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फेसबुकिंग आइडिया को मोदी की ना

Posted on 27 September 2015 by admin

फेसबुक प्रमुख मार्क ज़करबर्ग जब मोदी से मिलने नई दिल्ली आए थे तो उन्होंने तब बड़ी-बड़ी बातें की थीं। सो, इस बात से प्रेरित होकर अपनी अमेरिका यात्रा से पूर्व मोदी ने सीध्ो ज़करबर्ग से बात कर उनसे अनुरोध किया कि जब वे अमेरिका आएं तो ज़करबर्ग उनके सम्मान में एक डिनर आयोजित करे, जिसमें साइबर वल्र्ड की कुछ नामचीन हस्तियों को आमंत्रित किया जाए। सूत्र बताते हैं कि मोदी ने इसके लिए खासतौर पर सुंदर पिचाई का नाम भी लिया। पर ज़करबर्ग चाहते थे कि मोदी उनके फेसबुक कार्यालय का प्रयोग करें, वहां एक छोटा सा लेक्चर दें और फेसबुक में उच्च पदों पर कार्यरत भारतीयों से सीध्ाा संवाद स्थापित करें। किसी वजह से मोदी को ज़करवर्ग का यह फेसबुकिया आइडिया पसंद नहीं आया और उन्होंने फाॅच्र्यून500 लीडरों से मिलना ही ज्यादा बेहतर समझा।

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मोदी की लंदन रैली के लिए भीड़

Posted on 27 September 2015 by admin

संघ के नव प्रवत्र्तक थिंक टैंक राम माध्ाव अगर नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित लंदन रैली को देसी स्टाइल की रैली कर रहे हैं तो इसकी एक खास वजह है। टीम मोदी लंदन के वेम्बले स्टेडियम में होने वाली रैली में 50 हज़ार भारतीयों की भीड़ जुटाना चाहती हैं, ऐसे अप्रवासी भारतीय जो परिवार समेत लंदन में रह रहे हैं। टीम मोदी का अपना अनुमान और सर्वेक्षण बता रहा है कि 20-25 हज़ार लोगों की स्वतः स्फूत्र्त भीड़ अपने आप जुट जाएगी। शेष बची संख्या के लिए टीम मोदी लंदन और आसपास काम कर रहे वैसे अप्रवासी भारतीयों पर डोरे डाल रही है जिनकी सालाना आय 25 हज़ार पांऊड से कम है यानी जो वहां मेहनत-मज़दूरी के काम में लगे हैं। ऐसे लोगों की षिनाख़्त कर उन्हें भदेस देसी अंदाज़ में आने का न्यौता भेजा जा रहा है इस आष्वासन के साथ कि रैली में शामिल होने की वज़ह से जो उनके दैनंदिन कार्य का नुकसान होगा उसकी भरपाई की जाएगी।

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राजनाथ का अंदाज़ेबयां

Posted on 27 September 2015 by admin

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह सीआरपीएफ कमांडो की एक बैठक ले रहे थे, जिसका संदर्भ बिहार के आसन्न विधानसभा चुनाव से जुड़ा था। इस बैठक में यह भी तय हो रहा था कि जम्मू-कश्मीर या छत्तीसगढ़ यहां से कितने सीआरपीएफ ट्रूप को बिहार चुनावों के लिए मुक्त करना है। फिर कमांडरों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने एक बेहद पते की बात कही कि आप चुनावों में हमारे जवानों को निडरता से काम करने को कहिएगा जिससे चुनाव एक भयमुक्त वातावरण में संपन्न हो सके, पर उन्हें अति उत्साह दिखाने की जरूरत नहीं है। सनद रहे कि ऐन चुनावों के दिन पोलिंग बूथ पर बिहार पुलिस के बजाए कमान इन्हीं केंद्रीय रक्षा बलों के पास होती है, जिसकी वोटिंग ट्रेंड सेट करने में एक महती भूमिका हो सकती है।

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बीमार स्वास्थ्य मंत्रालय को मोदी ख़ुराक

Posted on 20 September 2015 by admin

गवर्नेंस को लेकर प्रधानमंत्री का रवैया अपने मंत्रियों के प्रति किंचित सख़्त हुआ है। बिहार चुनाव की आहटों और शोर -शराबे के बीच पिछले दिनों पीएम ने अपने कैबिनेट साथियों की क्लास ली और सरकार के पंद्रह-सोलह महीनों की उपलब्धियां गिनाने को कहा। लगभग सभी मंत्री पूरी तैयारी के साथ आए थे। अपना होम-वर्क भी दुरूस्त करके आए थे। जब बारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्ढा की आई तो उन्होंने अपने मंत्रालय की 3 प्रमुख उपलब्धियां गिनाईं। उपलब्धि नंबर 1-उनका मंत्रालय ई-गवर्नेंस से पूरी तरह लैस हो गया है, 2- बच्चों को जन्म देते समय माताओं की ‘मातृत्व मृत्यु दर’ में कमी आई है और 3- दवाईयों की मार्किट में सप्लाई बेहतर हुई है। पर उपलब्धियों का यह बखान पीएम को प्रभावित नहीं कर पाया। संभवतः वे सुनना चाहते थे कि दिल्ली में डेंगू की भयावहता बेतरह पैर पसार रही है, ऐसे में दिल्ली के अस्पताल आम आदमी को लूटने में लगे हैं ़़ ़ ़ आदि-आदि। जब मोदी के इस ‘स्वगत कथन’ की नड्ढा थाह नहीं लगा पाए तो सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने अपने स्वास्थ्य मंत्री से पूछ ही लिया कि ‘आपके मंत्रालय ने मरीजों से जुड़े जनहितकारी कार्य क्या-क्या किए हैं, आप इस बारे में बात करो।’ जाहिर है इस बाबत मंत्रीजी के पास कहने को बहुत कुछ नहीं था, बाहर निकले तो साथी मंत्रियों ने जानना चाहा कि पीएम से क्या बात हुई? मंत्रीजी ने कहा अभी उनका नंबर नहीं आया है, पीएम फिर से बुलाएंगे।

