Posted on 28 February 2014 by admin
दिल्ली में 49 दिनों के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की एक बड़ी गलती माननीय राष्टï्रपति महोदय की नज़र में आ गई, वह भी सिर्फ इसीलिए कि प्रणबदा कालांतर में देश के वित्त मंत्री रह चुके हैं, राष्टï्रपति ने गृह मंत्रालय से पूछा कि दिल्ली का बजट कहां है? यही सवाल गृह मंत्रालय ने दिल्ली के उप राज्यपाल से पूछा, उप राज्यपाल ने यही सवाल दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी से दुहराया, चीफ सेक्रेटरी ने जब इस बाबत फाइनेंस सेक्रेटरी को तलब किया तो उनका जवाब था कि आम आदमी सरकार ने उनसे बजट तैयार करने को ही नहीं कहा, फिर चीफ सेक्रटरी ने पूछा कि बिना सप्लीमेंटरी डिमांड के जो 300 करोड़ डिस्काम कंपनियों को देना था, वह कहां से दिया? जवाब मिला- ‘अनाउंस हुआ था, पर बजट में प्रावधान नहीं था।’ सब्सिडी और नॉन प्रेमेंट का क्या हुआ? जवाब आया-‘जी, वह बस प्रेस नोट है, कैबिनेट का $फैसला भी नहीं है।’
Posted on 28 February 2014 by admin
फिर क्या था, इस $खबर के आते ही प्रशासनिक हलके में तहलका मच गया, बात देश के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम तक पहुंची, उन्होंने आनन-फानन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से संपर्क साधा और उन्हें इत्तला भेजी कि आइआरएस रह चुके अरविन्द केजरीवाल बिना बजट पास किए ही आंदोलन मोड में चले गए और यदि दिल्ली का बजट पास नहीं हुआ तो सरकारी कर्मचारियों को 1 अप्रैल को उनकी तनख्वाह नहीं मिल पाएगी, सो किसी तरह जल्दबाजी दिखा कर संसद सत्र के आखिरी दिन यानी 21 फरवरी को यह बजट पास हुआ, वह भी सुषमा स्वराज के इस आश्वासन के बाद कि ‘दिल्ली में किसी तरह का संवैधानिक संकट उत्पन्न होने नहीं दिया जाएगा, और अब जो बजट पास भी हुआ है उसमें न तो वे 300 करोड़ हैं और न ही सब्सिडी के कोई ऑर्डर।’ सो, सरकार चलाना आंदोलन चलाने से अलग है केजरीवाल जी।
Posted on 28 February 2014 by admin
पिछले सप्ताह शनिवार को देश के एक बड़े मीट एक्सपोर्टर मोइन कुरैशी के यहां इंकम टैक्स की बड़ी रेड हुई, इसी छापे में इस बात का भी खुलासा हुआ कि मोइन और दिवंगत पोंटी चड्डïा के न सिर्फ फार्म-हाउस साथ-साथ हैं, बल्कि ये दोनों बिजनेस पार्टनर भी थे। एक वरिष्ठï सीबीआई अधिकारी के साथ कुरैशी की बातचीत का टेप भी सामने आया है और उस बातचीत में एक बड़ा खुलासा हुआ है कि हवाला के माध्यम से लंदन और पेरिस में एक बड़ा निवेश हुआ है और इस बात के भी संकेत मिले हैं कि इस बाबत सारे वित्तीय लेन-देन भी लंदन में ही हुए हैं, इस छापे में जितनी संपत्तियों का खुलासा हुआ है वह कुरैशी की कंपनी के 15 साल के टर्नओवर से भी कहीं ज्यादा है, सनद रहे कि कुरैशी और इस वरिष्ठï सीबीआई के फोन दो सालों से सर्विलेंस पर थे, बुधवार को इस व्यवसायी के नोएडा परिसर भी छापा मारा गया, यहां भी बहुत कुछ मिलने की बात कही जा रही है, अब सरकार $खास कर इंकम टैक्स की नज़र दिल्ली के एक अन्य बड़े मीट एक्सपोर्टर पर है, जिनके कई भाजपा नेताओं से गहरे ताल्लुकात हैं। क्या अगली बारी उनकी है?
