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मुकुल का भगवा प्रेम

Posted on 12 October 2015 by admin

तृणमूल के बागी सांसद इन दिनों अपने लिए एक नया सियासी ककहरा कंठस्थ करने में जुटे हैं, वे एक तरह से नीतीश के पदचिन्हनों पर चल कर भाजपा के साथ अपनी दोस्ती की नई इबारत लिखना चाहते हैं। जिस तरह बिहार में नीतीश कुमार ने भाजपा के संगठन व संसाधनों का इस्तेमाल कर बिहार की राजनीति में अपने लिए एक जगह बना ली, ठीक वही दांव बंगाल में मुकुल राय आजमाना चाहते हैं। सूत्र बताते हैं कि आने वाले दिनों में मुकुल की नई पार्टी को चुनाव आयोग की मान्यता संभव है। सूत्र बताते हैं कि मुकुल का अपना आकलन है कि 2016 के बंगाल चुनाव में उनकी नवगठित पार्टी 35-40 सीटें ला सकती है, भाजपा 15-17 सीटों पर मजबूत दिख रही है, कांग्रेस की भी 30-35 सीटें आ सकती है और सीपीएम की 50 तक। सो, अगर यह गणित कामयाब रहता है तो 295 सदस्यीय बंगाल विधानसभा में ममता की तृणमूल सरकार बनाने की जरूरी गिनती से पीछे रह सकती है, ऐसे में मुकुल एक बड़े प्लेयर के तौर पर उभर सकते हैं। ऐसे में ममता या तो कांग्रेस के साथ मिलकर या फिर मुकुल की पार्टी के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार बना सकते हैं, पर फिलवक्त तो यह दूर के ढोल सुहावने ही दिख रहे हैं।

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एनडीए गठबंध्ान को मोदी का सहारा

Posted on 06 October 2015 by admin

बिहार के जनमत सर्वेक्षणों के नतीजों से टीम शाह के हौंसले बम-बम हैं, अमित शाह को इस बात का बखूबी इल्म है कि भाजपा अपनी 160 सीटों पर अच्छी लड़ाई लड़ रही है, चुनांचे शाह की असली चिंता बिहार में अपने गठबंधन साथियों के प्रदर्शन को लेकर है। गठबंधन दलों के संभावित प्रदर्शन का आकलन करने के लिए शाह ने अब तक 3 सर्वे करवाए हैं। इन तीनों सर्वे में एनडीए के घटक दलों को 24, 27 और 30 सीटें मिलती दिखायी गई हैं, जबकि गठबंधन दलों के हिस्से कुल 83 सीटें आबंटित हैं। सो, अब शाह ने मोदी से आग्रह किया है कि वे सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए भी रैली करें, सो आने वाले दिनों में मोदी की रैली रामचंद्र पासवान के विध्ाानसभा सीट, मांझी की सीट और उपेंद्र कुशवाहा के उम्मीदवारों के लिए भी हो सकती है।

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शाह की आह

Posted on 06 October 2015 by admin

बिहार चुनाव में पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह बिहार की चुनावी बिसात पर अपना हर दांव बेहद फूंक-फूंक कर चल रहे हैं। अमित शाह पार्टी नेताओं की असमय और असंयमित बयानबाजी को लेकर भी खासे नाराज़ बताए जाते हैं। एक अक्तूबर को शाह दिल्ली में थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री से मिल कर उन्हें बिहार के ताजा चुनावी हालात से बाखबर करवाया। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने कम से कम तीन भाजपा नेताओं गिरिराज सिंह, आर.के.सिंह और शत्रुघ्न सिन्हा के रवैये की शिकायत प्रध्ाानमंत्री से की। शाह को अब भी इस बात को लेकर हैरानी है कि गिरिराज सिंह को आखिरकार ऐसे बयान देने की क्या जरूरत थी कि बिहार का अगला सीएम पिछड़ी जाति से होगा। शाह को लगता है कि गिरिराज के इस बयान के बाद सवर्णों में लालू को हराने का जज्बा किंचित मद्दिम पड़ गया है, शाह ने वैसे भी गिरिराज को इस बाबत कड़ी डांट लगाई है और उनसे पूछा है कि आखिरकार वे कब तक भाजपा का नुकसान करते रहेंगे? बिहार चुनाव के पहले चरण को लेकर जहां 12 अक्तूबर को चुनाव होने हैं, टीम शाह के हौंसले अब तलक बम-बम थे, पर पार्टी से निकले 13 बागियों ने उनकी नाक में दम कर रखा है। मोदी की 2 अक्तूबर की रैली से समां भाजपा गठबंधन के पक्ष में जरूर बंधा है, पर शाह इस माहौल को बनाए रखने की असल चुनौती से भी वाकिफ हैं।

