Posted on 12 April 2014 by admin
A new polarisation is in the offing in Uttarakhand. The BJP seems to have an upper hand in all the five Lok Sabha seats there. Bhuvan Chandra Khanduri, Ramesh Pokhriyal Nishank and Bhagat Singh Koshiyari have got an edge over their closest competitors. At the same time, Dehradoon is an open playing field for Satpal Maharaj because all these three aspirants for the chief minister’s post – Khanduri, Koshiyari and Nishank – have been handed over the Delhi tickets. While including him into the BJP, the party high command had assured Satpal Maharaj that he will be made Uttarakhand chief minister after the Lok Sabha elections. Half-a-dozen Congress MLA are ready to leave the party and join the BJP to be with Satpal Maharaj.
Posted on 12 April 2014 by admin
Priyanka Gandhi was in Khan Market a few days ago and was purchasing pastries from her favourite confectionary shop. She banged into a journalist who is familiar with her who told her that the Congress will see its lowest lows if she still didn’t take over the party reins. Priyanka laughed and said, “You have waited for so long. It is just a matter for some more time, wait until then.”
Posted on 12 April 2014 by admin
Siwagat Ullah Ansari, who is the Assembly member from Mohammadabad and also Mukhtar Ansari’s brother, had a significant role to play in the latter’s refusal to contest elections from Varanasi. He had conducted a public opinion survey in the city to gauge the conditions for Mukhtar contesting as an independent candidate. According to the survey, Mukhtar would have got merely 19,000-20,000 votes against Modi. Most Muslim voters were favouring Arvind Kejriwal of AAP.
Posted on 05 April 2014 by admin
गौतमबुद्घ नगर के कांग्रेसी उम्मीदवार रमेश चंद तोमर पार्टी व निष्ठा बदलने में सबको मात दे गए और उन्होंने भगवा होने की अपनी रणनीति को बड़े सुविचारित तरीके से अंजाम दिया, सबसे पहले तो कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कनिष्क सिंह की मदद से अपनी गौतमबुद्घ नगर सीट को पार्टी द्वारा निर्धारित ‘ए’ कैटेगरी में डलवा लिया, कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पार्टी ने उन्हें चुनाव लडऩे के लिए पेशगी की तौर पर 50 लाख तो पहले ही दे दिए थे। 2 अप्रैल की देर रात तक उन्होंने पार्टी कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा के घर पर शेष रकम पाने के लिए जैसे धरना ही दे दिया। पार्टी ने ‘ए’ कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 2 करोड़ की रकम तय की हुई है, चुनांचे 2 की रात वे वोरा जी से अपनी बाकी की किश्त डेढ़ करोड़ की रकम लेकर निकल गए और अगले दिन मोदी की रैली में उन्होंने अपना चोला बदल लिया। भाजपा से जुड़े सूत्र बताते हैं कि तोमर पहले भाजपाध्यक्ष राजनाथ के संपर्क में आए, राजनाथ ने उन्हें पार्टी के उत्तर प्रदेश के प्रभारी अमित शाह से मिलवा दिया, अमित शाह के माध्यम से भी वे उपकृत हुए और उन्होंने ऐसे वक्त कांग्रेस को ज़ोर का झटका दिया जब पार्टी का चुनाव चिन्ह उन्हें चुनाव आयोग द्वारा आबंटित हो गया और जब नामांकन वापिस लेने की तारीख निकल गई, तब उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया। अब कांग्रेस के लिए गौतमबुद्घ नगर में बड़ी दुविधा की स्थिति पैदा हो गई है, पार्टी के कार्यकत्र्ताओं का वहां क्या स्टैंड हो। वैसे भी कांग्रेस उन पर मुकदमा चलाने की सोच रही है।
Posted on 05 April 2014 by admin
