Archive | विशेष

…और अंत में

Posted on 05 April 2014 by admin

कांग्रेस ने तय किया है कि राहुल की 120 और सोनिया की 80 चुनावी रैलियां सिर्फ उन्हीं संसदीय क्षेत्रों में होंगे, जिन्हें कांग्रेस पार्टी ने अपनी ‘ए’ और ‘बी’ कैटेगरी की सीटों में वर्गीकृत कर रखा है।

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…और अंत में

Posted on 30 March 2014 by admin

यूपी, बिहार और झारखंड के दूर-दराज इलाकों में पहले जब चुनाव प्रचार के दौरान नेतागण पधारते थे तो उनका हेलीकॉप्टर देखने के लिए तमाम भीड़ जुटती थी। पर अब तो हेलीकॉप्टर ऐरा-बैरा-नत्थु खैरा नेता इस्तेमाल कर रहा है। सो, अब नरेंद्र मोदी को सामने से देखने का क्रेज है। सो, इन दिनों इन इलाकों के भाजपा प्रत्याशियों की वार रूम और केंद्रीय नेतृत्व से बस एक ही गुहार है कि बस मोदी की एक सभा लगवा दो। 

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भाजपा से नाराज ब्राह्मïण

Posted on 30 March 2014 by admin

पूर्वांचल से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे एक प्रमुख भगवा नेता ने पार्टी में टिकट बंटवारे से पूर्व अपने संसदीय क्षेत्र में एक जनमत सर्वेक्षण करवाया था। और उस ओपिनियन पोल में सैंपल साइज 2500 रखा गया था तब यह नेताजी 3 लाख से ज्यादा मतों से विजयी होते दिख रहे थे। यूपी में टिकट बंटवारे के तुरंत बाद इन नेताजी ने पहले से कहीं ज्यादा बड़े सैंपल साइज यानी 5,600 के साथ सर्वेक्षण करवाया तब उनकी जीत का मार्जिन घटकर दो से सवा दो लाख पर आ गया था। तब नेताजी को पता चला कि उनके कोई 50-60 हजार ब्राह्मïण वोट छिटक कर बसपा की झोली में जा रहे हैं। चूंकि सर्वेक्षण कंपनी ने उस प्रश्नावली में संबंधित व्यक्ति के फोन नंबर उद्घृत किए थे सो नेताजी ने ब्राह्मïण बहुल कई गांवों के संबंधित व्यक्तियों को फोन लगा दिए सबका एक ही रोना था कि भाजपा में इन दिनों ब्राह्मïणों का सम्मान नहीं हो रहा है।

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कबीर पंथी कर रहे हैं मोदी का प्रचार

Posted on 30 March 2014 by admin

भारतीय जनता पार्टी अपनी पूरी ताकत वाराणसी में झोंक रही है क्योंकि नरेंद्र मोदी यहां से चुनाव लडऩे जा रहे हैं। और भगवा पार्टी की प्रचार कमेटी आधुनिक व परंपरागत प्रचार के सभी तरीके वाराणसी में आजमा रही है। प्रचार कैसे हर स्तर पर और हर तबके तक पहुंचे इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है। वाराणसी को कबीर की धरती भी कहा जाता है सो मोदी सेना ने 200 कबीर पंथियों का एक ऐसा दल गुजरात से वाराणसी भेजा है जो कबीर की सधोकरी की तरह मोदीत्व का राग अलाप रहे हैं, कबीर पंथियों समाज का यह दल अपने आपको सिर्फ वाराणसी तक ही प्रचार में सीमित नहीं रखेगा। बल्कि पूर्वांचल की सभी सीटों पर भी साधु समाज व आम लोगों से मिल कर उनसे मोदी को वोट देने और जिताने की अपील करेगा। वाराणसी में 200 कबीर पंथियों के इस दल ने कबीर चौरा स्थित मूलगादी मठ में अपना डेरा जमा रखा है। पूरे वाराणसी में इन दिनों कबीर भजन की धूम है, जब से यहां इन कबीर पंथियों का हुजूम है।

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तिवारी को संग सारी

Posted on 24 March 2014 by admin

भाजपा के एक शीर्ष नेता ने चंद संसदीय सीटों का हवाला देते हुए भोजपुरी नायक / सिंगर मनोज तिवारी से आग्रह किया कि वे पूर्वांचल की इन सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए अपनी तारीखें दे दें, तो तिवारी ने मृदुभाव से विनयपूर्वक कहा-‘सर, हमारा एक दिन का चार्ज 2 लाख रुपए हैं, कृपया कर आप वह भी भिजवा दीजिएगा।’ यह सुनने भर की देर थी कि नेताजी को मानो सन्निपात मार गया हो।

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जेतली को भरोसा

Posted on 24 March 2014 by admin

पहली बार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे अरुण जेतली कांग्रेसी हैवीवेट कैप्टन अमरिंदर सिंह के मैदान में उतरने से परेशान नहीं जान पड़ते। मज़े से अमृतसर में रोज छोले-कुलचे का आनंद उठा रहे हैं, यह पूछने पर कि उन्हें अमृतसर कैसा लग रहा है? जेतली ठेठ पंजाबी में जवाब देते हैं-‘यह मेरा होम टाउन है। मेरी बहन यहीं रहती है। मेरी पत्नी डॉली के चाचा भी यहीं रहते हैं।’ यह पूछे जाने पर कि अमृतसर में 65 फीसदी सिख वोट हैं, उसका क्या? क्या उनका झुकाव कैप्टन की ओर नहीं रहेगा? जेतली मुस्कुरा कर चुप्पी लगा जाते हैं, वे जानते हैं कि यह मामला बादल परिवार और उनके विश्वस्त मजीठिया को संभालना है।

