Posted on 09 March 2014 by admin
हरियाणा के चुनावी मैदान से भगवा रणबांकुरों का नाम एक तरह से फाईनल हो गया है, भिवानी से जनरल वी.के.सिंह मैदान में होंगे, करनाल से हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई, गुडग़ांव से राव इंद्रजीत सिंह, रोहतक से ओमप्रकाश धनखड़, फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर और गुर्जर उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाने की सूरत में हरियाणा भाजपा युवा मोर्चा के कोषाध्यक्ष यशवीर डागर, अंबाला से पूर्व सांसद रतन लाल कटारिया, वहीं कांग्रेस से भाजपा में नई-नई आईं कृष्णा गहलावत सोनीपत की सीट मांग रही हैं, पर विनोद शर्मा के चलते कृष्णा गहलवात की उम्मीदवार फच्चर में फंस सकती है।
Posted on 09 March 2014 by admin
कभी लालू प्रसाद के विश्वस्त सहयोगियों में शुमार होने वाले रामकृपाल यादव की नाराजगी सिर्फ पाटलिपुत्र सीट छिन जाने की वजह से नहीं थी, इसकी कई और सियासी कारण बताए जा रहे हैं, नहीं तो लालू की पुत्री मीसा भारती नाराज रामकृपाल अंकल को मनाने के लिए उनके पीछे-पीछे नई दिल्ली तक आ गई थीं, और उन्होंने फराखदिली दिखाते हुए पाटलिपुत्र सीट फिर से रामकृपाल को ऑफर कर दी थी। पर तब तक रामविलास पासवान के मार्फत रामकृपाल बीजेपी से अपने तार जोड़ चुके थे और उनकी भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह से एक निर्णायक दौर की बातचीत हो चुकी थी, कहते हैं यूं तो राजद छोडऩे का मन रामकृपाल ने काफी पहले बना लिया था, पर कुछ आर्थिक मामलों को लेकर उनका लालू की पार्टी में पांव फंसाए रखना जरूरी था।
Posted on 09 March 2014 by admin
272 प्लस के लिए कुछ भी करेगा, बीजेपी नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करने में पूरा जोर लगा रही है, एक-एक सीट पर फोकस किया जा रहा है, नए साथियों को एनडीए में लाया जा रहा है, रूठों को मनाया जा रहा है, बी.एस.येदुरप्पा की भाजपा में वापसी के तमाम विरोधों को दरकिनार करते हुए उन्हें इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कर्नाटक में अहम भूमिका में रखा है, कर्नाटक की चंद सीटों पर श्री रामलु की बीएसआर कांग्रेस कर्नाटक का विलय भी भाजपा में हो चुका है, इस विलय से रेड्डïी बंधु भी अब भगवा पार्टी के पक्ष में खुलकर अलख जगा सकते हैं, श्री रामलु नायक समुदाय से आते हैं, कर्नाटक के बेल्लारी, कोप्पल, रायचुर, गडग़ व चित्रदुर्ग जिलों के अलावा महाराष्टï्र में भी इनका असर माना जाता है। सो अब भाजपा में भी केंद्रीय स्तर पर दो गुट बन गए हैं, एक सुषमा व अडवानी का गुट है जो ऐसे दागी लोगों को पार्टी में शामिल किए जाने के खिलाफ है, वहीं दूसरी ओर मोदी गुट सबको साथ लेकर चलने की हिमायत कर रहा है।
Posted on 02 March 2014 by admin
कांग्रेस के एक वरिष्ठï नेता, जो 10 जनपथ से अपनी नजदीकियों की वजह से हरियाणा के हुड्डïा सरकार में मंत्री हैं, दो टीवी चैनल तथा दर्जन भर पंचतारा होटलों के मालिक हैं, ठीक पहचाना आपने, वही विनोद शर्मा अपने एक टीवी चैनल के प्रमुख दीपक चौरसिया के साथ यूं अचानक लोगों को बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के 38, अशोक रोड स्थित निवास पर दिख गए। सूत्रों की मानें तो वे हरियाणा के करनाल संसदीय सीट से भाजपा का टिकट मांग रहे थे, उन्हें बताया गया कि समझौते के तहत यह सीट पहले ही सहयोगी दल हरियाणा जनहित कांग्रेस को दे दी गई है, तो 2014 के चुनावी महाभारत को एक नया माएने देने की नीयत रखने वाले विनोद शर्मा की नज़र अब कुरूक्षेत्र पर टिक गई है, जहां से एक और बड़े उद्योगपति नवीन जिंदल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हैं।
