Posted on 13 January 2014 by admin
अमरीकी व भारत सरकार के बीच एक गुपचुप डील हुई, उसके बाद भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की स्वदेश वापसी का मार्ग प्रशस्त हो सका। अमरीका को लेकर भारत में माहौल बिगड़ रहा था, छोटे-छोटे शहरों में भी ओबामा व मिशेल के पुतले फूंके जा रहे थे, चुनांचे अमरीका भी इस बदले परिदृश्य से आसानी से ‘आऊट ऑफ कोर्ट’ सेट्लमेंट के लिए तैयार हो गया। तीन प्रमुख बिंदुओं को लेकर यह समझौता हुआ है, भारत ने हर्जाने के तौर पर लगभग पौने दो करोड़ रुपए जमा करवाए हैं, वह जब्त हो सकता है, भारत इस पर कोई क्लेम नहीं करेगा, यानी भारत प्री-गिल्टी कंपनशेसन देने को राजी हो गया है। कालांतर में भारत पहले भी ऐसा कर चुका है। दूसरा, मेड संगीता रिचर्ड के ऊपर भारत में चल रहे तमाम मुकदमे वापिस लिए जाएंगे और उसके साथ भी ‘आऊट ऑफ कोर्ट’ सेटï्लमेंट किया जाएगा (संगीता को लेकर अमरीका की इतनी दिलचस्पी हैरान करने वाली है, क्या वह भारत में अमरीका की एजेंट थी?) तीसरा और सबसे अहम बिंदु कि अमरीका देवयानी पर चल रहे मुकदमों को वापिस नहीं लेगा, यानी अमरीका में देवयानी पर केस बदस्तूर चलता रहेगा और देवयानी की पोस्टिंग अन्य किसी मुल्क में नहीं हो पाएगी, क्योंकि भारत के सिवा कहीं भी उन पर इंटरपोल का डंडा चमक सकता है। क्या अमरीका के समक्ष घुटने टेक दिए हैं हमारे संप्रभुुत्व देश ने?
Posted on 13 January 2014 by admin
अगर 17 जनवरी के आस पास राहुल गांधी की ताजपोशी बतौर देश के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर होती है तो वह नई बदलावों के आहट से लबरेज कांग्रेस का एक नया चेहरा सामने लेकर आएंगे। अपने मंत्रिमंडल में भी युवा व साफ सुथरे चरित्र व चेहरे वालों को जगह देंगे। जनतंत्र में सहभागिता के राग को बुलंद करने के इरादे से ग्रास रूट से जुड़े लोगों को प्राथमिकता मिलेगी। जरूरी हुआ तो राहुल व उनकी नई टीम मनमोहन नीति पर भी हमला करने से नहीं चूकेगी, सुप्रीम कोर्ट में एटॉर्नी जनरल की इस राय को इसी चश्मे से देखा जा सकता है कि मनमोहन को लेकर कांग्रेस का रवैया बदल रहा है, जब एटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में माना कि कोयला आबंटन मामले में कुछ न कुछ गलत हुआ है, यह बयान एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है क्योंकि आम तौर पर ए.जे सरकार के पक्ष को ही सामने रखता है। राहुल कुछ ऐसे कठोर निर्णय लेंगे कि लोगों की उनके प्रति राय बदले, संसद के आने वाले सत्र में ज्यादा से ज्यादा बिल पास कराए जा सकते हैं, व्हिसल ब्लोअर व महिला आरक्षण बिल को सदन के पटल पर रखा जा सकता है, यानी कांग्रेस अपने युवराज को एक नए अवतार में पेश करने के लिए कृत संकल्प जान पड़ती है।
Posted on 05 January 2014 by admin
देश का सियासी तापमान गर्म है, प्रधानमंत्री अपने हालिया प्रेस-कांफ्रेंस में इस डर से देशवासियों को वाकिफ करा चुके हैं कि मोदी आए तो देश बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगा, मुमकिन है कि यह कांग्रेसी डर की अनुगूंज हो कि मोदी की उद्दात सियासी महत्वाकांक्षाओं पर नकेल कसना कितना जरूरी है। सो कांग्रेसी पिटारे में से स्नूपगेट का जिन्न बाहर आया है, और इस पर जांच आयोग बिठाने की जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो गई है, ऐसे में यह सवाल बेहद लाजिमी है कि आखिर यह टैपिंग की किसने है? ‘कोबरा’ व ‘गुलेल’ ने जो बातचीत की सीडी दिखाई है उसमें जी.एल.सिंघल और अमित शाह की बातचीत दर्ज है, जानकार सूत्रों का मानना है कि कम से कम यह टैपिंग सिंघल तो नहीं कर सकते क्योंकि वे लंबे समय से जेल में बंद हैं और अगर ये टैप उनके पास होते तो वे कहीं पहले इसे उजागर कर सकते थे। वहीं कहीं उसमें जो सिंघल के बयान हैं, वे उनके बचाव में नहीं हैं। तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि अगर सिंघल फोन टैपिंग का काम करते तो उस लडक़ी के साथ ‘साहब’ की बातचीत बाहर आ जाती। जानकार सूत्रों का दावा है कि इस फोन टैपिंग को अंजाम केंद्र सरकार ने ही दिया है, सिर्फ सिंघल के मार्फत उसे जमा करवाया गया है।
