Archive | विशेष

नहीं गली चटवाल की दाल

Posted on 27 September 2015 by admin

क्या आपको बिल व हिलेरी क्लिंटन के दुलारे संत सिंह चटवाल याद हैं? इन दिनों वे टीम नरेंद्र मोदी से अपना टांका भिड़ाने में जुटे हैं। मोदी की विदेष यात्राओं को अंतिम रूप देने और उसको परवान चढ़ाने वाले राम माध्ाव से मुलाकात कर अप्रवासी भारतीय बिजनेसमैन चटवाल ने मोदी के सम्मान में अमरीका में भारतीय मूल के रईस लोगों के लिए एक डिनर की रूपरेखा तय की। समझा जाता है कि टीम मोदी से हरी झंडी मिल जाने के बाद चटवाल ने इस डिनर के लिए प्रति व्यक्ति हज़ार डाॅलर की दर से पैसे वसूलने षुरू कर दिए। चटवाल का फंडा साफ था -‘हज़ार डाॅलर दो और मोदी के साथ डिनर करो।’ लोग बढ़-चढ़ कर इसके लिए आगे आने लगे, जब इस योजना की भनक टीम मोदी को लगी कि प्रधानमंत्री के साथ डिनर के नाम पर पैसा बनाया जा रहा है, तो आनन-फानन में चटवाल के इस चैरिटी डिनर को बंद कराया गया।

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मीडिया से नाराज़ शाह

Posted on 27 September 2015 by admin

भाजपा प्रमुख अमित शाह इन दिनों चंद मीडिया घरानों से बेहद खुन्नस में हैं। उनकी नाराज़गी की वजह ये मीडिया समूह भाजपा विरोध्ा की खबरों को हवा दे रहे हैं और इन्हीं मीडिया समूहों को पार्टी महासचिवों के साथ उनकी बैठक का मजमून लीक हो जाने से षाह बेतरह परेषान हो गए। इस बाबत उन्होंने एक-एक महासचिव की क्लास ली और उन्हें चेताया कि पिछले 15 दिनों में कौन-कौन किन पत्रकारों से मिला है इसका डिटेल्स वे अभी मुहैया करा दें, वरना हर महासचिव की काॅल डिटेल्स उन्हें खंगालनी पड़ सकती है।

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…और अंत में

Posted on 27 September 2015 by admin

इतना तो जगजाहिर हो ही चुका है कि हमारे काबिल प्रधानमंत्री दंड और पुरस्कार की नीति में भरोसा रखते हैं, मीडिया को लेकर भी हालिया दिनों में उनका रवैया बदला है। उनकी हालिया अमेरिका यात्रा में मीडिया वाले मोदी की बदली भाव-भंगिमाओं को लेकर चकित थे। सूत्र बताते हैं कि देष के एक तेज चैनल को उनके केजरीवाल विरोध का इनाम मिलने जा रहा है। अगर सब कुछ योजनाबद्द रूप से चला तो आगामी दो अक्तूबर को मोदी इस चैनल के साथ एक घंटे की विषेश बातचीत कर सकते हैं।

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सर्वे पर भरोसा

Posted on 27 September 2015 by admin

पब्लिक पाॅलिसी पोलिंग ने हालिया दिनों में दो जनमत सर्वेक्षण करवाए हैं। इनमें से एक सर्वेक्षण मोदी की देष में लोकप्रियता के प्रतिषत को लेकर है। दूसरा बिहार के विधानसभा चुनाव को लेकर है। मोदी की लोकप्रियता से संबंधित सर्वेक्षण को सर्वजनिक किया गयाहै वहीं बिहार चुनावों को लेकर हुए जनमत सर्वेक्षण के नतीजों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सुनने में आया है कि भाजपा स्वयं इस पूरे सर्वेडाटा को खरीदने का इरादा रखती है। ताकि इसकी नसीहतों को बिहार चुनाव में ठीक से आजमाया जा सके।

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एक और स्मिता

Posted on 20 September 2015 by admin

महाराष्ट्र के सत्ता के गलियारे में इन्हें एक नई स्मिता ठाकरे का अभ्युदय माना जा रहा है। महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस की पत्नी अमृता जिनके मुंबई और आस-पास आए दिन गाने के लाइव-शो हो रहे हैं, इन्हें अक्सरां मुंबई के उद्योगपतियों और फिल्मस्टारों के बगलगीर देखा जा सकता है। कुछ चुनींदा काॅरपोरेट घराने तो नियमित रूप से अमृता के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। देश के शीर्ष उद्योगपति मुकेश अंबानी भी अमृता के गाने के दीवाने बताए जाते हैं। स्वयं मुकेश ने भी अमृता के लिए कई शो आयोजित किए हैं। अगर सुर की बुलंदी को सत्ता का आलंगन मिल जाए तो बात दूर तलक जाती ही है।

