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शीला की रामलीला

Posted on 01 February 2014 by admin

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की उम्मीदों पर तब घड़ों पानी पड़ गया जब पार्टी ने उनसे कहा कि वह नई दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लडऩे की तैयारी करें, वहीं अजय माकन को पार्टी ने वेस्ट दिल्ली से चुनावी मैदान में उतारने का मन बनाया है। सूत्र बताते हैं कि शीला ने सफाई देते हुए कहा कि चूंकि उनके पुत्र संदीप दीक्षित भी दिल्ली से चुनाव लड़ रहे हैं ऐसे में एक परिवार के दो लोगों का एक ही राज्य से चुनाव लडऩा कितना वाजि़ब रहेगा? शीला ने संकेतों में पार्टी हाईकमान को यह समझाना चाहा था कि पार्टी उन्हें ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में लेकर आएं। पार्टी ने कहा है कि उन्हें राज्यसभा में भेजने या किसी राज्य का गवर्नर बनाने पर बाद में विचार किया जा सकता है।

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क्या करें केजरीवाल

Posted on 01 February 2014 by admin

केजरीवाल सरकार के अफसर यानी बाबू लोग मज़े में हैं, हाथ-पांव फैलाकर आराम फरमा रहे हैं, उनका मानना है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास सरकारी काम-काज देखने का वक़्त ही नहीं है, भले ही वे प्रेस में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हों पर सच्चाई तो यह है कि केजरीवाल जी का आधा वक़्त मीडिया व मंत्रियों के संग निकल जाता है और बाकी का समय वे पार्टी के कामकाज यानी आने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारियों में लगा देते हैं, तो ऐसे चल रही है आम आदमी की दिल्ली।

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जल गई लालू की लालटेन

Posted on 01 February 2014 by admin

राम विलास पासवान को लालू प्रसाद से गठबंधन के लिए मनाने में कांग्रेस की सबसे महती भूमिका रही। दरअसल एक समय पासवान ने जद(यू) के साथ जाने का पूरा मन बना लिया था, वे जद(यू) के कई नेताओं के निरंतर संपर्क में थे, पर उनकी मजबूरी थी कि वे कांग्रेस का साथ भी नहीं छोडऩा चाहते थे। ऐन वक्त कांग्रेस ने बिहार में अपना एक गुप्त जनमत सर्वेक्षण करवाया, इसके नतीजे कांग्रेसी रणनीतिकारों के आंख खोलने वाले थे, जनमत बता रहा था कि अगर कांग्रेस बिहार में अकेले चुनाव में जाती है तो उसके लिए एक सीट जीतनी भी मुश्किल हो जाएगी, वहीं अगर वह नीतीश के साथ जाती है तो 1 सीट जीत सकती है, वहीं अगर वह लालू-पासवान के गठबंधन में चुनाव लड़ती है तो 10 में से 4-5 सीटें जीत सकती है, वहीं राम विलास पासवान भी अपनी गठबंधन की 8 में से आधी सीट जीत सकते हैं,  और लालू 12-15 सीटें जीत सकते हैं। इस सर्वे ने बिहार में लालू के लिए गठबंधन का रास्ता साफ कर दिया।

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राहुल की भूल दर भूल

Posted on 01 February 2014 by admin

राहुल गांधी का एक अंग्रेजी चैनल को दिया गया इंटरव्यू सबसे बड़ा फ्लॉप साबित हुआ, इस इंटरव्यू को अरेंज करने में प्रियंका गांधी और राहुल की इमेज मैनेज करने वाली एक कंपनी की महती भूमिका थी। सूत्र बताते हैं कि इस पूरे इंटरव्यू के दौरान प्रियंका भी कैमरे की नज़रों से दूर राहुल की बगलगीर थीं, समझा जाता है कि अपना इंटरव्यू खत्म करने के बाद राहुल ने उस एंकर से पूछा भी कि उन्होंने (राहुल ने) कैसा बोला, यहां तक राहुल उस इंटरव्यू के बाद इतने उत्साहित थे कि वे एक हिंदी न्यूज चैनल को भी इंटरव्यू देने का मन बना चुके थे। समझा जाता है कि राहुल ने अपना इंटरव्यू ले रहे अर्णब गोस्वामी से यह भी जानना चाहा कि उनके ग्रुप का क्या कोई हिंदी न्यूज चैनल भी है? अर्णब के मना करने पर राहुल ने उन्हें कोई नाम सुझाने को भी कहा। तब तक राहुल-प्रियंका को नहीं मालूम था कि यह इंटरव्यू सियासी प्याले में इतना बड़ा तूफान लेकर आने वाला है, इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद सोशल मीडिया में राहुल की जब इस कदर किरकिरी होनी शुरू हो गई तो फिर उस मीडिया एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पार्टी ने पूछा है कि ‘उसका यह पूरा मूव राहुल की इमेज के लिए बेहद नकारात्मक रहा है, सो क्यों न पार्टी उससे सारा काम वापिस ले लें।’ एजेंसी हैरान है कि वह क्या करे वह राहुल के मुंह में शब्द तो डाल सकती है….परï?