Posted on 28 December 2013 by admin
सुल्तानपुर संसदीय सीट पर इस दफे रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है। इस सीट से कांग्रेस के निर्वाचित सांसद राजा संजय सिंह भाजपा के पाले में आने को तैयार बैठे हैं, वे लोकसभा का अगला चुनाव राहुल या सोनिया के खिलाफ अमेठी से लड़ सकते हैं। गांधी परिवार के भगवा चिराग वरुण गांधी इस दफे पीलीभीत के बजाए सुल्तानपुर के सुल्तान बनने की तैयारी में है। उन्हें वहां दो बाहुबलियों से चुनौती मिल रही है, एक तो सपा के अतीक अहमद, दूसरे बसपा के प्रत्याशी पवन पांडे। अतीक पहले ही कह चुके हैं कि वरुण की जितनी उम्र है, उतने तो उनके ऊपर विभिन्न अदालतों में मुकदमे चल रहे हैं। वैसे भी सुल्तानपुर में महज दो से ढाई लाख मुस्लिम वोट है, वहीं पवन पांडे बसपा सांसद राकेश पांडे के भाई हैं। पवन पहले मुंबई में रहते थे और शिवसेना से जुड़े थे, इस नाते बाबरी मस्जिद विध्वंस में भी उनका नाम आता है। ‘आप’ यहां से अपने प्रवक्ता संजय सिंह को मैदान में उतार रही है। ओडिशा से माइनिंग इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल संजय घाट-घाट का पानी पी चुके हैं, वे पहले सपा विधायक अनूप सांडा के सहयोगी रह चुके हैं, संजय उनका पेट्रोल पंप और पीआर देखते थे, जब सांडा पर रेप के आरोप प्रमाणित हो गए तो संजय अमर सिंह के बगलगीर हो गए और रघु ठाकुर के साथ लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया, फिर अपनी एक स्वयंसेवी संस्था बना ली, मनीष सिसौदिया उन्हें ‘आप’ में लेकर आए। यानी वरुण गांधी सुल्तानपुर के अगले सुल्तान दिखते हैं।
Posted on 22 December 2013 by admin
‘काठ का खिलौना है मोदी, भाजपा वालो इसे आग से बचाना’ मानो कांग्रेस चीख-चीख कर यही बात भगवा पार्टी को समझाना चाहती है। सो, ‘स्नूपगेट’ मामले को केंद्रनीत यूपीए सरकार ठंडे बस्ते में डालने के मूड में नहीं। सूत्रों की माने तो केंद्र सरकार जल्द ही एक कमीशन बना यह मामला उसके सुपुर्द करने जा रही है, टेलीग्राफी एक्ट के तहत कार्यवाही करते हुए केंद्र यह मामला इस कमीशन के सुपुर्द कर सकता है, क्योंकि इस पूरे मामले की रिकार्डिंग उपलब्ध है। यानी ज्यों-ज्यों आम चुनावों की बेला करीब आएगी उसी हिसाब से मोदी के मामलों में पलीता लगाया जाएगा। फिलहाल तो इस कमीशन की अगुवाई के लिए सरकार को एक रिटायर्ड जज़ की तलाश है।
Posted on 14 December 2013 by admin
यह तो वही बात हुई कि दिल्ली का जला अमेठी में भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है, चार राज्यों में मुंह की खाने के बाद अमेठी में बह रही बयार भी युवराज-विरोध के महक से बौरायी हुई है। अभी-अभी तुरंत कांग्रेस ने अमेठी व राय बरेली के लोगों का मूड भांपने के लिए एक जनमत सर्वेक्षण करवाया है, जिसमें अमेठी में सपा व बसपा के अघोषित सहयोग के बावजूद भाजपा के संजय सिंह से राहुल गांधी ने बेहद मामूली बढ़त बनाई हुई है, वहीं कहीं राय बरेली की रायशुमारी में सोनिया मैया पर जनता जनार्दन का भरोसा कायम है। सो, अब कांग्रेस में यह गंभीर विचार-मंथन का दौर चल रहा है कि क्यों न राहुल गांधी 2014 का लोकसभा चुनाव अमेठी की बजाए राय बरेली से लड़ें, क्योंकि राय बरेली में प्रियंका गांधी ने काफी वक्त लगाया है, यहां के लोगों से मेल-जोल बनाए रखा है। वैसे भी अगर सोनिया संजय सिंह के खिलाफ अमेठी से मैदान में उतरती हैं तो इसका उन्हें एक मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सकता है क्योंकि उन्होंने पहले भी संजय सिंह को 3 लाख वोटों के अंतर से हराया हुआ है, आम आदमी पार्टी की निगाहें भी अमेठी सीट पर बनी हुई हैं वह यहां से कुमार विश्वास को उतारना चाहती है जिन्हें सियासी मामा लगाने में महारथ हासिल है, पर आप के लिए भी राहुल की तुलना में सोनिया के लिए चुनौती उछालना आसान नहीं होगा।