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सीएम की माने ना

Posted on 20 September 2015 by admin

महाराश्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस अपने दो मातहत मंत्रियों से बेतरह परेशन हैं। जिसमें से एक मंत्री एकनाथ खड़से हैं और दूसरे मंत्री शिवसेना कोटे से हैं। मुख्यमंत्री को अक्सर इन दोनों मंत्रियों की वरिश्ठता को देखते हुए चुप्पी साध जाना पड़ता है। स्वास्थ्य के मुद्दे पर मुख्यमंत्री कार्यालय की एक नहीं चल रही है। माना जा रहा है कि ये दोनों ही मंत्री अपने मनचाहे फैसले लेते हैं जिन्हें मुख्यमंत्री की रज़ामंदी हासिल नहीं होती है और न ही सरकार की घोशित नीतियों से इनका कोई लेना-देना ही होता है।

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काले धन की वापसी

Posted on 20 September 2015 by admin

देश की आर्थिक सेहत में गिरावट को लेकर वित्त मंत्रालय चिंता में है। मंत्रालय के वरिश्ठ अधिकारी लगातार इस बात पर गहन चिंतन-मनन कर रहे हैं कि आखिरकार क्यों स्टाॅक माॅर्किट से लेकर सोना और रीयल इस्टेट मार्किट में गिरावट का दौर जारी है। डाॅलर के मुकाबले रूपए की सेहत लगातार कमजोर हो रही है। जिन देशों ने बड़े निवेश का भरोसा दिया था उन देशों यहां तक कि जापान से भी पैसा नहीं आ रहा है। भारतीय उद्योग भी इसी मंदी का शिकार है। हैरत की बात यह है कि पिछले दिनों जो थोड़ा-बहुत पैसा भारत में आया है वह माॅरीशस और सिंगापुर रूट से। सनद रहे कि इस रूट से अमूमन वही पैसा लौट कर देश में आता है जिसे हवाला या अन्य माध्यमों से वहां रूट किया गया हो।

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…और अंत में

Posted on 20 September 2015 by admin

राजा भैया और अखिलेश दास जैसे लोग राजनाथ सिंह के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं, ये दोनों भाजपा में शामिल होने के लिए बेकरार बताए जाते हैं। वहीं ठाकुर साहब ने अभी तय नहीं किया है कि इन दोनों के बारे में उन्हें अमित शाह से बात करनी चाहिए कि नहीं।

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…और अंत में

Posted on 15 September 2015 by admin

नियमित कैबिनेट मीटिंग की समाप्ति के बाद मोदी सरकार की दो प्रमुख महिला मंत्रियों के वार्तालाप की एक बानगी देखिए, पहली मंत्री दूसरी से -‘इन दिनों आपका वज़न अचानक से बढ़ गया है, मेरी बेटी कह रही थी कि आप उम्र में भी मुझसे भी बड़ी दिखने लगी हैं जबकि हकीकत में आप मुझ से उम्र में कई वर्ष छोटी हैं।’ दूसरी महिला मंत्री (ठहाका लगाकर) – ‘दरअसल, मेरे उज्जैन वाले गुरूजी ने कहा है कि अगर मैं स्वयं की चिंता और मोह-माया छोड़ दूं तो मैं राजनीति में बहुत पावरफुल हो जाउंगी, इतना ही नहीं गुरूजी का तो यहां तक कहना है कि मेरे षरीर का वजन जितना बढ़ेगा, मेरा सियासी वजन भी उस अनुपात में बढ़ता चला जाएगा …।’ पहली मंत्री (विस्मय भाव से)-‘….. सो तो दिख रहा है, कभी अपने उज्जैन वाले गुरूजी से मुझे भी तो मिलवाइए।’

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ओवैसी का भाजपा क्नेकषन

Posted on 13 September 2015 by admin

पिछले दिनों असासुद्दीन ओवैसी से मिलने सुन्नी संप्रदाय के चार बड़े मौलाना हैदराबाद पहुंचे, जहां से ओवैसी सांसद भी हैं। इन मुस्लिम धर्मगुरूओं ने ओवैसी से चिंता जतायी की वे बिहार चुनाव में जाने-अनजाने भाजपा की मदद कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा, ‘ऐसी बात नहीं है। हमारी पार्टी ने महाराश्ट्र में भी अपने उम्मीदवार दिए थे, आज महाराश्ट्र में हमारे दो विधायक भी हैं। सो अब हम अपना खाता बिहार में भी खोलना चाहते हैं।’ इस पर सुन्नी मौलानाओं ने ओवैसी से अर्ज किया कि अगर ऐसी बात है तो बिहार में दो-चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दें, जहां से उनकी जीत की प्रबल संभावना हो, नहीं तो अगर वे बिहार की 30-32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे तो कौम में यही संदेष जाएगा कि वे भाजपा के पैसे पर राजनीति कर रहें हैं। ओवैसी ने तब कसम खाई कि भाजपा का एक भी पैसा उनके लिए हराम का पैसा है, चूंकि वे मुसलमानों के हक-हुकुक की लड़ाई लड़ते आए हैं। सो, अब ओवैसी चाह कर भी बिहार में भाजपा की उतनी अपरोक्ष मदद नहीं कर पा रहे हैं।

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