Posted on 28 February 2014 by admin
ममता बनर्जी को जब से समाजसेवी अन्ना हजारे का साथ मिला है उनके हौंसले आसमान छू रहे हैं, अब उनके दूत मुकुल राय ने जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी को भी साध लिया है। सब योजना के मुताबिक रहा तो शाही इमाम देश भर में ममता के लिए चुनाव प्रचार कर सकते हैं, दीदी की कोशिश तृणमूल को एक राष्टï्रीय दल के तौर पर स्थापित करने की है, जिससे वह बंगाल से दीगर अन्य जगहों पर भी वामपंथियों के समक्ष एक महती चुनौती उपस्थित कर सकें। फिलहाल इस आम चुनाव में दीदी अपने उम्मीदवार बिहार, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्टï्र और सीमांध्र जैसे राज्यों में उतारना चाहती हैं, इसके लिए दीदी ने अपने लिए अन्ना और शाही इमाम के तौर पर दो स्टार प्रचारक इक_ïे कर लिए हैं।
Posted on 28 February 2014 by admin
इस बार सुप्रीम कोर्ट के 10 जज रिटायर हो रहे हैं, जिनमें से चार न्यायाधीशों ने लोकपाल के चेयरपर्सन बनने के लिए आवेदन किया है, इनमें जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, चीफ जस्टिस सदाशिवम, जस्टिस बी.एस.चौहान और जस्टिस सी.के.प्रसाद के नाम शामिल हैं, रेस में दो नाम सबसे आगे हैं और केंद्र सरकार की पसंद भी यही माने जा रहे हैं, ये हैं- जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस सी.के.प्रसाद।
Posted on 28 February 2014 by admin
सूत्र बताते हैं कि आईबी की एक गुप्त रिपोर्ट में 2014 के आम चुनाव में भाजपानीत एनडीए को 240 सीटें, कांग्रेस को 60-62, सपा को 9, बसपा को 12-13, नीतीश को 3-4 सीटें मिलने की बात कही गई है।
Posted on 16 February 2014 by admin
2014 के आम चुनाव का रंग कुछ अलहदा है, सियासत पल-पल रंग बदल रही है और बड़े-बड़े खिलाडिय़ों के भी रंग उतर रहे हैं, मसलन जो दिग्विजय सिंह भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज के खिलाफ बहुत पहले से विदिशा से चुनाव लडऩे का खम्म ठोंक रहे थे, वे बेदम निकले, अब तो वे सागर से भी चुनावी मैदान में उतरने को तैयार नहीं दिखते। मध्य प्रदेश के एक और प्रमुख कांग्रेसी नेता सुरेश पचौरी ने भी चुनाव लडऩे से मना कर दिया है, राजस्थान वाले सी.पी.जोशी का भी यही हाल है, सचिन पायलट अपनी अजमेर सीट छोडक़र जोशी की भीलवाड़ा सीट पर अपनी किस्मत आज़माना चाहते हैं, केंद्रीय खेल राज्य मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह अपनी अलवर की सीट से अपनी पत्नी अंबिका सिंह को लड़वाना चाहते हैं, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री नमो नारायण मीणा की सीट टोंक-सवाई माधोपुर से अशोक गहलोत अपने पुत्र वैभव को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। भाजपा की देशव्यापी मोदी-हवा के बावजूद भी कई बड़े नेताओं की हवाईयां उड़ रही है। अरुण जेतली, मुख्तार अब्बास नकवी, वेंकैया नायडू जैसे नेता चुनाव नहीं लडऩा चाहते। शत्रुघ्न सिन्हा के बड़े बोलों से मोदी-फोरम नाराज़ है, सो वह सिन्हा की पटना सीट से रवि शंकर प्रसाद को लड़वाना चाहता है। कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह भी बुलंदशहर से चुनाव लडऩे का इरादा बुलंद नहीं कर पा रहे, वे अपने लिए राज्यसभा चाहते हैं। शशि थरूर अपनी पत्नी सुनंदा की असमय मौत से गमज़दा हैं, सो वे तिरूअनंतपुरम से चुनाव लडऩे में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।
Posted on 16 February 2014 by admin