Posted on 02 March 2014 by admin
देश के एक बड़े मीट-कारोबारी / एक्सपोर्टर मोईन कुरैशी पर सीबीआई छापे के बाद धीरे-धीरे कई सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं, मोईन की पेजथ्री फेम पत्नी नसरीन कुरैशी जो मूलत: पाकिस्तान की रहने वाली हैं, इसके अलावा मोईन के दिल्ली के हाई-प्रोफाइल लोगों से संबंध, उनके लंदन, पेरिस व दुबई कनेक्शन का भी जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही है, इस पड़ताल में यह भी शामिल है कि सीबीआई के एक पूर्व मुखिया की पुत्री जो पेशे से फैशन डिजाइनर हैं, उनका पेरिस में शो-रूम खुलवाने में मोईन ने क्या मदद की है, इसके अलावा दस जनपथ से जुड़ीं एक सहयोगी कांग्रेसी महिला, उनकी बहन के पति और यूपीए सरकार से कम से कम तीन प्रमुख मंत्रियों के साथ मोईन के रिश्तों की बारीकी से पड़ताल हो रही है, इनमें से एक केंद्रीय राज्य मंत्री यूपी से आते हैं जो राहुल गांधी के करीबियों में शुमार होते हैं, एक मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, जो बहुत पैसे वाले हैं, और मनमोहन सरकार में कई अहम महकमे संभाल चुके हैं, एक मंत्री कांग्रेस के सहयोगी दल एनसीपी के हैं और वे महाराष्टï्र से आते हैं। इन तमाम बड़े लोगों से मोईन की बातचीत के टेप जांच एजेंसियों के पास मौजूद हैं, इस पूरे मामले के तार लंदन के प्रसिद्घ डॉरचेस्टर होटल से जुड़े हैं, जब मोईन कुरैशी ने कुछ वर्ष पहले अपने लंदन प्रवास के दौरान इस होटल को कैश में एक बड़ा भुगतान किया था, होटल-प्रबंधकों को तब मोईन पर शक हुआ और इन्होंने इस बात की सूचना ब्रिटेन के खुफिया विभाग को दे दी थी, तब से मोईन इन एजेंसियों के सर्विलांस पर आ गए थे।
Posted on 02 March 2014 by admin
सहारा प्रमुख सुब्रत राय को सोनिया गांधी से पंगा लेना भारी पड़ा। सोनिया बनाम सहारा के इस जंग का आगाज़ तब हुआ जब 1999 में अपने एक प्रेस-कांफ्रेंस के दौरान अपनी देशभक्ति की रौ में सहाराश्री कह गए कि ‘किसी विदेशी मूल की महिला को इस देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए।’ यह बात सोनिया के मन में घर कर गई, 2004 में जब केंद्र में पहली यूपीए सरकार का गठन हुआ तो चिदंबरम को बुलाकर सोनिया ने जिन दो लोगों के खिलाफ ‘ब्रीफ’ दिया उसमें से एक नरेंद्र मोदी थे, दूसरे सुब्रत राय सहारा। यूपीए-ढ्ढ कार्यकाल में जब लालू सहयोगी प्रेम गुप्ता ने कंपनी अफेयर्स मामलों का कार्यभार संभाला तो कथित तौर पर उन्हें भी सरकार की ओर से एक वर्क-प्लॉन दिया गया कि सहारा की दुकान कैसे बंद करवानी है, और कैसे चरणबद्द तरीके से सरकार द्वारा यह नोटिफिकेशन लाया जाना है कि सहारा द्वारा इक_ïी की जा रही तमाम रकम आरबीआई बांड में 100 $फीसदी लगानी जरूरी है। यूपीए सरकार अपने मंसूबों में कामयाब रही और शनै: शनै सहारा के लिए मुश्किलें बढ़ती गई। सेबी के चैयरमैन के तौर पर यू.के.सिन्हा की नियुक्ति भी इसी मंशा के तहत की गई थी, और ईनाम के तौर पर सिन्हा को केंद्र सरकार द्वारा दुबारा सेवा-विस्तार भी दे दिया गया। यानी केंद्र में नई सरकार के आने तक सहाराश्री को अपने अच्छे दिनों के लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है।
Posted on 02 March 2014 by admin