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बिना काम हैं मोदी के राज्यमंत्री

Posted on 20 September 2015 by admin

केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों को पीएमओ की बेहद साफ-साफ हिदायत है कि वे अपने अधीनस्थ राज्यमंत्रियों के कार्यों का समुचित बंटवारा करें, उन्हें भी फाइलें भिजवाएं, काम करने दें। पर इक्के-दुक्के कैबिनेट मंत्रियों की बात छोड़ दें तो मोदी सरकार के ज्यादातर राज्यमंत्री बस लाल बत्ती मंत्री हैं, उनके पास ज्यादा कुछ करने-धरने के लिए नहीं। एक दबंग महिला मंत्री से तो उनके राज्यमंत्री पानी मांग रहे हैं, इन दोनों राज्य मंत्रियों ने अपने दुख-दर्द को बयां करने के लिए प्रधानमंत्री को एक मार्मिक चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में उन्होंने विस्तार से अपने साथ हो रही दुष्वारियों की चर्चा की है। सूत्र बताते हैं कि मंत्रियों ने पीएम को लिखा है कि उनके लिए मंत्रालय में उनके कमरे से लगा कोई टाॅयलेट भी नहीं है। उन्हें भी गलियारा पार कर उसी टाॅयलेट का इस्तेमाल करना पड़ता है जिसे उनके आॅफिस के कर्मचारी इस्तेमाल करते हैं। एक राज्यमंत्री ने लिखा कि एक फाइल के सिलसिले में उन्होंने मत्रालय के जेएस को कमरे में तलब कर लिया, महज इस बात पर सीनियर मंत्री ने उन्हें काफी भला-बुरा कहा। चुनांचे जब पीएम मंत्रियों की रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा कर रहे थे और जब इस मंत्रालय का नंबर आया तो मोदी ने यूं अचानक ऐलान कर दिया कि इस मंत्रालय की रिपोर्ट कार्ड मंत्रालय के राज्यमंत्री पेश करेंगे। सूत्र बताते हैं कि इन केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में उनके राज्यमंत्री ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘सर, हम एक चपरासी तक तो बहाल नहीं कर सकते, मंत्रालय के कामकाज का क्या बखान करेंगे?’ इस कृत से पीएम ने सीनियर मंत्री तक अपना मैसेज पहुंचा दिया।

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गृह मंत्री की सियासी कसरत

Posted on 20 September 2015 by admin

इन दिनों सीनियर और जूनियर गृहमंत्री बेहद फुरसत में हैं। गुजरात से आने वाले हरिभाई पर पीएम की विशेष अनुकंपा बताई जाती है। सो, उनके पास करने को थोड़े बहुत काम होते हैं। पूर्वोत्तर, लद्दाख और तिब्बत पीएमओ की प्राथमिकताओं की सूची में शुमार हैं। लिहाजा राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के माध्यम से पीएम इन्हें खुद ही डील कर रहे हैं। चुनांचे राजनाथ जी इन दिनों ज्यादा फुरसत में हैं, सो इन दिनों उनका यूपी खासकर लखनऊ का दौरा खूब लग रहा है। वे संगठन के कार्यों में भी रूचि लेते दिख रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री किरण रिजिजू भले ही पूर्वोत्तर से संबंध रखते हों, पर पूर्वोत्तर मामलों में शायद ही इनकी राय को कोई खास तरजीह मिल पा रही हो चुनांचे इन दिनों दोपहर एक बजे भी रिजिजू को नई दिल्ली के अशोक होटल के अमात्रा में जिम करते देखा जा सकता है। सियासी सेहत की फिक्र में चलो सेहत तो बन ही रही है।

