Archive | विशेष

एक मंच पर भगवा असंतुष्ट

Posted on 30 November 2015 by admin

भाजपा के असंतुष्ट बिहारी, झारखंडी नेताओं ने एक गुप्त बैठक कर यह अहम फैसला लिया है कि अब इनमें से कोई भी नेता मीडिया में अकेले बयान नहीं देगा, बल्कि अब इनके संयुक्त बयान सामने आएंगे। सूत्र बताते हैं कि इस गुप्त बैठक में भाजपा के पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, आरा के भगवा सांसद आर के सिंह और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की मौजूदगी देखी गई। सूत्र बताते हैं कि इन दिनों पिता-पुत्र यानी यशवंत-जयंत सिन्हा में तलवारें खींची हुई हैए समझा जाता है कि पिछले दिनों जयंत व यशवंत में गर्मागर्म बहस हो गई, जिसमें जयंत ने अपने पिता पर अपना राजनैतिक कैरियर तबाह करने का आरोप तक मढ़ डाला। वहीं दूसरी ओर शत्रुघ्न सिन्हा अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के लिए एक अदद राज्यसभा सीट के लिए जोरदार लॉबिंग कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बारे में उन्होंने लालू और नीतीश से अलग-अलग बात की है। सू़त्रों की मानें तो शाटगन लोकसभा का अगला चुनाव भी लड़ने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने अपने करीबियों से साफ कर दिया है कि अब वे सियासत से अलहदा शांतिपूर्वक जीवन जीना चाहते हैं।

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सपा विधायकों के टिकट कटेंगे

Posted on 30 November 2015 by admin

सपा से जुड़े एक बेहद भरोसेमंद सूत्र का दावा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नेताजी एक ब्लू प्रिंट तैयार करवाया है, इस ब्लू.प्रिंट के मुताबिक 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को जिन 177 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा थाए उन सीटों के लिए उम्मीदवारों के चयन का मामला अंतिम दौर में पहुंच चुका हैए इस बार के एमएलसी चुनावों यानी फरवरी.मार्च के बाद कभी भी इन 177 सीटों के संभावित प्रत्याशियों की घोषणा हो सकती है। यूपी में बजट पेश होने के बाद पेश बची सीटों की समीक्षा होगी, मुख्यमंत्री व यूपी सपा के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन होगाए इस कमेटी में मुख्यमंत्री के अलावा प्रोफेसर रामगोपाल यादव, शिवपाल यादव, अरविंद गोप जैसे बडे़ नेता शामिल रहेंगे और नेताजी का अंतिम फैसला सबको मान्य होगा। कई विधायकों के खिलाफ काफी एंटी इंकंबेंसी फैक्टर काम कर रहा है। इसके आधार पर ही इनके टिकटों का निर्धारण होगा। सो प्रत्याशियों की अंतिम सूची की घोषणा अगले वर्ष अक्तूबर-नवंबर माह में हो सकती है। ताकि चुनाव की तैयारियों के लिए उन्हें कम से कम पांच-छह महीनों का वक्त मिल सके।

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नेताजी कहिन

Posted on 30 November 2015 by admin

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है। सूत्र बताते हैं कि सपा प्रमुख ने अपनी एक कोर कमेटी की बैठक में अपने लोगों से कहा कि यूपी का आने वाला चुनाव न तो विकास के नाम पर लड़ा जाएगा और न ही धर्म या सांप्रदायिकता के नाम पर क्योंकि बिहार में भाजपा ने यह एक्सपेरिमेंट करके देख लिया है जिसमें वह बुरी तरह फेल हुई है। सो बतौर नेताजी यूपी का अगला चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़ा जाएगा, जिसमें लॉ एंड आर्डर सबसे प्रमुख मुद्दा बनकर उभरेगा। सो नेताजी ने अपने मुख्यमंत्री पुत्र से राज्य की कानून व्यवस्था पर खास ध्यान देने को कहा है, नेताजी को भी कहीं न कहीं इस बात का अहसास है कि आज यूपी में कानून-व्यवस्था अपने सबसे बुरे दौर में है। सूत्र बताते हैं कि नेताजी ने अपने खास लोगों को चेताते हुए एक खुफिया रिपोर्ट का हवाला दिया है कि अगर आज यूपी में चुनाव हो जाए तो बसपा को 150-160, सपा को 70-80, भाजपा को 60-70 और कांग्रेस को 50-60 सीटें मिल सकती है। पर बड़ी देर कर दी हुजूर जागते-जागते।