आखिर ऐसी क्या बात हो गई जो लालू-रामविलास की वर्षों पुरानी दोस्ती टूट गई और रामविलास लालू के सबसे प्रबल शत्रु मोदी की गोद में जा बैठे। सूत्रों की मानें तो लालू के साथ जाने में सबसे ज्यादा परेशानी रामविलास के युवा पुत्र चिराग पासवान को थी जो लोक जनशक्ति पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं। दरअसल चिराग लालू सहयोगी रधुवंश प्रसाद सिंह के उस बयान को लेकर खासे नाराज थे कि जिसमें उन्होंने रामविलास की पार्टी को बिहार में ‘ढाई सीट’ लडऩे के काबिल बता दिया था, मामले की नजाकत को भांपते हुए लालू ने अपने विश्वस्त सहयोगी अब्दुल बारी सिद्घिकी को पासवान के घर दिल्ली माफी मांगने भी भेजा, पर चिराग का तर्क था कि लालू के लोग गाली तो सार्वजनिक तौर पर देते हैं और माफी चुपचाप रात के अंधेरे में मांग जाते हैं, आखिर इसका लोगों में क्या संदेश जाएगा? इसके अलावा लालू रामविलास को सिर्फ 4 सीटें देने को राजी थे, वहीं बीजेपी से उनकी 7 सीटों पर बात बन गई, रामविलास को भरोसा है कि बीजेपी के गठबंधन में वे कम से कम बिहार में 5 लोकसभा सीटें जीत सकते हैं। सो, उन्होंने अपनी बंगला में से लालू की लालटेन बाहर निकाल दी, कमल के प्रस्फुटन की आस में।
Posted on 02 March 2014 by admin
फैशन डिजाइनर, एक्टिविस्ट व फिल्मकार मुज़फ्फर अली 2001 के बाद से लगातार दिल्ली में ‘ज़श्ने-खुसरो’ के नाम से एक सूफी महोत्सव आयोजित करते आए हैं, दिल्ली की शीला सरकार भी इस सूफी महोत्सव को लेकर खासी उत्साहित रहती थीं। पर जब से इस दफे के विधानसभा चुनाव में दिल्ली से शीला सरकार की विदाई हो गई और उनकी जगह कुछ दिनों के लिए ही सही, दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल सरकार बनी, केजरीवाल के विद्रोही तेवरों को देखते हुए दरअसल मुज़फ्फर अली हिम्मत ही नहीं जुटा पाए कि वे केजरीवाल के समक्ष मुस्लिम तहजीब, शेरो-शायरी की रवायत को जिंदा रखने की बात करें और उनकी सरकार से जश्ने-खुसरो आयोजित करने के लिए पैसा मांगे। सो अली साहब ने चतुराई से इस महोत्सव को अप्रैल आखिर तक के लिए टाल दिया है, नहीं तो आम तौर पर हर साल मार्च में यह आयोजन दिल्ली में होता आया है। वैसे भी दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग की ऐसे मामलों में खासी दिलचस्पी रही है, वे सक्रिय रंगकर्म में हिस्सेदारी निभा चुके हैं और कभी तुगलक, तो कभी अकबर का रोल निभा चुके हैं, कायदे से मुजफ्फर अली को जंग साहब के पास जाना चाहिए था।
Posted on 02 March 2014 by admin
पुराने गांधी वादी नेता अन्ना हजारे ने अपने सुर क्या बदले आम आदमी पार्टी तो बिल्कुल से गांधीगिरी पर उतर आई है। जैसे ही अन्ना ने ममता की तारीफों में कसीदे पढ़े और उन्होंने ममता के लिए चुनाव प्रचार के लिए हामी भर दी, अरविन्द केजरीवाल के हाथों के तोते उड़ गए, आनन-फानन में अन्ना की टक्कर के गांधीवादियों की खोज होने लगी और केजरीवाल समर्थक ढूंढ़-ढांढकर गांधी के पोते राजमोहन गांधी को ढूंढ लाए जो पहले ही घाट-घाट कर पानी पी चुके हैं। तुरंत-फुरंत में इस बात का ऐलान हुआ कि राजमोहन गांधी ‘आप’ के टिकट पर पूर्वी दिल्ली से चुनाव लड़ेंगे। यानी दिल्ली में रहकर राजमोहन मीडिया वालों के लिए ज्यादा से ज्यादा उपलब्ध रह सकेंगे और ‘आप’ अन्ना के मुकाबले उनसे खंडन-मंडन वाला बयान दिलवा पाएगी।
Posted on 02 March 2014 by admin
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी एक निर्देश के मुताबिक इस 31 मार्च से 2005 के पहले वाले 500 और 1000 रुपए के नोट चलन में बंद हो जाएंगे, सरकार की मंशा साफ नज़र आती है कि वह चाहती है कि लोगों का कालाधन बाहर आए, वह बैंकों में जमा हो, सरकार के खाली खजाने में पैसा आए और इस चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल पर हर संभव रोक लगे, पर एक बड़ा सवाल अभी भी अनुत्तरित है कि 31 मार्च के बाद 2005 के पहले के उन नोटों का क्या होगा?