख रहे हैं। जाट समुदाय को लगता है कि दंगों में उनका इस्तेमाल हुआ है यूपी में, और जब हरियाणा में उन्होंने अपने हक की आवाज़ उठाई तो उन पर भगवा सरकार ने गोलियां बरसवाई। वहीं जाटों में इस बात को लेकर भी नाराज़गी नज़र आती है कि हरियाणा में भाजपा ने किसी जाट को सीएम नहीं बनाया। सो, अजीत और उनके रालोद के उम्मीदवार जीते या हारे बड़े पैमाने पर जाट वोटरों का समर्थन उन्हें मिल सकता है। (एनटीआई-gossipguru.in)

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दिग्गजों के पैर फिसल रहे पंजाब में

Posted on 29 January 2017 by admin

इस बार पंजाब में रोमांचक सियासी घमासान देखने को मिल रहा है, इस दफे के चुनावी घमासान में कई दिग्गजों के पैर लड़खड़ा रहे हैं, मिसाल के तौर पर लांबी विधानसभा सीट पर प्रकाश सिंह बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों ही कमजोर जमीन पर नज़र आ रहे हैं, वहां से आप के उम्मीदवार बलबीर सिंह से दोनों ही दिग्गजों को कड़ी टक्कर मिल रही है, वैसे ही जलालाबाद में आप के भगवंत सिंह मान ने छोटे बादल यानी सुखबीर सिंह बादल को पानी पिला रखा है, मजीठा में एक वक्त आप को वहां अपना दफ्तर खोलने की भी जगह नहीं मिल रही थी पर बदले हालात में आप के हिम्मत सिंह शेरगिल ने बादल परिवार के मजीठिया की नाक में दम कर रखा है। पर अमृतसर में नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस की टिकट पर एक आसान जीत की ओर बढ़ रहे हैं तो वहीं पटियाला में किसी भी दल के लिए कैप्टन अमरिंद्र सिंह को हराना आसान नहीं जान पड़ता।

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उप राष्ट्रपति के लिए नहीं माने वेंकैया

Posted on 29 January 2017 by admin

उप राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर अभी से सियासी सरगर्मियां तेज हो गई है, अब से पहले माना जा रहा था कि केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू इस रेस में सबसे आगे हैं, पर सूत्र बताते हैं कि वेंकैया ने मना कर दिया है, वे केंद्र में ही मंत्री बने रहना चाहते हैं, उनकी जगह जो नया नाम चर्चा में आया है वह नाम है विद्यासागर राव का। एक बात और यूपी चुनाव के बाद उप राष्ट्रपति का चुनाव यह तय कर देगा कि राज्यसभा टीवी यानी आरएस टीवी के नए चेहरे मोहरे का क्या होगा? कुछ लोग तो यहां तक अनुमान लगा रहे हैं कि नया उप राष्ट्रपति चाहे जिसे भी चुना जाए, आरएस टीवी का कायाकल्प तो तय है, इसे आरएसएस टीवी बनने से कोई रोक नहीं सकता।

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गले की फांस बना सूट

Posted on 29 January 2017 by admin

दिल्ली के सबसे बड़े रीयल स्टेट के मालिक ने मोदी सरकार के एक सर्वशक्तिमान मंत्री को अपने घर लंच पर बुलाया और उनकी खूब आवभगत की, सर्वशक्तिमान के समक्ष सफाई पेश करते हुए मेहमान ने कहा कि-’हम हमेशा से भाजपा की मदद के लिए तत्पर रहते हैं, हमने पार्टी की दिल खोल कर मदद भी की है, पर जब भी कोई काम की बात होती है हमारा नाम गांधी परिवार के साथ जोड़ दिया जाता है, इस बात से हम दुखी हैं। जबकि गांधी परिवार से हमारे केवल पारिवारिक रिश्ते हैं, व्यापारिक नहीं, सो आप हमें एक बार पीएम से मिलवा दीजिए।’ सूत्र बताते हैं कि सर्वशक्तिमान ने सुझाया कि मोदी जी तो कपड़ों के शौकीन है, और आपके तो दिल्ली व नोएडा में इतने सारे शापिंग मॉल है, सो आप उनके लिए पहले कुछ डिजाइनर सूट बनवा लीजिए, उनका नाप आपको अहमदाबाद से मिल जाएगा।’ कोई दर्जन भर डिजाइनर सूट बनवाने के बाद इस रीयल स्टेट के स्वामी ने फोन कर पीएम से मिलने का समय मांगा तो उनसे पूछा गया-’क्यों मिलना चाहते हैं?’ तो स्वामी ने बताया कि वे पीएम को उपहार स्वरूप कुछ सूट भेंट करना चाहते हैं। इस पर दूसरी ओर से यह कहते हुए फोन रख दिया गया-’पहले तो आप लोग ही तोहमत लगाते हैं कि प्रधानमंत्री जी एक दिन में 4-5 बार कपड़े बदलते हैं, सूट-बूट की सरकार चलाते हैं, अब खुद सूट लेकर आ गए।’ सर्वशक्तिमान की सलाह इस रीयल स्टेट स्वामी के गले की फांस बन गई है।

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…और अंत में

Posted on 29 January 2017 by admin

अगर पंजाब में आप विजयी होती है तो क्या मुख्यमंत्री की दौड़ में फिलवक्त भगवंत मान सबसे आगे जान पड़ते हैं, वे एक दिन में न सिर्फ सबसे ज्यादा चुनावी सभाएं कर रहे हैं, अपितु उनकी सभाओं में खूब भीड़ भी जुट रही है। 26 जनवरी के रोज मौसम का मिजाज किंचित बिगड़ गया, झमाझम बारिश होने लगी, राहुल गांधी समेत तमाम बड़े नेताओं की चुनावी सभाएं रद्द कर दी गईं, पर भगवंत नहीं माने, वे बोलते रहे और लोग बरसात में भीग कर भी उन्हें सुनते रहे। (एनटीआई-gossipguru.in)

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क्या नज़रबंद हैं नेताजी?

Posted on 29 January 2017 by admin

मुल्क के सबसे बड़े मुलायमवादी ठाकुर अमर सिंह की यह अब तक की सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा है, वे बैचेन हैं, और चाह कर भी अपने प्रिय नेता से संपर्क नहीं साध पा रहे हैं, चूंकि इन दिनों नेताजी अपने बेटे अखिलेश के मोहपाश में जकड़े हैं, ठाकुर साहब से जुड़े सूत्रों का दावा है कि बेटे ने जैसे अपने पिता को नज़रबंद कर रखा है जिससे कि बाहरी दुनिया से उनका संपर्क विच्छेद हो जाए। कहते हैं नेताजी के पुराने फोन का नंबर भी बदल दिया गया है, मुलायमवादियों के ये भी दावे हैं कि नेताजी ने कई बार चाहा कि वे प्रेस कांफ्रेंस कर हाले दिल बयां कर दें, पर दबाव में आकर उन्हें हर बार अपनी प्रेस कांफ्रेंस कैंसिल करनी पड़ी है। रही बात शिवपाल यादव की तो बताया जाता है कि 31 तारीख तक उनका भी मुंह बंद रहेगा, चूंकि उन्हें डर है कि ज्यादा शोर-शराबा करने से कहीं अखिलेश उनका टिकट काट न दे। सो, समाजवादी कुनबे में एक पसरा हुआ असहज सन्नाटा आने वाले किसी बड़े सियासी तूफान की बारंबार चेतावनी दे रहा है।

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