Posted on 26 June 2017 by admin
यूपी में 10 सूचना आयुक्त (इंफॉरमेशन कमिश्नर) बनाए गए थे, जिसमें से एक मुलायम सिंह यादव के समधी (मुलायम के दूसरे पुत्र प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा के पिता) अरविन्द सिंह बिष्ट भी शामिल हैं। सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का, सो बिष्ट जी उत्साह के अतिरेक में डूब-उतर रहे थे, ऐसे में यूपी के चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर जब भी कभी छुट्टी पर जाते थे तो अपने मातहत एक गुप्ता जी को चार्ज देकर जाते थे। सूत्र बताते हैं कि इस बात का बिष्ट जी ने काफी बुरा माना और अपने बॉस को ही जली-कटी सुना डाली। बिष्ट का मानना था कि वे सबसे सीनियर हैं, चुनांचे चार्ज तो उनको ही मिलना चाहिए। वहीं बॉस बिष्ट साहब को सीनियर मानने को तैयार नहीं थे, उनका तर्क था कि जब सभी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति एक ही दिन हुई है तो उसमें सिर्फ लिस्ट में पहले नंबर पर नाम होने की वजह से बिष्ट सबसे सीनियर कैसे हो सकते हैं। मामला ने जब ज्यादा तूल पकड़ा तो बिष्ट कोर्ट चले गए। पर कोर्ट में उल्टे ही उन्हें डांट पिला दी, तो उन्हें अब असलियत समझ में आ गई है।
Posted on 26 June 2017 by admin
ओडिशा के उत्साही चेहरे जय पांडा के आत्मविश्वास पर इन दिनों घड़ों पानी फिर गया है। दिल के अरमां आसुंओं में बह गए की तर्ज पर इन दिनों वे बड़े खोए-खोए से दिख रहे हैं। अपनी पार्टी बीजद और इसके सर्वेसर्वा नवीन पटनायक से नाराज चल रहे राज्यसभा सांसद पिछले काफी वक्त से भाजपा के निरंतर संपर्क में बताए जा रहे थे। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों उनकी पीएम से भी एक अहम मुलाकात हुई। कहते हैं बातों ही बातों में पांडा ने पीएम को बताया कि उनका विदेश नीति पर कितना गहन अध्ययन है, इंडिया-अमेरिका फ्रेंडशिप फोरम के वे पिछले 10 वर्षों से अध्यक्ष हैं। सूत्र बताते हैं कि दरअसल पांडा बीजद छोड़कर भाजपा में आने को तैयार बैठे थे, उनकी इच्छा थी कि उन्हें विदेश मंत्रालय में राज्य स्तर का मंत्री बना दिया जाए। पीएम ने भी उन्हें आशवासन दिया था कि उन्हें एक महती जिम्मेदारी मिलेगी। अब पांडा को नई जिम्मेदारी मिल गई है, उन्हें फिक्की के फ्रेंडशिप फोरम बांटने का अधिकार मिल गया है, वे जर्मनी, इजरायल जैसे देशों में मैत्री फोरम के गठन, उसके संगठन व चेहरे मोहरे को नया लुक देंगे। बिचारे पांडा चले थे मंत्री बनने, बन गए मैनेजर।
Posted on 26 June 2017 by admin
दो अंग्रेजी न्यूज चैनल ’रिपब्लिक’ और ’टाइम्स नाऊ’ की टीआरपी की लड़ाई अब सड़कों पर उतर आई है, सूत्र बताते हैं कि इन दोनों चैनलों में अब टीआरपी का अंतर भी मात्र 24 अंक का रह गया है। सो, देश के सबसे बड़बोले एंकर अर्णब गोस्वामी पर दबाव बढ़ गया है कि वे जल्द ही कुछ नए धमाके-नए खुलासे करें। महज राग देशभक्ति सुनाने से कुछ नहीं होने वाला। सो इस चैनल पर जल्द ही कुछ नए स्टिंग ऑपरेशन प्रसारित हो सकते हैं। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 19 June 2017 by admin