Posted on 08 December 2013 by admin
नए विजिलेंस कमिश्नर की रेस तेज हो गई है, फिलहाल इस रेस में जो दो लोग सबसे आगे चल रहे हैं वह हैं सीबीआई के विशेष डायरेक्टर के पद से हाल में ही रिटायर हुए सलीम अली तथा नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेसी हमले की कमान संभालने वाले गुजरात के आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा। हालांकि एनएसजी के पूर्व महानिदेशक रहे राजन मेधेकर, एसएसबी के महानिदेशक अरुण चौधरी, वीरप्पन को मार कर ख्याति बटोरने वाले आईपीएस विजय कुमार और सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर विनीत गुप्ता भी इस रेस में शामिल हैं, पर कांग्रेस अपना दांव प्रदीप शर्मा पर लगाना चाहती है। जिससे एक तीर से दो शिकार हो सके।
Posted on 01 December 2013 by admin
तहलका मामले से जुड़ी पीडि़त पत्रकार एक अच्छे सुशिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती हैं, उनके पिता भी अपने वक्त के एक नामी पत्रकार रह चुके हैं और तरुण तेजपाल इस नाते ही इस लडक़ी के पिता के गहरे मित्रों में शुमार होते थे। इस महिला पत्रकार ने तरुण को सदैव अपने पिता के मित्र की तरह ही इज्जत दी। पर गोवा की उस घटना ने उसे इतना झकझोर कर रख दिया कि उसके बाद अपना हर कदम वह बेहद सोच-समझकर उठाने लगी। मसलन, उस घटना के बाद उसके मोबाइल पर जितने भी फोन-कॉल्स आए उसने सबको रिकार्ड कर लिया। उसमें एनडीटीवी के एक वरिष्ठï पत्रकार श्रीनिवासन जैन के फोन की बातचीत भी रिकार्ड है। शोमा चौधरी से बातचीत की वह रिकार्डिंग भी उपलब्ध है जिसमें शोमा उस महिला पत्रकार से कहती हैं-‘तरुण इज़ ए हैंडसम मैन, यू शुड नॉट माइंड बिइंग कॉय विद हिम’ (तरुण एक सुदर्शन व्यक्तित्व है उसके साथ तुम नजदीकियां बढ़ा सकती हो), इस महिला पत्रकार ने इन तमाम बातचीत की सीडी गोवा पुलिस को सौंप दी है।
Posted on 25 November 2013 by admin
कांचीमठ के शंकराचार्य पर जयललिता फिर से शिकंजा कसने को तैयार बैठी है, शंकर रमण मामले में जल्द ही कोर्ट का फैसला आने वाला है। यदि यह फैसला शंकराचार्य के पक्ष में आता है तो जयललिता कांचीमठ को कई नए मामलों में उलझा सकती है। कांचीमठ को विदेशों से मिले पैसों को लेकर अम्मा शंकराचार्य को घेर सकती हैं और यदि अदालत का फैसला शंकराचार्य के खिलाफ आता है तो फिर उनके जेल में रहते रहने की मजबूरी बनी रहेगी।
Posted on 24 November 2013 by admin
अपनी ही एक सहकर्मी की यौन उत्पीडऩ की आंच झेल रहे तहलका पत्रिका के कत्र्ताधत्र्ता तरुण तेजपाल बहुत ऊंचे रसूख वाले व्यक्ति हैं, लिहाजा तहलका के तार देश के कानून मंत्री कपिल सिब्बल से भी जुड़े हैं, सिब्बल तहलका(अनंत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड) के प्रमुख शेयर होल्डर्स में से एक हैं, इस पत्रिका समूह को मशहूर क्रिमिनल वकील राम जेठमलानी का भी आशीर्वाद प्राप्त है, राम जेठमलानी के पुत्र महेश जेठमलानी इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हैं, राजस्थान पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड भी इसके शेयर होल्डर्स में से हैं, इसके अलावा नितिन शाह, अनु आगा भी तहलका के अंशधारकों में शामिल हैं, वैसे भी तहलका समूह का नियंत्रण राज्यसभा सांसद व उद्योगपति के.डी.सिंह के पास है, सनद रहे कि ये सिंह वही हैं जो तृणमूल नेत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबियों में शुमार होते हैं। तहलका के तार कई और प्रमुख कांग्रेसी नेताओं से भी जुड़े हैं, सूत्रों की मानें तो यही वजह है कि तरुण तेजपाल का यह मामला सामने आते ही कथित तौर पर केंद्र सरकार इस मामले को रफा-दफा करने में जुट गई, भाजपा नेताओं के दावों के मुताबिक अगर यह घटना भाजपा शासित राज्य गोवा में घटित नहीं होती तो कब का इसे रफा-दफा कर दिया जाता।