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नए लोकपाल की तलाश में केंद्र

Posted on 25 January 2014 by admin

नए लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्रनीत मनमोहन सरकार ने कदमताल शुरू कर दिए हैं, आगामी 5 फरवरी से संसद सत्र आहूत है, संभव है कि यह सत्र 22 तक चले, केंद्र सरकार की कोशिश है कि इसी दरम्यान लोकपाल की ज्यूरी तय करने की मीटिंग कर ली जाए। सनद रहे कि जूरी चुनने की इस मीटिंग में प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल रहेंगे। वैसे लोकपाल के दावेदारों में जो नाम प्रमुखता से रेस में बने हुए हैं, वे हैं-सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस सताशिवम, पूर्व चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर, पूर्व चीफ जस्टिस जस्टिस एस.एच.कपाडिय़ा व जस्टिस डी.के.जैन। चूंकि मौजूदा चीफ जस्टिस सताशिवम ज्यूरी चुनने वाले पैनल में शामिल हैं, सो वे चाहे तो लोकपाल के लिए अपना नाम प्रस्तावित भी कर सकते हैं या चाहें तो नाम वापिस भी ले सकते हैं।

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नहीं मिल रहा स्नूपगेट पर जांच कमीशन का अगुआ

Posted on 25 January 2014 by admin

‘स्नूपगेट’ पर जांच कमीशन बनाने व मोदी को घेरने की केंद्र सरकार की मंशाओं पर घड़ों पानी फिर गया लगता है, इस बात से कांग्रेस हाईकमान भी खासा परेशान है कि कोई भी रिटायर जज आखिरकार क्यों नहीं इस जांच कमीशन की अगुवाई के लिए तैयार हो रहा है, इस जांच कमीशन की अध्यक्षता के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर का नाम फाइनल किया था, सूत्र बताते हैं कि जब जस्टिस कबीर इस कमीशन की अध्यक्षता के लिए तैयार नहीं हुए तो फिर केंद्र सरकार की ओर से जस्टिस एच.एस.बेदी और जस्टिस दीपक वर्मा से संपर्क साधा गया, पर इन दोनों जज महोदयों ने भी साफ-साफ मना कर दिया, यानी कांग्रेस सरकार की एक अदद जज की तलाश अब भी जारी है।

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75 प्लस का रिटायरमेंट प्लॉन

Posted on 25 January 2014 by admin

पिछले दिनों भाजपा में एक हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब संघ के निर्देश पर भाजपा के तीन 75 प्लस सीनियर नेताओं को यह समझाने की पुरकश चेष्टïा हुई कि वे लोकसभा का अगला चुनाव लडऩे का इरादा छोड़ दें और ऊपरी सदन यानी राज्यसभा की शोभा बढ़ाएं, साथ ही पार्टी में अभिभावक की भूमिका निभाएं, ये नेतागण थे-मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा और शांता कुमार। सबसे ज्यादा आग-बबूला जोशी ही हुए वे अपनी बनारस की लोकसभा सीट छोडऩे के लिए कतई तैयार नहीं दिखे और उन्हें अंदर ही अंदर यह चिंता भी खाई जा रही है कि यह सारा ड्रामा मोदी के निर्देश पर हो रहा है, जिनकी नज़र उनकी वाराणसी सीट पर टिकी है।