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अम्मा का यू-टर्न

Posted on 06 October 2015 by admin

अम्मा और भाजपा के बीच सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है, शायद यही वजह है कि भाजपा जीएसटी बिल के मुद्दे पर संसद का जो दो दिनों का एक्सटेंडेड मानसून सत्र बुलाया जाना तय था, उसे ऐन वक्त कैंसिल कर दिया गया। क्योंकि जीएसटी के मुद्दे पर तमिल महारानी ने अपना रूख सरकार के रणनीतिकारों के समक्ष यह साफ कर दिया था कि वे स्वयं भी जीएसटी बिल के पक्ष में नहीं हैं। जब चैन्नई में जयललिता की मुलाकात प्रधानमंत्री से हुई थी तो उस मीटिंग मंे जयललिता की बातचीत का सारा फोकस उनके ऊपर चल रहे अदालती मामलों से जुड़ा था। भाजपा की ओर से एस. गुरूमूत्र्ति और चो. रामास्वामी ने निरंतर जयललिता से संपर्क बनाया था। मोदी सरकार के दो मंत्रियों नितिन गडकरी और रविशंकर प्रसाद से भी तमिल महारानी के निजी ताल्लुकात बहुत अच्छे हैं पर सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों जब गडकरी और प्रसाद अपने-अपने कार्यों के सिलसिले में चैन्नई में थे तो जयललिता ने इन्हें मिलने का समय देकर भी ऐन वक्त उसे कैंसिल कर दिया, जो कहीं न कहीं केंद्रनीत एनडीए सरकार के प्रति उनकी नाराजगी की एक वजह है।

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शुक्ला की जगह शशांक

Posted on 06 October 2015 by admin

बीसीसीआई के नए अध्यक्ष के तौर पर एकबारगी राजीव शुक्ला का नाम तय माना जा रहा था, क्योंकि उन्हें उस जेटली गुट का समर्थन हासिल हैं जिनके पास 16 वोट बताए जाते हैं, पर ऐन वक्त अमित षाह ने शुक्ला जी के परिदृष्य को धुंधला कर दिया। षाह का जेटली से कहना था कि वे किसी कांग्रेसी का इस पद के लिए कैसे समर्थन कर सकते हैं। ऐसे में चतुर सुजान अनुराग ठाकुर षषांक मनोहर का नाम सामने लेकर आए, शशांक को षरद पवार गुट का समर्थन हासिल है, जिनके जिम्मे मात्र 3 वोट हैं। सनद रहे कि अनुराग की पवार पुत्री सुप्रिया सूले से गहरी छनती है। समझा जाता है कि सुप्रिया ने ही नागपुर के वकील शशांक का नाम आगे किया, जो पहले भी एक टर्म बीसीसीआई के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस दौरान षाह और मनोहर की कभी पटी नहीं, क्योंकि मनोहर ने अहमदाबाद को मैच देने के लिए मनाही कर दी थी। वहीं भाजपा के जुड़े एस. गुरूमूत्र्ति, सुब्रह्मण्यम स्वामी और ज़ी के सुभाश चंद्रा श्रीनिवासन के लिए लाॅबिंग कर रहे हैं कि उनके आईसीसी की विकेट कैसे बचाई जाए। जाहिर है इन परिस्थतियों में सबसे निराष अरूण जेटली ही जान पड़ते हैं, जो हाथ आए इतने स्वर्णिम मौके के बाद भी अपने परम मित्र राजीव शुक्ला को बीसीसीआई की गद्दी पर नहीं बिठा पाए।