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और अंत में

Posted on 30 November 2015 by admin

लालू यादव ने तय कर लिया है कि वे अपनी धर्मपत्नी राबड़ी देवी को अगले वर्ष 2016 में राज्यसभा में लेकर आएंगे, चूंकि राबड़ी देवी पूर्व मुख्यमंत्री है, इस नाते उन्हें नई दिल्ली के लूटियंस जोन में टाइप-8 श्रेणी का बंगला आबंटित हो सकता है, जो दिल्ली में लालू के सियासी सरगर्मियों का केंद्र रह सकता है।

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नीतीश की सोशल इंजीनियरिंग के मंत्री

Posted on 23 November 2015 by admin

नीतीश कुमार ने अपने ताजा मंत्रिमंडल के गठन में जातीय समीकरणों का सबसे ज्यादा ध्यान रखा है। पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देने पर फोकस रखा गया है और जिस जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस दफे के विधानसभा चुनाव में टिकट बांटे गए थे, उसी अनुपात में और उसी सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखते हुए मंत्री बनाए गए हैं। जाहिरा तौर पर अगड़ों के पर कतरे गए हैं और उन्होंने मंत्रिमंडल के गठन में अपनी अंतररात्मा की आवाज़ से ज्यादा लालू जी की आवाज़ सुनी हैं, और चाहते हुए भी श्याम रजक को मंत्री नहीं बना पाए हैं, जो लालू जी का खेमा छोड़ उनके दल में शामिल हुए थे। लालू जी ने भी भले ही अपने विश्वस्त अब्दुल बारी सिद्दिकी को वित्त मंत्रालय दिलवा दिया, पर सुशील मोदी वाले फार्मूले पर उन्हें डिप्टी सीएम बनाने के बजाए अपने पुत्र को डिप्टी सीएम बनवाया है, इस बात को लेकर मुस्लिम कौम में थोड़ी नाराजगी भी देखी जा सकती है। वहीं जहानाबाद से विजयी रहे यादवों के एक प्रमुख नेता जो उनकी पार्टी राजद के महासचिव भी हैं, मुद्रिका प्रसाद को मंत्री नहीं बनाया गया है, जबकि पहली बार चुनाव जीते जय प्रकाश यादव के भाई विजय प्रकाश मंत्री बन गए हैं। वैसे लहरों को गिनने में और उसे बूझने में माहिर लालू ने अपने कोटे की 4 सीटें अभी खाली रखी है। वहीं कांग्रेस कोटे से भी किसी पिछड़े को मंत्री नहीं बनाया गया है, पर कांग्रेस ने भी एक सीट खाली रखी है। सो नीतीश के इस सोशल इंजीनियरिंग का आगे ध्यान रखा जा सकता है।

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…और अंत में

Posted on 23 November 2015 by admin

स्टील सा फौलादी नेतृत्व का दावा करने वाले मोदी-राज में स्टील कारोबारियों की हालत बद से बदतर हो रही है। एस्सार का वित्तीय संकट बढ़ता जा रहा है, जिंदल भी कमोबेश इसी राह पर है। अप्रवासी भारतीयों की स्टील कंपनियां भी नुकसान की राह पर है, कई कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर है। एस पी हिंदूजा के बेटे के लव अफेयर में आत्महत्या की बात सामने आई थी, पर हकीकत कुछ और हो सकती है। स्वराज पाल के बेटे अंगद पाल की मृत्यु को भी उनके आत्महत्या से जोड़कर देखा जा सकता है, क्योंकि अंगद के नेतृत्व वाली ’कपेरो कंपनी’ की वित्तीय हालत बहुत ही खस्ता थी, अंगद इसी बात को लेकर खासे परेशान बताए जाते थे।

