Posted on 08 February 2015 by admin
पीएमओ ने अपने सारे मंत्रियों का एक रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है, मंत्रियों के कामकाज, उनकी निपुणता, शासकीय फैसलों को आधार बना कर 10 अंकों के पैमाने पर उन्हें कसौटी पर रखा गया है। मोदी ने साफ कर दिया है कि जिन मंत्रियों के अंक 5 से ऊपर हैं, वे उनसे बिलावजह मिल कर उनकी पीठ नहीं थपथपाना चाहते, कई मंत्रिगण ऐसे हैं जो हाशिए पर सिमट आए हैं और अंक तालिका में उन्हें 2 से कम अंक प्राप्त हुए हैं, मोदी ने ऐसे मंत्रियों की क्लास लगानी शुरू कर दी है, उनसे ‘वन टू वन’ संवाद स्थापित कर रहे हैं, इस कड़ी में जो मंत्रिगण शामिल हैं, उनमें से चंद नाम हाजिर हैं, मसलन नजमा हेपतुल्ला, राधामोहन सिंह, श्रीपद नायक, स्मृति ईरानी आदि-आदि।
Posted on 08 February 2015 by admin
केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी की जगह एल सी गोयल को लाया जाना प्रधानमंत्री कार्यालय के सर्वशक्तिमान नृपेंद्र मिश्र का एक अहम फैसला था, चूंकि केंद्रीय गृह सचिव राजनाथ सिंह पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा के लिए यह पद चाह रहे थे, पर पीएमओ से जुड़े अहम सूत्र बताते हैं कि सौरभ भी नृपेंद्र मिश्र को उतने ही प्यारे हैं और मिश्र ने अपने प्रिय चंद्रा के लिए एक अहम जिम्मेदारी पहले से तय कर रखी है। अगर पीएमओ की सबसे ताकतवर तिकड़ी यानी नृपेंद्र मिश्र, पी के मिश्रा और अजित डोभाल की यूं बदस्तूर चली तो सौरभ चंद्रा देश के अगले कैबिनेट सचिव हो सकते हैं। इसी कड़ी में कैबिनेट सेक्रेटरी अजित सेठ का कार्यकाल 6 महीनों के लिए बढ़ाया गया है जिससे कि वक्त रहते सौरभ चंद्रा का ‘इमपेनलमेंट’ हो सके और उनके अगले कैबिनेट सेके्रटरी बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके। नृपेंद्र मिश्र के तमाम चहेते अधिकारियों को उनकी मन चाही पोस्टिंग मिल रही है, अपने चहेते आईपीएस अधिकारी प्रकाश मिश्र को नृपेंद्र मिश्र सीबीआई का डायरेक्टर बनवाना चाहते थे, पर नवीन पटनायक के इतने उग्र विरोध को नजरअंदाज कर पाना नरेंद्र मोदी के लिए मुमकिन नहीं हुआ। सो प्रकाश मिश्र को आईबी प्रमुख के पद से ही संतोष करना पड़ा। आज भी पीएमओ में कार्यरत तमाम ताकतवर अधिकारी चाहे वह अशोक प्रसाद हों या अनंत कुमार सिंह इन सबको नृपेंद्र मिश्र का वरदहस्त प्राप्त है।
Posted on 08 February 2015 by admin
नए पदाधिकारियों के चुनाव को लेकर 15-17 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक अहम बैठक आहूत है, संघ की यह बैठक हर तीन साल में एक बार होती है, जिसमें संघ के पदाधिकारियों का औपचारिक चुनाव होता है। समझा जाता है कि इस वक्त संघ में नंबर दो भैय्याजी जोशी संरक्षक की नई भूमिका में अवतरित हो सकते हैं। भैय्याजी जोशी की जगह लेने के लिए दत्तात्रेय होसबोले का नाम रेस में सबसे आगे बताया जाता है, वे सह सरकार्यवाह की भूमिका में नार आ सकते हैं। होसबोले की जगह लेने के लिए बिहार के प्रांत प्रभारी स्वांत रंजन का नाम सामने आ रहा है, यह भी माना जा रहा है कि आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में स्वांत रंजन की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