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माने ना मनाली

Posted on 06 October 2015 by admin

उत्तराखंड के उत्तरापेक्षी मुख्यमंत्री हरीष रावत अपने दो विधायकों के साथ पिछले दिनों दिल्ली में अपने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। षुरूआत के 10-15 मिनट राहुल बस कुल्लू-मनाली की विषिश्टता और उसके अनुपम सौंदर्य पर बोलते रहे। राहुल ने यह भी बताया कि मनाली तो उनकी दादी को भी बहुत प्रिय था, उन्हें और प्रियंका को भी यह जगह बहुत पसंद है। राहुल ने जोर देकर रावत से कहा कि कुल्लू-मनाली को विष्व स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, अगर पर्यटक इतनी बड़ी तादात में गोवा जा सकते हैं तो फिर मनाली क्यों नहीं? रावत राहुल के इस मनाली प्रेम से अभिभूत हुए बिना नहीं रह सके, फिर उन्होंने से धीरे से कहा कि वे उनकी भावनाओं को हिमाचल के मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह तक पहुंचा देंगे और यह भी इत्तला कर देंगे कि इस बाबत वे आपसे बात कर लेंगे। सूत्र बताते हैं कि जब राहुल को अपनी गलती का अहसास हुआ तो फौरन इसके पांच मिनट के अंदर उन्होंने यह मीटिंग समाप्त कर दी।

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कैप्टन का बदला मन

Posted on 06 October 2015 by admin

पंजाब के कद्दावर कांग्रेसी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पिछले दिनों राहुल गांधी से मिलने वाले भाग्यषालियों में षुमार थे। वे राहुल के बुलावे पर दिल्ली आकर उनसे मिले। पूरी बातचीत एक आत्मीय नोट पर षुरू हुई, फिर धीरे-धीरे इसमें तल्खी आती गई। राहुल ने साफ कर दिया कि उनकी पसंद बाजवा ही हैं, चुनांचे वे पंजाब के आसन्न विधानसभा चुनाव में पार्टी की कमान कैप्टन को नहीं सौंप सकते। नाराज़ कैप्टन पंजाब लौट गए और उन्होंने अब एक-एक करके कांग्रेस के हर जिला प्रतिनिधि को बुलाकर कथित तौर पर उनसे यह चर्चा षुरू कर दी है कि प्रतिनिधिगण बताएं कि उनकी निश्ठा किसके साथ है? कैप्टन के साथ या कांग्रेस के साथ? सूत्र बताते हैं कि अंबिका सोनी ने कैप्टन से बात कर उन्हें एक बीच का रास्ता निकालने को कहा, पर कैप्टन ने साफ कर दिया है कि पंजाब में उन्हें अंबिका का नेतृत्त्व भी स्वीकार नहीं। इन दिनों पंजाब के कांग्रेसी नेताओं में कैप्टन से मिलने की होड़ मची है, सूत्रों के मुताबिक मनीश तिवारी और सुनील जाखड़ जैसे नेतागण भी हालिया दिनों में कैप्टन से मिलकर आए हैं। भाजपा से जुड़े एक उच्च पदस्थ सूत्र का दावा है कि पंजाब चुनावों में भाजपा कैप्टन को अपना नया गठबंधन साथी घोशित कर सकती है क्योंकि अकालियों से उनका पूरी तरह से मोहभंग हो चुका है।

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मोदी की इजराइल यात्रा तीसरी बार खटाई में