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असंतुष्टों के निशाने पर जेटली

Posted on 17 November 2015 by admin

भाजपा असंतुष्टों के निशाने पर सिर्फ शाह ही नहीं अपितु मोदी सरकार के सर्वशक्तिमान अरूण जेटली भी हैं। असंतुष्टों का तर्क है कि बिहार की हार में जेटली की सर्वप्रमुख भूमिका रही है। क्योंकि बिहार के चुनाव प्रबंधन में टीम जेटली शिद्दत से लगी थी, और शाह के अलावा बिहार चुनाव की पूरी बागडोर जेटली के विश्वस्त लोगों यानी भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, सुशील मोदी और अनिल जैन के हाथों में थी। वहीं जेटली की आर्थिक नीतियों की वजह से भी मोदी सरकार की इतनी फजीहत हो रही है। जेटली बेलगाम महंगाई पर अंकुश लगा पाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में एक चर्चा उनके विभाग बदले जाने की भी है। सो असंतुष्टों की मांग है कि जेटली से वित्त विभाग लेकर उन्हें कोई कम महत्त्व का मंत्रालय सौंपा जाए। पर यह असली परीक्षा तो प्रधानमंत्री मोदी की है कि वे अपने परम मित्र को इस संकट की घड़ी में कैसे उबारते हैं?

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Posted on 17 November 2015 by admin

समझा जाता है कि भाजपा के असंतुष्ट बुुजुर्गों का साझा बयान तैयार करने वाले अरूण शौरी ही थे, उन्हें प्रशांत किशोर से मिलने के बाद यह प्रेरणा प्राप्त हुई। वहीं पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को मनाने की कवायद के तहत मोदी के चाणक्य माने जाने वाले अरूण जेटली पहले मुरली मनोहर जोशी और बाद में लालकृष्ण अडवानी से मिले। हालांकि मुलाकात का बहाना तो इन बुजुर्ग नेताओं को अपनी बेटी के विवाह का आमंत्रण देना था, सनद रहे कि इसी दिसंबर में जेटली की वकील पुत्री का ब्याह उन्हीं के लाॅ-फर्म में काम करने वाले उनके एक साथी वकील से तय हुआ है। पर सूत्र बताते हैं अपनी पुत्री के विवाह का कार्ड देने के बहाने जेटली ने इन बुजुर्ग नेताओं के साथ संवाद के द्वार खोल दिए हैं, और डैमेज कंट्रोल की बानगी पर इन बुजुर्गों की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचारने का आष्वासन भी दे डाला है।

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…और अंत में

Posted on 30 October 2015 by admin

ईडी की जांच में पी.चिदंबरम पर शिकंजा कसता दिख रहा है। सूत्र बताते हैं कि ईडी की जांच में इस बात के भी खुलासे हुए हैं कि आंखों के एक अस्पताल चेन में पैसा लगाने के अलावा चिदंबरम ने मोदी-विरोध का अलख जगाने वाले कांग्रेस पोषित एक न्यूज़ चैनल में हजारों करोड़ रूपए लगाए हैं। जांच एजेंसियां अब मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

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…और अंत में

Posted on 22 October 2015 by admin

इन दिनों नेट पर एक जोक सबसे ज्यादा वायरल हो रहा है, सबसे ज्यादा साहित्य अकादमी पुरस्कार पाने वाले हमारे प्रधानमंत्री कौन हैं? जवाब सिर्फ एक है नरेन्द्र मोदी। क्योकि उनको ईंगित कर साहित्य अकादमी पुरूस्कार लौटाने का क्रम अब भी जारी है, ताजा मिसाल काषीनाथ सिंह का है।

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