Posted on 08 February 2015 by admin
भले ही संघ नेतृत्व आखिरी दम तक दिल्ली में भगवा कमल खिलाने के प्रयासों में जुटा रहा, पर कैडर में एक तरह का असंतोष साफ देखा गया, चुनांचे चुनाव के दिन भी कैडर न तो इस तरह अपने घरों में बाहर निकला और न ही मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने में उस कदर बेकरार दिखा, जैसा 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान समां बंधा था, कईयों की सहानुभूति तो खुले तौर पर आप और केजरीवाल के साथ रही। दिल्ली के चुनाव के दो रोज पहले झंडेवालान स्थित संघ के दीनदयाल उपाध्याय संस्थान के गेट पर खड़े एक प्रहरी ने खुल्लम खुल्ला ‘आप’ की टोपी लगा रखी थी, पर उसे रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था।
Posted on 08 February 2015 by admin
एक तेज चैनल ने तेजी से अपनी निष्ठा बदल ली है, मोदी-प्रेम का चोगा भी बदल लिया है और केंद्र सरकार के प्रति अपने तेवर भी, दरअसल इस मीडिया समूह के सर्वेसर्वा अपने लिए पद्मविभूषण की आस लगाए बैठे थे, सर्वोच्च नागरिक सम्मान से वंचित रह गए तो दिल्ली के नागरिकों की सुध लेनी शुरू कर दी और दिल्ली विधानसभा चुनावों में भगवा अरमानों पर पानी फेरने के लिए हाथों में झाड़ू उठा ली।
Posted on 04 February 2015 by admin
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के दौरान हमारे प्रधानमंत्री का उन्हें ‘बराक’ संबोधन देना, कई पश्चिमी मीडिया को रास नहीं आ रहा है, वे इसे किसी राष्ट्राध्यक्ष के जरूरी शिष्टाचार का हनन मान रहे, लंदन से निकलने वाली प्रसिद्ध पत्रिका ने तो आवेश में आकर इसे ‘एक चाय वाले का अनर्गल प्रलाप करार’ दिया है। वहीं मोदी को खुश करने की होड़ में उनके नजदीकी और मंत्रिगण चापलूसी की तमाम सीमाएं लांघ रहे हैं। पिछले सप्ताह जैसे ही कैबिनेट की मीटिंग शुरू हुई एक प्रमुख महिला नेत्री में अतिरंजित तारीफों के पुल बांध दिए। बकौल महिला मंत्री-‘सर, आपका अमरीकी राष्ट्रपति को ‘बराक’ कह के बुलाने से हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है, वह अमरीकी राष्ट्रपति से आपकी निजी दोस्ती के नए आयाम से वाकिफ हो रहा है, और कहीं न कहीं उन्हें अमरीका से अपनी बराबरी का अहसास हो रहा है।’ सच है शासन सिर्फ बड़े दिल और बड़े मन से नहीं होता, इसके लिए आत्म प्रवंचनाओं की खिड़की-दरवाजे खोलकर उनसे बाहर भी निकलना होता है।
Posted on 04 February 2015 by admin
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा जिस कदर अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, उससे आम आदमी पार्टी के हालिया अभ्युदय की अवधारणा को कहीं ज्यादा मजबूती मिलती है। शाह और मोदी की पसंद बेदी को लेकर भाजपा संगठन में असहजता का आलम व्याप्त है। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों जब भाजपा की सीएम पद की उम्मीदवार किरण बेदी ने दिल्ली के भाजपा सांसदों को मिलने के लिए बुलाया, तो सबसे पहले इस कड़कती ठंड में सांसदों को बाहर ही अपने जूते उतार कर उनके कमरे में प्रवेश करना पड़ा, फिर किसी टीचर की मानिंद किरण बेदी ने इन सांसदों से दो मिनट में अपना परिचय देने को कहा, इस पर संघ पृष्ठभूमि से जुड़े एक भगवा सांसद बेतरह उखड़ गए और उन्होंने किंचित तल्खी से बेदी से कहा-‘हम सांसद हैं, और आप हमारी सीएम पद की उम्मीदवार, इतना ही परिचय काफी है, आप सीधे मुद्दे पर आएं।’