भाजपा के भूले-बिसराए भीष्म पितामह के लिए ये सब किसी यंत्रणा से कम नहीं था, जिस पार्टी को उन्होंने अपने रक्त-मज्जा से खड़ा किया हो आज वहां उनका कोई सुध लेवा नहीं। विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि अपनी पुत्री प्रतिभा अडवानी व सचिव दीपक चोपड़ा के साथ केरल और पुद्दुचेरी छुट्टियों पर जाने से पहले अडवानी ने तीन प्रमुख लोगों से मिलने का समय मांगा था, इनमें से एक स्वयं प्रधानमंत्री थे। सूत्रों का कहना है कि पीएमओ की ओर से अडवानी के दफ्तर को बताया गया कि पीएम अपने विदेश दौरे से वापिस लौट कर ही मिल पाएंगे, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की ओर से बताया गया कि इन दिनों वे लगातार यात्राएं कर रहे हैं, चुनांचे जब इसके बीच वे कभी दिल्ली आए तो शाह स्वयं अडवानी जी से जाकर मिल लेंगे, पर वह दिन कभी आया नहीं। संघ प्रमुख की ओर से बताया गया कि संघ का वर्ग चल रहा है, जिनमें वे व्यस्त हैं। अडवानी सियासत की नब्ज को बखूबी जानते हैं, वे सत्ता की दुलकी चाल को भी समझते हैं, सो उन्हें कहीं शिद्दत से यकीन हो गया कि यह भगवा सूरज वह नहीं है जिसे उन्होंने आजीवन पाल पोसकर बड़ा किया है, इसकी रोशनी में वे किरचें हैं जो उनकी आंखों व दिल में जलन पैदा कर रही है।
Posted on 19 June 2017 by admin
भले ही कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी अनेकानेक सियासी मोर्चों पर फेल साबित हुए हों पर एक मां का दिल कहां मानता है। कांग्रेसी राजमाता सोनिया गांधी ने अपने युवराज की ताजपोशी का वक्त मुकर्रर कर दिया है। सब कुछ अगर योजनाबद्द तरीके से चला तो आने वाले अक्टूबर माह में राहुल कांग्रेस के नए पार्टी अध्यक्ष बन जाएंगे। वे अपनी मां सोनिया की जगह लेंगे। अक्टूबर के इस महा आयोजन के लिए जगह की तलाश भी शुरू हो चुकी है। इस बारे में कांग्रेस के अंदर दो राय है कि पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि यह आयोजन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आहूत हो, सनद रहे कि तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में पहले भी कांग्रेस के कई महाधिवेशन हो चुके हैं। वहीं पार्टी का एक दूसरा धड़ा है जो यह चाहता है कि राहुल की ताजपोशी बेंगलुरु में हो, क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है सो, इस आयोजन को ज्यादा बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इस बारे में अंतिम निर्णय राहुल को ही लेना है, एक बार वे नानी से मिलकर, उनके साथ कुछ वक्त गुजार कर इटली से भारत लौट आएं तो इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना सकें।
Posted on 19 June 2017 by admin
पर राहुल गांधी के लिए अध्यक्ष पद का ताज कांटों का ताज साबित हो सकता है। अपनी तमाम नेक नीयती व मेहनत के बाद भी वे अपने लिए वह राजनैतिक जगह नहीं बना पाए हैं। सहयोगी दलों में भी उनको लेकर कोई बहुत अच्छी समझ नहीं बन पाई है। जैसे पिछले दिनों जब तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी नई दिल्ली आईं तो राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर रणनीतियां बुनने की लिहाज से राहुल ने दीदी