Posted on 27 September 2015 by admin

प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित इजराइल यात्रा तीसरी बार टल गई है। इस बात से इजराइल सरकार भी हैरानी में है क्योंकि एनडीए षासनकाल की शुरुआत से ही इजराइल भारत को अपना स्वाभाविक मित्र मानने लगा था। इसी परिप्रेक्ष्य में भारत व इजराइल के बीच कई महत्त्वपूर्ण सैन्य व रक्षा सहयोग भी हुए। सूत्र बताते हैं कि इस दफे राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल की एक संवेदनषील रिपोर्ट के बाद आनन-फानन में मोदी की प्रस्तावित इजराइल यात्रा को टाल दिया गया। सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अगर मोदी इस वक्त इजराइल जाते हैं तो इससे उन्हें ओबामा की नाराज़गी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामेन नेतान्याहू और ओबामा के बीच तलवारें तनी हुई हैं। यह झगड़ा तब से है जब ओबामा पहली बार राश्ट्रपति पद का चुनाव लड़ रहे थे तो नेतान्याहू ने खम्म ठोक कर उनका विरोध्ा किया था। ओबामा की हालिया फिलिस्तीनी नीति को लेकर भी इजराइल को खासी आपत्ति है। इसके अलावा नई दिल्ली स्थित अरब दूतावासों के कोई 14 राजदूत मोदी से आकर मिले थे और उनसे आग्रह किया था कि अगर भारत इजराइल के साथ इतना खुल्लम-खुल्ला प्यार की पींगे बढ़ाएगा तो अरब देषों को भी भारत से अपनी दोस्ती के बारे में सोचना होगा। सूत्र बताते हैं कि सऊदी अरब और कतर के राजदूत ने तो यहां तक चेतावनी दे डाली कि ऐसी सूरत में उन्हें सोचना पड़ सकता है कि वे भारत में निवेष करें या नहीं। यानी इन चैतरफा दबावों की वजह से मोदी की प्रस्तावित इजराइल यात्रा फिर खटाई में पड़ गई।

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ओबामा का चीन प्रेम

Posted on 27 September 2015 by admin

ओबामा ने इस दफे मोदी की अमरीका यात्रा को लेकर वह पुराना वाला उत्साह नहीं दिखाया जबकि चीनी राश्ट्रपति षीजिन पिंग के स्वागत के लिए पलक-पांवड़े बिछा दिए गए। अमेरिकी राश्ट्रपति ने न सिर्फ षीजिन पिंग के लिए दो दिनों का वक्त निकाला बल्कि उनके सम्मान में स्टेट बैंक्वेट भी रखा। वहीं मोदी की अमेरिका यात्रा के डेढ़-दो महीने पहले से पीएमओ यह कोशिश कर रहा था कि मोदी की अमेरिका में ओबामा के संग वन-टू-वन एक आत्मीय बातचीत हो जाए। पर जब इस पर अमेरिकी विदेष मंत्रालय की ओर से कोई ठोस आष्वासन प्राप्त नहीं हुआ तो वाषिंगटन स्थित भारतीय राजदूत को इस बाबत सक्रिय किया गया और आनन-फानन में भारत में बड़े बोइंग सौदे को हरी झंडी दिला दी तब कहीं जाकर व्हाईट हाऊस के दरो-दीवार तनिक पिघले।

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राहुल अमरीका में

Posted on 27 September 2015 by admin

बिहार विधानसभा चुनाव को ऐन अध्ाबीच छोड़ते जब कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी ने मंगलवार को लंदन की उड़ान पकड़ी तो सियासी हलके में सनसनी मच गई क्येंकि राहुल को लंदन से फिर अमेरिका में कोलाराडो की उड़ान पकड़नी थी। कांग्रेस का मीडिया सेल दबी जुबान में यह खुलासा कर रहा है कि राहुल अमेरिका के एक प्रमुख सीबीएस चैनल के को-होस्ट चार्ली रोज़ द्वारा एस्पेन, कोलाराडो में आयोजित ‘आइडियाज़ और इनोवेषन’ के एक व्याख्यानमाला में हिस्सा ले सकते हैं। जिसमें विष्व के कई प्रमुख नेताओं के षामिल होने की अटकले हैं। पर दबी-छुपी जुबान में यह भी कहा जा रहा है कि कोलाराडो अपने मनोरम दृष्यों के लिए ख्यात एक पर्यटन स्थल है, जहां के पथरीले पहाड़ विष्वभर के पर्वतारोहियों का ध्यान अपनी ओर हमेषा खींचते रहे हैं और राहुल का पर्वतारोहण का षौक काफी पुराना है।

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