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काॅल ड्राप पर पीएमओ सख़्त

Posted on 20 September 2015 by admin

पिछले कुछ समय से कैबिनेट की तमाम बैठकों में काॅल ड्राप का मुद्दा छाया हुआ है। स्वयं प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर कई बार रविषंकर प्रसाद से अपनी नाराज़गी जता चुके हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली भी कैबिनेट में काॅल ड्राप के मुद्दे पर मुखरता से बोल रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा लगता है कि हम 70 के दशक में जी रहे हैं जब सिर्फ केवल लैंडलाइन का आसरा रहता था। जेटली का कहना था कि साऊथ और नाॅर्थ ब्लाक में तो मोबाइल लगता ही नहीं। इसके बाद ही यह तय हुआ कि तमाम सरकारी इमारतों पर मोबाइल टाॅवर लगाने की इज़ाजत दे दी जाए। रविषंकर प्रसाद तथा दो अन्य मंत्रियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे मीडिया में जाकर यह बयान दें कि मोबाइल टाॅवर से कैंसर का कोई लेना-देना नहीं है। प्रसाद ने पीएम को बताया कि वे और उनके मंत्रालय के सचिव पहले ही टीवी में ऐसा बयान दे चुके हैं, पर लोगों को उनकी बात पर भरोसा नहीं हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद पीएम ने सुझाव दिया कि क्यों नहीं मेनका गांधी से टीवी पर ऐसा बयान दिलवाया जाए जिससे लोगों में यह भरोसा कायम हो सके कि मोबाइल टाॅवर से कैंसर नहीं होता है। पर इस बारे में मेनका से बात करे कौन और कौन मनाए उन्हें ऐसा बयान देने के लिए।

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निर्मला की नफीस अंग्रेज़ी

Posted on 20 September 2015 by admin

अरूण जेटली स्कूल की बेहतरीन प्रोडक्ट में शुमार होने वाली निर्मला सीतारमण की न सिर्फ सरकार में बल्कि हालिया कुछ दिनों में पार्टी में भी तूती बोलने लगी है। अपने कई साथी मंत्रिमणों मसलन सुषमा स्वराज से सीतारमण का जरूरी औपचारिकताओं का निवर्हन भी नहीं होता यानी इनकी आपस में हाय-हैलो भी नहीं होती। वहीं भाजपाध्यक्ष अमित शाह निर्मला की नफीस और तेज-तर्रार अंग्रेज़ी पर फिदा बताए जाते हैं। सो, निर्मला को इन दिनों कइ्र मौकों पर शाह के साथ देखा गया है। सूत्र बताते हैं कि शाह निर्मला से सरकार के मंत्रियों के काम-काज के बारे में इन दिनों जरूरी फीड बैक भी ले रहे हैं और उसे अपने स्तर पर जांच-परख के बाद सीधे मोदी तक पहुंचा रहे हैं।

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कौशल विकास में सिद्दहस्त रूढ़ी

Posted on 20 September 2015 by admin

मोदी के नेतृत्त्व में सरकार ने एक अहम फैसला लिया है कि हर सांसद और मंत्री साल में कम से कम तीन बार विदेश जरूर जाएं। जिससे कि उनके वैष्विक ज्ञान का चतुर्दिक विकास हो सके, जाहिर है यह बात मोदी हवा में नहीं अपने अनुभवों से कह रहे हैं। अपने पीएम के ज्ञान को कौशल विकास मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने बेहद गंभीरता से ग्रहण किया है। अभी वे पिछले 10 दिनों से अपने परिवार के साथ तंजानिया में स्किल डेवलेपमेंट का उपक्रम साध रहे थे, इससे पहले इसी कौशल विकास को धार देने के लिए वे परिवार के साथ माॅरीशस और मालदीव होकर आए हैं।

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बड़ों से पंगा मारिया को महंगा पड़ा

Posted on 13 September 2015 by admin

एक बड़ा सवाल जो नैतिकता व षुचिता की दुहाई देने वाली भाजपा की मंषाओं पर कदमताल कर रहा है कि आखिरकार ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि मुबंई के तत्कालीन पुलिस कमिष्नर राकेष मारिया को इतनी अफरा-तफरी में उन्हें पदोन्नत कर उनका तबादला बतौर होमगाडर््स डीजी कर दिया गया। और वह सब वैसे वक्त में हुआ जब मारिया हाई-प्रोफाइल ‘षीना मर्डर कांड’ की बस तह में पहुंचने ही वाले थे। महाराश्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को भी क्या कहीं ‘ऊपर’ से आदेष था कि उन्होंने जापान रवाना होने से पहले रात के कोई ढाई बजे मारिया ेकी फाईल पर दस्तखत कर दिए। उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि मारिया पीटर मुखर्जिया से कई एंगिल से पूछताछ कर रहे थे और इसमें एक मामला मनी लांड्रिंग यानी हवाला कारोबार से भी जुड़ा था। सूत्र बताते हैं कि इस मनी लांड्रिग में देष के एक षीर्शस्थ उद्योगपति की भूमिका षक के दायरे में आ गई थी। इसके अलावा बांबे क्लब से जुड़े एक-दो अन्य उद्योगपतियों के नाम भी सामने आ रहे थे। इस मामले में कम से कम दो सीनियर कैबिनेट मंत्रियों की भूमिका को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। इनमें से एक केंद्रीय मंत्री की बेटी को खुलकर पीटर के समर्थन में लाबिंग करते देखा गया। यानी पहलू में बड़ा षोर था मोदी राज का, पर यह भी तो कतरा-ए-खून ही निकला।

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