को अपने तुगलक लेन स्थित सरकारी निवास पर भोजन पर आंमत्रित किया। हालांकि ममता ने राहुल का यह निमंत्रण स्वीकार कर लिया पर उन्होंने अपनी ओर से एक शर्त भी रख दी कि इस दावत का आयोजन 10 जनपथ पर हो ताकि उसमें सोनिया भी उपस्थित रह सकें। सूत्रों की मानें तो ममता ने राहुल के समक्ष यह दलील भी रखी कि उनके पिता यानी स्व. राजीव गांधी की वह सबसे ज्यादा इज्जत करती हैं, इस नाते 10 जनपथ से उनका एक बेहद भावानात्मक रिश्ता जुड़ा है, इसीलिए वह वहीं आना चाहती है। शायद राहुल निकट भविष्य में ऐसे राजनैतिक संदेशों को पढ़ने व समझने की आदत डाल दें।
Posted on 19 June 2017 by admin
शायद कांग्रेस के लिए सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है, सो दोस्तों और खासकर सहयोगी दलों के नजरिए में भी आमूल-चूल बदलाव नज़र आने लगा है। 10 जनपथ से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों सपा नेता नरेश अग्रवाल सोनिया गांधी से मिलने उनके घर पहुंचे, मामला राष्ट्रपति चुनाव को लेकर आम राय से विपक्ष के सर्वमान्य उम्मीदवार को तय करने का था। सूत्र बताते हैं कि बातों ही बातों में नरेश अग्रवाल ने सोनिया से बेधड़के यह कह डाला कि ’आपको रॉबर्ट वाड्रा का मामला जल्दी सुलझाना पड़ेगा, नहीं तो इससे न केवल कांग्रेस का नुकसान होगा, बल्कि यह सहयोगी दलों के लिए भी गले की हड्डी साबित होगा।’ कहते हैं नरेश अग्रवाल की इन बातों से सोनिया एकबारगी भौचक रह गईं, फिर भी उन्होंने खुद को संयत करते हुए कहा-’वी आर नॉट इन्वाल्व इन दैट, बट आइ विल सी’(इस मामले से हालांकि हमारा कोई लेना देना नहीं है, फिर भी मैं देखूंगी।) अग्रवाल के जाने बाद कहते हैं सोनिया ने अपने एक नजदीकी व्यक्ति से कहा-’जो लोग कल तक हमसे मिलने के लिए तरसते थे, देखो आज कैसे आंखें तरेर रहे हैं
Posted on 19 June 2017 by admin
पार्टी के अंदर व बाहर चौतरफों हमलों से घिरी आम आदमी पार्टी को एक नया आत्म ज्ञान प्राप्त हुआ है। यह आत्म ज्ञान डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया से सीबीआई की पूछताछ के बाद और प्रखर हुआ है। पार्टी ने अपने कोर ग्रुप में आत्म मंथन के बाद यह फैसला लिया है कि इस बार के गुजरात व हिमाचल विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी। खासकर गुजरात को लेकर आप ने काफी पहले से तैयारियां की थी, स्वयं केजरीवाल गुजरात को लेकर काफी उत्साहित थे। पर आप से जुड़े सूत्रों का मानना है कि फिलहाल पार्टी अपना सारा फोकस दिल्ली पर रखेगी, ताकि यहां सरकार अच्छे से काम कर सके। पहले स्वयं केजरीवाल चाहते थे कि इन प्रदेशों में अगर पार्टी को 6 फीसदी वोट भी मिल जाते हैं तो पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त हो सकता है। (एनटीआई-gossipguru.in)
Posted on 29 May 2017 by admin