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विजिलेंस कमिश्नर की रेस में

Posted on 25 January 2014 by admin

देश के नए विजिलेंस कमिश्नर को लेकर माथा-पच्ची जारी है, डीओपीटी ने कुछ शॉर्ट लिस्ट कर लिए थे, और यह सूची प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री नारायणसामी को पहले ही सौंप दी गई थी, नारायणसामी इस लिस्ट को लेकर प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग करने ही वाले थे कि अचानक से उनकी पत्नी के निधन की दुखद $खबर आ गई, सामी को आनन-फानन में पुद्दुचेरी रवाना होना पड़ा, अब वे इस शुक्रवार को ही लौटकर दिल्ली आए हैं, सो अब आज-कल में कभी भी यह मीटिंग हो सकती है और नए विजिलेंस कमिश्नर के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है, जो अधिकारी गण विजिलेंस कमिश्नर बनने की रेस में शामिल हैं वे हैं यूटी कैडर के 1977 बैच के आइपीएस अजय चड्ढïा, 1975 बैच के यूपी कैडर के आइपीएस राजीव कुमार, कानून सचिव पी.के.मल्होत्रा, मध्य प्रदेश कैडर के 1975 बैच के आइएएस अंशु वैश्य, गुजरात कैडर के 1975 बैच के आइएएस डी.के.सीकरी। सनद रहे कि विजिलेंस कमिश्नर के चयन के लिए गठित सेलेक्शन पैनल में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, सीवीसी, नेता प्रतिपक्ष शामिल रहते हैं।

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कौन है शाएना एन.सी?

Posted on 25 January 2014 by admin

भाजपा की पेजथ्री नेता शाएना एन.सी ने महाराष्टï्र से भाजपा के कोटे से राज्यसभा में आने के लिए सबसे जोरदार लॉबिंग की, यहां तक कि उनके लिए पूरा ‘बांबे क्लब’ एक जुट होकर कदमताल कर रहा था, सूत्र बताते हैं कि शीर्ष उद्योगपति रतन टाटा, मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, कुमारमंगलम बिड़ला और सुब्रत राय सहारा ने शाएना की पैरवी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से की, शाएना के पिता नाना चुड़ा सामा मुंबई के शेरिफ रह चुके हैं, जिन्होंने एक मुस्लिम लडक़ी से निकाह किया था, यह मुस्लिम युवती रिश्ते में वाहनमती की मौसी लगती हैं, यानी शाएना की मां जहां मुस्लिम है, वहीं उनके पिता गुजराती और शाएना ने स्वयं एक मारवाड़ी युवक से शादी रचाई है। पर संघ और भाजपा प्रमुख की यह सोच शाएना की महत्वाकांक्षाओं के रास्ते का रोड़ा साबित हो रही है कि ये इस द$फे किसी ग्लैमरस चेहरे को भाजपा के कोटे से उपकृत नहीं करना चाहते।

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राहुल की कंघी पीसी का सर

Posted on 25 January 2014 by admin

पिछले हफ्ते आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की बैठक में हंसी व ठहाकों की लहर दौड़ गई जब अपने भाषण के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हिंदी के उस मंझे जुमले को आज़माते हुए प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नमो पर चुटकी लेते हुए कहा-‘इनकी मार्किटिंग स्किल्स का तो मैं भी कायल हो गया हूं, ये तो इतने बड़े सेल्समैन हैं कि वे गंजे को भी कंघी बेच दें।’ राहुल का यह कहना था कि पूरे हॉल में ठहाके गूंज गए, पर राहुल इतने पर ही नहीं चुप हुए, उन्होंने आम आदमी पार्टी पर चुटकी लेते हुए कहा-‘अब तो मैदान में कुछ नए लोग भी आ गए हैं, उनकी चतुरता देखिए वे गंजों को नया हेयर कट देने में जुटे हैं’ फिर से हॉल में ठहाकों की गूंज सुनाई देने लगी, वहां मौजूद हर व्यक्ति ठठाकर हंस रहा था, सिवाए पी.चिदंबरम के जो इन हिंदी कहावतों का अर्थ नहीं समझ पा रहे थे। उनके बगलगीर थे कांग्रेस अध्यक्षा के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल, जिन्होंने बातों व इशारों में चिदंबरम को इन हिंदी कहावतों का अंग्रेजी तर्जुमा समझाया, जब तक पीसी को बात समझ में आई और उन्होंने हंसना शुरू किया तब तक हॉल में मौजूद नेतागण हंसना बंद कर चुके थे।

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