सोनिया गांधी के राय बरेली से पर्चा दाखिल करने के दौरान प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा की गैर मौजूदगी कईयों को हैरान करने वाली थी, क्योंकि अब से पहले सोनिया के हर नामांकन के दौरान प्रियंका व रॉबर्ट उनके साथ देखे जाते रहे हैं, जबकि रॉबर्ट ने राय बरेली जाने की पूरी तैयारी कर रखी थी, तब ऐन वक्त पर सोनिया का संदेशा आया कि जब तक देश में चुनाव चल रहे हैं तब तक रॉबर्ट सोनिया व राहुल के साथ सार्वजनिक रूप से न दिखें, क्योंकि रॉबर्ट का जिक्र आते ही उनके लैंड-डील के मामलों को विपक्ष उठाने लगता है। पर जहां तक प्रियंका गांधी का सवाल है उन्हें राहुल गांधी के अमेठी में पर्चा दाखिल करते वक्त उनके साथ वहां देखा जा सकेगा, दूसरी सबसे अहम बात यह कि अमेठी व रायबरेली दोनों ही संसदीय क्षेत्रों में प्रचार व चुनाव प्रबंधन की कमान प्रियंका के पास रहेगी, और अब प्रियंका का अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त राय बरेली व अमेठी में गुजारा करेंगी।
Posted on 05 April 2014 by admin
सुल्तानपुर के भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी को सुर्खियों की सवारी गांठना खूब पसंद है, सो एक सुविचारित तरीके से वे अमेठी में अपने चचेरे भाई राहुल गांधी के स्वयंसेवी सहायता समूहों की तारीफ कर जाते हैं, अपने पूरे चुनावी अभियान को मोदी-मदद व मोदी लहर से अछूता रखते हैं, यहां तक कि सुल्तानपुर में 2 लाख 80 हजार आबादी वाले मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जाकर भी उनका वोट और सपोर्ट मांगते हैं, यह वरुण बदल गए हैं, 2009 के चुनावों से निपट उलट छवि है यह, सबको साथ लेकर चलने की बात करते हैं, सुल्तानपुर में इनका मुख्य मुकाबला बसपा के बाहुबली पवन पांडे से हैं। वरुण इस बात से भी बेखबर लगते हैं कि उनके संसदीय क्षेत्र में अकेले ब्राह्मïणों की आबादी कोई 2 लाख 60 हजार है, यहां दलित वोट 4 लाख, कुर्मी वोट सवा लाख, राजपूत सवा लाख वोटर हैं। पवन पांडे एक ओर जहां दलित व ब्राह्मïण वोटों पर अपना फोकस कर रहे हैं। वहीं वरुण खुल कर कह रहे हैं कि उन्हें हर वर्ग का वोट चाहिए। और सुल्तानपुर को अपने पिता संजय गांधी की यादों से जोड़ कर वहां के मतदाताओं के साथ अपना एक भावनात्मक रिश्ता कायम करना चाहते हैं, यही वजह है कि ब्राह्मïण व राजपूत वोट तेजी से उनके पाले में आते दिख रहे हैं।
Posted on 05 April 2014 by admin
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अमृतसर से चुनावी मैदान में उतरने की कहानी कोई कम दिलचस्प नहीं। दरअसल पंजाब के कुछ हैवीवेट कांग्रेसी मसलन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा इस चुनाव में कैप्टन को निपटाना चाहते थे, बाजवा और कैप्टन में छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है, सो बाजवा ने दूर की कौड़ी खेलते हुए सोनिया गांधी को फोन करके कहा कि अगर कांग्रेस वास्तव में अमृतसर में भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार अरुण जेतली को घेरना चाहती है तो उन्हें चुनौती देने के लिए कैप्टन से बेहतर और कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं हो सकता। बाजवा की रणनीति साफ थी कि अगर कैप्टन जीत जाते हैं तो फिर दिल्ली की राजनीति करेंगे, हार जाते हैं तो दुबई की ठौर पकड़ लेंगे, और अगर चुनाव लडऩे से इंकार कर देते हैं तो मैडम सोनिया की नज़रों से गिर जाएंगे, यानी हर हाल में उनका यानी बाजवा का पंजाब का अगला सीएम बनने की राह पक्की। पर जैसे ही सोनिया ने कैप्टन से बात की, कैप्टन ने बिना एक पल की देर लगाए अमृतसर से जेतली को चुनौती देने के लिए तुरंत हामी भर ली, तब तक इस बात का भाजपा में कहीं किसी को दूर-दूर तक कोई इल्म न था।
Posted on 05 April 2014 by admin