केंद्र सरकार पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी.चिदंबरम और उनके पुत्र कार्तिक चिदंबरम की कुंडली खंगालने में जुटी है। सूत्रों के दावों पर अगर यकीन किया जाए तो आने वाले दिनों में चिदंबरम पर देशद्रोह का मुकदमा भी चल सकता है। सनद रहे कि भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी लंबे समय से चिदंबरम पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं। स्वामी ने ये साक्ष्य जांच एजेंसियों के समक्ष भी पेश किए हैं कि जब 1996 में केंद्र में देवेगौड़ा की सरकार थी और चिदंबरम उस सरकार के वित्त मंत्री थे तो उन्होंने भारतीय करेंसी के लिए कागज खरीदने और उसे छापने का ठेका एक ब्रिटिश कंपनी ’दे ला रू’ को दे दिया था, चिदंबरम पर यह भी आरोप लगते हैं कि उन्होंने इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले इस बारे में अपने प्रधानमंत्री देवेगौड़ा से भी पूछने की जरूरत नहीं समझी। सवाल यह भी उठते हैं कि क्या यह महज इत्तफाक था कि ’दे ला रू’ ही वह कंपनी थी जो पाकिस्तानी मुद्रा भी छापती थी। सो, कहा जाता है कि शत्रु देश पाकिस्तान को भारतीय करेंसी का कागज हासिल करने की इससे एक आसान राह मिल गई और फिर भारत में कश्मीर के रास्ते पाक प्रायोजित जाली नोटों के पहुंचने का एक सिलसिला भी कायम हो गया, जिस पर आज भी ठीक तरीके से काबू नहीं पाया जा सका है। पीएमओ से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की माने तो पिछले दिनों पीएम ने अपने वित्त मंत्री अरुण जेटली को बुला कर उनसे दो टूक कह दिया है कि चिदंबरम के खिलाफ सारे कागजात ठीक से जुटाए जाएं और उन्हें जांच एजेंसियों के हवाले किया जाए।
Posted on 29 May 2017 by admin
मोदी सरकार भले ही वायदे के मुताबिक आम भारतीयों के लिए अच्छे दिन नहीं ला पाई हो, पर कांग्रेस के लिए बुरे दिन के आगाज जारी है। पहले तो पार्टी का ग्राफ सिमटता जा रहा है और अब कांग्रेस के मुखपत्र ’कांग्रेस संदेश’ के भी बुरे दिन षुरू हो गए हैं। हालिया दिनों में इस पत्रिका की क्वालिटी और इसके सुर्कलेशन में जबर्दस्त गिरावट दर्ज हुई है। 10 रुपए की कीमत और हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रकाशित होने वाले इस पत्रिका की प्रसार संख्या कभी तकरीबन एक लाख प्रति के आसपास हुआ करती थी। सूत्रों की मानें तो आज ’कांग्रेस संदेश’ का सर्कुलेशन मात्र 10 हजार प्रतियों पर सिमट आया है। इसमें काम करने वाले पत्रकारों की हालत भी अब अच्छी नहीं रह गई है। अब न तो उन्हें वक्त पर तनख्वाह मिल रही है और न ही अन्य भत्तों का लाभ। एक जमाने में इन पत्रकारों के पेट्रोल बिल पर कोई रोक टोक नहीं थी, कैंटीन में इनके मुफ्त खाने-पीने की भी व्यवस्था थी। पर जब से नोटबंदी का दौर आया है, पहले कई महीनों तक तो इन्हें तनख्वाह ही नहीं मिली और अब तनख्वाह मिल भी रही है तो वह वक्त पर नहीं है। कांग्रेस के कई सीनियर लीडर इसका ठीकरा पत्रिका की संपादक गिरिजा व्यास और इसके एडिटोरियल बोर्ड के सदस्यों जयराम रमेश और सलमान खुर्शीद पर फोड़ रहे हैं। वहीं इन बातों से तटस्थ पत्रिका के प्रकाशक व पार्टी के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा अब भी ’कांग्रेस संदेश’ को अपना पूरा वक्त दे रहे हैं। पत्रिका को छपने के लिए प्रेस भेजने से पहले वह इसे खुद आद्योपांत पढ़ते हैं, भाषा व तथ्यात्मक ऋुटियों को सुधारते हैं और कांग्रेस व ’कांग्रेस संदेश’ के अच्छे दिनों की कामना करते हैं।