Posted on 04 February 2015 by admin
22 जनवरी को हरियाणा के पानीपत में मोदी की ‘बेटी बचाओ रैली’ में खास तौर पर शामिल हुईं सिने तारिका माधुरी दीक्षित नरेंद्र मोदी की निजी पसंद बताई जाती हैं। सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने अपनी ‘मन की बात’ अपने प्रिंसिपल सेके्रटरी नृपेंद्र मिश्र से शेयर की, फिर माधुरी को उस प्रोग्राम में आमंत्रित करने के लिए पीएमओ के अधिकारियों में होड़ मच गई। जब माधुरी से मुंबई में संपर्क साधा गया तो ‘धक-धक गर्ल’ ने बताया कि चूंकि उनकी मां आईसीयू मेंर् भत्ती हैं, सो उनका कार्यक्रम में शामिल हो पाना मुश्किल है। फिर किंचित मनुहार के बाद वह मान गईं, अपने 10 लोगों की टीम के साथ बिजनेस क्लास में सफर के बाद वह दिल्ली पधारीं, यहां के एक मशहूर पंचतारा होटल में दो दिनों के लिए एक आलीशान सुईट में बुकिंग कराई गई, उनकी पसंद की एक खास सीरीज की कार उनके लिए मंगाई गई, कहना न होगा कि सिर्फ माधुरी के आव-भगत पर सरकार के 8-10 लाख रुपए खर्च हो गए, शेष रकम की बात तो गुप्त है।
Posted on 04 February 2015 by admin
भले ही सियासी रंग मंच पर तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता सिंह की अकस्मात रूखसती कईयों को हैरान करने वाली हो, पर इसकी पटकथा तो काफी पहले लिखी जा चुकी थी, मोदी और सुजाता सिंह के संबंधों में वैसे भी प्रगाढ़ता की कोई डोर नहीं जुड़ी थी, क्योंकि सुजाता सिंह की पाक नीति को लेकर मोदी इत्तफाक नहीं रखते थे। मोदी के विदेश नीति के एजेंडे में अमरीका, चीन व जापान को लेकर कुछ खास रणनीतियां समाहित थीं। पिछले वर्ष सितंबर में जब मोदी अपनी अमरीका यात्रा पर गए तो वहां के भारतीय राजदूत एस.जयशंकर की सूझ बूझ के वे कायल हो गए, कहते हैं जयशंकर की सलाह मानते हुए मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एशियन सेंचुरी’ जैसे जुमलों का इस्तेमाल न्यूयॉर्क के अपने बहुचर्चित ‘मेडीसन स्वॉयर’ के उद्बोधन में नहीं किया। सुजाता सिंह से अलहदा जयशंकर का स्पष्ट तौर पर मानना था कि इन जुमलों का अमरीका में सकारात्मक संदेश नहीं जाएगा, मोदी ने जयशंकर की सलाहों पर अमल किया और दोनों के बीच एक नए रिश्ते की शुरूआत हुई।
Posted on 04 February 2015 by admin
जब पिछले दिनों भाजपा की सीएम पद की उम्मीदवार किरण बेदी पूर्वी दिल्ली में एक रोड-शो कर रही थीं, तो बेदी से मिलने के बाद एक 3-4 साल के बच्चे ने अपने पिता से बेहद मासूमियत से पूछ लिया-‘पापा, यह मिस्टर बेदी हैं या मिसेज बेदी?’ सूत्र बताते हैं कि बच्चे की इस बात का इस पूर्व पुलिस अधिकारी ने बेहद बुरा माना और उन्होंने बच्चे के पिता को कथित तौर पर डपटते हुए कहा-‘आप अपने बच्चे को कुछ तमीज क्यों नहीं सिखाते?’