इस बार के लोकसभा चुनाव में करीब दो दर्जन से ज्यादा आईएएस और आईपीएस अफसर चुनाव लड़ रहे हैं, इनमें से कई सेवा निवृत्त हैं तो कई अपनी बंधी-बंधाई नौकरी छोड़ कर चुनावी मैदान में कूदे हैं, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के.सिंह भी भाजपा के टिकट पर बिहार के आरा संसदीय क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं, 1975 बैच के बिहार काडर के आईएएस अफसर आर.के.सिंह का मुख्य मुकाबला जनता दल(यू) की मीना सिंह से है, पर मीना सिंह व आर.के.सिंह के चुनावी अभियान में जमीन आसमान का फर्क है, जहां सिंह साहब राजनीति बेहद तहजीब भरे अंदाज़ में कर रहे हैं, यानी उनका डिब्बा बंद खाना व बोतल बंद पानी उनके पूरे चुनावी अभियान में साथ-साथ चलता है, सिंह साहब के भाषणों पर उनका अंग्रेजीदांपन झलकता है, वहीं मीना खालिस बिहारी अंदाज़ में अपना चुनाव प्रचार कर रही हैं, सिंह साहब के हाय-हलो से अलहदा वो अपने चुनाव अभियान के दौरान कहीं किसी घर में खाना-पीना कर लेती हैं, पांव छू कर बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना नहीं भूलतीं, पर जहां तक किस्मत और चुनावी हवा की बात है, आरा का 90 फीसदी राजपूत बीजेपी और आर.के.सिंह के साथ हैं, और सिंह साहब ने अपनी प्रतिद्वंदी पर अभी से काफी बढ़त बना ली है।
Posted on 05 April 2014 by admin
कांग्रेस ने चुनाव क्षेत्र व प्रत्याशियों की ताकत के हिसाब से देश भर की संसदीय सीटों को तीन कैटेगरी में बांटा है, ‘ए’ कैटेगरी में जीत की प्रबल संभावनाओं वाली लोकसभा सीटों को रखा गया है और यहां चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेसी उम्मीदवारों को चुनाव खर्च के तौर पर 2 करोड़ की रकम दी जा रही है, ‘बी’ कैटेगरी की सीटों पर चुनाव लड़ रहे पार्टी उम्मीदवारों को डेढ़ करोड़ तथा ‘सी’ कैटेगरी सीटों पर चुनाव लड़ रहे पार्टी प्रत्याशियों के लिए एक करोड़ की रकम तय है। और यह पूरी रकम पार्टी प्रत्याशियों को लगभग तीन किश्तों में अदा की जा रही है।
Posted on 30 March 2014 by admin
रशीद मसूद के भतीजे इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी के बारे में जो विवादास्पद बात कही है, वह कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति भी हो सकती है। मुजफ्फरनगर दंगों की आंच में जब पश्चिमी यूपी और सारा जाट लैंड झुलस रहा था, तब भी कांग्रेस, सोनिया व राहुल ने मुस्लिम समाज के जख्मों पर सियासी रोटियां सेंकनी चाही, यही काम भाजपा ने भी किया, हिंदुओं की भावनाओं भडक़ा कर। बतौर उम्मीदवार इमरान को आगे लेकर आने में पर्दे के पीछे से प्रियंका गांधी की एक अहम भूमिका रही थी, जिन्होंने राहुल व सोनिया से बात कर इमरान की सहारनपुर से उम्मीदवारी को एक मुकम्मल रूप दिया था। वैसे जब इमरान ने कथित तौर पर मोदी को टुकड़ों में काटने की बात कही थी तो उस वक्त मीडिया का कोई भी प्रतिनिधि वहां मौजूद नहीं था, इमरान अपने खास कार्यकत्र्ताओं की टोली से यह बात कह रहे थे, उन्हीं कार्यकत्र्ताओं में से एक अपने मोबाइल पर इमरान की यह फिल्म बना ली और उनके एक करीबी जर्नलिस्ट को लीक भी हो गई। सहारनपुर में कुल साढ़े पंद्रह लाख वोटर हैं, इनमें से करीब 5 लाख मुस्लिम वोटर हैं जो किसी उम्मीदवार की जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जाहिर तौर पर इमरान व कांग्रेस की नजर मुस्लिम वोटों को ही गोलबंद करने की रही होगी। मुस्लिम वोट भले ही अभी पशोपेश की स्थिति में हों, पर पश्चिमी यूपी में इमरान एपिसोड के बाद से हिंदू वोट जरूर भाजपा के पक्ष में गोलबंद होने लगे हैं। चुनांचे अगर इस पूरे मामले का अगर चुनाव आयोग संज्ञान लेता है और किसी सूरत में अगर इमरान की उम्मीदवारी रद्द हो जाती है तो कांग्रेस नेतृत्व ने तमाम विकल्पों की भी सुध ले सकता है।