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प्रियंका के प्रिय

Posted on 24 March 2014 by admin

भोजपुरी स्टार रवि किशन को जौनपुर से लड़ाने में भी प्रियंका गांधी की एक अहम भूमिका रही, सबसे पहले उन्होंने कृपाशंकर सिंह को यह जिम्मा सौंपा था कि वे रवि किशन से बात करें, कृपाशंकर ने बात की तो रवि टाल मटोल करते रहे, फिर प्रियंका ने राजीव शुक्ला को यह काम सौंपा। सियासी जोड़-तोड़ में माहिर शुक्ला जी ने अगले ही रोज रवि को प्रियंका के दरबार में हाजिर करा दिया, रवि किशन प्रियंका के अनुरोध को ठुकरा नहीं पाए और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लडऩे के लिए हामी भर दी। इस पूरे मामले में टिï्वस्ट यह थी कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह स्वयं रवि किशन के निरंतर संपर्क में थे, एक तरह से उन्होंने रवि को भाजपा के टिकट पर जौनपुर से चुनाव लडऩे को राजी कर लिया था कि ऐन वक्त प्रियंका ने भाजपा का सारा दांव उलट दिया। इसी तरह पार्टी राज बब्बर को लखनऊ से लड़ाना चाहती थी, पर स्थानीय जातीय समीकरणों को देखते हुए प्रियंका ने उन्हें गाजियाबाद भेज दिया, क्योंकि वहां मुस्लिम, जाट व पंजाबी वोटों से जीत-हार का समीकरण बदल सकता है। उसी प्रकार अर्जुन सिंह के पुत्र को सतना से लड़ाने का निर्णय, पूर्णमासी राम को गोपालगंज से तथा आचार्य प्रमोद और इमरान मसूद को मैदान में उतारने का निर्णय भी प्रियंका का ही था। वहीं प्रियंका ने अपने लिए तय किया है कि वह लोकसभा का अगला चुनाव राय बरेली से लड़ेंगी, अपनी मां की सीट से, यानी यह चुनाव सोनिया का आखिरी चुनाव साबित होगा, वहीं अब प्रियंका के सक्रिय राजनीति में उतरने के भी स्पष्टï संकेत मिलने लगे हैं।

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चंदा का फंडा

Posted on 09 March 2014 by admin

केजरीवाल अदानी-अंबानियों को सार्वजनिक रूप से चाहे जितना गरिया लें, इनकी पार्टी के ही कुछ बड़े नेता चुनाव लडऩे के लिए अंबानियों से चंदा मांगने से गुरेज नहीं कर रहे हैं, पिछले दिनों ‘आप’ पार्टी के एक बड़े नेता जो पूर्व में एक बड़े सामाजिक कार्यकर्ता भी रह चुके हैं, उनका नाम जब ‘आप’ ने अपने चुनावी उम्मीदवारों की सूची में घोषित कर दिया तो उन्होंने चुनावी चंदे के लिए दोनों अंबानी बंधुओं के समक्ष हाथ पसार दिए, दोनों अंबानियों के बड़े अधिकारियों ने एक स्वर में इस नेताजी से पूछ लिया कि क्या उन्होंने चंदा मांगने से पहले अपने पार्टी सुप्रीमो केजरीवाल से ग्रीन सिग्नल ले लिया है?

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…और अंत में

Posted on 09 March 2014 by admin

अलग तेलंगाना के गठन का क्रेडिट लेने में टीआरएस और कांग्रेस में जैसे होड़-सी मची है, तेलंगाना का क्रेडिट टीआरएस को नहीं देने को कृतसंकल्प कांग्रेस ने अभी हाल में एक नारा तैयार किया है-‘सोनिया इज एवरी हाउस होल्ड, कांग्रेस टू एवरी डोर-स्टेप यानी सोनिया हर घर, कांग्रेस हर दर’।  

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केजरी को तौकीर का साथ

Posted on 09 March 2014 by admin

अरविन्द केजरीवाल भी नई सियासी कसरतों को आजमा रहे हैं, उन्हें लगता है कि अगर यूपी जैसे राज्य में पार्टी का टेंट-तंबू जमाना है तो वहां मुस्लिम मतदाताओं को पटाना जरूरी है, इस ख्याल से वे फिर से विवादित मौलाना तौकीर रज़ा की शरण में चले गए हैं, ख्याल रहे कि ये वही तौकीर रज़ा हैं जो तस्लीमा नसरीन के सिर काटने वाले फतवे से चर्चित हुए थे, वैसे तो तौकीर रज़ा ने अपनी पार्टी भी बना रखी है, पर उनकी पार्टी इस बार के चुनाव में सक्रिय नहीं है, सो वे ‘आप’ जैसी किसी पार्टी का साथ देने के लिए स्वतंत्र हैं, सो केजरीवाल भी जैसे इसी मौके को लपकना चाहते हैं।

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