कांग्रेस इस दफे के आम चुनाव में अपने दरकते दुर्ग को बचाने की चुनौती से जूझ रही है, सो 2014 के चुनाव के महती चुनौतियों से उबरने के लिए कांग्रेस अपनी दो सूत्री नीति पर काम कर रही है, एक, पार्टी के मीडिया रणनीति को नए सिरे से पारिभाषित किया जा रहा है, दो, अपने लोकसभा प्रत्याशियों के चयन में पार्टी बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस ने एक तीन सदस्यीय टीम का गठन किया है, जिसके अंदर सरकार के एक सीनियर मंत्री, एक सीनियर प्रवक्ता और एक जूनियर प्रवक्ता को समाहित किया गया है, यह टीम अपने स्टेट यूनिट को मीडिया का सामना करने के लिए प्रशिक्षित करेगी और सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, भोजन का अधिकार तथा लोकपाल विधेयकों से परिचित कराएगी इसके अलावा यूपीए सरकार के विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को भी एजेंडे में शामिल करेगी, शुरूआती चरण में लखनऊ, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, पटना, भोपाल आदि शहरों में इस टीम की धमक सुनाई देगी, इसके अलावा राहुल गांधी पार्टी प्रत्याशियों के चयन में भी पर्याप्त सर्तकता बरत रहे हैं, मसलन राहुल ने पार्टी चुनाव समिति को स्पष्टï हिदायत दी है कि जो नेता लगातार दो बार से लोकसभा चुनाव हार रहे हों और 1 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हारे हों उसे पार्टी टिकट नहीं देगी। तथा उम्मीदवार की छवि को भी लेकर एक स्वतंत्र एजेंसी से पहले सर्वे कराया जाएगा। कांग्रेस भले ही चुनाव हार रही हो, पर उसने अभी उम्मीद नहीं हारी है।
Posted on 16 February 2014 by admin
12 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद हरीश रावत को उत्तराखंड की गद्दी क्या मिली, कईयों के नासूर हरे हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा कैंप रावत की गद्दी हिलाने में अभी से जुट गया है, इस कैंप के 5 कांग्रेसी विधायक एक बड़े बिजनेस हाउस के निरंतर संपर्क में हैं, इस बिजनेस हाउस के अगुआ ने अभी दिल्ली में भाजपा के प्रमुख केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर उन्हें यह प्रस्ताव दे रहे हैं कि अगर भाजपा उत्तराखंड में सरकार बनाने को तैयार हैं तो ये पांचो विधायक अपनी विधानसभा की सदस्यता छोड़ देंगे, इस कार्य के एवज में यह बिजनेस हाउस भाजपा वालों को एक मुंहमांगी रकम देने को भी तैयार है, बिचारे रावत करें तो क्या, अपनी गद्दी बचाएं कि सरकार चलाएं।
Posted on 16 February 2014 by admin
वाराणसी संसदीय क्षेत्र का चुनाव इस दफे खासा दिलचस्प होने वाला है, पहली बार काशी नरेश परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में उतर रहा है, काशी नरेश के पोते पहले कांग्रेस से टिकट चाह रहे थे, पर राहुल गांधी ने इस पर सोचने में बहुत वक़्त लगा दिया, तो सपा ने इस मौके को लपकते हुए काशी नरेश परिवार को अपना टिकट ऑफर कर दिया, आप के टिकट पर यहां से जेएनयू के प्रोफेसर आनंद कुमार मैदान में उतरने वाले हैं, इन स्थितियों में भगवा पार्टी के उम्मीदवार मुरली मनोहर जोशी की संभावनाओं पर ग्रहण लग सकता है, क्योंकि बनारस की जनता अपने जनप्रतिनिधि जोशी से खासी नाखुश बताई जाती है, उनपर सदा से यह आरोप भी लगता रहा है कि वे वाराणसी में यदा-कदा ही दिखते हैं, दिल्ली में ज्यादा बने रहते हैं। इसीलिए पूर्वांचल के भाजपा नेताओं ने मोदी के समक्ष यह गुहार भी लगाई थी कि वे इस दफे का चुनाव बनारस से लड़ें, संघ ने एक मुहिम चलाकर जोशी जैसे बुजुर्ग नेताओं को राज्यसभा में भेजने का उपक्रम भी चलाया पर जोशी इसके लिए राजी नहीं हुए। सो, मोदी को वाराणसी से लड़ाने का सपना फिलहाल तो भाजपा के लिए टेढ़ी खीर नज़र आ रहा है।